📍नई दिल्ली | 28 Apr, 2026, 9:41 PM
UHLH Helicopter IAF: भारतीय वायुसेना ने अपनी भारी लिफ्ट क्षमता को मजबूत करने के लिए अल्ट्रा हेवी लिफ्ट हेलीकॉप्टर यानी यूएचएलएच के लिए रिक्वेस्ट फॉर इंफॉर्मेशन जारी की है। रक्षा मंत्रालय की तरफ से निकाली गई इस प्रक्रिया में ऐसे हेलीकॉप्टर की तलाश की जा रही है जो बेहद भारी वजन उठा सके और कम समय में ऑपरेशन के लिए तैयार हो जाए। इस प्रस्ताव के तहत तीन हेलीकॉप्टर शुरुआती तौर पर दो साल के लिए डैम्प लीज मॉडल पर लिए जाएंगे, जिसके बाद इन्हें खरीदने का विकल्प भी रहेगा।
UHLH Helicopter IAF: क्या होता है डैम्प लीज मॉडल
डैम्प लीज को आसान भाषा में समझें तो इसमें हेलीकॉप्टर वेंडर से लिया जाता है, लेकिन उसे उड़ाने और ऑपरेट करने की जिम्मेदारी वायुसेना की होती है। यानी मशीन बाहर से आती है, लेकिन उसका इस्तेमाल और मेंटेनेंस इस्तेमाल करने वाला पक्ष संभालता है। इससे ट्रेनिंग, ऑपरेशन और कंट्रोल पूरी तरह सेना के पास रहता है।
इस मॉडल का फायदा यह है कि हेलीकॉप्टर कम समय में उपलब्ध हो जाते हैं और वायुसेना को नई क्षमता जल्दी मिल जाती है। साथ ही बाद में अगर जरूरत लगे तो उसी प्लेटफॉर्म को खरीदा भी जा सकता है। (UHLH Helicopter IAF)
हेलीकॉप्टर में क्या-क्या चाहिए
वायुसेना ने इस आरएफआई में कुछ साफ तकनीकी शर्तें रखी हैं। सबसे अहम शर्त इसकी पेलोड क्षमता है, जो करीब 20 टन होनी चाहिए। यह हेलीकॉप्टर भारी हथियार, वाहन या बड़ी मात्रा में सामान एक बार में ले जा सके।
इसके अलावा इसकी क्रूज स्पीड 230 किलोमीटर प्रति घंटा से ज्यादा होनी चाहिए, ताकि तेजी से मूवमेंट हो सके। अधिकतम स्पीड इससे भी ज्यादा रखी गई है, जिससे यह जरूरत पड़ने पर तेज ऑपरेशन कर सके।
हेलीकॉप्टर में कम से कम 45 सैनिक बैठ सकें, या इसे ऐसे बदला जा सके कि इसमें 20 स्ट्रेचर के साथ घायल सैनिकों को ले जाया जा सके। इससे यह हेलीकॉप्टर सिर्फ ट्रांसपोर्ट ही नहीं, बल्कि मेडिकल इवैक्यूएशन में भी काम आएगा।
ऊंचाई और मौसम में काम करने की क्षमता
इस हेलीकॉप्टर को ऊंचे इलाकों में उड़ान भरने में सक्षम होना चाहिए। इसके लिए ऑपरेटिंग एल्टीट्यूड करीब 5500 मीटर या उससे अधिक तय किया गया है। यह शर्त खासतौर पर हिमालयी इलाकों को ध्यान में रखकर रखी गई है, जहां ऑक्सीजन कम होती है और उड़ान चुनौतीपूर्ण होती है।
इसके साथ ही हेलीकॉप्टर को हर मौसम में उड़ान भरने के लिए आईएफआर सर्टिफाइड होना जरूरी है। इसका मतलब है कि खराब मौसम या कम विजिबिलिटी में भी यह सुरक्षित उड़ान भर सके।
हो ईड्ब्ल्यूएस सिस्टम से लैस
हेलीकॉप्टर में एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम भी होना जरूरी है। इसमें रडार वार्निंग रिसीवर और मिसाइल अप्रोच वार्निंग सिस्टम जैसे उपकरण शामिल होंगे, जो खतरे का पहले से पता लगा सकें। इसके साथ काउंटर मेजर डिस्पेंसिंग सिस्टम भी होना चाहिए, जिससे जरूरत पड़ने पर दुश्मन के हमले से बचाव किया जा सके।
ये सभी सिस्टम एक-दूसरे से जुड़े होने चाहिए, ताकि खतरे की पहचान और प्रतिक्रिया जल्दी हो सके। इससे हेलीकॉप्टर की सर्वाइवल क्षमता बढ़ती है। (UHLH Helicopter IAF)
