📍नई दिल्ली/बेंगलुरु | 24 Jun, 2026, 9:52 PM
FWD Supreme AI Fighter Jet: भारत में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) बेस्ड फाइटर जेट बनाने ी तैयारियां शुरू हो गई हैं। बेंगलुरु की डिफेंस टेक्नोलॉजी कंपनी फ्लाइंग वेज डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने बुधवार को एफडब्ल्यूडी सुप्रीम (FWD Supreme) नाम के एआई-पायलटेड फाइटर जेट कॉन्सेप्ट को पेश किया।
कंपनी के मुताबिक, यह ऐसा कॉम्बैट प्लेटफॉर्म होगा जिसमें विमान को लगातार जमीन से कोई पायलट कंट्रोल नहीं करेगा। एआई सिस्टम विमान को उड़ाने, सेंसर से जानकारी लेने, खतरे पहचानने और मिशन के दौरान फैसले लेने में मदद करेगा।
कंपनी ने इसके साथ ही ‘मोबिंग डॉक्ट्रिन’ नाम की एक नया वॉरफेयर कॉन्सेप्ट भी पेश किया। जिसमें कई छोटे या मध्यम आकार के एआई-पायलटेड फाइटर जेट्स को एक साथ नेटवर्क में चलाना है। कंपनी ने एफडब्ल्यूडी सुप्रीम लाइट नाम के शुरुआती टेक्नोलॉजी डेमॉन्स्ट्रेटर की पहली उड़ान इसी साल तीसरी तिमाही जुलाई से सितंबर के बीच में कराने की तैयारी कर रही है। कंपनी ने इस विमान के डिजिटल कॉन्सेप्ट की तस्वीरें भी जारी की हैं।
FWD Supreme AI Fighter Jet: सामान्य ड्रोन से कैसे अलग होगा एफडब्ल्यूडी सुप्रीम
अभी भारत समेत दुनिया के कई देशों में जो मिलिट्री ड्रोन इस्तेमाल होते हैं, उनमें से अधिकतर को जमीन पर मौजूद ऑपरेटर कंट्रोल करते हैं। ऑपरेटर कैमरा देखता है, ड्रोन को डायरेक्शन देता है और जरूरत पड़ने पर मिशन से जुड़े फैसले करता है। कुछ ड्रोन पहले से तय रास्ते पर अपने आप उड़ सकते हैं, लेकिन जरूरी फैसलों में मानव के पास ही कंट्रोल रहेगा।
फ्लाइंग वेज का दावा है कि एफडब्ल्यूडी सुप्रीम का डिजाइन इससे अलग होगा। इसमें एआई बेस्ड फ्लाइट कंट्रोल, सिचुएशनल अवेयरनेस, सेंसर फ्यूजन, ऑटोनॉमस डिसीजन मेकिंग और कॉग्निटिव मिशन एक्जीक्यूशन जैसे सिस्टम जोड़े जाएंगे। विमान के अलग-अलग सेंसर, कैमरे और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जो जानकारी जुटाएंगे, उसे एआई एक साथ पढ़ेगा। इसके बाद वह तय करेगा कि सामने कोई विमान है, मिसाइल है, रडार है या कोई अन्य खतरा।
सेंसर फ्यूजन का काम बहुत महत्वपूर्ण होता है। किसी एक सेंसर को बादल, धुआं, इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग या दूरी की वजह से पूरी जानकारी नहीं मिल सकती। लेकिन रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल कैमरा, इन्फ्रारेड सेंसर, डेटा लिंक और अन्य सिस्टम से आई जानकारी को मिलाकर ज्यादा साफ इमेज बनाई जा सकती है। इसी इमेज के आधार पर विमान को रास्ता बदलने, टारगेट की पहचान करने या अपने समूह के दूसरे प्लेटफॉर्म को सूचना भेजने में मदद मिलती है।
कंपनी के अनुसार, एफडब्ल्यूडी सुप्रीम को ऐसे एयरस्पेस के लिए तैयार किया जा रहा है जहां दुश्मन के रडार, मिसाइल, जैमिंग सिस्टम और लड़ाकू विमान एक्टिव हों। ऐसे माहौल को कॉन्टेस्टेड एनवायरनमेंट कहा जाता है। यहां मानव पायलट वाले विमान के लिए खतरा ज्यादा होता है, जबकि बिना पायलट वाले प्लेटफॉर्म में पायलट की जान का जोखिम नहीं रहता।
क्या है मोबिंग डॉक्ट्रिन
