HomeDefence News‘रेजिलिएंस’ और ‘डिटरेंस’ से सुरक्षित होगा भारत! राजनाथ सिंह ने बताया क्या...

‘रेजिलिएंस’ और ‘डिटरेंस’ से सुरक्षित होगा भारत! राजनाथ सिंह ने बताया क्या है Mission Sudarshan Chakra

राजनाथ सिंह ने कहा कि शांति बनाए रखने के लिए शक्ति जरूरी होती है और आत्मनिर्भरता उस शक्ति की सबसे मजबूत नींव है...

रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US

📍हैदराबाद | 12 Jun, 2026, 10:10 PM

Mission Sudarshan Chakra: ऑपरेशन सिंदूर में आकाश और ब्रह्मोस जैसे स्वदेशी सिस्टम्स के प्रदर्शन की सराहना करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत अब ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ के जरिए एक अत्याधुनिक बहु-स्तरीय मिसाइल रक्षा कवच तैयार कर रहा है। उन्होंने यह बात डीआरडीओ के नए एडवांस्ड वेपन सिस्टम कॉम्प्लेक्स के उद्घाटन के दौरान कही। रक्षा मंत्री ने इस मौके पर डीआरडीओ को आधुनिक युद्ध की चुनौतियों के साथ-साथ भविष्य की तकनीकों पर भी तेजी से काम करने का आह्वान किया।

हैदराबाद स्थित डीआरडीओ की डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी (डीआरडीएल) में एडवांस्ड वेपन सिस्टम कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान स्वदेशी मिसाइल प्रणालियों ने जिस तरह का प्रदर्शन किया, उसने दुनिया को भारत की बढ़ती रक्षा तकनीकी क्षमता का परिचय दिया है। उन्होंने कहा कि डीआरडीओ के बनाए सिस्टम्स ने यह साबित कर दिया है कि भारत अब केवल हथियार खरीदने वाला देश नहीं है, बल्कि अत्याधुनिक रक्षा तकनीक विकसित करने की क्षमता भी रखता है।

डीआरडीओ की डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी (डीआरडीएल) देश के प्रमुख डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम मिसाइल कॉम्प्लेक्स का हिस्सा है और इसे भारत की भविष्य की मिसाइल तथा हथियार तकनीकों के विकास में अहम माना जा रहा है।

Mission Sudarshan Chakra: ऑपरेशन सिंदूर में दिखी स्वदेशी हथियारों की ताकत

रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में ऑपरेशन सिंदूर का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि इस सैन्य अभियान के दौरान भारतीय डिफेंस सिस्टम्स ने शानदार प्रदर्शन किया। खासकर आकाश एयर डिफेंस सिस्टम और ब्रह्मोस जैसी मिसाइलों ने यह दिखाया कि भारतीय तकनीक किसी भी वैश्विक रक्षा प्रणाली से मुकाबला कर सकती है।

उन्होंने कहा कि जब देश की सीमाओं पर हवाई खतरे मंडरा रहे थे, तब भारतीय एयर डिफेंस नेटवर्क ने दुश्मन की योजनाओं को पूरी तरह विफल कर दिया। यह केवल मिसाइलों की सफलता नहीं थी, बल्कि वर्षों से चल रहे भारतीय रक्षा अनुसंधान और विकास कार्यक्रमों की सफलता भी थी।

यह भी पढ़ें:  वायुसेना में बड़ा बदलाव: एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित होंगे नए वाइस चीफ, क्या बन सकते हैं अगले एयर चीफ?

राजनाथ सिंह ने कहा कि शांति बनाए रखने के लिए शक्ति जरूरी होती है और आत्मनिर्भरता उस शक्ति की सबसे मजबूत नींव है। डीआरडीओ ने पिछले वर्षों में यह साबित किया है कि भारत अपनी सुरक्षा जरूरतों को स्वयं पूरा करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

क्या है Mission Sudarshan Chakra?

कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2025 के स्वतंत्रता दिवस भाषण में घोषित मिशन सुदर्शन चक्र का भी विस्तार से उल्लेख किया।

उन्होंने बताया कि मिशन सुदर्शन चक्र आधुनिक भारत के मल्टी-लेयर्ड मिसाइल डिफेंस सिस्टम के तौर पर डेवलप किया जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल सैन्य ठिकानों की सुरक्षा करना नहीं है, बल्कि महत्वपूर्ण नागरिक ढांचे, ऊर्जा परियोजनाओं, सरकारी प्रतिष्ठानों और रणनीतिक परिसंपत्तियों की भी रक्षा करना है।

रक्षा मंत्री के अनुसार यह सिस्टम तीन परतों वाली सुरक्षा व्यवस्था पर आधारित होगी। यदि किसी दुश्मन मिसाइल, ड्रोन या अन्य हवाई खतरे का पता चलता है, तो अलग-अलग स्तरों पर उसे रोकने की क्षमता इस नेटवर्क में मौजूद होगी। इसका मकसद संभावित हमलों को टारगेट तक पहुंचने से पहले ही नष्ट करना है।

उन्होंने कहा कि यह सुरक्षा ढांचा नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है ताकि किसी भी आपात स्थिति में आम लोगों को कम से कम परेशानी हो।

तेजी से बदल रहा है आधुनिक युद्ध

राजनाथ सिंह ने कहा कि आज का युद्ध पहले जैसा नहीं रह गया है। अब केवल टैंक, तोप और लड़ाकू विमान ही युद्ध का परिणाम तय नहीं करते। नई तकनीकों ने युद्ध के स्वरूप को पूरी तरह बदल दिया है।

उन्होंने बताया कि प्रिसिजन स्ट्राइक हथियार, इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस सिस्टम, हाइपरसोनिक हथियार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित प्लेटफॉर्म, स्वायत्त हथियार प्रणाली, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और एडवांस्ड सेंसर तकनीक आधुनिक युद्ध की नई पहचान बन चुके हैं।

यह भी पढ़ें:  भारतीय नौसेना को मिला टेक्नोलॉजी-ड्रिवन चीफ, जानिए कौन हैं वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन

उनके अनुसार दुनिया इस समय तेजी से बदलते सुरक्षा माहौल से गुजर रही है। कई पुराने सुरक्षा समीकरण बदल रहे हैं और नए गठबंधन तथा नई चुनौतियां सामने आ रही हैं। ऐसे समय में किसी भी देश के लिए केवल हथियार खरीदना पर्याप्त नहीं है। उसे अपनी तकनीकी क्षमता और उत्पादन क्षमता दोनों विकसित करनी होंगी।

राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए क्यों जरूरी हैं ‘रेजिलिएंस’ और ‘डिटरेंस’?

रक्षा मंत्री ने अपने भाषण में दो शब्दों पर विशेष जोर दिया- रेजिलिएंस और डिटरेंस। उन्होंने कहा कि रेजिलिएंस का अर्थ है किसी भी झटके को सहकर दोबारा मजबूती के साथ खड़ा होने की क्षमता। वहीं डिटरेंस का मतलब है ऐसी ताकत विकसित करना जिससे दुश्मन हमला करने से पहले कई बार सोचने पर मजबूर हो जाए।

राजनाथ सिंह ने कहा कि यदि किसी देश के पास प्रभावी जवाब देने की क्षमता हो, तो कई बार युद्ध की स्थिति पैदा ही नहीं होती। इसलिए आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था में केवल रक्षा नहीं, बल्कि प्रतिरोधक क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

उनके अनुसार डीआरडीओ पिछले कई वर्षों से देश की इसी क्षमता को मजबूत करने में लगा हुआ है और विभिन्न स्वदेशी कार्यक्रमों के जरिए भारत की सुरक्षा तैयारियों को नई मजबूती मिल रही है।

भविष्य की तकनीकों पर भी काम करे डीआरडीओ

रक्षा मंत्री ने कहा कि डीआरडीओ की जिम्मेदारी केवल मौजूदा चुनौतियों का समाधान करना नहीं है, बल्कि भविष्य की जरूरतों का अनुमान लगाकर नई तकनीकों का विकास करना भी है।

