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कारगिल विजय दिवस पर रक्षा मंत्री की पाकिस्तान को दो टूक, अब पीओके पर ही होगी बातचीत

राजनाथ सिंह ने कैप्टन विक्रम बत्रा के प्रसिद्ध वाक्य "ये दिल मांगे मोर" का उल्लेख करते हुए कहा कि यही भावना भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता के अभियान को आगे बढ़ा रही है...

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📍द्रास, लद्दाख | 26 Jul, 2026, 10:20 PM

Kargil Vijay Diwas 2026: 27वें कारगिल विजय दिवस के अवसर पर 26 जुलाई को द्रास स्थित कारगिल युद्ध स्मारक पर आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को लेकर भारत की नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा पर सरकार का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने साबित कर दिया है कि भारत पाकिस्तान की किसी भी दुस्साहसपूर्ण हरकत का उसकी कल्पना से कहीं अधिक कड़े तरीके से जवाब देने की क्षमता रखता है। उन्होंने दो टूक कहा कि पाकिस्तान के साथ यदि भविष्य में कोई बातचीत होगी तो पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) पर होगी, क्योंकि वह भारत का अभिन्न हिस्सा है और उस पर पाकिस्तान ने अवैध कब्जा कर रखा है।

रक्षा मंत्री ने कारगिल युद्ध के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि 1999 में भारतीय सैनिकों ने जिस साहस, अनुशासन और देशभक्ति का परिचय दिया था, वही भावना आज भी भारतीय सशस्त्र सेनाओं की सबसे बड़ी ताकत है।

Kargil Vijay Diwas 2026: ऑपरेशन सिंदूर का किया उल्लेख

रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की संप्रभुता और सुरक्षा के खिलाफ होने वाली हर नापाक हरकत का जवाब उसी दृढ़ता से दिया जाएगा, जैसा भारतीय सेनाओं ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान आतंकियों और उनके संरक्षकों के खिलाफ दिया था।

उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत केवल आतंकियों को ही नहीं, बल्कि उन्हें संरक्षण देने वाले सिस्टम को भी अलग नजरिए से नहीं देखता। उनके अनुसार भारत अब आतंकवाद और उसे समर्थन देने वाली व्यवस्था के बीच कोई अंतर नहीं मानता। (Kargil Vijay Diwas 2026)

पाकिस्तान पर साधा निशाना

राजनाथ सिंह ने कहा कि पिछले 27 सालों में भारत और पाकिस्तान की दिशा पूरी तरह अलग हो चुकी है। उन्होंने कहा कि भारत इनोवेशन, तकनीक और विकास के नए रास्ते तलाश रहा है, जबकि पाकिस्तान आज भी घुसपैठ और आतंकवाद के सहारे अपनी नीतियां चला रहा है।


उन्होंने कहा कि भारत सेमीकंडक्टर बना रहा है, जबकि पाकिस्तान आत्मघाती आतंकियों को तैयार करने में लगा है। भारत दुनिया को सॉफ्टवेयर उपलब्ध करा रहा है, जबकि पाकिस्तान पर स्लीपर सेल तैयार करने के आरोप लगते रहे हैं। भारत अंतरिक्ष मिशनों में सफलता हासिल कर रहा है, जबकि पाकिस्तान प्रॉक्सी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है।

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रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के माध्यम से दुनिया को जोड़ रहा है, जबकि पाकिस्तान पर हवाला नेटवर्क के जरिए आतंकवाद को समर्थन देने के आरोप लगते रहे हैं।

सैनिकों के कल्याण और राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता

रक्षा मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने भारतीय सेनाओं को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में आवश्यक कार्रवाई के लिए पूरा राजनीतिक समर्थन दिया है। उन्होंने कहा कि जब देश की सीमाओं पर भारतीय सैनिक पूरी सतर्कता और संकल्प के साथ तैनात हैं, तब कोई भी दुश्मन भारत की ओर बुरी नजर डालने का साहस नहीं कर सकता।

उन्होंने कहा कि सरकार सैनिकों के कल्याण और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। सीमाओं पर आधारभूत ढांचे को लगातार मजबूत किया जा रहा है और बदलते युद्ध स्वरूप के अनुरूप सैन्य क्षमताओं का आधुनिकीकरण भी जारी है।

कारगिल के वीरों को किया नमन

राजनाथ सिंह ने 1999 के कारगिल युद्ध में सर्वोच्च बलिदान देने वाले सभी सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने परमवीर चक्र विजेता कैप्टन विक्रम बत्रा और कैप्टन मनोज कुमार पांडेय सहित उन सभी वीर सैनिकों को याद किया, जिनकी बहादुरी आज भी देश के युवाओं को प्रेरित करती है।

उन्होंने कहा कि कारगिल विजय दिवस केवल एक सैन्य जीत का दिन नहीं है, बल्कि यह युवाओं को यह समझाने का अवसर भी है कि व्यक्तिगत सफलता और राष्ट्रीय कर्तव्य में क्या अंतर होता है। त्याग और सेवा की भावना ही किसी भी राष्ट्र की सबसे मजबूत नींव होती है। (Kargil Vijay Diwas 2026)

