HTT-40 Trainer Aircraft Engine: भारत के स्वदेशी बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट एचटीटी-40 (हिंदुस्तान टर्बो ट्रेनर 40) प्रोग्राम के लिए अच्छी खबर है। लंबे समय से इंजन सप्लाई में देरी की वजह से रुका यह प्रोजेक्ट अब दोबारा रफ्तार पकड़ता दिख रहा है। अमेरिकी कंपनी हनीवेल ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी एचएएल को टीपीई331-12बी टर्बोप्रॉप इंजन की पहली खेप सौंप दी है। इन इंजनों के मिलने के बाद एचटीटी-40 ट्रेनर विमान की डिलीवरी जल्द होने की उम्मीद बढ़ गई है। बता दें कि एचएएल ने पिछले साल सितंबर से एचटीटी-40 ट्रेनर विमानों की डिलीवरी करने की बात कही थी।
भारतीय वायुसेना पिछले कई वर्षों से नए बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट का इंतजार कर रही थी। पुराने ट्रेनर विमानों के धीरे-धीरे बाहर होने और नए पायलटों की ट्रेनिंग जरूरतों को देखते हुए एचटीटी-40 प्रोग्राम को बेहद अहम माना जा रहा है।
HTT-40 Trainer Aircraft Engine: एचएएल को मिले तीन नए इंजन
जानकारी के मुताबिक अमेरिकी कंपनी हनीवेल ने एचएएल को तीन टीपीई331-12बी टर्बोप्रॉप इंजन डिलीवर किए हैं। यह इंजन खास तौर पर एचटीटी-40 ट्रेनर एयरक्राफ्ट के लिए बनाए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि सप्लाई चेन से जुड़ी दिक्कतों के चलते इंजन डिलीवरी में देरी हो रही थी, लेकिन अब स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है।
हनीवेल ने एचएएल को भरोसा दिया है कि आगे की सप्लाई तय समय पर की जाएगी। साथ ही हर महीने दो इजंन डिलीवरी करने की बात कही है। वहीं, भारतीय वायुसेना एचटीटी-40 को नए पायलटों की शुरुआती उड़ान ट्रेनिंग के लिए तैयार कर रही है। यह विमान युवा पायलटों को बेसिक फ्लाइंग स्किल्स सिखाने में अहम भूमिका निभाएगा।
तीन साल पहले दिया था बड़ा ऑर्डर
भारतीय वायुसेना ने करीब तीन साल पहले एचएएल को 70 एचटीटी-40 बेसिक ट्रेनर विमान बनाने का ऑर्डर दिया था। इस डील की कीमत लगभग 6,838 करोड़ रुपये बताई गई थी। समझौते के तहत एचएएल को वित्त वर्ष 2025-26 में 12 विमान वायुसेना को देने थे।
हालांकि इंजन सप्लाई नहीं होने की वजह से अब तक एक भी विमान डिलीवर नहीं किया जा सका। इसी कारण पूरे प्रोग्राम में देरी हुई। सूत्रों का कहना है कि विमान लगभग तैयार थे, लेकिन इंजन नहीं मिलने से अंतिम उत्पादन और टेस्टिंग प्रभावित हुई। अब जब इंजन मिलने लगे हैं तो एचएएल डिलीवरी प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाना चाहता है।

क्या है टीपीई331-12बी इंजन
एचटीटी-40 में इस्तेमाल होने वाला टीपीई331-12बी एक टर्बोप्रॉप इंजन है। इसे अमेरिकी कंपनी हनीवेल बनाती है। यह इंजन करीब 1100 शाफ्ट हॉर्सपावर क्षमता वाला माना जाता है।
यह इंजन हल्के मिलिटरी और ट्रेनर विमानों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसकी खासियत कम ईंधन खपत, बेहतर भरोसेमंद प्रदर्शन और आसान मेंटेनेंस मानी जाती है।
