📍मुंबई/नई दिल्ली | 14 May, 2026, 4:09 PM
Indian Navy MCMV: भारतीय नौसेना को जल्द ही समुद्र के भीतर छिपी बारूदी सुरंगों से निपटने के लिए नई पीढ़ी की अनमैन्ड टेक्नोलॉजी मिलने वाली है। भारत की दिग्गज इंजीनियरिंग कंपनी लार्सन एंड टुब्रो यानी एलएंडटी ने फ्रांस की कंपनी एक्साइल के साथ एक बड़ी रणनीतिक साझेदारी की है। इस समझौते के तहत भारतीय नौसेना के लिए एडवांस अनमैन्ड माइन काउंटर मेजर सिस्टम तैयार किया जाएगा।
यह सिस्टम भारतीय नौसेना के आने वाले माइन काउंटर मेजर वेसल्स यानी एमसीएमवी प्रोग्राम का हिस्सा होगा। नौसेना इस प्रोजेक्ट के तहत 12 नए विशेष युद्धपोत शामिल करने की तैयारी कर रही है। इन जहाजों का काम समुद्र में बिछाई गई दुश्मन की माइन्स का पता लगाना और उन्हें सुरक्षित तरीके से नष्ट करना होगा।
समुद्री माइन्स सबसे सस्ती लेकिन सबसे खतरनाक हथियारों में मानी जाती हैं। इन्हें बंदरगाहों, समुद्री रास्तों या तटीय इलाकों में चुपचाप बिछाया जा सकता है। अगर समय रहते इन्हें खोजा न जाए तो युद्धपोतों, व्यापारिक जहाजों और सप्लाई रूट्स को भारी नुकसान पहुंचा सकती हैं।
Indian Navy MCMV: एलएंडटी होगा प्राइम कॉन्ट्रैक्टर
एलएंडटी इस पूरे प्रोजेक्ट में “प्राइम कॉन्ट्रैक्टर” की भूमिका निभाएगा। यानी भारतीय नौसेना के लिए बनने वाले इस अनमैन्ड सिस्टम की जिम्मेदारी मुख्य रूप से एलएंडटी के पास होगी। वहीं फ्रांस की एक्साइल कंपनी टेक्नोलॉजी पार्टनर के रूप में काम करेगी।
दोनों कंपनियां मिलकर ऐसा सिस्टम तैयार करेंगी, जो बिना किसी इंसानी चालक के समुद्र में जाकर माइन्स का पता लगाएगा। इसके बाद वह माइन्स की पहचान करेगा और जरूरत पड़ने पर उन्हें नष्ट भी कर सकेगा।
एलएंडटी ने कहा है कि यह सिस्टम पूरी तरह “स्टैंड ऑफ मोड” में काम करेगा। यानी नौसैनिकों को सीधे खतरे वाले इलाके में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अनमैन्ड सिस्टम दूर से ही पूरा ऑपरेशन करेगा।
हालांकि, एलएंडटी पहले से युद्धपोत, सबमरीन सिस्टम्स, मिसाइल लॉन्चर और कई एडवांस रक्षा प्लेटफॉर्म्स पर काम कर चुकी है।
कंपनी के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अरुण रामचंदानी ने कहा कि यह साझेदारी एलएंडटी की डिफेंस इंजीनियरिंग क्षमता और एक्साइल की एडवांस माइन वारफेयर टेक्नोलॉजी को एक साथ लाएगी।
वहीं एक्साइल के मैरीटाइम सिस्टम्स बिजनेस प्रमुख जेरोम बेंडेल ने कहा कि यह साझेदारी केवल एक प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि भारत में स्वदेशी अनमैन्ड समुद्री सिस्टम्स के विकास की दिशा में भी अहम कदम है।
क्यों जरूरी है यह सिस्टम
भारतीय नौसेना लंबे समय से नए माइन काउंटर मेजर जहाजों की जरूरत महसूस कर रही थी। वर्तमान में पुराने पोंडिचेरी-क्लास माइन्सवीपर्स 25-30 साल पुराने हो चुके हैं और जल्द ही डीकमीशन होने वाले हैं। इनकी जगह 12 माइन काउंटर मेजर वेसल्स (MCMVs) खरीदने की योजना है, हालांकि जरूरत 24 की है। इनमें प्रत्येक जहाज लगभग 1000 टन वजन का होगा, जिसमें नॉन-मैग्नेटिक हल, हाई-डेफिनिशन सोनार, हल-माउंटेड और टोड एरे सोनार शामिल होंगे। इनमें माइन काउंटरमेजर के साथ-साथ एंटी-सबमरीन वारफेयर (ASW) की भी क्षमता होगी।
