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स्कूल ऑफ आर्टिलरी में आर्मेनिया के अधिकारी, क्या Pinaka MBRL के लोकल प्रोडक्शन को लेकर चल रही बातचीत?

आर्मेनिया के अधिकारियों को भारतीय पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम भी दिखाया गया। विदेशी अधिकारियों ने पिनाका लॉन्चर और आर्टिलरी के फायर कंट्रोल/सर्विलांस इक्विपमेंट (रडार/थर्मल सिस्टम) का डेमो भी देखा...

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📍नई दिल्ली/देवलाली | 23 May, 2026, 2:43 PM

India-Armenia Pinaka Deal: भारत और आर्मेनिया के बीच रक्षा सहयोग में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। हाल ही में आर्मेनिया की सेना का एक तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल महाराष्ट्र के देवलाली स्थित भारतीय सेना के प्रतिष्ठित स्कूल ऑफ आर्टिलरी पहुंचा। इस टीम का नेतृत्व आर्मेनिया के डिप्टी चीफ ऑफ आर्टिलरी डिपार्टमेंट कर्नल अराम खाचातुरियन कर रहे थे।

भारतीय सेना ने आर्मेनिया के अधिकारियों को आधुनिक आर्टिलरी ट्रेनिंग सिस्टम, लाइव फायरिंग एक्सरसाइज और हथियारों के रखरखाव से जुड़ी प्रक्रियाओं की जानकारी दी। इस दौरान दोनों देशों के बीच आर्टिलरी क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।

भारतीय सेना के अधिकारियों के मुताबिक विदेशी प्रतिनिधिमंडल को उन सभी प्रक्रियाओं के बारे में बताया गया, जिनकी मदद से भारतीय सेना अपने हथियारों और आर्टिलरी सिस्टम को लंबे समय तक ऑपरेशनल स्थिति में बनाए रखती है।

India-Armenia Pinaka Deal: स्कूल ऑफ आर्टिलरी में लाइव फायरिंग एक्सरसाइज

देवलाली स्थित स्कूल ऑफ आर्टिलरी भारतीय सेना की सबसे महत्वपूर्ण ट्रेनिंग संस्थाओं में गिना जाता है। यहां तोपखाना अधिकारियों और जवानों को आधुनिक आर्टिलरी सिस्टम चलाने, फायर कंट्रोल, सर्विलांस और बैटलफील्ड कोऑर्डिनेशन की ट्रेनिंग दी जाती है।

आर्मेनिया के अधिकारियों को यहां अत्याधुनिक ट्रेनिंग सुविधाएं दिखाई गईं। उन्हें लाइव फायरिंग एक्सरसाइज भी दिखाई गई, जिसमें भारतीय सेना की आर्टिलरी क्षमता का प्रदर्शन किया गया।

प्रतिनिधिमंडल को यह भी बताया गया कि भारतीय सेना किस तरह अलग-अलग स्तर पर हथियारों की मरम्मत, ओवरहॉल और तकनीकी जांच करती है ताकि युद्ध जैसी स्थिति में भी सिस्टम लगातार काम करते रहें।

स्कूल ऑफ आर्टिलरी के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल एनएस सरना ने भी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। इस दौरान भारत और आर्मेनिया के बीच आर्टिलरी सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा हुई।

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India-Armenia Pinaka Deal
A three member Armenian military delegation led by Col Aram Khachatryan, Combat Cross First Class, Deputy Chief of Artillery Department, visited School of Artillery on 21-22 May 2026.

