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भारत के पिनाका में दिलचस्पी दिखाने के बाद फ्रांस ने लिया बड़ा फैसला, इस रणनीति के चलते HIMARS को भी किया रिजेक्ट

फ्रांस ने पिनाका की क्षमताओं का अध्ययन जरूर किया, लेकिन उसके रक्षा योजना दस्तावेज पहले से ही यह संकेत दे रहे थे कि वह अपनी अगली पीढ़ी की रॉकेट आर्टिलरी सिस्टम घरेलू स्तर पर विकसित करना चाहता है...

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📍नई दिल्ली | 16 Jun, 2026, 12:56 PM

France Pinaka FLP-T Program: पिछले दो सालों में भारतीय मीडिया में कई बार ऐसी खबरें सामने आईं कि फ्रांस भारत के स्वदेशी मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम पिनाका में दिलचस्पी दिखा रहा है और संभव है कि वह इसे अपने सैन्य बेड़े में शामिल करे। उस समय इसे भारत के रक्षा निर्यात के लिए बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा गया था। हालांकि अब फ्रांस के हालिया फैसलों और उसके लंबी दूरी की मारक क्षमता वाले कार्यक्रमों को देखने के बाद तस्वीर काफी स्पष्ट हो गई है। रक्षा मामलों से जुड़े सूत्रों और उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार फ्रांस ने अपनी भविष्य की रॉकेट आर्टिलरी जरूरतों के लिए किसी विदेशी सिस्टम पर निर्भर रहने के बजाय पूरी तरह स्वदेशी समाधान विकसित करने का रास्ता चुना है।

फ्रांस ने अपनी पुरानी रॉकेट आर्टिलरी क्षमता को बदलने के लिए एफएलपी-टी यानी फ्रैप लॉन्ग पोर्टे टेरेस्त्रे कार्यक्रम शुरू किया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल नया रॉकेट लॉन्चर खरीदना नहीं बल्कि ऐसा सिस्टम डेवलप करना है जिस पर फ्रांस का पूर्ण कंट्रोल हो। यही वजह है कि फ्रांसीसी रक्षा उद्योग की कई कंपनियों को इस कार्यक्रम में शामिल किया गया है और उन्हें घरेलू तकनीक पर आधारित समाधान विकसित करने की जिम्मेदारी दी गई है।

France Pinaka FLP-T Program: पिनाका को लेकर क्यों हुई थी चर्चा

पिनाका भारत का स्वदेशी मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम है जिसे डीआरडीओ ने विकसित किया है। यह भारतीय सेना की सबसे सफल आर्टिलरी परियोजनाओं में गिना जाता है। कारगिल युद्ध के दौरान इसकी क्षमता सामने आई थी और इसके बाद लगातार नए वर्जन तैयार किए गए।

जब फ्रांस की ओर से पिनाका का मूल्यांकन किए जाने की खबरें आईं तो इसे संभावित निर्यात सौदे के रूप में देखा गया। हालांकि रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि किसी सैन्य सिस्टम का मूल्यांकन किया जाना और उसे खरीदने का फैसला लेना दो अलग-अलग बातें हैं। दुनिया की अधिकांश सेनाएं समय-समय पर विभिन्न देशों के हथियारों और प्रणालियों का अध्ययन करती हैं ताकि उनकी तुलना की जा सके और अपनी जरूरतों को बेहतर ढंग से समझा जा सके।

सूत्रों का कहना है कि फ्रांस ने पिनाका की क्षमताओं का अध्ययन जरूर किया, लेकिन उसके रक्षा योजना दस्तावेज पहले से ही यह संकेत दे रहे थे कि वह अपनी अगली पीढ़ी की रॉकेट आर्टिलरी सिस्टम घरेलू स्तर पर विकसित करना चाहता है।

अक्टूबर 2025 में भारत आए थे फ्रांसीसी सेना प्रमुख

अक्टूबर 2025 में फ्रांसीसी सेना प्रमुख जनरल पियरे शिल भारत दौरे पर आए थे। इस दौरान उन्होंने राजस्थान के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में भारतीय सेना के पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम का प्रदर्शन देखा था। पिनाका की क्षमताओं, इसकी मारक दूरी और ऑपरेशनल प्रदर्शन से जुड़ी जानकारी उन्हें भारतीय सेना की ओर से दी गई थी। इसी दौरे के दौरान जनरल पियरे शिल ने भारतीय सेना के अधिकारियों और सैनिकों के साथ पिनाका सिस्टम के सामने समूह तस्वीर भी खिंचवाई थी, जिसकी तस्वीर बाद में काफी चर्चा में रही।

