📍नई दिल्ली/कानपुर | 14 Apr, 2026, 12:56 PM
GE Aerospace Tejas Engine Depot: उत्तर प्रदेश अब डिफेंस और एविएशन सेक्टर में भी ऊंची छलांग लगाने की तैयारी कर रहा है। अमेरिकी कंपनी जीई एरोस्पोस और भारतीय वायुसेना के बीच तेजस के इंजन को लेकर हाल ही में अहम समझौता हुआ है। इस समझौते के तहत देश में ही एफ-404-आईएन20 इंजन के लिए एक इन-कंट्री डिपो फैसिलिटी बनाई जाएगी, जो तेजस एलसीए फाइटर जेट्स के इंजन की मरम्मत और मेंटेनेंस का काम करेगी। उम्मीद जताई जा रही है कि यह फैसिलिटी उत्तर प्रदेश में लगई जा सकती है।
इस फैसिलिटी को भारतीय वायुसेना तैयार करेगी, जबकि जीई एयरोस्पेस तकनीकी सहयोग देगा। इस कदम को यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए एक बड़े बूस्ट के तौर पर देखा जा रहा है।
GE Aerospace Tejas Engine Depot: क्या है नया डिपो प्रोजेक्ट
इस समझौते का मुख्य उद्देश्य यह है कि भारत में ही तेजस एमके1/एमके1ए के इंजन रिपेयर और ओवरहॉल की सुविधा तैयार हो सके। अभी तक जब भी तेजस फाइटर जेट के इंजन में बड़ी खराबी आती थी, तो उसे विदेश भेजना पड़ता था। इस पूरी प्रक्रिया में काफी समय लगता था और कई विमान लंबे समय तक ग्राउंडेड रहते थे।
अब इस नई डिपो फैसिलिटी के बनने के बाद यह काम देश के अंदर ही हो सकेगा। इससे रिपेयर का समय कम होगा और विमान ज्यादा समय तक ऑपरेशनल रह पाएंगे। इस फैसिलिटी का पूरा ऑपरेशन भारतीय वायुसेना के हाथ में होगा। जबकि जीई एयरोस्पेस ट्रेनिंग, तकनीकी सपोर्ट, स्पेयर पार्ट्स और जरूरी उपकरण उपलब्ध कराएगा।
समय पर मिलेंगे इंजन
जीई एरोस्पेस की डिफेंस और सिस्टम्स की सेल्स और बिजनेस डेवलपमेंट की वाइस प्रेसिडेंट रीटा फ्लैहर्टी ने कहा,भारतीय सशस्त्र बलों की मदद करना उनकी कंपनी की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि इसी सोच के तहत यह साझेदारी आगे बढ़ाई जा रही है, ताकि तेजस विमान के इंजनों की देखभाल और सपोर्ट की क्षमता भारत में ही मजबूत हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि नई डिपो फैसिलिटी के जरिए भारतीय वायुसेना को एफ-404 आईएन20 इंजन समय पर उपलब्ध रहेंगे और उन्हें आधुनिक तकनीक का सीधा फायदा मिलेगा। (GE Aerospace Tejas Engine Depot)
तेजस फ्लीट को कैसे मिलेगा फायदा
एफ-404-आईएन20 वही इंजन है, जो हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एलएएल) तेजस फाइटर जेट में लगाया जाता है। यह भारत का स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट है। इंजन की समय पर मरम्मत और मेंटेनेंस न होने की वजह से कई बार विमान उड़ान के लिए तैयार नहीं हो पाते थे। अब डिपो फैसिलिटी के जरिए यह समस्या काफी हद तक कम हो जाएगी। इसका सीधा असर यह होगा कि वायुसेना के पास ज्यादा विमान एक साथ उपलब्ध रहेंगे और ऑपरेशनल क्षमता बेहतर बनी रहेगी। (GE Aerospace Tejas Engine Depot)
यूपी डिफेंस कॉरिडोर को मिलेगी मजबूती
उत्तर प्रदेश में बना डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर देश के बड़े रक्षा प्रोजेक्ट्स में से एक है। यह कॉरिडोर छह अलग-अलग शहरों में फैला हुआ है, जिसमें अलीगढ़, आगरा, चित्रकूट, झांसी, लखनऊ और कानपुर शामिल हैं।
