HomeOpinionट्रंप ने भारत को बता दिया 'नरक का गड्ढा', इनफॉरमेशन वॉरफेयर में...

ट्रंप ने भारत को बता दिया ‘नरक का गड्ढा’, इनफॉरमेशन वॉरफेयर में बाजी मार ले गया ईरान

हैदराबाद मिशन ने पोस्ट में लिखा, “भारत और चीन बहुत पुरानी और समृद्ध सभ्यताएं हैं।। असल हेल होल तो वो जगह है जहां इसका युद्ध अपराधी राष्ट्रपति ईरान की सभ्यता को मिटाने की धमकी दे रहा था।”...

रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US

📍नई दिल्ली | 25 Apr, 2026, 6:22 PM

Hellhole India Information Warfare: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप एक सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ विवाद अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक वीडियो क्लिप शेयर करते हुए भारत और चीन को लेकर “हेलहोल” यानी “नरक का गड्ढा” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। हालांकि विदेश मंत्रालय ने संयमित प्रतिक्रिया दी, लेकिन राजनीतिक स्तर पर चुप्पी साधे रखी। वहीं, ईरान का इस विवाद से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं था, लेकिन भारत का बचाव करते हुए अमेरिका पर जमकर पलटवार किया।

यह क्लिप असल में एक पुराने पॉडकास्ट इंटरव्यू का हिस्सा थी, जिसमें जन्म आधारित नागरिकता यानी बर्थराइट सिटिजनशिप पर चर्चा हो रही थी। क्लिप में कहा गया, “यहां एक बच्चा तुरंत नागरिक बन जाता है और फिर पूरा परिवार चीन या भारत या दुनिया के किसी दूसरे नरक के गड्ढे से आ जाता है।” उसी दौरान भारत और चीन को लेकर यह टिप्पणी की गई थी। ट्रंप ने इसे दोबारा से शेयर कर दिया, जिसके बाद यह मामला तेजी से फैल गया।

Hellhole India Information Warfare: विदेश मंत्रालय का संयमित जवाब

भारत के विदेश मंत्रालय ने इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए साफ कहा कि ऐसी टिप्पणियां तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और पूरी तरह अनुचित हैं। मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि इस तरह के बयान भारत-अमेरिका संबंधों की असलियत को नहीं दर्शाते।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच संबंध आपसी सम्मान और साझा हितों पर आधारित हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि चल रही व्यापार और रणनीतिक बातचीत पर इस तरह की टिप्पणियों का कोई असर नहीं पड़ेगा।

सरकार ने बयान देते समय संतुलन बनाए रखा और किसी भी तरह के टकराव से बचने की कोशिश दिखाई।

ईरान की एंट्री, सोशल मीडिया पर पलटवार

इसी बीच ईरान ने इस पूरे मामले को अपने हाथों में लेते हुए जमकर प्रतिक्रिया दी। भारत में मौजूद ईरानी मिशनों ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर इस बयान का विरोध किया।

हैदराबाद मिशन ने पोस्ट में लिखा, “ट्रंप के पोस्ट से उनकी सोच साफ दिखती है और यह नस्लवाद (racism) को दर्शाता है। भारत और चीन बहुत पुरानी और समृद्ध सभ्यताएं हैं। असल हेल होल तो वो जगह है जहां इसका युद्ध अपराधी राष्ट्रपति ईरान की सभ्यता को मिटाने की धमकी दे रहा था।” मुंबई कांसुलेट ने महाराष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत का वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “कभी भारत आकर देखो।” ईरान ने भारत को “सभ्यताओं का केंद्र” बताते हुए ट्रंप की टिप्पणी को अमेरिका पर उलट दिया।

यह भी पढ़ें:  जेलेंस्की का बड़ा खुलासा! सस्ते ड्रोन के आगे बेबस हैं महंगे एयर डिफेंस सिस्टम, अब फाइटर जेट्स भी सुरक्षित नहीं!

एक और पोस्ट में व्यंग्य करते हुए कहा गया कि “डिवाइड एंड रूल” की बात होती है, लेकिन ट्रंप सिर्फ लोगों को बांट रहे हैं, शासन नहीं कर पा रहे।

यह जवाब इतना तीखा और व्यंग्यपूर्ण था कि सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। भारतीय यूजर्स ने इसे “ईरान की मजबूत दोस्ती” बताया।

ईरान के इन पोस्ट्स के बाद सोशल मीडिया पर एक तरह का “मीम वॉर” शुरू हो गया। कई मीम्स में ट्रंप को अलग-अलग अंदाज में दिखाया गया। एक मीम में उन्हें वैज्ञानिक आइंस्टीन की तरह दिखाया गया, जबकि दूसरे में उन्हें बमबारी के बाद कमजोर हालत में दिखाया गया। इन मीम्स के जरिए ईरान ने ट्रंप के बयान का मजाक उड़ाया और अपनी बात लोगों तक पहुंचाई।

इनफॉरमेशन वॉरफेयर का बड़ा उदाहरण

हो सकता है कि मोबाइल स्कीन पर आप ईरान की तरफ से शेयर वडा पाव, बन मस्का, पाव भाजी या ईरानी चाय के वीडियोज को देख कर खुश हो रहे हों, और उन्हें रीट्वीट कर रहे हों, लेकिन यह ईरान की इनफॉरमेशन वॉरफेयर की रणनीति है।