करीब चार साल पहले एचएएल और हनीवेल के बीच 100 मिलियन डॉलर का समझौता हुआ था। इसके तहत कुल 88 इंजन और इंजन किट सप्लाई की जानी थीं। इनमें से कुछ इंजन सीधे हनीवेल देगा जबकि बाकी भारत में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के तहत बनाए जाएंगे। समझौते के अनुसार पहला इंजन सितंबर 2025 तक आना था, लेकिन सप्लाई में देरी हुई।
दो विमान पहले से भर रहे हैं उड़ान
दिलचस्प बात यह है कि एचटीटी-40 के दो सीरियल प्रोडक्शन विमान पहले से उड़ान भर रहे हैं। इनमें पुराने कैटेगरी-बी इंजन लगाए गए हैं, जो पहले प्रोटोटाइप विमानों में इस्तेमाल किए गए थे। पहले सीरियल प्रोडक्शन विमान टीएच-4001 ने अक्टूबर 2025 में अपनी पहली उड़ान भरी थी। इसके बाद दूसरा विमान टीएच-4002 ने दिसंबर 2025 में उड़ान भरी।
कैसे शुरू हुआ एचटीटी-40 प्रोग्राम
एचटीटी-40 प्रोग्राम की शुरुआत 2013 में हुई थी। उस समय एचएएल ने इस प्रोजेक्ट को अपने इंटरनल फंड से शुरू किया था। शुरुआती निवेश करीब 350 करोड़ रुपये बताया गया था।
पहला प्रोटोटाइप फरवरी 2016 में सामने आया था जबकि पहली उड़ान मई 2016 में हुई। इसके बाद कई सालों तक टेस्टिंग और एयरवर्थिनेस से जुड़े परीक्षण चलते रहे।
इस दौरान विमान ने स्पिन टेस्ट, एरोबैटिक ट्रायल और विभिन्न सुरक्षा परीक्षण पूरे किए। जून 2022 में इसे प्रोविजनल एयरवर्थिनेस सर्टिफिकेट मिला। यह पूरी तरह भारत में डिजाइन और विकसित किया गया बेसिक ट्रेनर विमान है।
एचटीटी-40 की खासियतें
एचटीटी-40 एक टैंडम सीट बेसिक ट्रेनर विमान है। इसमें ट्रेनर एंड ट्रेनी पायलट एक के पीछे एक बैठते हैं। विमान पूरी तरह एरोबैटिक क्षमता वाला है और शुरुआती ट्रेनिंग के लिए डिजाइन किया गया है।
इसमें एयर-कंडीशंड कॉकपिट दिया गया है, ताकि गर्म इलाकों में भी ट्रेनिंग आसान हो सके। विमान में ग्लास कॉकपिट और आधुनिक एवियोनिक्स लगाए गए हैं, जिससे पायलटों को आधुनिक फाइटर विमान जैसी ट्रेनिंग मिलती है।
इसमें जीरो-जीरो इजेक्शन सीट भी है। इसका मतलब यह है कि कम ऊंचाई और कम गति पर भी पायलट सुरक्षित तरीके से बाहर निकल सकता है।
विमान में “हॉट रिफ्यूलिंग” सुविधा भी दी गई है। यानी इंजन बंद किए बिना जमीन पर ईंधन भरा जा सकता है। इससे ऑपरेशन तेज होते हैं।

तकनीकी क्षमता भी काफी मजबूत
एचटीटी-40 की लंबाई करीब 10.5 मीटर है जबकि विंगस्पैन लगभग 11 मीटर है। इसका अधिकतम टेकऑफ वजन करीब 2800 किलोग्राम बताया जाता है। यह विमान लगभग 400 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से उड़ सकता है। इसकी अधिकतम सीमा करीब 1000 किलोमीटर है।
विमान 6000 मीटर तक की ऊंचाई पर ऑपरेट कर सकता है। इसके अलावा यह +6 और -3 जी लिमिट्स तक एरोबैटिक मूवमेंट करने में सक्षम है। सूत्रों का कहना है कि यह केवल ट्रेनिंग विमान नहीं बल्कि जरूरत पड़ने पर हल्के हथियारों के साथ इस्तेमाल होने की क्षमता भी रखता है।
भारत में बढ़ेगा स्वदेशीकरण