इन सभी में कानपुर को सबसे अहम नोड माना जा रहा है। यहां सबसे ज्यादा निवेश आया है और पहले से ही डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग का मजबूत बेस मौजूद है। सूत्रों का कहना है कि जीई एरोस्पेस अपनी नई फैसिलिटी के लिए कानपुर नोड को चुन सकता है।
इसकी वजह है कि कानपुर में पुराने समय से ऑर्डनेंस फैक्ट्रियां काम कर रही हैं, जहां हथियार और सैन्य उपकरण बनाए जाते रहे हैं। इसी वजह से यहां स्किल्ड वर्कफोर्स और इंडस्ट्रियल इन्फ्रास्ट्रक्चर पहले से तैयार है।
कानपुर की सबसे बड़ी ताकत यह है कि यहां पहले से ही डिफेंस से जुड़ी फैक्ट्रियां मौजूद हैं। शहर में कई ऑर्डनेंस फैक्ट्रियां काम कर रही हैं, जहां हथियार और सैन्य उपकरण बनाए जाते रहे हैं। यहं आयुध निर्माणी कानपुर, लघु शस्त्र निर्माणी, फील्ड गन निर्माणी जैसी कई ऑर्डनेंस फैक्ट्रियां पहले से ही मौजूद हैं। इसके साथ ही यहां के लोगों को मेटल वर्क, लेदर और टेक्सटाइल का अच्छा अनुभव है, जिससे डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग के लिए तैयार स्किल्ड वर्कफोर्स और इंडस्ट्रियल इन्फ्रास्ट्रक्चर मिलता है। (GE Aerospace Tejas Engine Depot)
तेजी से बढ़ रहा निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर
कानपुर यूपी डिफेंस कॉरिडोर का सबसे अहम हिस्सा माना जा रहा है। यहां सबसे ज्यादा निवेश आया है और यही वजह है कि इसे इस कॉरिडोर का “इंजन” कहा जाता है। अब तक यहां करीब 12,683 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है, जो बाकी सभी नोड्स से ज्यादा है।
यहां नए-नए डिफेंस प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू हो चुका है। नरवल इलाके में बड़े पैमाने पर जमीन विकसित की गई है, जहां कंपनियों को प्लॉट दिए जा रहे हैं। इसके अलावा यहां सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और स्किल डेवलपमेंट से जुड़े प्रोजेक्ट्स भी शुरू किए गए हैं। आईआईटी कानपुर जैसे संस्थान के जुड़ने से रिसर्च और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट को भी बढ़ावा मिल रहा है। (GE Aerospace Tejas Engine Depot)
इसके अलावा कानपुर में प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों ने भी तेजी से निवेश किया है। यहां बड़े प्राइवेट प्रोजेक्ट्स भी तेजी से आ रहे हैं। अदाणी डिफेंस एंड एरोस्पेस का करीब 1,500 करोड़ रुपये का प्लांट कानपुर में शुरू हो चुका है, जहां मिसाइल और गोला-बारूद बनाए जा रहे हैं। इसे दक्षिण एशिया के बड़े डिफेंस प्लांट्स में गिना जाता है।
यह यूनिट सालाना करीब 30 करोड़ राउंड छोटे हथियारों के लिए बना सकती है। इस तरह हथियार और गोला-बारूद दोनों का निर्माण देश में ही हो रहा है, जिससे पूरी सप्लाई चेन मजबूत हो रही है। हाल ही में अदाणी डिफेंस की तरफ से सेना को डिलीवर की गईं प्रहार लाइट मशीन गन की गोलियां भी यहीं बनाई जा रही हैं।
