हरेंद्र चौधरी
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।
Operation Tiranga: इस नई सीक्रेट वॉर स्ट्रैटेजी ने रखी सबसे बड़े डिफेंस रिफॉर्म्स की नींव, जानें क्या है यह ऐतिहासिक टेबल टॉप एक्सरसाइज
यह एक्सरसाइज कई महीनों तक चली और अप्रैल 2026 में इसका मुख्य काम पूरा हो गया। इसमें सबसे ज्यादा फोकस इस बात पर रहा कि युद्ध के समय तीनों सेनाएं एक साथ कैसे काम करें और फैसले जल्दी कैसे लिए जाएं...
कानपुर बनेगा एविएशन हब, जीई एयरोस्पेस से मिलेगा यूपी डिफेंस कॉरिडोर को ग्रोथ का “इंजन”!
उत्तर प्रदेश में बना डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर देश के बड़े डिफेंस प्रोजेक्ट्स में से एक है। यह कॉरिडोर छह अलग-अलग शहरों में फैला हुआ है, जिसमें अलीगढ़, आगरा, चित्रकूट, झांसी, लखनऊ और कानपुर शामिल हैं...
रक्षा मंत्रालय की बड़ी मंजूरी, ‘वीराज’ एंटी-टैंक स्मार्ट माइन और एयर-ड्रॉप्ड ड्रोन स्वार्म सिस्टम को दी हरी झंडी!
नई ‘वीराज’ माइन को ज्यादा एडवांस बनाने की योजना है। इसमें सेंसर आधारित सिस्टम हो सकता है, जो टैंक या भारी वाहन की हलचल को पहचान सके। इसके अलावा इसमें सेल्फ-न्यूट्रलाइजेशन जैसी क्षमता भी हो सकती है...
IFC-IOR रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, होर्मुज में 9 दिन की ‘खामोशी’ का बताया सच, GPS जामिंग से रास्ता भटक रहे जहाज
रिपोर्ट बताती है कि अब समुद्री हमले सिर्फ एक जगह तक सीमित नहीं रहे हैं। शुरुआत में हमले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज तक सीमित थे, लेकिन अब यह खतरा बढ़कर उत्तरी अरब सागर, यूएई के पानी और प्रमुख बंदरगाहों तक फैल गया है...
होर्मुज से गाजा तक बारूदी सुरंगों ने कैसे पूरी दुनिया को खतरे में डाला, दशकों तक ‘साइलेंट किलर’ बने रहते हैं डबल एज्ड वेपंस
युद्ध कागजों पर खत्म हो सकता है, लेकिन जमीन पर रहने वाले लोगों के लिए यह लंबे समय तक खत्म नहीं होता। हर कदम पर जान का जोखिम होता है, क्योंकि यह पता नहीं होता कि जमीन के नीचे क्या छिपा है। यही वजह है कि माइंस को “साइलेंट किलर” भी कहा जाता है...
Project-17A का चौथा स्टेल्थ फ्रिगेट INS Taragiri नौसेना में शामिल, पढ़ें कैसे स्वदेशी शिपबिल्डिंग इकोसिस्टम हो रहा मैच्योर
आईएनएस तारागिरी (एफ41) एक आधुनिक नीलगिरी क्लास स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट है, जिसे प्रोजेक्ट-17 अल्फा के तहत तैयार किया गया है। प्रोजेक्ट-17 अल्फा के तहत कुल सात ऐसे फ्रिगेट बनाए जा रहे हैं...
Exclusive: ऑपरेशन सिंदूर से मिला बड़ा सबक! स्वार्म ड्रोन से निपटने के लिए सेना खरीदेगी नेक्स्ट जनरेशन एयर डिफेंस गन
RFI में ऑपरेशन सिंदूर का भी जिक्र किया गया है। इसमें बताया गया है कि पश्चिमी मोर्चे पर दुश्मन ने ड्रोन और स्वार्म ड्रोन का इस्तेमाल निगरानी और हमले दोनों के लिए किया था। इन हमलों में सिविल और डिफेंस ठिकानों को निशाना बनाया गया...
Explainer: रूस-फ्रांस-अमेरिका और इजरायल से क्यों दूरी बना रहा भारत? क्या है देश का नया मिलिट्री डिप्लोमेसी प्लान?
इस बदलाव के तहत भारत ने उन देशों में अपनी सैन्य कूटनीतिक मौजूदगी कम करनी शुरू कर दी है, जो लंबे समय से उसके प्रमुख सप्लायर रहे हैं। इनमें रूस, फ्रांस, अमेरिका और इजरायल जैसे देश शामिल हैं...
बिना गोली चलाए होगी T-90 टैंक गनर्स की ट्रेनिंग! भारतीय सेना खरीदेगी AI बेस्ड वर्चुअल वॉरफील्ड सिमुलेटर
इस सिस्टम में भारत के अलग-अलग सीमावर्ती इलाकों जैसा माहौल बनाया जाएगा। इसमें पश्चिमी सीमा, नियंत्रण रेखा और वास्तविक नियंत्रण रेखा जैसे क्षेत्रों के हालात शामिल होंगे...
चीन-पाकिस्तान के लिए बुरी खबर; IAF का ‘बाज’ बनेगा और घातक, मिग-29 में वायुसेना करने जा रही बड़ा मिसाइल अपग्रेड
मिग-29 भारतीय वायुसेना का एक अहम फाइटर एयरक्राफ्ट है, जिसे मिग-29UPG वर्जन में अपग्रेड किया जा चुका है। इसके बावजूद इसमें इस्तेमाल हो रही कुछ मिसाइलें अब पुरानी हो चुकी हैं...
सेना को सप्लाई किए जाने वाले ड्रोन में ‘चीनी घुसपैठ’ का खतरा, अब पास करना होगा 20 पॉइंट सिक्योरिटी टेस्ट
रक्षा मंत्रालय ने एक नया सिक्योरिटी फ्रेमवर्क तैयार किया है, जिसके तहत हर ड्रोन को खरीद से पहले सख्त जांच से गुजरना होगा। यह फ्रेमवर्क सेना, नौसेना और वायुसेना के साथ मिलकर तैयार किया गया है...
सैनिक स्कूलों को लेकर संसदीय समिति ने कही ये बड़ी बात, बजट और इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर जताई नाराजगी!
देश में इस समय कुल 33 सैनिक स्कूल हैं, जो 1961 से केंद्र और राज्य सरकारों के मिल कर चलाए जा रहे हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल और देहरादून स्थित राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज भी रक्षा मंत्रालय के तहत काम करते हैं...