एचटीटी-40 प्रोग्राम को आत्मनिर्भर भारत अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। फिलहाल इसमें करीब 56 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री इस्तेमाल हो रही है। एचएएल का फोकस इसे आगे बढ़ाकर 60 प्रतिशत से ज्यादा करना है। इसके लिए कई बड़े सिस्टम और सब-सिस्टम भारत में बनाए जाएंगे। इस प्रोग्राम से देश की 100 से ज्यादा एमएसएमई कंपनियां जुड़ी हुई हैं। इससे हजारों लोगों को रोजगार मिलने की बात कही जा रही है। इंजन टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के बाद भारत में भी इंजन असेंबली और निर्माण का रास्ता खुलेगा।
पिलाटस पीसी-7 की जगह लेगा एचटीटी-40
फिलहाल भारतीय वायुसेना शुरुआती उड़ान ट्रेनिंग के लिए स्विस कंपनी के पिलाटस पीसी-7 एमके-2 विमान इस्तेमाल करती है। स्टेज-1 ट्रेनिंग के दौरान सभी नए पायलट इन्हीं विमानों पर बेसिक फ्लाइंग सीखते हैं। इसके बाद उन्हें फाइटर, ट्रांसपोर्ट और हेलीकॉप्टर स्ट्रीम में बांटा जाता है।
फाइटर पायलटों को आगे किरण एमके-1ए और हॉक एडवांस्ड जेट ट्रेनर पर ट्रेनिंग दी जाती है। 2019 में पिलाटस कंपनी के साथ कारोबारी लेनदेन पर रोक लगने के बाद भारत ने नए स्वदेशी ट्रेनर विमान पर ज्यादा जोर देना शुरू किया। इसी वजह से एचटीटी-40 प्रोग्राम को तेजी से आगे बढ़ाया गया।
नासिक और बेंगलुरु में बन रहे विमान
एचएएल अब बेंगलुरु और नासिक दोनों जगह एचटीटी-40 का प्रोडक्शन कर रहा है। अक्टूबर 2025 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नासिक में नई प्रोडक्शन लाइन का उद्घाटन किया था। इसी सुविधा में एलसीए एमके-1ए लड़ाकू विमान का उत्पादन भी किया जा रहा है। एचएएल का कहना है कि दोनों फैक्ट्रियों को मिलाकर हर साल लगभग 20 एचटीटी-40 विमान बनाए जा सकते हैं। हालांकि वास्तविक उत्पादन इंजन सप्लाई पर निर्भर करेगा।
वायुसेना के लिए क्यों जरूरी है यह विमान
भारतीय वायुसेना के पास इस समय ट्रेनर विमानों की कमी मानी जा रही है। अधिकारियों के अनुसार वायुसेना को बड़ी संख्या में नए ट्रेनर विमानों की जरूरत है ताकि पायलट ट्रेनिंग पर दबाव कम हो सके।
एचटीटी-40 के आने से पूरी ट्रेनिंग प्रणाली को मजबूती मिलेगी। खास तौर पर शुरुआती उड़ान प्रशिक्षण में यह बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
सूत्रों का कहना है कि स्वदेशी ट्रेनर विमान होने से मेंटेनेंस, स्पेयर पार्ट्स और लॉजिस्टिक सपोर्ट भी आसान होगा। विदेशी निर्भरता कम होने से लंबे समय में खर्च भी कम आएगा।
उत्पादन में देरी क्यों हुई
एचटीटी-40 प्रोग्राम में सबसे बड़ी चुनौती इंजन सप्लाई रही। विमान का ढांचा और सिस्टम काफी हद तक तैयार थे, लेकिन इंजन समय पर नहीं पहुंचे।
ग्लोबल सप्लाई चेन संकट, एविएशन सेक्टर में देरी और तकनीकी कारणों से इंजन डिलीवरी प्रभावित हुई। इसी वजह से प्रोडक्शन लाइन फुल स्पीड से काम नहीं कर सकी।
अब इंजन की पहली खेप आने के बाद एचएएल उत्पादन को तेज करने की तैयारी में है। अधिकारियों का कहना है कि विमान निर्माण और टेस्टिंग प्रक्रिया को अब तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा।












