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Operation Tiranga: इस नई सीक्रेट वॉर स्ट्रैटेजी ने रखी सबसे बड़े डिफेंस रिफॉर्म्स की नींव, जानें क्या है यह ऐतिहासिक टेबल टॉप एक्सरसाइज

यह एक्सरसाइज कई महीनों तक चली और अप्रैल 2026 में इसका मुख्य काम पूरा हो गया। इसमें सबसे ज्यादा फोकस इस बात पर रहा कि युद्ध के समय तीनों सेनाएं एक साथ कैसे काम करें और फैसले जल्दी कैसे लिए जाएं...

अब भारत में ही होगा तेजस इंजन रिपेयर! F404 इंजन के लिए भारत में खास फैसिलिटी बनाएगा GE

इस समझौते के तहत देश में एफ-404-आईएन20 इंजन के लिए एक इन-कंट्री डिपो तैयार किया जाएगा। इस डिपो को ऑपरेट और मेंटेन भारतीय वायुसेना करेगी...

ऑपरेशन सिंदूर ने बदली सेना की रणनीति, बनाई नई ‘साइकॉलॉजिकल डिफेंस यूनिट’

आर्मी चीफ ने समझाया कि अब युद्ध को सिर्फ नक्शे पर एक लाइन की तरह नहीं देखा जा सकता। आज का युद्ध कई लेयर्स में चलता है। जमीन पर सैनिक लड़ रहे होते हैं, उसी समय साइबर अटैक चल रहे होते हैं, स्पेस से जानकारी मिल रही होती है...

RUAV-200 ड्रोन को देखने पहुंचे आर्मी चीफ, स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर प्रचंड में भरी उड़ान

RUAV-200 यानी रोटरी अनमैन्ड एरियल व्हीकल, यह एक ऐसा ड्रोन है जो हेलीकॉप्टर की तरह उड़ता है और बिना पायलट के ऑपरेट होता है। इसे खास तौर पर निगरानी, जानकारी जुटाने और टारगेट पहचान जैसे कामों के लिए तैयार किया गया है...

तेजस को लेकर जीई और एचएएल के बीच हुई अहम बैठक, इंजन की समय पर डिलीवरी को लेकर हुई बात

इस साल मार्च 2026 तक 5 और अतिरिक्त इंजन मिलने की उम्मीद थी, लेकिन वह भी पूरी नहीं हुई। इससे तेजस एमके1ए का प्रोडक्शन सीधे प्रभावित हुआ है। कई विमान बनकर तैयार हैं, लेकिन इंजन न होने की वजह से उन्हें उड़ान के लिए तैयार नहीं किया जा सका...

रक्षा मंत्रालय की बड़ी मंजूरी, ‘वीराज’ एंटी-टैंक स्मार्ट माइन और एयर-ड्रॉप्ड ड्रोन स्वार्म सिस्टम को दी हरी झंडी!

नई ‘वीराज’ माइन को ज्यादा एडवांस बनाने की योजना है। इसमें सेंसर आधारित सिस्टम हो सकता है, जो टैंक या भारी वाहन की हलचल को पहचान सके। इसके अलावा इसमें सेल्फ-न्यूट्रलाइजेशन जैसी क्षमता भी हो सकती है...

Explainer: क्या है भारतीय सेना का फ्यूचर वॉरफेयर प्लान? टैंक नहीं, ड्रोन तय करेंगे जंग का नतीजा!

मॉडर्न वॉरफेयर में ड्रोन का किस तरह से तरह से इस्तेमाल किया जा रहा है इसकी झलक हालिया युद्धों ईरान-इजरायल वॉर और यूक्रेन वॉर में देखी जा सकती है। जहां सस्ते ड्रोन के जरिए महंगे वेपन सिस्टम को निशाना बनाया जा रहा है...

ड्रोन बनाने वाली कंपनी अब भारत में बनाएगी एडवांस गोला-बारूद, सागर डिफेंस को मिला एक्सप्लोसिव्स लाइसेंस

रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय सेना के लिए जरूरी 175 तरह के गोला-बारूद में से लगभग 154 को देश में ही बनाया जाने लगा है। यानी करीब 88 प्रतिशत जरूरतें अब स्वदेशी स्तर पर पूरी हो रही हैं...

भारतीय सेना का बड़ा कदम, ड्रोन और लॉइटरिंग म्यूनिशन के लिए पहली बार जारी हुआ मेगा रोडमैप

इस रोडमैप में कुल 30 तरह के ड्रोन और लॉइटरिंग म्यूनिशन प्लेटफॉर्म शामिल किए गए हैं। यह पूरा दस्तावेज आर्मी डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है, जिसमें पांच मुख्य कैटेगरी रखी गई हैं...

1000 किलो का देसी ‘सुपर बम’ बनाएगा भारत, IAF को मिलेगी अमेरिका के MK-84 एरियल बम जैसी ताकत

इस परियोजना के तहत भारतीय वायुसेना करीब 600 एरियल बम खरीदने की योजना बना रही है। फिलहाल इस तरह के बम विदेशों से खरीदे जाते हैं और वायुसेना के पास पहले से मौजूद हैं...

IFC-IOR रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, होर्मुज में 9 दिन की ‘खामोशी’ का बताया सच, GPS जामिंग से रास्ता भटक रहे जहाज

रिपोर्ट बताती है कि अब समुद्री हमले सिर्फ एक जगह तक सीमित नहीं रहे हैं। शुरुआत में हमले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज तक सीमित थे, लेकिन अब यह खतरा बढ़कर उत्तरी अरब सागर, यूएई के पानी और प्रमुख बंदरगाहों तक फैल गया है...

होर्मुज से गाजा तक बारूदी सुरंगों ने कैसे पूरी दुनिया को खतरे में डाला, दशकों तक ‘साइलेंट किलर’ बने रहते हैं डबल एज्ड वेपंस

युद्ध कागजों पर खत्म हो सकता है, लेकिन जमीन पर रहने वाले लोगों के लिए यह लंबे समय तक खत्म नहीं होता। हर कदम पर जान का जोखिम होता है, क्योंकि यह पता नहीं होता कि जमीन के नीचे क्या छिपा है। यही वजह है कि माइंस को “साइलेंट किलर” भी कहा जाता है...