भारी वजन उठाने और लटकाकर ले जाने की क्षमता
इस हेलीकॉप्टर को सिर्फ अंदर ही नहीं, बल्कि बाहर लटकाकर भी वजन ले जाने की क्षमता होनी चाहिए। इसके लिए लगभग 10 टन तक का अंडरस्लंग लोड उठाने की शर्त रखी गई है। इसके साथ यह भी जरूरी है कि पायलट दिन और रात दोनों समय इस लटकाए गए लोड को देख और मॉनिटर कर सके।
यह क्षमता पहाड़ी इलाकों में बेहद काम आती है, जहां सीधे लैंडिंग संभव नहीं होती और सामान को रस्सी के जरिए नीचे उतारा जाता है।
वायुसेना ने इस हेलीकॉप्टर की उपलब्धता कम से कम 95 प्रतिशत रखने की शर्त रखी है। यानी यह मशीन ज्यादातर समय ऑपरेशन के लिए तैयार रहे। इसके साथ हर महीने करीब 30 घंटे के इस्तेमाल की क्षमता भी तय की गई है। यह शर्त इसलिए रखी गई है ताकि हेलीकॉप्टर सिर्फ कागजों में नहीं, बल्कि लगातार ऑपरेशन में इस्तेमाल हो सके। (UHLH Helicopter IAF)
करनी होगी जल्दी डिलीवरी
इस आरएफआई में सबसे खास बात इसकी डिलीवरी टाइमलाइन है। वेंडर्स को कॉन्ट्रैक्ट साइन होने के बाद 3 से 6 महीने के अंदर हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराने होंगे। यह समय सीमा काफी कम मानी जाती है, जिससे साफ है कि वायुसेना को यह क्षमता जल्द से जल्द चाहिए।
यूएचएलएच हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल कई तरह के ऑपरेशन में किया जा सकता है। इनमें भारी हथियार और वाहन को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना, सीमावर्ती इलाकों में सप्लाई पहुंचाना और आपदा राहत जैसे काम शामिल हैं।
इसके अलावा यह हेलीकॉप्टर घायल सैनिकों को निकालने और कठिन इलाकों में तेजी से सैनिकों की तैनाती के लिए भी उपयोगी होगा। पहाड़ी, रेगिस्तानी और दूर-दराज के इलाकों में इसकी भूमिका अहम मानी जाती है।
मौजूदा फ्लीट और नई जरूरत
भारतीय वायुसेना के पास पहले से कुछ भारी हेलीकॉप्टर मौजूद हैं, लेकिन समय के साथ उनकी संख्या और क्षमता दोनों में बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही है। कुछ पुराने हेलीकॉप्टर अब अपनी उम्र पूरी कर रहे हैं, जबकि नए ऑपरेशन के लिए ज्यादा क्षमता वाले प्लेटफॉर्म की जरूरत है।
इसी वजह से 20 टन क्षमता वाले हेलीकॉप्टर की मांग सामने आई है, जो एक बार में ज्यादा सामान और सैनिकों को ले जा सके। (UHLH Helicopter IAF)
इस पूरी प्रक्रिया को डिफेंस एक्विजिशन प्रोसीजर 2020 के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है। इसमें भारतीय और विदेशी दोनों तरह के वेंडर्स भाग ले सकते हैं, लेकिन प्राथमिकता भारतीय लीज कैटेगरी को दी जाएगी। वायुसेना की जरूरत को देखते हुए यह कदम तेजी से क्षमता बढ़ाने के मकसद से उठाया गया है, ताकि बिना लंबी खरीद प्रक्रिया के तुरंत ऑपरेशनल जरूरत पूरी की जा सके।
आरएफआई जारी होने के बाद अब कंपनियां अपनी प्रतिक्रिया देंगी। इसके बाद अगला चरण यानी रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल आएगा, जिसमें तकनीकी और फाइनेंशियल ऑफर मांगे जाएंगे। इस प्रक्रिया के जरिए तय किया जाएगा कि कौन सा हेलीकॉप्टर वायुसेना की जरूरतों के हिसाब से सबसे उपयुक्त है। (UHLH Helicopter IAF)