कारगिल युद्ध स्मारक को बताया भारत की एकता का प्रतीक

रक्षा मंत्री ने कहा कि द्रास स्थित कारगिल युद्ध स्मारक केवल एक स्मारक नहीं है, बल्कि यह पूरे भारत का प्रतिनिधित्व करता है। यहां अंकित शहीदों के नाम देश के हर क्षेत्र, हर भाषा और हर समुदाय से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि यही विविधता भारत की सबसे बड़ी ताकत है और यही एकता उन लोगों के लिए जवाब है जो देश को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं।

आधुनिक युद्ध ने बदल दी सुरक्षा की चुनौतियां

अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने पश्चिम एशिया और रूस-यूक्रेन संघर्ष का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन संघर्षों ने यह दिखाया है कि आधुनिक युद्ध केवल सैनिकों की क्षमता की परीक्षा नहीं लेते, बल्कि किसी देश के धैर्य, संसाधनों और राष्ट्रीय संकल्प की भी परीक्षा लेते हैं।

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उन्होंने कहा कि भारत के पास मजबूत और सक्षम सशस्त्र सेनाएं हैं, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सैनिकों की जिम्मेदारी नहीं है। प्रत्येक नागरिक में राष्ट्र सर्वोपरि की भावना, अनुशासन और कर्तव्यबोध होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर भारतीय को सैनिक बनने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन यदि देश को कभी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष सहयोग की जरूरत पड़े तो हर नागरिक मानसिक, नैतिक और शारीरिक रूप से तैयार रहना चाहिए।

विकसित भारत 2047 की सोच

रक्षा मंत्री ने कहा कि विकसित भारत 2047 केवल आर्थिक विकास का लक्ष्य नहीं है। इसमें रणनीतिक मजबूती, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक समरसता भी शामिल है। उन्होंने कहा कि कारगिल के वीरों ने जिस समर्पण और कर्तव्य भावना का परिचय दिया, वही सोच राष्ट्र निर्माण के हर क्षेत्र में आवश्यक है। (Kargil Vijay Diwas 2026)

आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन पर दिया जोर

राजनाथ सिंह ने कैप्टन विक्रम बत्रा के प्रसिद्ध वाक्य “ये दिल मांगे मोर” का उल्लेख करते हुए कहा कि यही भावना भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता के अभियान को आगे बढ़ा रही है।

उन्होंने बताया कि जब वर्तमान सरकार ने कार्यभार संभाला था तब भारत अपनी रक्षा जरूरतों का लगभग 65 से 70 प्रतिशत सामान विदेशों से आयात करता था। आज लगभग 65 फीसदी रक्षा उपकरणों का निर्माण भारत में ही हो रहा है।

उन्होंने कहा कि भारतीय सेनाओं के पास अब स्वदेशी आकाश-तीर एयर डिफेंस कंट्रोल सिस्टम, नई पीढ़ी की आकाश मिसाइल, स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत, तेजस हल्का लड़ाकू विमान, प्रचंड लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर, ध्रुव एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर, अर्जुन मुख्य युद्धक टैंक, पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर, अस्त्र एयर-टू-एयर मिसाइल, आधुनिक ड्रोन और काउंटर-ड्रोन प्रणाली जैसे कई स्वदेशी प्लेटफॉर्म उपलब्ध हैं।

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उन्होंने कहा कि देश में और अधिक आधुनिक हथियार, अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमान, पनडुब्बियां और मिसाइलें विकसित करने का कार्य जारी है। (Kargil Vijay Diwas 2026)

वर्चुअल वॉकथ्रू पोर्टल का शुभारंभ

रक्षा मंत्री ने कार्यक्रम के दौरान वर्चुअल वॉकथ्रू पोर्टल का भी उद्घाटन किया। इस पोर्टल का उद्देश्य देशभर के लोगों को डिजिटल माध्यम से कारगिल युद्ध के इतिहास और उससे जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों की जानकारी उपलब्ध कराना है।

उन्होंने गौरव गाथा प्रस्तुति भी देखी, जिसमें दो नॉन-कमीशंड अधिकारियों ने ऑपरेशन विजय के दौरान भारतीय सैनिकों की बहादुरी, धैर्य और संघर्ष की कहानी सुनाई। इसके बाद उन्होंने हट ऑफ रिमेंबरेंस और वीर भूमि पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी।

शौर्य विजय यात्रा का समापन

कार्यक्रम के अंत में रक्षा मंत्री ने सैनिकों, शहीद परिवारों और अन्य अतिथियों के साथ चाय पर बातचीत की। इसके बाद उन्होंने शौर्य विजय यात्रा मोटरसाइकिल रैली का समापन किया। इस रैली को उन्होंने 14 जुलाई को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय समर स्मारक से रवाना किया था। (Kargil Vijay Diwas 2026)

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  • herry passport

    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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