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What is Sudarshan Chakra Mission?: AI मिसाइलों, रडार और लेजर सिस्टम से लैस होगा स्वदेशी एयर डिफेंस कवच सुदर्शन चक्र, जानें इजरायल के आयरन डोम से कैसे होगा अलग?

सुदर्शन चक्र मिशन की रूपरेखा जून 2025 में एक उच्चस्तरीय सुरक्षा बैठक में तैयार की गई थी। इस बैठक में भारत के शीर्ष नेतृत्व ने एक स्वदेशी, बहुस्तरीय एयर डिफेंस शील्ड बनाने का फैसला लिया...

Sudarshan Chakra Mission Explained: India’s AI-Powered Missiles, Radars & Laser Defence Shield – How It Differs from Israel’s Iron Dome
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📍नई दिल्ली | 15 Aug, 2025, 3:04 PM

What is Sudarshan Chakra Mission?: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 79वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किला के प्राचीर से देश की सुरक्षा के लिए ‘सुदर्शन चक्र मिशन’ की शुरुआत की घोषणा की। उन्होंने बताया कि सुदर्शन चक्र मिशन को 2035 तक पूरी तरह लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। यह मिशन एक दशक से अधिक समय से तैयार हो रही उस योजना का हिस्सा है, जिसमें एक स्वदेशी और व्यापक एयर डिफेंस सिस्टम तैयार करना है। इस सिस्टम को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा कवच’ नाम दिया गया है, जो शहरों, मिलिट्री बेस और महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर को ड्रोन, मिसाइल और अन्य हवाई हमलों से बचाएगा।

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What is Sudarshan Chakra Mission?: श्रीकृष्ण के सुदर्शन चक्र से प्रेरित

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि इस मिशन की प्रेरणा भगवान श्रीकृष्ण के सुदर्शन चक्र से ली गई है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगले 10 सालों में, चाहे वह रणनीतिक महत्व का इलाका हो, नागरिक क्षेत्र हो या आस्था के केंद्र, देश में एक ऐसा राष्ट्रीय सुरक्षा कवच खड़ा किया जाएगा, जो किसी भी हमले का सामना कर सके। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा को देश की समृद्धि का आधार बनाना होगा और इसके लिए आधुनिक तकनीक का अधिकतम इस्तेमाल करना जरूरी है।

पीएम ने ये एलान ऐसे समय में किया है जब देश हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर से गुजरा है, जिसमें पाकिस्तान ने भारत के सैन्य ठिकानों, नागरिक क्षेत्रों और मंदिरों को निशाना बनाया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे एयर डिफेंस सिस्टम ने इन हमलों को नाकाम किया और यह साबित किया कि भारत किसी भी तरह के युद्ध का सामना करने के लिए तैयार है।

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What is Sudarshan Chakra Mission?: कब तैयार हुई रूपरेखा

सुदर्शन चक्र मिशन की रूपरेखा जून 2025 में एक उच्चस्तरीय सुरक्षा बैठक में तैयार की गई थी। इस बैठक में भारत के शीर्ष नेतृत्व ने एक स्वदेशी, बहुस्तरीय एयर डिफेंस शील्ड बनाने का फैसला लिया। इसकी जरूरत ऑपरेशन सिंदूर के दौरान महसूस की गई। ऑपरेशन सिंदूर को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया था। इस हमले में 26 लोग मारे गए थे, जिनमें 25 भारतीय और एक नेपाली नागरिक शामिल थे। हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ ने ली थी।

ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। इस दौरान पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए भारतीय सैन्य ठिकानों, नागरिक क्षेत्रों और धार्मिक स्थलों पर ड्रोनों और मिसाइलों से हमले किए। भारत के एयर डिफेंस सिस्टम जैसे आकाश और S-400, ने इन हमलों को नाकाम कर दिया। लेकिन इस ऑपरेशन के बाद महसूस हुआ कि भारत को एक मजबूत और स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम की जरूरत है, जिसके बाद सुदर्शन चक्र मिशन की नींव रखी गई।

