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Israel LMG supply India: भारतीय सेना को जल्द मिलने वाली हैं 40,000 एलएमजी, अरबेल एडवांस एल्गोरिदम तकनीक पर बातचीत जारी

अरबेल दुनिया का पहला ऐसा सिस्टम है जो छोटे हथियारों (जैसे राइफल या कार्बाइन) को पूरी तरह कंप्यूटरीकृत फायर-कंट्रोल तकनीक प्रदान करता है...

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📍नई दिल्ली | 8 Dec, 2025, 11:25 AM

Israel LMG supply India: भारतीय सेना को अगले साल की शुरुआत में एलएमजी की बड़ी खेप मिलने वाली है। इजरायल की डिफेंस कंपनी इजरायल वेपन इंडस्ट्रीज यानी आईडब्ल्यूआई ने पुष्टि की है कि वह भारत को पहली खेप में 40,000 लाइट मशीन गन (एलएमजी) भेजेगी। यह सप्लाई उस कॉन्ट्रैक्ट का हिस्सा है, जिसे पिछले साल साइन किया गया था। कंपनी के मुताबिक सभी टेस्ट, ट्रायल और जांच पूरी हो चुकी है और प्रोडक्शन लाइसेंस भी मिल गया है।

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एलएमजी की पहली खेप अगले साल की शुरुआत में भेजी जाएगी। पूरी सप्लाई पांच साल में पूरी होने की योजना है, लेकिन जरूरत पड़ने पर इससे भी जल्दी डिलीवरी भी संभव है। सेना की इन्फैंट्री के लिए ये मशीन गन बहुत जरूरी मानी जाती हैं, क्योंकि इन्हें लंबी फायरिंग, लगातार मूवमेंट और कठिन ऑपरेशन में इस्तेमाल किया जाता है।

इसके साथ ही कंपनी भारत के लिए एक और बड़ा सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट के अंतिम चरण में है। यह कॉन्ट्रैक्ट करीब 1.7 लाख सीक्यूबी कार्बाइन का है। यह कार्बाइन 5.56×45 मिलीमीटर कैलिबर की होती हैं और नजदीकी लड़ाई, शहरों में ऑपरेशन और आतंकवाद विरोधी कार्रवाई में इस्तेमाल की जाती हैं। रक्षा मंत्रालय की योजना कुल 4.25 लाख ऐसी कार्बाइन लेने की है। इस प्रोजेक्ट के लिए भारत की कंपनी भारत फोर्ज मुख्य बोलीदाता है, जबकि आईडब्ल्यूआई की पार्टनर कंपनी पीएलआर सिस्टम्स करीब 40 फीसदी कार्बाइन बनाएगी।

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आईडब्ल्यूआई भारत के साथ कंप्यूटरीकृत हथियार सिस्टम अरबेल तकनीक पर भी काम कर रही है। यह सिस्टम एडवांस एल्गोरिद्म के जरिए निशाने को ज्यादा सटीक बनाता है और गोला-बारूद की सही खपत सुनिश्चित करता है। इस तकनीक पर शुरुआती बातचीत जारी है और भविष्य में इसका को-प्रोडक्शन भारत और इजरायल में किया जा सकता है। यह इजरायल वेपन इंडस्ट्रीज द्वारा बनाया गया एक स्मार्ट फायर-कंट्रोल सिस्टम है।

अरबेल दुनिया का पहला ऐसा सिस्टम है जो छोटे हथियारों (जैसे राइफल या कार्बाइन) को पूरी तरह कंप्यूटरीकृत फायर-कंट्रोल तकनीक प्रदान करता है। इसमें एडवांस्ड सेंसर, एआई-बेस्ड एल्गोरिदम और रीयल-टाइम डेटा प्रोसेसिंग का इस्तेमाल होता है। इसमें लगे सेंसर (जैसे बैलिस्टिक कैलकुलेटर, वाइब्रेशन सेंसर और ऑप्टिकल साइट) निशाने की दूरी, हवा की गति, तापमान आदि फैक्टर्स को मापते हैं।

इन डेटा को प्रोसेस करके हथियार को ऑटोमैटिकली एडजस्ट करते हैं। जैसे ही जवान का निशाना सही जगह लगता है, सिस्टम सेकंड के एक अंश में सटीक गोली चला देता है। यह मैनुअल एडजस्टमेंट की जरूरत खत्म कर देता है, जिससे सटीकता 90% तक बढ़ जाती है। इससे गोलियों की बचत होती है और नाइट या एडवर्स कंडीशंस में कम ट्रेनिंग की जरूरत पड़ती है। आईडब्ल्यूआई अदाणी ग्रुप के साथ मिल कर कानपुर में प्लांट लगा रही हैं। 2026 से एलएमजी और कार्बाइन की सप्लाई शुरू होगी, वहीं, अरबेल को भारतीय फोर्सेस में शामिल करने की बातचीत चल रही है।

इसके अलावा कंपनी गृह मंत्रालय के तहत आने वाले केंद्रीय सुरक्षा बलों को भी कई तरह की राइफल, पिस्टल और मशीन गन सप्लाई करने के लिए बातचीत कर रही है। मांग बढ़ने पर सालाना सप्लाई 10,000 तक जा सकती है।

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आईडब्ल्यूआई ‘मेक इन इंडिया’ पहल का शुरुआती साझेदार है और भारत में पीएलआर सिस्टम्स के जरिए घरेलू निर्माण बढ़ा रहा है।

इससे पहले भारत ने 2020 में 7.62×51 मिलीमीटर कैलिबर की नेगेव मशीन गन खरीदने का कॉन्ट्रैक्ट किया था। अगस्त 2023 में सरकार ने इसी कैलिबर की और मशीन गन लेने की मंजूरी दी थी। नए हथियार आने से सेना की फायरपावर और जमीनी लड़ाकू क्षमता में बढ़ोतरी होगी।

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