उन्होंने बताया कि हाल के वर्षों में डीआरडीओ ने मिसाइल तकनीक के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। अलग-अलग श्रेणी की एडवांस मिसाइल सिस्टम्स का सफल परीक्षण किया गया है और सामरिक तथा टैक्टिकल हथियार कार्यक्रमों में लगातार प्रगति हुई है।

उनके अनुसार ये उपलब्धियां केवल तकनीकी सफलता नहीं हैं, बल्कि भारत के बढ़ते आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और रणनीतिक क्षमता का भी प्रतीक हैं।

यह भी पढ़ें:  India US defence framework pact: भारत-अमेरिका के बीच नया 10 वर्षीय रक्षा समझौता, दोनों देशों के रिश्तों को मिलेगी मजबूती

केवल तकनीक नहीं, उत्पादन क्षमता भी जरूरी

राजनाथ सिंह ने इस बात पर भी जोर दिया कि युद्ध केवल तकनीकी श्रेष्ठता से नहीं जीते जाते। बड़े पैमाने पर उत्पादन क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।

उन्होंने कहा कि यदि किसी देश के पास उत्कृष्ट तकनीक तो हो, लेकिन जरूरत पड़ने पर वह पर्याप्त संख्या में हथियार और प्रणालियां तैयार न कर सके, तो उसकी क्षमता सीमित रह जाती है।

इसीलिए उन्होंने डीआरडीओ, तीनों सेनाओं और रक्षा उद्योग को एकीकृत प्रणाली के रूप में काम करने की सलाह दी। उनका कहना था कि रिसर्च लैबोरेटरी से लेकर प्रोडक्शन युनिट और सेना तक पूरी प्रक्रिया में बेहतर तालमेल होना चाहिए।

रक्षा मंत्री ने डीआरडीओ से आग्रह किया कि वह विकास और उत्पादन को अलग-अलग प्रक्रिया मानने के बजाय एक ही चक्र का हिस्सा समझे। उन्होंने कहा कि नई तकनीकों को विकसित करने के बाद उन्हें सेना तक पहुंचाने में लगने वाला समय कम किया जाना चाहिए। निर्माण प्रक्रिया को सरल बनाना, स्वदेशी सामग्री का उपयोग बढ़ाना और ऐसी प्रणालियां विकसित करना जरूरी है जिन्हें आवश्यकता पड़ने पर तेजी से बड़े पैमाने पर बनाया जा सके।

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में वही देश आगे रहेंगे जो अनुसंधान से उत्पादन और उत्पादन से सैन्य तैनाती तक का सफर सबसे तेज गति से पूरा कर सकेंगे।

Author

  • साहिल पठान

    साहिल पठान एक अनुभवी राष्ट्रीय मामलों के पत्रकार हैं, जो रक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा, सैन्य रणनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर लिखते हैं। साहिल ने डीडी न्यूज, बीबीसी, न्यूज 24, भारत एक्सप्रेस और टी.ऐ.ऍन्‌. नेटवर्क जैसे कई बड़े मीडिया संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण खबरें और विशेष रिपोर्टें की हैं। वह अक्सर सीमावर्ती इलाकों और सैन्य क्षेत्रों से रिपोर्टिंग करते हैं, जहां वे भारत के रणनीतिक हितों से जुड़े मुद्दों को स्पष्टता, जिम्मेदारी और तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं।

रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US
साहिल पठान
साहिल पठान

साहिल पठान एक अनुभवी राष्ट्रीय मामलों के पत्रकार हैं, जो रक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा, सैन्य रणनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर लिखते हैं। साहिल ने डीडी न्यूज, बीबीसी, न्यूज 24, भारत एक्सप्रेस और टी.ऐ.ऍन्‌. नेटवर्क जैसे कई बड़े मीडिया संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण खबरें और विशेष रिपोर्टें की हैं। वह अक्सर सीमावर्ती इलाकों और सैन्य क्षेत्रों से रिपोर्टिंग करते हैं, जहां वे भारत के रणनीतिक हितों से जुड़े मुद्दों को स्पष्टता, जिम्मेदारी और तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं।

Most Popular