सेना की ताकत बढ़ाना नहीं है उद्देश्य

सुदर्शन चक्र मिशन का उद्देश्य केवल सेना की ताकत बढ़ाना नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक सुरक्षा दृष्टिकोण है जिसमें सीमा क्षेत्रों में निगरानी और जवाबी कार्रवाई की क्षमता को मजबूत करना, साइबर हमलों से बचाव के लिए एडवांस टेक्नोलॉजी और प्रशिक्षित मानव संसाधन विकसित करना, स्वदेशी रक्षा तकनीकों का निर्माण और अंतरराष्ट्रीय मानकों की प्रणालियों का समावेश करना शामिल है। साथ ही, सैनिकों के लिए आधुनिक प्रशिक्षण और सुविधाओं की व्यवस्था भी इस योजना का हिस्सा है।

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एयर डिफेंस नेटवर्क से होगा कनेक्ट

रक्षा मंत्रालय से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह प्रणाली देश के मौजूदा एयर डिफेंस नेटवर्क में इंटीग्रेट होगी। इसमें राष्ट्रीय स्तर पर रडार का नेटवर्क, कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर और इंटरसेप्टर मिसाइलें शामिल होंगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित रियल टाइम निगरानी और क्विक रेस्पॉन्स सिस्टम इसे और अधिक प्रभावी बनाएगा, जो आने वाली मिसाइलों, ड्रोन, तोप के गोले, और दुश्मन के स्वार्म अटैक को तुरंत पहचानकर नष्ट कर सकेगी। यह सिस्टम शहरों, सैन्य ठिकानों, बिजली संयंत्रों, रेलवे, बंदरगाहों और अस्पतालों को हवाई हमलों से बचाएगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह सिस्टम रडार, कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर और इंटरसेप्टर मिसाइलों का राष्ट्रव्यापी नेटवर्क होगी।

इजरायल के आयरन डोम से कैसे होगा अलग

यह मिशन आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत तैयार किया जा रहा है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन इसका नेतृत्व करेगा, और निजी क्षेत्र की कंपनियां भी इसमें शामिल होंगी। यह सिस्टम मौजूदा आकाश, S-400 और QR-SAM प्रणालियों के साथ इंटीग्रेट होगा। भविष्य में लेजर-आधारित इंटरसेप्टर सिस्टम भी जोड़े जाएंगे। यह सिस्टम इजरायल के आयरन डोम से अलग होगा, जो केवल छोटी दूरी के रॉकेट हमलों को रोकता है। सुदर्शन चक्र मिशन लंबी दूरी की बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों जैसे बड़े खतरों से भी निपटेगा।

इसका डिजाइन इस तरह किया जा रहा है कि यह पाकिस्तान और चीन से आने वाले खतरों का भी सामना कर सके। भारत की विविधता वाली भौगोलिक परिस्थितियां, जिसमें हिमालय, रेगिस्तान और तटीय इलाके शामिल हैं, वहां भी यह सिस्टम बखूबी काम करेगा।

सुदर्शन चक्र मिशन अभी प्रारंभिक चरण में है। इसके स्ट्रक्चर औऱ टेक्नोलॉजी को अंतिम रूप देना बाकी है। सरकार ने 2035 तक सुदर्शन चक्र की पूर्ण तैनाती का लक्ष्य रखा है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा कवच केवल युद्ध और रक्षा का विषय नहीं है, बल्कि यह आर्थिक स्थिरता, सामाजिक एकता और नागरिकों की सुरक्षा को भी मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि पिछले 11 सालों में रक्षा और नागरिक सुरक्षा के लिए जो कदम उठाए गए हैं, वे सरकार की प्राथमिकता को स्पष्ट करते हैं और सुदर्शन चक्र मिशन उसी दिशा में एक निर्णायक कदम है।

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  • herry passport

    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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