Explained: SU-30 MKI से दागी गई रुद्रम-II मिसाइल, सिर्फ एक वार और दुश्मन का रडार बेकार, जानिए कितनी है खतरनाक
रुद्रम-II एक स्वदेशी एयर-टू-सर्फेस मिसाइल है। इस मिसाइल को खास तौर पर दुश्मन के रडार, एयर डिफेंस सिस्टम, कमांड सेंटर, कम्युनिकेशन स्टेशन, बंकर और अन्य महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को नष्ट करने के लिए डेवलप किया गया है...
DRDO को चाहिए घातक टर्बोजेट इंजन, वजन हो 25 किग्रा से कम, देता हो 180 किलोग्राम-फोर्स तक का थ्रस्ट
डीआरडीओ ने इस इंजन के लिए बेहद खास तकनीकी जरूरतें तय की हैं। इंजन का व्यास 275 मिलीमीटर और लंबाई 540 मिलीमीटर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। इसके बावजूद इसे 130 से 180 किलोग्राम-फोर्स तक थ्रस्ट पैदा करना होगा...
दुश्मन के टैंक से लेकर हेलीकॉप्टर तक सब होंगे निशाने पर, DRDO की नई स्मार्ट मिसाइल ULPGM-V3 का ड्रोन से सफल परीक्षण
ULPGM का पूरा नाम अनमैन्ड एरियल व्हीकल लॉन्च्ड प्रिसीजन गाइडेड मिसाइल है। यह एक हल्की लेकिन बेहद सटीक मिसाइल है, जिसे ड्रोन यानी यूएवी से लॉन्च किया जाता है...
भारत के अग्नि MIRV टेस्ट के पास क्यों मंडराता रहा चीन का ‘समुद्री जासूस’? हिंद महासागर में दिखी ड्रैगन की बेचैनी
सैटेलाइट इमेज और ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक DA YANG HAO चीनी जहाज इस साल फरवरी में हिंद महासागर क्षेत्र में दाखिल हुआ था। इसके बाद यह अप्रैल में मॉरीशस के पास दिखाई दिया...
Explainer: हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल बनाने के करीब पहुंचा भारत! DRDO ने किया 20 मिनट तक स्क्रैमजेट इंजन का सफल टेस्ट
हाइपरसोनिक मिसाइलें दुनिया की सबसे खतरनाक और तेज हथियारों में गिनी जाती हैं। ऐसी मिसाइलें ध्वनि की रफ्तार से पांच गुना या उससे ज्यादा रफ्तार से उड़ती हैं...
एक ‘अग्नि-6’ मिसाइल और कई निशाने…MIRV टेस्ट से बढ़ेगी चीन-पाकिस्तान की टेंशन!
हालांकि डीआरडीओ ने आधिकारिक तौर पर मिसाइल का नाम सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन रक्षा सूत्रों ने इसे इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) श्रेणी का परीक्षण बताया गया...
Explained: क्या है DRDO का नया हथियार TARA? जो साधारण बम को बना देता है स्मार्ट, जगुआर से हुआ सफल ट्रायल
तारा यानी “टैक्टिकल एडवांस्ड रेंज ऑगमेंटेशन” एक ग्लाइड वेपन सिस्टम है। इसे खास तौर पर इस तरह बनाया गया है कि पुराने और साधारण बमों को भी आधुनिक “प्रिसीजन गाइडेड वेपन” में बदला जा सके...
AMCA जेट प्रोजेक्ट को मिली जमीन, 140 स्टेल्थ फाइटर यहीं होंगे तैयार
पुट्टापर्थी को इस प्रोजेक्ट के लिए इसलिए चुना गया क्योंकि यह बेंगलुरु के काफी करीब है, जहां एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी यानी एडीए स्थित है। यही एजेंसी इस पूरे प्रोजेक्ट की डिजाइन और डेवलपमेंट देख रही है...
