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भारतीय नौसेना बना रही डिजिटल कमांड प्लेटफॉर्म, AI से ट्रैक होंगे मिसाइल और टॉरपीडो
अगर किसी मिसाइल सिस्टम में बार-बार खराबी आ रही हो या किसी गोला-बारूद की स्टोरेज लाइफ खत्म होने वाली हो, तो सिस्टम पहले से अलर्ट दे सकेगा। इससे नौसेना का प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस और इन्वेंट्री मैनेजमेंट बेहतर होगा...
जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन को मिलेगी नई धार, राष्ट्रीय राइफल्स के लिए सेना खरीदने जा रही है नए बुलेट प्रूफ ट्रूप्स कैरियर
यह व्हीकल खास तौर पर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जैसे संवेदनशील इलाकों में तैनात जवानों के लिए तैयार किया जा रहा है, जहां काउंटर इंसर्जेंसी और काउंटर टेररिज्म ऑपरेशन लगातार चलते रहते हैं...
भारतीय सेना को चाहिए आकाशतीर के साथ 83 नए डिफेंस कैरियर, जो टैंकों के साथ चलते हुए दुश्मन को करेगा ट्रैक
कैडेट को एक तरह से मोबाइल कमांड पोस्ट माना जा रहा है। यह सीधे आर्मर्ड कॉलम के साथ रहेगा और एयर डिफेंस यूनिट्स को रियल टाइम में जानकारी देता रहेगा...
भारतीय वायुसेना को चाहिए हैवी पेलोड वाला ‘सुपर लिफ्ट’ हेलीकॉप्टर! UHLH के लिए जारी की RFI
इसके अलावा हेलीकॉप्टर की क्रूज स्पीड 230 किलोमीटर प्रति घंटा से ज्यादा होनी चाहिए, ताकि तेजी से मूवमेंट हो सके। अधिकतम स्पीड इससे भी ज्यादा रखी गई है, जिससे यह जरूरत पड़ने पर तेज ऑपरेशन कर सके...
सेना कर रही ‘सुपर कंट्रोल सिस्टम’ बनाने की तैयारी, “डिजिटल दिमाग” से जुड़ेंगे टैंक, मिसाइल और आर्टिलरी
ब्रिगेड स्तर पर इस सिस्टम को टेस्ट किया जाएगा। इसमें 155 मिमी बोफोर्स गन और स्मर्च रॉकेट सिस्टम को जोड़कर देखा जाएगा कि सिस्टम कैसे काम करता है। अगर यह सफल रहा तो इसे धीरे-धीरे पूरे आर्मी स्तर पर लागू किया जाएगा...
Exclusive: ऑपरेशन सिंदूर से मिला बड़ा सबक! स्वार्म ड्रोन से निपटने के लिए सेना खरीदेगी नेक्स्ट जनरेशन एयर डिफेंस गन
RFI में ऑपरेशन सिंदूर का भी जिक्र किया गया है। इसमें बताया गया है कि पश्चिमी मोर्चे पर दुश्मन ने ड्रोन और स्वार्म ड्रोन का इस्तेमाल निगरानी और हमले दोनों के लिए किया था। इन हमलों में सिविल और डिफेंस ठिकानों को निशाना बनाया गया...
F-INSAS प्रोग्राम के तहत सेना खरीदेगी 15,000 होलोग्राफिक रिफ्लेक्स साइट्स, एक क्लिक में दुश्मन खत्म!
इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि जवान दोनों आंखें खुली रखकर भी फायरिंग कर सकता है। इससे आसपास के हालात पर नजर बनाए रखते हुए भी दुश्मन पर सटीक निशाना लगाया जा सकता है...
भारतीय सेना को चाहिए नया ‘ड्रोन इंटरसेप्शन सिस्टम’, स्वॉर्म अटैक से निपटने की है तैयारी, जारी की RFI
इस प्रस्तावित सिस्टम को ड्रोन इंटरसेप्शन सिस्टम यानी डीआईएस कहा गया है। यह एक ऐसा सिस्टम होगा जो दुश्मन के ड्रोन को हवा में ही रोक सके और उन्हें नष्ट कर सके...
अब दुश्मन के ड्रोनों को ‘बंदी’ बनाएगी भारतीय सेना! खरीदेगी ये खास ‘जाल’
अब तक ज्यादातर सिस्टम ड्रोन को जाम करने या मार गिराने में एक्सपर्ट थे, लेकिन कई बार ऐसे हालात हो जाते हैं जिनमें ड्रोन को सही सलामत पकड़ना ज्यादा उपयोगी होता है...
समुद्र के भीतर से दुश्मन पर वार! पनडुब्बियों के लिए 500 किमी रेंज वाली क्रूज मिसाइल खरीदेगी भारतीय नौसेना
आरएफआई में नौसेना ने कंपनियों से जानकारी मांगी है जो ऐसी लैंड अटैक क्रूज मिसाइल उपलब्ध करा सकें, जिन्हें पनडुब्बियों से दागी जा सकें और जो जमीन पर दूर बैठे दुश्मन के अहम सैन्य ठिकानों को सटीकता के साथ निशाना बना सकें...
चीन की ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ को काउंटर करने की तैयारी! 73 साल बाद भारतीय नौसेना को चाहिए एम्फीबियस एयरक्राफ्ट, जारी की RFI
एम्फीबियस एयरक्राफ्ट की सबसे बड़ी खासियत यह होती है कि वह समुद्र, झील और रनवे, तीनों जगह से ऑपरेट कर सकता है। नौसेना ने साफ किया है कि विमान को दिन और रात, दोनों समय उड़ान भरने में सक्षम होना चाहिए...
Tactical RPA RFI: सेना को चाहिए रेगिस्तान से लद्दाख तक 24,000 फीट पर उड़ने वाले टैक्टिकल ड्रोन, 8 घंटे रहें हवा में, बिना रनवे...
आज की जंग में दुश्मन सबसे पहले जीपीएस जैमिंग और साइबर अटैक करता है। सेना इसलिए चाहती है कि ड्रोन सिर्फ जीपीएस पर निर्भर न रहे। ड्रोन को जीपीएस, ग्लोनास, गैलीलियो और नाविक, चारों सिस्टम इस्तेमाल करने होंगे...