आज के समय में किसी भी अंतरराष्ट्रीय घटना की शुरुआत अक्सर सोशल मीडिया से होती है। एक वीडियो या पोस्ट तेजी से लोगों तक पहुंचता है और उसी के आधार पर धारणा बनती है।

ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, इस तरह के पोस्ट भारत में ही तैयार किए जा रहे हैं। उनका कहना है कि अमेरिका और इजरायल की तरफ से जो प्रचार किया जाता है, उसका जवाब सिर्फ आधिकारिक बयान से नहीं दिया जा सकता। इसलिए लोगों तक पहुंचने के लिए क्रिएटिव और आसान तरीके अपनाए जा रहे हैं, ताकि ज्यादा लोग इसे समझ सकें और जुड़ सकें।

यह भी पढ़ें:  Trump Threat India: ट्रंप की धमकी के बाद रूस से रिश्ता तोड़ेगा भारत? जब पुतिन पर नहीं चला बस, तो इंडिया पर कर रहा 'आर्थिक हथियार' का इस्तेमाल

इस मामले में भी ऐसा ही हुआ। पहले एक वीडियो क्लिप सामने आई, फिर उस पर प्रतिक्रिया आई और उसके बाद अलग-अलग देशों ने अपनी-अपनी तरह से संदेश देना शुरू किया।

ईरान की प्रतिक्रिया में व्यंग्य, सांस्कृतिक संदर्भ और सोशल मीडिया की भाषा का इस्तेमाल किया गया, जिससे वह जल्दी वायरल हो गई।

अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान से जुड़े कुछ ऑनलाइन नेटवर्क सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) पर काफी सक्रिय रहे हैं। इनमें “BRICS4CLICKS” और “Verified4War” जैसे ग्रुप शामिल बताए जाते हैं। कहा जाता है कि इन नेटवर्क्स ने बहुत कम समय में करोड़ों-करोड़ लोगों तक अपना कंटेंट पहुंचाया।

इन पोस्ट्स में एआई से बनाए गए वीडियो, एडिट की गई तस्वीरें और ऐसे संदेश शामिल होते हैं, जो एक खास नजरिया दिखाते हैं। इनमें अक्सर अमेरिका और इजरायल की छवि खराब दिखाने की कोशिश की जाती है, जबकि ईरान को मजबूत और सफल दिखाया जाता है।

हालांकि ईरान की तरफ से यह भी कहा गया कि एआई का इस्तेमाल जानकारी समझाने के लिए होना चाहिए, न कि गलत प्रचार फैलाने के लिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप ने कुछ ऐसी तस्वीरों का जिक्र किया था, जिन्हें बाद में एआई से बनाई गई फर्जी तस्वीरें बताया गया।

परेस्प्शन की लड़ाई

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष ने यह दिखाया है कि युद्ध अब सिर्फ जमीन, आसमान या समुद्र में नहीं लड़ा जाता, बल्कि धारणा (परेस्प्शन) की लड़ाई भी उतनी ही अहम हो गई है।

सोशल मीडिया पर जो पक्ष सबसे पहले लोगों का ध्यान खींच लेता है, वही आगे की पूरी कहानी को प्रभावित करता है। टीवी डिबेट, अखबारों की हेडलाइन और कूटनीतिक चर्चा तक उसी के असर में आती है।

यह भी पढ़ें:  Trump-Zelenskyy Clash: ट्रंप-ज़ेलेंस्की विवाद के बाद अमेरिका और यूरोप के बीच दरार, यूक्रेन के समर्थन में उतरे पश्चिमी देश

ईरान ने इस बात को समझते हुए अपनी रणनीति बनाई। उसने सिर्फ सरकारी बयान नहीं दिए, बल्कि मीम्स, छोटे वीडियो, एआई से बने विजुअल्स और आसान भाषा का इस्तेमाल किया।

अलग-अलग दर्शकों के लिए अलग संदेश

ईरान ने अपने संदेश को अलग-अलग देशों और दर्शकों के हिसाब से तैयार किया। ग्लोबल साउथ के देशों के लिए उसने खुद को एक हमले का शिकार देश बताया। पश्चिमी देशों के लिए उसने इसे अमेरिकी दखल के रूप में पेश किया। सोशल मीडिया पर उसने व्यंग्य, मजाक और इंटरनेट कल्चर का इस्तेमाल किया, जिससे युवा वर्ग जल्दी जुड़ गया।

वहीं भारत के मामले में यह पहली बार नहीं है। इससे पहले भी ईरान कई बार ऐसा कर चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान का यह कदम सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। भारत ने इस पूरे मामले में सीधे किसी पक्ष का समर्थन नहीं किया, लेकिन ईरान ने इसे अपने तरीके से “दोस्ती” की तरह पेश करने की कोशिश की।

ईरान के बयानों में बार-बार भारत को एक पुरानी और महान सभ्यता बताया गया, ताकि लोगों के बीच भावनात्मक जुड़ाव बनाया जा सके।

विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत के सामने संतुलन बनाए रखना जरूरी है। भारत के एक तरफ अमेरिका के साथ मजबूत रिश्ते हैं, तो दूसरी तरफ ईरान और रूस के साथ भी ऊर्जा और सुरक्षा से जुड़े संबंध हैं।

Author

  • Herry Photo

    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US
हरेंद्र चौधरी
हरेंद्र चौधरी
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

Most Popular