📍नई दिल्ली | 4 Jul, 2026, 11:58 AM
Indian Navy Tactical Multi-Copter Surveillance Drone: भारतीय नौसेना अपने नौसैनिक अड्डों और संवेदनशील ठिकानों की सुरक्षा को और मजबूत करने की तैयारी कर रही है। रक्षा मंत्रालय ने टैक्टिकल मल्टी-कॉप्टर सर्विलांस ड्रोन, जिसे स्पॉटर ड्रोन भी कहा जाता है, की खरीद के लिए रिक्वेस्ट फॉर इंफॉर्मेशन (आरएफआई) जारी की है।
रक्षा सूत्रों के मुताबिक यह ड्रोन भारतीय नौसेना के तटीय ठिकानों, नौसैनिक अड्डों और अन्य महत्वपूर्ण परिसरों की लगातार निगरानी के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य दिन और रात दोनों समय रियल टाइम में निगरानी करना, संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाना और सुरक्षा बलों को तुरंत जानकारी उपलब्ध कराना होगा।
Indian Navy Tactical Multi-Copter Surveillance Drone: दो हिस्सों में होगा पूरा ड्रोन सिस्टम
प्रस्तावित सिस्टम दो मुख्य भागों से मिलकर बनेगा। पहला हिस्सा एरियल प्लेटफॉर्म होगा, जिसमें वर्टिकली टेकऑफ और लैंडिंग करने वाला मल्टी-कॉप्टर ड्रोन शामिल रहेगा। दूसरा हिस्सा ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन होगा, जिससे पूरा ड्रोन ऑपरेट किया जाएगा।
ड्रोन के साथ एक मजबूत स्टोरेज बॉक्स भी होगा, जिसमें उपकरण सुरक्षित रखे जा सकेंगे। पूरा सिस्टम इस तरह तैयार किया जाएगा कि उसे कम समय में किसी भी स्थान पर ले जाकर ऑपरेशन शुरू किया जा सके।
360 डिग्री नजर रखने वाला कैमरा होगा सबसे बड़ी ताकत
ड्रोन में स्टेबलाइज्ड इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इंफ्रारेड कैमरा लगाया जाएगा। यह कैमरा चारों दिशाओं में लगातार निगरानी कर सकेगा।
कैमरे में ऑटोमैटिक टारगेट ट्रैकिंग की सुविधा होगी, जिससे एक साथ 30 से ज्यादा टारगेट्स पर नजर रखी जा सकेगी। जरूरत पड़ने पर ऑपरेटर किसी एक टारगेट पर तुरंत जूम भी कर सकेगा।
इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल कैमरे में कम से कम 30 गुना ऑप्टिकल जूम और दो गुना डिजिटल जूम होगा। वहीं इंफ्रारेड कैमरे में छह गुना डिजिटल जूम और हाई डेफिनिशन इमेजिंग की सुविधा होगी, जिससे रात में भी स्पष्ट तस्वीर मिल सकेगी।
ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन रहेगा पूरी उड़ान का कंट्रोल सेंटर
ड्रोन का ऑपरेशन एक मैन-पोर्टेबल ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन से किया जाएगा। इसमें चार्ट से लैस टफबुक, आरएफ कम्युनिकेशन सेट, जॉयस्टिक कंट्रोलर और एलईडी डिस्प्ले होगा।
आरएफ कम्युनिकेशन सेट ड्रोन और कंट्रोल स्टेशन के बीच सुरक्षित डेटा लिंक बनाए रखेगा। इसकी मदद से जरूरत पड़ने पर चलते हुए वाहन या दूसरे प्लेटफॉर्म से भी ड्रोन को कंट्रोल किया जा सकेगा।
टफबुक और कम्युनिकेशन सेट के लिए अतिरिक्त बैटरियां भी दी जाएंगी ताकि लंबे समय तक ऑपरेशन जारी रखा जा सके।
समुद्र में कठिन मौसम में भी करेगा काम
यह ड्रोन खास तौर पर समुद्री वातावरण को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जाएगा। यह दिन और रात दोनों समय काम करेगा। बारिश और तेज समुद्री हवाओं के दौरान भी इसकी उड़ान पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
