📍नई दिल्ली/जम्मू | 25 Apr, 2026, 3:08 PM
Mobile Drone Lab India: भारतीय सेना को अब ड्रोन बनाने और उन्हें ठीक करने के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। युवा स्टार्टअप कंपनी अपोलियन डायनामिक्स ने भारत की पहली मोबाइल ड्रोन लैब तैयार की है, जिसे जम्मू के फॉरवर्ड एरिया में सेना के साथ तैनात कर दिया गया है। यह लैब एक चलती-फिरती यूनिट है, जो जरूरत के हिसाब से एक जगह से दूसरी जगह पहुंच सकती है और सीधे फॉरवर्ड एरिया में काम कर सकती है। अभी तक यह सुविधा रूस और यूक्रेन जैसे देशों में ही थी, लेकिन अब भारत में भी यह उपलब्ध हो गई है।
मोबाइल ड्रोन लैब दरअसल एक ट्रक पर बनाई गई पूरी वर्कशॉप है। इसमें ड्रोन बनाने, उन्हें जोड़ने, टेस्ट करने और मरम्मत करने की सभी सुविधाएं मौजूद हैं। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि जहां सैनिक तैनात हैं, उसी इलाके के पास ड्रोन तैयार किए जा सकें। इससे पहले सेना को ड्रोन के लिए सप्लाई का इंतजार करना पड़ता था, लेकिन अब जरूरत के हिसाब से मौके पर ही ड्रोन तैयार किए जा सकते हैं। (Mobile Drone Lab India)
यह लैब हर महीने 100 से ज्यादा एफपीवी यानी फर्स्ट पर्सन व्यू ड्रोन तैयार कर सकती है। एफपीवी ड्रोन ऐसे ड्रोन होते हैं जिन्हें ऑपरेटर कैमरे के जरिए सीधे कंट्रोल करता है और रियल टाइम में देख सकता है कि ड्रोन कहां जा रहा है। इससे सेना के पास ड्रोन की कमी नहीं होगी और ऑपरेशन के दौरान तुरंत नए ड्रोन उपलब्ध कराए जा सकेंगे।
Apollyon Dynamics presents India’s first Mobile Drone Lab, now deployed with the Indian Army in Jammu. pic.twitter.com/tcxIKJdIUu
— Apollyon Dynamics (@ApollyonDyn) April 20, 2026
इस मोबाइल लैब में 3डी प्रिंटर भी लगा है। जिसकी मदद से ड्रोन के छोटे-बड़े पार्ट्स वहीं पर बनाए जा सकते हैं। अगर किसी ड्रोन का कोई हिस्सा टूट जाए या उसे बदलने की जरूरत हो, तो उसे तुरंत प्रिंट करके लगाया जा सकता है। इससे समय की बचत होती है और ड्रोन जल्दी दोबारा इस्तेमाल के लिए तैयार हो जाते हैं। (Mobile Drone Lab India)
ड्रोन बनाने के अलावा इस लैब में उन्हें ठीक करने की सुविधा भी है। ऑपरेशन के दौरान अगर कोई ड्रोन खराब हो जाता है, तो उसे पीछे भेजने की जरूरत नहीं पड़ती। उसी जगह पर उसकी मरम्मत की जा सकती है। जो काम पहले कई दिन लेता था, अब कुछ घंटों में पूरा हो जाता है। इससे सेना की कार्यक्षमता पर सीधा असर पड़ता है और ऑपरेशन बिना रुके चलते रहते हैं।
अपोलियन डायनामिक्स ने सेना के जवानों को ड्रोन असेंबल करने, उन्हें उड़ाने और जरूरत पड़ने पर ठीक करने की भी ट्रेनिंग दी है। इससे सैनिक खुद ही ड्रोन से जुड़े काम संभाल सकते हैं।
मोबाइल ड्रोन लैब के साथ-साथ जम्मू में एक स्थायी ड्रोन लैब भी बनाई गई है। यहां बड़े स्तर पर ड्रोन असेंबली, स्टोरेज और ट्रेनिंग का काम होता है। मोबाइल लैब जहां जरूरत के हिसाब से अलग-अलग जगह पहुंच सकती है, वहीं यह स्थायी लैब बैकअप और बड़े कामों के लिए इस्तेमाल होती है। दोनों मिलकर एक पूरा सिस्टम तैयार करते हैं, जिससे ड्रोन ऑपरेशन और भी आसान हो जाता है। (Mobile Drone Lab India)
इस पूरे प्रोजेक्ट की सबसे खास बात यह है कि इसे शुरू करने वाली कंपनी काफी नई है। अपोलियन डायनामिक्स की शुरुआत 2025 में हैदराबाद स्थित बिट्स पिलानी दो छात्रों सौर्य चौधरी और जयंत खत्री ने की थी। उन्होंने अपने हॉस्टल रूम से काम शुरू किया और कुछ ही समय में सेना के साथ काम करने लगे। आज उनकी कंपनी ड्रोन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रही है और सेना को अलग-अलग तरह के ड्रोन सिस्टम उपलब्ध करा रही है।
इस मोबाइल ड्रोन लैब को तैयार करने में ज्यादा समय नहीं लगा। कंपनी ने इसे करीब 15 से 20 दिनों में तैयार कर लिया और जनवरी 2026 में इसे जम्मू में तैनात कर दिया गया।
कंपनी को सरकार की NIDHI सीड सपोर्ट स्कीम के तहत भी मदद मिली है। इस योजना के जरिए नए स्टार्टअप्स को फंडिंग और जरूरी संसाधन दिए जाते हैं। (Mobile Drone Lab India)

