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IAF का बड़ा फैसला; भारतीय वायुसेना खुद बनाएगी 30 किग्री वारहेड वाला लंबी दूरी का घातक कामिकेज ड्रोन

वायुसेना ने जिस ड्रोन की मांग की है वह फिक्स्ड विंग डिजाइन पर आधारित होगा। इसका मतलब है कि यह छोटे क्वाडकॉप्टर ड्रोन की तरह नहीं बल्कि एक छोटे विमान की तरह उड़ान भरेगा...

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📍नई दिल्ली | 16 Jun, 2026, 12:03 PM

IAF Kamikaze Drone Project: भारतीय वायुसेना ने आधुनिक युद्ध की बदलती जरूरतों को देखते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। पहली बार वायुसेना केवल किसी वेपन सिस्टम की खरीद की बजाय उसके विकास और डिजाइन प्रक्रिया में भी सीधे भागीदारी करेगी। वायुसेना ने लंबी दूरी के कामिकेज ड्रोन विकसित करने के लिए भारतीय उद्योग से साझेदारी का फैसला किया है और इसके लिए चुनिंदा भारतीय कंपनियों से जानकारी मांगी है।

हाल ही में जारी टेंडर में साफ कहा गया है कि यह ड्रोन पूरी तरह भारत में डिजाइन, विकसित और निर्मित होना चाहिए। इस परियोजना की जिम्मेदारी तमिलनाडु के सुलूर स्थित भारतीय वायुसेना के 5 बेस रिपेयर डिपो को दी गई है, जिसे इस पूरे कार्यक्रम की नोडल एजेंसी बनाया गया है।

रक्षा क्षेत्र से जुड़े सूत्रों के अनुसार यह कदम वायुसेना की पारंपरिक खरीद प्रणाली से अलग है। अब तक वायुसेना अपनी जरूरतें और तकनीकी मानक तय करती थी, जबकि उद्योग डिजाइन और निर्माण का काम करता था। इस बार वायुसेना खुद विकास प्रक्रिया का हिस्सा बनेगी ताकि तकनीक पर उसका अधिक नियंत्रण बना रहे।

IAF Kamikaze Drone Project: क्या होते हैं कामिकेज ड्रोन?

आधुनिक सैन्य भाषा में इन्हें “वन वे अटैक अनमैन्ड एरियल सिस्टम” कहा जाता है। आसान शब्दों में समझें तो यह ऐसे ड्रोन होते हैं जो किसी लक्ष्य को नष्ट करने के लिए भेजे जाते हैं और मिशन पूरा होने के बाद वापस लौटने के लिए नहीं बनाए जाते।

सामान्य ड्रोन की तरह ये केवल निगरानी नहीं करते बल्कि अपने साथ विस्फोटक या अन्य पेलोड लेकर टारगेट पर सीधे हमला कर सकते हैं। कई बार इन्हें “लॉइटरिंग म्यूनिशन” भी कहा जाता है क्योंकि ये लक्ष्य क्षेत्र के ऊपर कुछ समय तक मंडरा सकते हैं और सही मौका मिलने पर हमला करते हैं।

पिछले कुछ वर्षों में यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया के संघर्षों और अन्य सैन्य अभियानों में ऐसे ड्रोन ने अपनी उपयोगिता साबित की है। कम लागत में बड़े और महत्वपूर्ण लक्ष्यों को निशाना बनाने की क्षमता के कारण दुनिया भर की सेनाएं इन प्रणालियों पर तेजी से निवेश कर रही हैं। (IAF Kamikaze Drone Project)

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किस तरह का ड्रोन चाहती है वायुसेना?