कानपुर में टेक्नोलॉजी और रिसर्च पर भी काम हो रहा है। आईआईटी कानपुर के साथ मिलकर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाया जा रहा है। शिवली इलाके में डिफेंस पार्क की योजना है, जहां बैलिस्टिक मैटेरियल और डिफेंस टेक्सटाइल से जुड़े प्रोजेक्ट्स लगाए जाएंगे।
इसमें बड़े डिफेंस प्लांट लगाए जा रहे हैं, जहां मिसाइल, गोला-बारूद और अन्य सैन्य उपकरण बनाए जा रहे हैं। इन प्रोजेक्ट्स की वजह से न सिर्फ उत्पादन बढ़ रहा है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के मौके भी बन रहे हैं। सरकार की तरफ से भी इन कंपनियों को पॉलिसी सपोर्ट, टैक्स में छूट और इंफ्रास्ट्रक्चर की सुविधा दी जा रही है, जिससे निवेश को बढ़ावा मिल रहा है।
सीधे शब्दों में कहें तो पुरानी फैक्ट्रियों और नई प्राइवेट कंपनियों के निवेश की वजह से कानपुर सबसे तेजी से आगे बढ़ रहा है और पूरे डिफेंस कॉरिडोर को गति दे रहा है। (GE Aerospace Tejas Engine Depot)
दसॉ भी बना रही है यूपी में एमआरओ फैसिलिटी
हालांकि यूपी में एमआरओ फैसिलिटी बनाने वाली जीई एविएशन पहली कंपनी नहीं है। राफेल फाइटर जेट बनाने वाली दसॉ एविएशन ने भारत में अपने विमानों की मेंटेनेंस के लिए उत्तर प्रदेश के नोएडा में, जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास एमआरओ फैसिलिटी बना रही है। जिसका नाम दसॉ एविएशन एमआरओ इंडिया (DAMROI) रखा गया है। इस फैसिलिटी का मुख्य उद्देश्य भारतीय वायुसेना के फ्रेंच मूल के फाइटर जेट्स, जैसे मिराज-2000 और राफेल, की मरम्मत, मेंटेनेंस और ओवरहॉल की सुविधा देश के अंदर ही उपलब्ध कराना है। अभी तक इन विमानों की बड़ी मरम्मत या अपग्रेड के लिए विदेश पर निर्भर रहना पड़ता था। लेकिन अब यह काम भारत में ही तेजी से किया जा सकेगा। इससे मरम्मत का समय कम होगा और वायुसेना के पास ज्यादा विमान एक साथ ऑपरेशन के लिए उपलब्ध रहेंगे। यह व्यवस्था तेज रिस्पॉन्स और बेहतर एफिशिएंसी सुनिश्चित करने के लिए तैयार की जा रही है। इसके जरिए भारतीय जरूरतों के अनुसार कस्टमाइज्ड सर्विस भी दी जाएगी। (GE Aerospace Tejas Engine Depot)
सेना के कई प्लेटफॉर्म्स में जीई के इंजन
कंपनी भारत में एविएशन सेक्टर को मजबूत बनाने पर भी काम कर रही है। डिजाइन, डेवलपमेंट, मैन्युफैक्चरिंग और मेंटेनेंस जैसे क्षेत्रों में लगातार सहयोग किया जा रहा है। कंपनी ने भारत में कई ट्रेनिंग प्रोग्राम भी चलाए हैं, जिनसे हजारों लोगों को तकनीकी कौशल सिखाया गया है।
तेजस के अलावा भी जीई एरोस्पेस के इंजन भारतीय नौसेना और वायुसेना के कई प्लेटफॉर्म्स में इस्तेमाल हो रहे हैं। इनमें पी-8आई मैरीटाइम पेट्रोल एयरक्राफ्ट, एमएच-60आर हेलीकॉप्टर और एएच-64 अपाचे हेलीकॉप्टर शामिल हैं। इसके अलावा एलएम2500 गैस टरबाइन इंजन भारतीय नौसेना के युद्धपोतों और आईएनएस जैसे एयरक्राफ्ट कैरियर में भी लगाए गए हैं।
इसके साथ ही, जीई और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ‘तेजस एमके2’ के लिए भारत में एफ414 इंजनों का संयुक्त उत्पादन भी करेंगे, जिसमें 80% टेक्नोलॉजी ट्रांसफर शामिल होगा। (GE Aerospace Tejas Engine Depot)