नौसेना ने 2023 में इसके लिए आरएफआई जारी की थी। इसके बाद जुलाई 2025 में रक्षा मंत्रालय की डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल ने इस योजना को मंजूरी दी। इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 44 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। नए माइन काउंटर मेजर जहाजों की डिलीवरी 2030 से 2037 के बीच शुरू होगी।
इन जहाजों का निर्माण गोवा शिपयार्ड लिमिटेड समेत भारतीय शिपयार्ड्स में किया जाएगा। ऑर्डर अलग-अलग शिपयार्ड्स के बीच बांटा जाएगा। इससे पहले 2011 और 2015 में भी इस तरह की कोशिश हुई थी, लेकिन विदेशी कंपनियों से तकनीक ट्रांसफर में दिक्कत आने की वजह से प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ पाया। अब सरकार का पूरा जोर भारत में ही स्वदेशी तकनीक से निर्माण करने पर है।
समुद्र में माइन्स का खतरा आज भी बेहद गंभीर माना जाता है। किसी भी युद्ध के दौरान दुश्मन समुद्री रास्तों को ब्लॉक करने के लिए माइन्स का इस्तेमाल कर सकता है। इससे बंदरगाहों पर जहाजों की आवाजाही रुक सकती है।
भारत के लिए यह खतरा इसलिए भी अहम है क्योंकि देश का बड़ा व्यापार समुद्री रास्तों से होता है। हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती मौजूदगी और पाकिस्तान की नौसैनिक गतिविधियों को देखते हुए भारत अपनी समुद्री सुरक्षा मजबूत करने में जुटा हुआ है।
सूत्रों का कहना है कि पुराने समय में माइन्स हटाने के लिए जहाजों और जवानों को सीधे खतरे वाले इलाके में जाना पड़ता था। लेकिन अब अनमैन्ड सिस्टम्स इस जोखिम को काफी कम कर देंगे।
कैसे काम करेगा यह अनमैन्ड सिस्टम
एलएंडटी और एक्साइल जो सिस्टम भारतीय नौसेना को देने जा रहे हैं, उसमें कई तरह के एडवांस समुद्री ड्रोन और सेंसर शामिल होंगे। इनमें अनमैन्ड सरफेस व्हीकल यानी यूएसवी, अंडरवॉटर ड्रोन, रिमोट ऑपरेटेड सिस्टम और हाई टेक सोनार सिस्टम शामिल हैं।
ये सिस्टम समुद्र के अंदर जाकर पहले संदिग्ध माइन्स का पता लगाएंगे। फिर उनकी तस्वीर और डेटा कमांड सेंटर तक भेजेंगे। इसके बाद जरूरत पड़ने पर छोटे रोबोटिक सिस्टम माइन्स के पास जाकर उन्हें निष्क्रिय या नष्ट कर देंगे।
एक्साइल की तकनीक पहले से कई देशों की नौसेनाओं में इस्तेमाल हो रही है। कंपनी का दावा है कि उसके सिस्टम्स वास्तविक सैन्य ऑपरेशनों में टेस्ट किए जा चुके हैं।
फ्रांस की एक्साइल कंपनी का दावा है कि उसके अनमैन्ड माइन वारफेयर सिस्टम्स दुनिया के सबसे एडवांस प्लेटफॉर्म्स में गिने जाते हैं। यह तकनीक यूरोप और मिडिल ईस्ट की कई नौसेनाओं में इस्तेमाल हो रही है।
समुद्री ड्रोन और एआई पर बढ़ रहा जोर
आधुनिक नौसैनिक युद्ध तेजी से बदल रहा है। अब केवल बड़े युद्धपोत ही सबसे बड़ी ताकत नहीं माने जाते। अनमैन्ड सिस्टम्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अंडरवॉटर ड्रोन जैसी तकनीकें तेजी से अहम होती जा रही हैं।
रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक भविष्य के समुद्री युद्धों में ऐसे ड्रोन सिस्टम्स की भूमिका और बढ़ेगी। ये सिस्टम दुश्मन की गतिविधियों की निगरानी, माइन्स की खोज और खतरनाक इलाकों में ऑपरेशन के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
भारतीय नौसेना अब “मैनड और अनमैन्ड टीमिंग” मॉडल पर भी जोर दे रही है। यानी युद्धपोतों के साथ छोटे समुद्री ड्रोन मिलकर काम करेंगे।
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