एफडब्ल्यूडी सुप्रीम कार्यक्रम का सबसे अलग हिस्सा ‘मोबिंग डॉक्ट्रिन’ है। इस कॉन्सैप्ट को कंपनी के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुहास तेजस्कंदा ने तैयार किया है। जिसमें एक अकेले बड़े और महंगे फाइटर जेट पर निर्भर रहने के बजाय कई एआई-पायलटेड प्लेटफॉर्म एक साथ काम करते हैं।
कंपनी के अनुसार, इन विमानों को नेटवर्क के जरिए जोड़ा जाएगा। एक विमान दुश्मन की स्थिति देख सकता है, दूसरा इलेक्ट्रॉनिक निगरानी कर सकता है, तीसरा टारगेट के पास जाकर जानकारी जुटा सकता है और चौथा स्ट्राइक मिशन के लिए इस्तेमाल हो सकता है। यह पूरा समूह एक-दूसरे के साथ डेटा शेयर करेगा। यदि किसी एक प्लेटफॉर्म का संपर्क टूटता है या वह नष्ट हो जाता है, तो बाकी प्लेटफॉर्म मिशन की जानकारी के आधार पर काम जारी रख सकते हैं।
इस रणनीति का दूसरा हिस्सा लागत से जुड़ा है। किसी भी आधुनिक मानव चालित लड़ाकू विमान की कीमत, उसके पायलट का प्रशिक्षण, रखरखाव और हथियारों की लागत बहुत अधिक होती है। इसके मुकाबले छोटे एआई-पायलटेड प्लेटफॉर्म अपेक्षाकृत कम लागत वाले हो सकते हैं। कंपनी का तर्क है कि अगर किसी मिशन में कुछ प्लेटफॉर्म खो भी जाएं, तब भी बाकी प्लेटफॉर्म दुश्मन की एयर डिफेंस सिस्टम पर प्रेशर बनाए रख सकते हैं।
यह आइडिया स्वॉर्म ऑपरेशन जैसा है। जिसमें स्वॉर्म या कई ड्रोन या मानव रहित विमान का एक साथ कॉर्डिनेट तरीके से काम करते हैं। लेकिन मोबिंग डॉक्ट्रिन में केवल संख्या नहीं, बल्कि नेटवर्किंग और मशीन की रफ्तार से फैसले लेने की बात की गई है। कंपनी के अनुसार, इसका उद्देश्य महंगे मानव चालित प्लेटफॉर्म के सामने कम लागत वाले लेकिन ऑर्गेनाइज्ड एआई विमान तैनात करना है। (FWD Supreme AI Fighter Jet)
दो अलग वैरिएंट में तैयार होगा प्लेटफॉर्म
फ्लाइंग वेज ने एफडब्ल्यूडी सुप्रीम परिवार को दो वैरिएंट में डेवलप करने की योजना बताई है। पहला वैरिएंट एफडब्ल्यूडी सुप्रीम लाइट होगा। इसका अनुमानित ऑल-अप वेट करीब 250 किलोग्राम श्रेणी का रखा गया है। ऑल-अप वेट का मतलब विमान का कुल वजन है, जिसमें एयरफ्रेम, ईंधन, उपकरण और पेलोड शामिल होता है।
लाइट वैरिएंट को शुरुआती टेक्नोलॉजी डेमॉन्स्ट्रेटर के रूप में तैयार किया जा रहा है। इसका इस्तेमाल एआई फ्लाइट कंट्रोल, ऑटोनॉमस टेक-ऑफ, लैंडिंग, सेंसर इंटीग्रेशन और नेटवर्क आधारित ऑपरेशन की जांच के लिए किया जा सकता है। कंपनी ने इसकी पहली उड़ान का लक्ष्य तीसरी तिमाही में रखा है।
दूसरा वैरिएंट एफडब्ल्यूडी सुप्रीम हैवी होगा। इसका वजन करीब एक टन श्रेणी का बताया गया है। हैवी वैरिएंट को लंबी दूरी के ऑटोनॉमस कॉम्बैट ऑपरेशन के लिए डिजाइन करने की योजना है। ये इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस यानी आईएसआर, स्ट्राइक, कोलैबोरेटिव कॉम्बैट और एयर डोमिनेंस जैसे मिशन पूरे करेगा।
आईएसआर मिशन में प्लेटफॉर्म का मुख्य काम जानकारी जुटाना होता है। इसमें सीमा क्षेत्र की निगरानी, दुश्मन की गतिविधियों पर नजर, रडार या वाहन की पहचान और लाइव वीडियो भेजना शामिल होता है। स्ट्राइक मिशन में हथियार या म्यूनिशन ले जाने की जरूरत होती है। कोलैबोरेटिव कॉम्बैट का मतलब मानव चालित फाइटर जेट, अन्य ड्रोन, ग्राउंड रडार और कमांड सेंटर के साथ मिलकर काम करना है। (FWD Supreme AI Fighter Jet)