ड्रोन की सर्विस सीलिंग दो हजार फीट एजीएल तक होगी। इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इंफ्रारेड कैमरे के साथ यह कम से कम 40 नॉट की क्रूज स्पीड बनाए रखने में सक्षम होगा।
लॉन्च पॉइंट से इसका ऑपरेशन रेडियस कम से कम 20 किलोमीटर रखा गया है। एक बार उड़ान भरने के बाद यह कम से कम 120 मिनट तक लगातार मिशन पूरा कर सकेगा।
उड़ान के दौरान बदल सकेगा कंट्रोल स्टेशन
इस ड्रोन की एक सबसे बड़ी खूबीयह होगी कि उड़ान के दौरान इसे एक ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन से दूसरे स्टेशन को सौंपा जा सकेगा। इससे यदि ऑपरेशन एरिया बदलता है या किसी अन्य टीम को ड्रोन का कंट्रोल देना हो तो मिशन बिना रोके जारी रखा जा सकेगा।
इसके अलावा सिस्टम में एंटी-जैमिंग तकनीक भी होगी ताकि दुश्मन की इलेक्ट्रॉनिक जामिंग के बावजूद ड्रोन सुरक्षित तरीके से काम करता रहे।
तेज हवा और बारिश में भी होगी सुरक्षित लैंडिंग
ड्रोन को चार मीटर गुणा चार मीटर के छोटे खुले क्षेत्र से भी उड़ाया और उतारा जा सकेगा। यह 30 नॉट तक की हवा में सुरक्षित टेकऑफ और लैंडिंग कर सकेगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसकी लैंडिंग पूरी तरह ऑटोमैटिक होगी। लैंडिंग पूरी तरह से ऑपरेटर फ्री होगी।
यदि डेटा लिंक टूट भी जाता है, बैटरी डाउन हो जाती है या जैमिंग का खतरा महसूस हो तो ड्रोन अपने आप लॉन्च पॉइंट पर लौट आएगा या पहले से तय सुरक्षित स्थान पर पहुंच जाएगा। (Indian Navy Tactical Multi-Copter Surveillance Drone)
सुरक्षित डेटा लिंक और जियोफेंसिंग भी होगी
आरएफआई ने कहा गया है कि ड्रोन में जीएनएसएस आधारित नेविगेशन सिस्टम होगा, जिसमें जियोफेंसिंग सुविधा भी शामिल रहेगी।
वीडियो और टेलीमेट्री के लिए सुरक्षित और एन्क्रिप्टेड डेटा लिंक होगा। यह एक हजार फीट या उससे अधिक ऊंचाई पर 30 किलोमीटर तक लाइन ऑफ साइट कम्युनिकेशन बनाए रख सकेगा।
रक्षा मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस्तेमाल होने वाली आरएफ फ्रीक्वेंसी भारतीय नौसेना के अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में किसी प्रकार का इंटरफेरेंस नहीं करेगी।
चार घंटे में चार्ज होगी बैटरी
ड्रोन की बैटरियां पूरी तरह पोर्टेबल होंगी। इन्हें सामान्य 220 वोल्ट बिजली सप्लाई से चार्ज किया जा सकेगा। पूरी बैटरी चार घंटे के भीतर चार्ज हो जाएगी। प्रत्येक ड्रोन के साथ दो अतिरिक्त बैटरी सेट भी उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि लगातार मिशन चलाया जा सके। (Indian Navy Tactical Multi-Copter Surveillance Drone)
ऑपरेटर को एक स्क्रीन पर मिलेगी पूरी जानकारी
ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन में मल्टी-सेंसर फ्यूजन स्क्रीन होगी। इस पर दिन और रात दोनों समय कैमरे की तस्वीरें डिजिटल मैप के साथ दिखाई देंगी। वीडियो लगातार रिकॉर्ड होगा और जरूरत पड़ने पर निगरानी केंद्र की एलसीडी स्क्रीन पर भी भेजा जा सकेगा। ऑपरेटर इसी स्टेशन से ड्रोन को उड़ाएगा, दिशा बदलेगा, कैमरा नियंत्रित करेगा और पूरे मिशन की निगरानी करेगा।
नहीं लगेगा जंग