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रक्षा सूत्रों के अनुसार यह दौरा फ्रांस द्वारा पिनाका सिस्टम के मूल्यांकन और तकनीकी अध्ययन का हिस्सा था। उस समय फ्रांसीसी पक्ष विशेष रूप से पिनाका के लंबी दूरी वाले संस्करणों में रुचि दिखा रहा था। फ्रांसीसी सेना यह समझना चाहती थी कि यह सिस्टम उसकी ऑपरेशनल जरूरतों के अनुरूप कितना उपयोगी हो सकता है।

इसी दौरान फ्रांसीसी ब्रिगेडियर जनरल स्टेफेन रिचो ने भी पिनाका को फ्रांस की कुछ आवश्यकताओं के अनुरूप बताया था। हालांकि सूत्रों का कहना है कि किसी सैन्य प्रणाली का मूल्यांकन किए जाने का मतलब यह नहीं होता कि उसे खरीदने का फैसला भी ले लिया गया है। फ्रांस की ओर से किया गया यह आकलन मुख्य रूप से बेंचमार्किंग, तकनीकी तुलना और क्षमता अध्ययन के उद्देश्य से था, ताकि वह अपनी भविष्य की लंबी दूरी की रॉकेट आर्टिलरी योजनाओं के लिए विभिन्न विकल्पों को समझ सके।

फ्रांस की रक्षा नीति में स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी सबसे ऊपर

फ्रांस लंबे समय से स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी की नीति पर काम करता रहा है। उसके पास अपने लड़ाकू विमान, परमाणु हथियार, पनडुब्बियां, मिसाइलें, एयर डिफेंस सिस्टम और अंतरिक्ष कार्यक्रम मौजूद हैं। फ्रांस की सुरक्षा नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि वह महत्वपूर्ण सैन्य तकनीकों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर न रहे।

रक्षा मामलों के जानकारों के अनुसार यही कारण है कि फ्रांस ने अमेरिकी हिमार्स (HIMARS) जैसे सिस्टम को भी सीधे अपनाने का रास्ता नहीं चुना। इसके बजाय उसने अपनी जरूरतों के अनुरूप स्वदेशी कार्यक्रम शुरू किया।

सूत्रों का कहना है कि यदि फ्रांस अमेरिका जैसी करीबी साझेदार के सिस्टम पर पूरी तरह निर्भर रहने से बचना चाहता था, तो किसी भारतीय सिस्टम को अपनी भविष्य की रॉकेट आर्टिलरी का आधार बनाना उसकी नीति के अनुरूप नहीं था।

क्या है एफएलपी-टी कार्यक्रम

फ्रांस ने अपनी पुराने एलआरयू रॉकेट सिस्टम को बदलने के लिए एफएलपी-टी कार्यक्रम शुरू किया है। यह कार्यक्रम 2030 के बाद फ्रांसीसी सेना को नई लंबी दूरी की मारक क्षमता देने के उद्देश्य से बनाया गया है।

इस कार्यक्रम के तहत कई फ्रांसीसी कंपनियां प्रतिस्पर्धा में हैं। एमबीडीए और साफ्रान मिलकर थंडार्ट नामक सिस्टम विकसित कर रहे हैं। वहीं थेल्स और एरियानग्रुप भी अपने सॉल्युशन पर काम कर रहे हैं। इसके अलावा फूद्रे नामक एक अन्य सिस्टम भी डेवलप किया जा रहा है।

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इन सभी परियोजनाओं का लक्ष्य फ्रांस को ऐसी रॉकेट आर्टिलरी देना है जिसकी तकनीक, उत्पादन, रखरखाव और अपग्रेड पर पूरा नियंत्रण फ्रांस के पास हो। (France Pinaka FLP-T Program)

पिनाका की क्षमता पर नहीं उठे सवाल

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि फ्रांस का फैसला पिनाका की क्षमता से जुड़ा नहीं है। पिनाका पहले ही युद्ध में अपनी प्रभावशीलता साबित कर चुका है।

पिनाका एमके-1 की मारक दूरी लगभग 45 किलोमीटर तक है। एमके-2 संस्करण 60 किलोमीटर से अधिक दूरी तक टारगेट हिट कर सकता है। गाइडेड संस्करणों की रेंज 75 से 90 किलोमीटर तक बताई जाती है। इसके अलावा विस्तारित रेंज वाले संस्करणों पर भी काम किया गया है।

एक लॉन्चर से 12 रॉकेट बेहद कम समय में दागे जा सकते हैं। पूरी बैटरी कुछ ही सेकंड में बड़े क्षेत्र को कवर कर सकती है। यही वजह है कि भारतीय सेना में इसकी बड़ी संख्या में तैनाती की जा रही है।