वायुसेना ने जिस ड्रोन की मांग की है वह फिक्स्ड विंग डिजाइन पर आधारित होगा। इसका मतलब है कि यह छोटे क्वाडकॉप्टर ड्रोन की तरह नहीं बल्कि एक छोटे विमान की तरह उड़ान भरेगा।

तकनीकी शर्तों के अनुसार ड्रोन को कम से कम 16,000 फीट की ऊंचाई पर काम करने में सक्षम होना चाहिए। इसे दिन और रात दोनों समय मिशन पूरा करने की क्षमता रखनी होगी। इसके अलावा इसमें कम से कम 30 किलोग्राम वजन का पेलोड ले जाने की क्षमता जरूरी होगी।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पेलोड मॉड्यूलर होना चाहिए। यानी जरूरत के अनुसार इसे बदला जा सके। किसी मिशन में यह विस्फोटक ले जा सकता है, तो किसी अन्य मिशन में सेंसर या डेटा रिले सिस्टम भी लगा सकता है।

सूत्रों का कहना है कि वायुसेना एक ऐसे प्लेटफॉर्म की तलाश में है जो एक ही स्ट्रक्चर पर कई तरह के मिशन पूरे कर सके और अलग-अलग ऑपरेशनल जरूरतों के अनुसार जल्दी तैयार किया जा सके। (IAF Kamikaze Drone Project)

वायुसेना अपने पास रखेगी तकनीक का अधिकार

इस परियोजना की सबसे खास बात यह है कि विकसित होने वाली तकनीक के बौद्धिक संपदा अधिकार यानी आईपीआर वायुसेना के पास रहेंगे।

रक्षा क्षेत्र के सूत्रों के मुताबिक इससे भविष्य में सिस्टम में बदलाव और अपग्रेड करना आसान होगा। यदि किसी नई तकनीक को जोड़ने की जरूरत पड़े तो वायुसेना को किसी विदेशी या निजी कंपनी पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

सूत्रों ने बताया कि इससे उत्पादन क्षमता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। आवश्यकता पड़ने पर 5 बेस रिपेयर डिपो उत्पादन प्रक्रिया का विस्तार कर सकेगा और तेजी से अधिक संख्या में ड्रोन तैयार किए जा सकेंगे। (IAF Kamikaze Drone Project)

ऑटोपायलट सिस्टम होगा पूरी तरह ऑटोमैटिक

नए ड्रोन में अत्याधुनिक ऑटोपायलट सिस्टम लगाने की योजना है। वायुसेना चाहती है कि यह सिस्टम लॉन्च से लेकर मिशन पूरा होने तक अधिकतर कार्य अपने आप कर सके।

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ड्रोन को निर्धारित मार्ग पर उड़ने, अलग-अलग वेपॉइंट तक पहुंचने, लक्ष्य क्षेत्र में मंडराने, मिशन पूरा करने और आवश्यकता पड़ने पर वापसी जैसी क्षमताएं दी जाएंगी।

इससे ऑपरेटर पर दबाव कम होगा और युद्ध जैसी जटिल परिस्थितियों में भी सिस्टम प्रभावी ढंग से काम कर सकेगा।

एयरफ्रेम और महत्वपूर्ण सिस्टम भी होंगे स्वदेशी

वायुसेना और उद्योग की साझेदारी केवल ड्रोन के बाहरी ढांचे तक सीमित नहीं रहेगी। परियोजना के तहत एयरफ्रेम, कंट्रोल सिस्टम और अन्य महत्वपूर्ण सब-सिस्टम भी विकसित किए जाएंगे।

ड्रोन का एयरफ्रेम ऐसा होना चाहिए जो लॉन्च, उड़ान, तेज मोड़, ऊंचाई परिवर्तन और लक्ष्य पर हमले जैसी परिस्थितियों के दौरान पड़ने वाले दबाव को सहन कर सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक ड्रोन में एयरफ्रेम की मजबूती उतनी ही महत्वपूर्ण होती है जितनी उसके हथियार या सेंसर प्रणाली। (IAF Kamikaze Drone Project)

चीनी तकनीक पर पूरी तरह रोक

टेंडर दस्तावेज में एक महत्वपूर्ण शर्त यह भी रखी गई है कि ड्रोन में किसी भी प्रकार की चीनी तकनीक, चीनी पुर्जे या चीनी मूल की सामग्री का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।