ड्रोन के सभी हिस्से समुद्री वातावरण को ध्यान में रखकर बनाए जाएंगे। इसके सभी एयरफ्रेम और अन्य पुर्जे ऐसे मटेरियल से बनाए जाएंगे, जिन पर समुद्री नमी और खारे पानी का असर न पड़े। ड्रोन को रखने के लिए मजबूत और सुरक्षित स्टोरेज बॉक्स दिया जाएगा, जिसे एक या दो व्यक्ति आसानी से उठा सकेंगे। इस बॉक्स का वजन 30 किलोग्राम से अधिक नहीं होगा। पूरा सिस्टम इस तरह तैयार किया जाएगा कि इसे 10 मिनट से भी कम समय में ऑपरेशन के लिए तैयार किया जा सके।
ड्रोन में रात के समय पहचान के लिए स्ट्रोब या फ्लैशिंग लाइट लगी होगी। इसे माइनस 10 डिग्री सेल्सियस से लेकर 55 डिग्री सेल्सियस तापमान और 99 प्रतिशत तक नमी वाले वातावरण में भी सुरक्षित रखा जा सकेगा। इसके लैंडिंग गियर पर एंटी-स्लिप मटेरियल लगाया जाएगा, जिससे गीली या फिसलन वाली सतह पर भी सुरक्षित लैंडिंग हो सके। (Indian Navy Tactical Multi-Copter Surveillance Drone)
सुरक्षा के कई अतिरिक्त फीचर
सुरक्षा के लिहाज से भी इसमें कई आधुनिक फीचर दिए जाएंगे। ड्रोन में मोटर, रोटर और पावर सोर्स के लिए रिडंडेंसी होगी, यानी किसी एक हिस्से में खराबी आने पर भी दूसरा सिस्टम काम करता रहेगा। इसके अलावा लो बैटरी, कम्युनिकेशन लिंक टूटने, ज्यादा कंपन और जैमिंग जैसी स्थिति के लिए अलग-अलग अलार्म दिए जाएंगे।
जरूरत पड़ने पर ऑपरेटर फ्लाइट कंट्रोलर में मौजूद रिकॉर्ड किए गए डेटा को पूरी तरह मिटा भी सकेगा, ताकि संवेदनशील जानकारी सुरक्षित रहे।
लो बैटरी, कम्युनिकेशन फेलियर, हाई वाइब्रेशन और जैमिंग के लिए अलग-अलग अलार्म दिए जाएंगे।
ड्रोन अपनी उड़ान से जुड़ा पूरा डेटा लगातार 12 घंटे तक रिकॉर्ड करेगा। यह डेटा ऐसे फॉर्मेट में सेव होगा, जिसे आसानी से किसी दूसरे कंप्यूटर में ट्रांसफर किया जा सके। ड्रोन को क्लिप-ऑन यूनिट्स की मदद से जोड़ा जाएगा और हर हिस्से पर स्पष्ट पहचान और गाइडिंग मार्किंग्स होंगी, ताकि असेंबली के दौरान किसी तरह की गलती न हो।
सुरक्षित लैंडिंग और रास्ते में आने वाली बाधाओं से बचने के लिए इसमें लाइडार सेंसर लगाया जाएगा, जो टेरेन ट्रैकिंग और कोलिजन अवॉइडेंस में मदद करेगा। (Indian Navy Tactical Multi-Copter Surveillance Drone)
दस साल तक मिलेगा तकनीकी सपोर्ट
रक्षा मंत्रालय ने कंपनियों से कहा है कि वे कम से कम दस वर्ष तक इस सिस्टम के लिए स्पेयर पार्ट्स, मरम्मत और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराएं। वारंटी कम से कम तीन वर्ष की होगी। एक वर्ष के लिए ऑनबोर्ड स्पेयर और पांच वर्ष के लिए बेस तथा डिपो स्तर के स्पेयर भी उपलब्ध कराने होंगे।
इसके अलावा ऑपरेटरों, तकनीकी कर्मचारियों और प्रशिक्षण संस्थानों के लिए अलग-अलग प्रशिक्षण कार्यक्रम भी देना होगा।
केवल भारतीय कंपनियां ही होंगी पात्र
रक्षा सूत्रों के मुताबिक यह खरीद भारतीय-आईडीडीएम श्रेणी के तहत की जाएगी। इसलिए केवल भारतीय कंपनियां या भारतीय सिस्टम इंटीग्रेटर ही इसमें भाग ले सकेंगे।
कंपनी पर किसी प्रकार का बैन नहीं होना चाहिए। उसके पास रक्षा निर्माण का अनुभव, पर्याप्त वित्तीय क्षमता और आवश्यक औद्योगिक लाइसेंस होना जरूरी होगा।
इसके साथ ही कंपनियों को यह भी साबित करना होगा कि वे भारत में ही मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल की सुविधा उपलब्ध करा सकती हैं। (Indian Navy Tactical Multi-Copter Surveillance Drone)
Author
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।