पिनाका सिस्टम पर रहा खास फोकस

इस दौरे के दौरान आर्मेनिया के अधिकारियों को भारतीय पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम भी दिखाया गया। विदेशी अधिकारियों ने पिनाका लॉन्चर और आर्टिलरी के फायर कंट्रोल/सर्विलांस इक्विपमेंट (रडार/थर्मल सिस्टम) का डेमो भी देखा।

सूत्रों के मुताबिक यह दौरा केवल औपचारिक था, बल्कि भारत द्वारा आर्मेनिया को दिए गए पिनाका सिस्टम से भी जुड़ा हुआ माना जा रहा है।

दरअसल, आर्मेनिया भारत का पहला विदेशी ग्राहक है जिसने पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम खरीदा है। वर्ष 2022 में दोनों देशों के बीच करीब 2,000 करोड़ रुपये का रक्षा समझौता हुआ था। इस डील में चार पिनाका बैटरियां, रॉकेट, गाइडेड रॉकेट और अन्य सैन्य उपकरण शामिल थे।

क्यों खास है पिनाका रॉकेट सिस्टम

पिनाका भारत का स्वदेशी मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम है। इसे डीआरडीओ और भारतीय रक्षा उद्योग ने मिलकर विकसित किया है। यह सिस्टम कम समय में बड़ी मात्रा में रॉकेट दागने की क्षमता रखता है।

इसे “इंडियन हिमार्स” भी कहा जाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत “शूट एंड स्कूट” क्षमता मानी जाती है। यानी रॉकेट फायर करने के तुरंत बाद लॉन्चर अपनी जगह बदल सकता है, जिससे दुश्मन के जवाबी हमले से बचना आसान हो जाता है।

आर्मेनिया को पिनाका के अलग-अलग वेरिएंट दिए गए हैं, जिनमें स्टैंडर्ड, एक्सटेंडेड रेंज और गाइडेड वर्जन शामिल हैं। गाइडेड पिनाका रॉकेट लगभग 75 किलोमीटर तक सटीक हमला करने में सक्षम माना जाता है।

भारतीय रक्षा सूत्रों के मुताबिक इस साल जनवरी में भारत ने गाइडेड पिनाका रॉकेट्स का पहला बैच आर्मेनिया भेजा था। जिसे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने फ्लैगऑफ किया था। खास बात यह है कि गाइडेड पिनाका पाने वाला पहला विदेशी देश आर्मेनिया बना।

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आर्मेनिया क्यों बढ़ा रहा भारत से रक्षा सहयोग

पिछले कुछ वर्षों में आर्मेनिया ने भारत के साथ रक्षा संबंध तेजी से मजबूत किए हैं। नागोर्नो-काराबाख संघर्ष के बाद आर्मेनिया अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत करना चाहता है और रूस पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है।

इसी वजह से उसने भारत से पिनाका, आर्टिलरी सिस्टम और दूसरे सैन्य उपकरण खरीदने शुरू किए।

रक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि आर्मेनिया भारतीय हथियारों को भरोसेमंद और लागत के हिसाब से प्रभावी मान रहा है। भारतीय सिस्टम की खासियत यह भी है कि उन्हें कठिन इलाकों और युद्ध जैसी परिस्थितियों में इस्तेमाल के हिसाब से डिजाइन किया गया है।

लोकल प्रोडक्शन पर भी चर्चा

वहीं, आर्मेनिया भारत के साथ मिलकर कुछ सैन्य उपकरणों का स्थानीय उत्पादन शुरू करना चाहता है।

सूत्रों के मुताबिक आर्मेनिया भारत के साथ मिलकर 155 एमएम आर्टिलरी गोले और पिनाका रॉकेट सिस्टम से जुड़े हथियारों का लोकल प्रोडक्शन शुरू करना चाहता है। इसके लिए दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि यह चर्चा कितनी आगे बढ़ चुकी है और संभावित डील की लागत कितनी हो सकती है।

दरअसल आर्मेनिया भविष्य में किसी संघर्ष की स्थिति में सप्लाई चेन पर निर्भरता कम करना चाहता है। अगर युद्ध के दौरान दूसरे देशों से हथियारों की सप्लाई रुक जाए, तो स्थानीय स्तर पर उत्पादन उसके लिए मददगार साबित हो सकता है। इसी वजह से वह भारत के साथ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और लाइसेंस प्रोडक्शन जैसे विकल्पों पर विचार कर रहा है।

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हालांकि अभी यह प्रक्रिया शुरुआती बातचीत के स्तर पर है। दोनों देशों के बीच टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और जॉइंट मैन्युफैक्चरिंग जैसे मुद्दों पर चर्चा चल रही है।

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  • herry passport

    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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