कितनी होगी रफ्तार और रेंज
कंपनी ने पहले चरण में एफडब्ल्यूडी सुप्रीम के लिए अधिकतम गति मैक 0.9 तक होगी। इसकी क्रूज स्पीड लगभग मैक 0.5 होगी। क्रूज स्पीड पर विमान मिशन के दौरान लंबे समय तक उड़ सकता है। कंपनी ने ऑपरेशनल रेंज 700 से 1,000 किलोमीटर के बीच बताई है। इसकी रेंज मिशन प्रोफाइल, पेलोड, ईंधन, उड़ान ऊंचाई और मौसम पर निर्भर करती है।
पहले चरण में ऑटोनॉमस टेक-ऑफ, मिशन एक्जीक्यूशन और रिकवरी का लक्ष्य रखा गया है। इसका अर्थ है कि विमान रनवे या तय लॉन्च सिस्टम से अपने आप उड़ान भर सके, मिशन क्षेत्र तक पहुंच सके, सेंसर और डेटा लिंक के आधार पर अपना कार्य कर सके और वापस निर्धारित स्थान पर उतर सके।
कंपनी के दूसरे चरण के रोडमैप में मैक 2 के करीब सुपरसोनिक परफॉरमेंस, स्टेल्थ खूबियां और मल्टी-एयरक्राफ्ट ऑटोनॉमस टीमिंग जैसी क्षमताओं होंगी। (FWD Supreme AI Fighter Jet)
तेजस कार्यक्रम से जुड़े वैज्ञानिकों की टीम
कंपनी के मुताबिक, इस कार्यक्रम का नेतृत्व एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी के पूर्व सचिव और कंट्रोल सिस्टम विशेषज्ञ गिरिश दीक्षित कर रहे हैं। टीम में एलसीए तेजस कार्यक्रम से जुड़े रहे कई वरिष्ठ वैज्ञानिकों के नाम भी शामिल हैं।
इनमें वी. सुब्बा राव, जी. राधाकृष्णन, महेश प्रभाकर पडवाले और आर. एस. राव शामिल हैं। इन विशेषज्ञों का अनुभव एयरफ्रेम, स्ट्रक्चरल सिस्टम, प्रोपल्शन, इंजन इंटीग्रेशन, एवियोनिक्स और वेपन इंटीग्रेशन जैसे क्षेत्रों में रहा है। किसी भी लड़ाकू विमान कार्यक्रम में ये सभी हिस्से एक-दूसरे से जुड़े होते हैं।
एयरफ्रेम विमान का मुख्य स्ट्रक्चर होता है। इसमें विंग, फ्यूजलेज, टेल और लैंडिंग गियर जैसी स्ट्रक्चर आते हैं। प्रोपल्शन से विमान को आगे बढ़ाने वाला इंजन या पावर सिस्टम जुड़ा होता है। एवियोनिक्स में रडार, नेविगेशन, कम्युनिकेशन, कंप्यूटर और मिशन सिस्टम शामिल होते हैं। वेपन इंटीग्रेशन का काम हथियार को विमान के सेंसर, फायर कंट्रोल सिस्टम और सुरक्षित लॉन्च व्यवस्था से जोड़ना होता है। (FWD Supreme AI Fighter Jet)
बेंगलुरु में हो रहा तैयार
फ्लाइंग वेज डिफेंस एंड एयरोस्पेस की स्थापना वर्ष 2022 में हुई थी और इसका मुख्यालय बेंगलुरु में है। कंपनी का कहना है कि एफडब्ल्यूडी सुप्रीम को उसके बेंगलुरु स्थित मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी में डिजाइन और विकसित किया जा रहा है। कंपनी एआई आधारित युद्ध प्रणाली, ऑटोनॉमस कॉम्बैट एयरक्राफ्ट और मानव रहित हवाई प्लेटफॉर्म पर काम करती है।
कंपनी के अनुसार, उसने पहले स्वदेशी यूएवी के लिए डीजीसीए टाइप सर्टिफिकेशन हासिल किया था। सितंबर 2024 में उसके एफडब्ल्यूडी-200बी अनमैन्ड बॉम्बर की पहली उड़ान हुई थी। कंपनी ने अगस्त 2025 में काल भैरव ई2ए2 नाम के एआई-पावर्ड मीडियम एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस प्लेटफॉर्म की जानकारी भी साझा की थी। कंपनी ने इस प्लेटफॉर्म के लिए 30 घंटे की एंड्योरेंस और 3,000 किलोमीटर रेंज का दावा किया था। (FWD Supreme AI Fighter Jet)


