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DRDO का मल्टी-लेयर मिसाइल डिफेंस सिस्टम तैयार! AD-1, AD-2 और NASM-MR ने दिखाया दम, दुनिया के चुनिंदा देशों में शामिल हुआ भारत

10 और 11 जून 2026 को ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज में किए गए इन परीक्षणों ने यह दिखाया कि भारत अब केवल मिसाइल बनाने वाला देश नहीं रहा, बल्कि दुश्मन की मिसाइलों को रोकने और समुद्र में मौजूद दुश्मन के जहाजों पर सटीक हमला करने की क्षमता भी हासिल कर चुका है...

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📍नई दिल्ली | 13 Jun, 2026, 11:30 AM

AD-1 AD-2 Missile Test: भारत ने रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। डीआरडीओ ने हाल ही में तीन महत्वपूर्ण मिसाइल परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे कर देश की सामरिक क्षमता का प्रदर्शन किया है। इन परीक्षणों में दो एडवांस बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस इंटरसेप्टर और एक नई नेवल एंटी-शिप मिसाइल शामिल थी। इन सफल परीक्षणों के बाद भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में पहुंच गया है जिनके पास लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही नष्ट करने की क्षमता मौजूद है।

10 और 11 जून 2026 को ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज में किए गए इन परीक्षणों ने यह दिखाया कि भारत अब केवल मिसाइल बनाने वाला देश नहीं रहा, बल्कि दुश्मन की मिसाइलों को रोकने और समुद्र में मौजूद दुश्मन के जहाजों पर सटीक हमला करने की क्षमता भी हासिल कर चुका है। डीआरडीओ के मुताबिक ये परीक्षण भारत के मल्टी-लेयर्ड डिफेंस सिस्टम और आधुनिक युद्ध की जरूरतों के अनुरूप डेवलप की गई नई तकनीकों की सफलता का प्रमाण हैं।

AD-1 AD-2 Missile Test: 24 घंटे में तीन सफल परीक्षण

डीआरडीओ ने लगातार तीन उड़ान परीक्षण किए। इनमें दो बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस इंटरसेप्टर और एक नेवल एंटी-शिप मिसाइल का परीक्षण शामिल था। इन तीनों परीक्षणों का उद्देश्य अलग-अलग प्रकार के खतरों के खिलाफ भारत की प्रतिक्रिया क्षमता को परखना था।

पहले दो परीक्षणों में ऐसी इंटरसेप्टर मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया, जो दुश्मन की लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को बीच रास्ते में ही नष्ट कर सकती हैं। तीसरा परीक्षण नेवल एंटी-शिप मिसाइल-मीडियम रेंज यानी एनएएसएम-एमआर (NASM-MR) का था, जिसने समुद्री युद्ध क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि तीनों परीक्षण अपने निर्धारित लक्ष्यों पर पूरी तरह सफल रहे और सभी सिस्टम्स ने अपेक्षित प्रदर्शन किया।

क्या होता है बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम?

किसी भी देश के लिए बैलिस्टिक मिसाइल सबसे गंभीर खतरों में से एक मानी जाती है। ऐसी मिसाइलें हजारों किलोमीटर दूर से छोड़ी जा सकती हैं और बहुत कम समय में अपने टारगेट तक पहुंच सकती हैं। अगर इनके खिलाफ प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था न हो तो सैन्य ठिकानों, शहरों और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को भारी नुकसान पहुंचा सकती हैं।

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इसी खतरे से बचाने के लिए बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम डेवलप किया जाता है। यह एक ऐसा मल्टी-लेयर्ड डिफेंस सिस्टम होता है जो दुश्मन की मिसाइल का पता लगाकर उसे टारगेट तक पहुंचने से पहले ही नष्ट कर देता है।

भारत का बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस कार्यक्रम कई सालों से विकसित किया जा रहा है। हालिया परीक्षण इसी कार्यक्रम के दूसरे चरण की बड़ी उपलब्धि माने जा रहे हैं। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार इस सफलता के बाद भारत की सुरक्षा व्यवस्था पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत हुई है। (AD-1 AD-2 Missile Test)

AD-1 और AD-2 इंटरसेप्टर

हालांकि सरकार ने आधिकारिक रूप से इंटरसेप्टरों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं, लेकिन सूत्रों ने बताया कि ये एडी-1 और एडी-2 इंटरसेप्टर हैं। ये दोनों मिसाइलें डीआरडीओ के फेज-2 बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस कार्यक्रम का हिस्सा हैं।

एडी-1 इंटरसेप्टर ऊंचाई पर जाकर दुश्मन की मिसाइल को वायुमंडल के बाहर या उसकी सीमा के आसपास नष्ट करने के लिए तैयार की गई है। वहीं एडी-2 इंटरसेप्टर वायुमंडल के भीतर आने वाली मिसाइलों को निशाना बनाने के लिए डेवलप की गई है।

