📍नई दिल्ली/नागौर | 14 May, 2026, 3:12 PM
Operation Sindoor Rajnath Singh: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि भारत अब आतंकवाद के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” की नीति पर चल रहा है। राजस्थान के नागौर में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि भारत किसी को उकसाता नहीं है, लेकिन अगर कोई भारत को उकसाएगा तो उसे छोड़ा भी नहीं जाएगा।
राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना ने जिस तरह मिलकर कार्रवाई की, वह अभूतपूर्व थी। उन्होंने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर फिर से आतंकवादी गतिविधियां जारी रहीं तो भारत और भी कड़ा जवाब देगा।
Operation Sindoor Rajnath Singh: नागौर में दिया बड़ा बयान
रक्षा मंत्री राजस्थान के नागौर जिले में पूर्व उपराष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत और मेड़ता के संस्थापक राव दूदा मेड़तिया की प्रतिमा अनावरण समारोह में पहुंचे थे। इस कार्यक्रम में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी मौजूद रहे।
अपने संबोधन के दौरान राजनाथ सिंह ने पहलगाम आतंकी हमले और उसके बाद हुए ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति अब पूरी तरह जीरो टॉलरेंस की होगी।
रक्षा मंत्री ने कहा, “2016 में हमने सर्जिकल स्ट्राइक की, 2019 में बालाकोट स्ट्राइक की और 2025 में ऑपरेशन सिंदूर हुआ। हमारी तीनों सेनाओं ने जिस तरह यह ऑपरेशन अंजाम दिया, उसकी कोई तुलना नहीं है।”
उन्होंने कहा कि भारत किसी देश को उकसाना नहीं चाहता, लेकिन अगर कोई भारत के खिलाफ कार्रवाई करेगा तो उसे जवाब जरूर मिलेगा।
ऑपरेशन सिंदूर का किया जिक्र
राजनाथ सिंह ने अपने भाषण में ऑपरेशन सिंदूर को भारत की बड़ी सैन्य कार्रवाई बताया। उन्होंने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले में निर्दोष लोगों की हत्या के बाद देश ने मजबूत जवाब दिया।
उन्होंने कहा कि आतंकियों ने लोगों को धर्म पूछकर निशाना बनाया था, लेकिन भारत ने उसके बाद जवाबी कार्रवाई करके यह दिखा दिया कि देश अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर कदम उठाने को तैयार है।
रक्षा मंत्री ने कहा, “अब ऐसी घटनाओं में कोई सीमा हमें रोक नहीं सकती।”
बता दें कि मई 2025 में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पीओके में मौजूद आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए थे। इस ऑपरेशन में भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना ने एक साथ मिलकर कार्रवाई की थी।
तीनों सेनाओं के तालमेल की तारीफ
राजनाथ सिंह ने खास तौर पर भारतीय सेनाओं के बीच तालमेल की तारीफ की। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तीनों सेनाओं ने जिस तरह एक साथ काम किया, उसने दुनिया को भारत की सैन्य क्षमता दिखाई।
रक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि पिछले कुछ सालों में भारतीय सेना “जॉइंटनेस” और “मल्टी डोमेन वॉरफेयर” मॉडल पर तेजी से काम कर रही है। इसका मकसद जमीन, हवा और समुद्र में एक साथ ऑपरेशन करने की क्षमता बढ़ाना है।
ऑपरेशन सिंदूर को इसी नई सैन्य रणनीति का बड़ा उदाहरण माना गया था। इस अभियान में लंबी दूरी की मिसाइलों, ड्रोन, प्रिसिजन हथियारों और एडवांस सर्विलांस सिस्टम का इस्तेमाल किया गया।
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत अब आतंकवाद को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान अब दोबारा भारत की तरफ आंख उठाकर देखने की हिम्मत नहीं करेगा।
सर्जिकल स्ट्राइक से ऑपरेशन सिंदूर तक
अपने भाषण में राजनाथ सिंह ने पिछले एक दशक में भारत की बड़ी सैन्य कार्रवाइयों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक, 2019 की बालाकोट एयर स्ट्राइक और फिर ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को भारत की नई नीति दिखाई है।
उन्होंने कहा कि भारत अब केवल प्रतिक्रिया देने वाला देश नहीं रह गया है, बल्कि जरूरत पड़ने पर निर्णायक कार्रवाई करने की क्षमता रखता है।
भैरों सिंह शेखावत को किया याद
कार्यक्रम के दौरान राजनाथ सिंह ने पूर्व उपराष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत को भी याद किया। उन्होंने कहा कि भैरों सिंह शेखावत का राजनीतिक जीवन बेहद प्रेरणादायक रहा।
उन्होंने बताया कि शेखावत ने 1952 में राजस्थान विधानसभा सदस्य के रूप में अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की थी और बाद में तीन बार राजस्थान के मुख्यमंत्री बने। इसके बाद उन्होंने देश के 11वें उपराष्ट्रपति के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली।
कार्यक्रम में राव दूदा मेड़तिया को भी श्रद्धांजलि दी गई। राव दूदा मेड़तिया राठौड़ राजपूत योद्धा और मेड़तिया वंश के संस्थापक माने जाते हैं।
राजनाथ सिंह ने घटाया अपना काफिला
इस बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने सरकारी काफिले का आकार भी कम करने का फैसला किया है। जानकारी के मुताबिक उन्होंने अपने काफिले को पहले की तुलना में आधे से भी कम करने का निर्णय लिया है।
यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील के बाद आया है, जिसमें उन्होंने देशवासियों से ईंधन बचाने और आयातित फ्यूल पर निर्भरता कम करने की बात कही थी।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से ऊर्जा बचाने और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प अपनाने की अपील की थी। इसी के बाद रक्षा मंत्री ने भी अपने काफिले को छोटा करने का फैसला लिया।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि यह कदम ईंधन बचत और संसाधनों के बेहतर उपयोग के संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
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