पिछले कुछ वर्षों में भारत रक्षा प्रणालियों में विदेशी निर्भरता कम करने और संवेदनशील उपकरणों में सुरक्षित सप्लाई चेन विकसित करने पर जोर दे रहा है।

सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह शर्त रखी गई है ताकि भविष्य में किसी बाहरी आपूर्ति बाधा का असर सैन्य क्षमताओं पर न पड़े। (IAF Kamikaze Drone Project)

मेंटेनेंस और सपोर्ट सिस्टम पर भी जोर

वायुसेना केवल ड्रोन खरीदने तक सीमित नहीं रहना चाहती। इसके साथ पूरा मेंटेनेंस स्ट्रक्चर ढांचा भी विकसित किया जाएगा।

परियोजना में फ्लाइट कंट्रोलर, हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, वर्जन मैनेजमेंट और सप्लाई चेन सपोर्ट को शामिल किया गया है। इसके अलावा उपयोगकर्ता स्तर पर ही आवश्यक स्पेयर पार्ट्स और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी मांगी गई है।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ड्रोन लंबे समय तक परिचालन स्थिति में बने रहें और किसी भी तकनीकी समस्या का समाधान तेजी से किया जा सके। (IAF Kamikaze Drone Project)

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जमीन से होगा लॉन्च

वायुसेना ने ड्रोन के लिए एक विशेष लॉन्चर सिस्टम की भी मांग की है। यह ड्रोन स्थिर लॉन्च प्लेटफॉर्म से उड़ान भरेगा।

लॉन्चर को इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि हर बार एक समान प्रदर्शन मिले और फील्ड में तेजी से तैनाती संभव हो। सैन्य अभियानों में तेजी से स्थान बदलने और कम समय में लॉन्च करने की क्षमता बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। (IAF Kamikaze Drone Project)

पहले से मौजूद अनुभव का मिलेगा फायदा

भारतीय वायुसेना पहले भी लॉइटरिंग म्यूनिशन का इस्तेमाल कर चुकी है। उसके पास इजरायली मूल के कुछ सिस्टम मौजूद हैं, लेकिन नया कार्यक्रम पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित होगा।

रक्षा क्षेत्र में काम कर रही कई भारतीय कंपनियां पहले से इस तरह के सिस्टम्स पर काम कर रही हैं। कुछ भारतीय लॉइटरिंग म्यूनिशन का परीक्षण ऊंचाई वाले इलाकों में भी किया जा चुका है।

सूत्रों का कहना है कि वायुसेना का उद्देश्य केवल एक नया ड्रोन तैयार करना नहीं बल्कि ऐसा स्वदेशी तकनीकी ढांचा बनाना है जो डिजाइन, निर्माण, रखरखाव और अपग्रेडेशन की पूरी क्षमता देश के भीतर उपलब्ध कराए। (IAF Kamikaze Drone Project)

बदलते युद्ध में बढ़ी ऐसे ड्रोन की अहमियत

आधुनिक युद्ध में ड्रोन अब केवल निगरानी उपकरण नहीं रह गए हैं। कम लागत और उच्च सटीकता के कारण इनका उपयोग तेजी से बढ़ा है।

कई सैन्य विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे सिस्टम दुश्मन के रडार, कमांड सेंटर, आर्टिलरी ठिकानों और अन्य महत्वपूर्ण लक्ष्यों पर तेजी से हमला करने में सक्षम होते हैं। (IAF Kamikaze Drone Project)

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  • News Desk

    रक्षा समाचार न्यूज डेस्क भारत की अग्रणी हिंदी रक्षा समाचार टीम है, जो Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, रक्षा उपकरण, युद्ध रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक खबरें पेश करती है। हम लाते हैं सटीक, सरल और अपडेटेड Defence News in Hindi। हमारा उद्देश्य है – "हर खबर, देश की रक्षा से जुड़ी।"

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