दोनों मिलकर एक डुअल सिक्युरिटी लेयर तैयार करती हैं। यदि पहली लेयर में टारगेट नष्ट नहीं होता तो दूसरी लेयर एक्टिव होकर उसे खत्म करने का प्रयास करती है। यही वजह है कि इसे मल्टी-लेयर्ड डिफेंस सिस्टम कहा जाता है।

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2000 से 5000 किमी रेंज वाली मिसाइलों को रोकने की क्षमता

रक्षा सूत्रों के अनुसार इन इंटरसेप्टरों को खास तौर पर उन बैलिस्टिक मिसाइलों के खिलाफ तैयार किया गया है जिनकी मारक क्षमता 2000 से 5000 किलोमीटर तक होती है। इस श्रेणी को इंटरमीडिएट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल कहा जाता है।

ऐसी मिसाइलें आधुनिक युद्ध में बेहद खतरनाक मानी जाती हैं क्योंकि वे लंबी दूरी से हमला कर सकती हैं और उनके पास भारी वारहेड ले जाने की क्षमता होती है।

सूत्रों का कहना है कि इस क्षमता के साथ भारत अब उन देशों की सूची में शामिल हो गया है जिनके पास लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों से बचाव की एडवांस तकनीक मौजूद है।

पाकिस्तान और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों पर नजर

सूत्रों का कहना है कि भारत ने बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस कार्यक्रम को इसलिए भी प्राथमिकता दी है क्योंकि क्षेत्र में मिसाइल क्षमताएं तेजी से बढ़ रही हैं।

पाकिस्तान लगातार नए मिसाइल सिस्टम्स पर काम कर रहा है। फतह-1, फतह-2 और चीन से जुड़े कुछ अन्य मिसाइल सिस्टम्स को लेकर भारतीय सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी रखती हैं। ऐसे माहौल में एक मजबूत मिसाइल रक्षा कवच की जरूरत पहले से अधिक महसूस की जा रही थी। (AD-1 AD-2 Missile Test)

समुद्र में दुश्मन के जहाजों पर भी होगी पैनी नजर

बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस परीक्षणों के साथ डीआरडीओ ने पहली बार नेवल एंटी-शिप मिसाइल-मीडियम रेंज का भी सफल परीक्षण किया। यह मिसाइल भारतीय नौसेना की समुद्री हमला क्षमता को मजबूत करने के लिए तैयार की गई है।

परीक्षण के दौरान मिसाइल ने समुद्र की सतह के बेहद करीब उड़ान भरी और अपने टारगेट तक सटीक पहुंचने की क्षमता दिखाई। सूत्रों ने इसे सी-स्किमिंग प्रोफाइल बताया है, जिसमें मिसाइल बहुत कम ऊंचाई पर उड़ती है ताकि दुश्मन के रडार उसे देर से पहचान सकें।

मिसाइल ने अपनी नेविगेशन क्षमता, लक्ष्य पहचान और अंतिम चरण की सटीकता का सफल प्रदर्शन किया। इससे यह साबित हुआ कि भविष्य में भारतीय नौसेना के पास दुश्मन के युद्धपोतों और अन्य समुद्री लक्ष्यों को निशाना बनाने का एक और स्वदेशी विकल्प उपलब्ध होगा।

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नेटवर्क आधारित युद्ध सिस्टम का भी हुआ परीक्षण

इन परीक्षणों की एक और महत्वपूर्ण बात यह रही कि केवल मिसाइलों का ही नहीं बल्कि पूरे नेटवर्क-सेंट्रिक वारफेयर को भी परखा गया।

लंबी दूरी के रडार, कमांड सेंटर, कम्यूनिकेशन नेटवर्क और कंट्रोल सिस्टम्स ने मिलकर टारगेट का पता लगाया, उसकी जानकारी साझा की और इंटरसेप्टर मिसाइलों को निर्देशित किया।

आधुनिक युद्ध में हथियारों, सेंसरों और कमांड सिस्टम के बीच तालमेल ही सफलता तय करता है। डीआरडीओ ने इन परीक्षणों के जरिए इस क्षमता का भी प्रदर्शन किया। (AD-1 AD-2 Missile Test)

रक्षा मंत्री और डीआरडीओ प्रमुख ने दी बधाई

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इन सफल परीक्षणों पर डीआरडीओ को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि भारत की रक्षा तैयारियों को नई मजबूती देगी। उन्होंने कहा कि ऐसी तकनीकें देश को हवाई और समुद्री खतरों से निपटने में महत्वपूर्ण मदद प्रदान करेंगी।

डीआरडीओ के चेयरमैन और रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव राजेश कुमार सिंह ने भी वैज्ञानिकों, उद्योग भागीदारों और सशस्त्र बलों की संयुक्त टीम की सराहना की। उन्होंने कहा कि केवल 24 घंटे के भीतर इतने अहम परीक्षणों को सफलतापूर्वक पूरा करना इंडियन डिफेंस रिसर्च सिस्टम की क्षमता को दर्शाता है। (AD-1 AD-2 Missile Test)

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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