रक्षा सूत्रों के अनुसार फ्रांस ने पिनाका को इसलिए नहीं छोड़ा क्योंकि वह कमजोर सिस्टम था, बल्कि इसलिए क्योंकि उसकी प्राथमिकता फ्रांस में किसी सिस्टम को डेवलप करना है। (France Pinaka FLP-T Program)

फ्रांस की मौजूदा रॉकेट क्षमता की चुनौती

फ्रांस के पास इस समय एलआरयू सिस्टम है जो अमेरिकी एम-270 प्लेटफॉर्म पर आधारित है। इनकी संख्या सीमित रह गई है और आने वाले वर्षों में इन्हें बदलना जरूरी हो गया है।

यूक्रेन युद्ध के बाद लंबी दूरी की आर्टिलरी और रॉकेट सिस्टम की अहमियत और बढ़ गई है। फ्रांस भी अपनी सेना की इस क्षमता को मजबूत करना चाहता है। हालांकि वह इस प्रक्रिया में विदेशी निर्भरता कम करने पर जोर दे रहा है।

सूत्रों का कहना है कि अमेरिका पर गोला-बारूद और तकनीक के लिए निर्भरता ने फ्रांस को यह एहसास कराया कि भविष्य में उसे अपनी स्वतंत्र क्षमता विकसित करनी होगी। इसी सोच ने एफएलपी-टी कार्यक्रम को गति दी।

राफेल और रक्षा सहयोग के बीच चर्चा में आया पिनाका

भारत और फ्रांस के बीच पिछले कुछ वर्षों में रक्षा सहयोग काफी बढ़ा है। राफेल लड़ाकू विमान, नौसैनिक सहयोग और अन्य रक्षा परियोजनाओं पर दोनों देशों के बीच लगातार बातचीत होती रही है।

रक्षा मामलों से जुड़े सूत्रों का मानना है कि इसी दौरान पिनाका को लेकर भी चर्चा सामने आई। फ्रांसीसी पक्ष द्वारा भारतीय रक्षा उत्पादों में रुचि दिखाना दोनों देशों के बीच संतुलित रक्षा संबंधों का संकेत माना गया।

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इससे भारतीय रक्षा उद्योग को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली और यह संदेश गया कि भारतीय हथियार प्रणालियां वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता रखती हैं। (France Pinaka FLP-T Program)

निवेश के आंकड़े बताते हैं फ्रांस का असली इरादा

विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी देश की वास्तविक प्राथमिकता उसके निवेश पैटर्न से समझी जा सकती है। पिछले दो सालों में फ्रांस ने घरेलू रॉकेट आर्टिलरी कार्यक्रमों में लगातार निवेश बढ़ाया है।

फूद्रे, थंडार्ट और एफएलपी-टी 150 जैसी प्रोजेक्ट पर ट्रायल्स भी किए जा चुके हैं। फ्रांसीसी सरकार ने इन कार्यक्रमों के लिए बजट और संसाधन उपलब्ध कराए हैं।

सूत्रों के अनुसार यही संकेत देता है कि फ्रांस शुरू से ही घरेलू समाधान को आगे बढ़ाने के इरादे से काम कर रहा था। पिनाका सहित अन्य विदेशी प्रणालियों का अध्ययन केवल तुलना और मूल्यांकन की प्रक्रिया का हिस्सा था। (France Pinaka FLP-T Program)

रक्षा निर्यात के लिए महत्वपूर्ण सबक

रक्षा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि यह मामला इस बात का उदाहरण है कि किसी देश की रुचि और वास्तविक खरीद योजना में अंतर हो सकता है। किसी हथियार सिस्टम की तकनीकी क्षमता महत्वपूर्ण होती है, लेकिन अंतिम फैसला अक्सर रणनीतिक नीति, औद्योगिक हितों और राष्ट्रीय सुरक्षा सिद्धांतों के आधार पर लिया जाता है।

पिनाका आज भी भारत की सबसे सफल रक्षा परियोजनाओं में गिना जाता है और कई देशों ने इसमें रुचि दिखाई है। हालांकि फ्रांस का मामला यह दिखाता है कि हर संभावित ग्राहक की प्राथमिकताएं अलग होती हैं।

रक्षा सूत्रों के अनुसार फ्रांस ने अपनी परंपरागत नीति के अनुरूप वही रास्ता चुना है, जिसे वह दशकों से अपनाता आया है। उसका लक्ष्य ऐसी सैन्य क्षमता विकसित करना है जिस पर तकनीकी, औद्योगिक और रणनीतिक स्तर पर उसका पूरा नियंत्रण बना रहे। (France Pinaka FLP-T Program)

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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