📍कोलकाता | 21 Jun, 2026, 12:05 PM
Indian Navy Tri-Commissioning: अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर कोलकाता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) में बने तीन स्वदेशी नौसैनिक जहाजों को भारतीय नौसेना में कमीशन किया। इनमें एडवांस्ड स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस दुनागिरी, सर्वे वेसल लार्ज आईएनएस संशोधक और एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट आईएनएस अग्रेय शामिल हैं।
तीनों जहाजों के एक साथ नौसेना में शामिल होने को ट्राई-कमीशनिंग कहा जाता है। इससे पहले 2025 में 17 महीने पहले मुंबई में पहली ट्राई-कमीशनिंग हुई थी, वहीं कोलकाता में यह दूसरी ट्राई-कमीशनिंग है।
यह कार्यक्रम इसलिए भी खास रहा क्योंकि 21 जून को विश्व हाइड्रोग्राफी दिवस भी मनाया जाता है। इसी दिन भारत के सबसे आधुनिक हाइड्रोग्राफिक सर्वे जहाजों में शामिल आईएनएस संशोधक को नौसेना में शामिल किया गया।
Indian Navy Tri-Commissioning: समुद्री क्षमता बेहद जरूरी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्यक्रम में कहा कि कोलकाता और बंगाल की धरती ने भारत के विचारों को नई दिशा दी है और सदियों से भारत को समुद्र के जरिए दुनिया से जोड़ा है। उन्होंने कहा कि इसी धरती पर आत्मनिर्भर भारत, सुरक्षित भारत और विकसित भारत से जुड़ा महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित हुआ है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि समुद्री क्षमता के बिना कोई देश बड़ी शक्ति नहीं बन सकता। उनके अनुसार विकास, सुरक्षा और समृद्धि समुद्र से जुड़े हैं। दुनिया का अधिकांश व्यापार समुद्री रास्तों से होता है और देशों को जोड़ने वाले बड़े डेटा नेटवर्क भी समुद्र के नीचे से गुजरते हैं। उन्होंने कहा कि समुद्र के साथ भविष्य के क्रिटिकल मिनरल्स, डीप सी रिसोर्सेज और नई ऊर्जा के स्रोत भी जुड़े हैं। (Indian Navy Tri-Commissioning)

तीन अलग-अलग भूमिकाओं के लिए बने हैं ये तीनों जहाज
प्रधानमंत्री ने कहा कि ये तीनों जहाज भारत के तीन महत्वपूर्ण संकल्पों का प्रतीक हैं। इन्हें भारत में डिजाइन किया गया, भारत में बनाया गया और इनके पीछे भारतीय इंजीनियरों, कामगारों तथा उद्योगों की मेहनत है।
उन्होंने कहा कि भारत अब रक्षा क्षेत्र में केवल खरीदार बने रहने की स्थिति में नहीं रहना चाहता। प्रधानमंत्री के अनुसार देश की सैन्य ताकत को दुनिया के लिए बाजार नहीं बनना चाहिए, बल्कि ताकत की परिभाषा आत्मनिर्भरता से तय होनी चाहिए।
आईएनएस दुनागिरी, आईएनएस संशोधक और आईएनएस अग्रेय तीनों अलग-अलग मिशन के लिए बनाए गए हैं। इन तीनों जहाजों का निर्माण भारत में हुआ है और इनके डिजाइन में भी भारतीय संस्थानों तथा उद्योगों की भूमिका रही है। (Indian Navy Tri-Commissioning)
200 से ज्यादा एमएसएमई ने निभाई भूमिका
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इन तीनों जहाजों के निर्माण में 200 से ज्यादा एमएसएमई ने योगदान दिया है। एमएसएमई यानी माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज देश की छोटी और मध्यम उद्योग इकाइयां होती हैं। युद्धपोत निर्माण में केवल बड़ा शिपयार्ड काम नहीं करता, बल्कि हजारों उपकरण और पुर्जे अलग-अलग कंपनियां बनाती हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि एक आधुनिक जहाज में सैकड़ों टन स्टील, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और हजारों कंपोनेंट्स लगते हैं। इनके पीछे हजारों कंपनियां काम करती हैं और इससे बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार मिलता है। उन्होंने समुद्री क्षेत्र को विकसित भारत के लिए एम्प्लॉयमेंट इंजन बताया।

आईएनएस विक्रांत का किया जिक्र
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब आईएनएस विक्रांत को राष्ट्र को समर्पित किया गया था, तब भारत ने अपनी समुद्री शक्ति का नया अध्याय शुरू किया था।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आईएनएस विक्रांत से लेकर आईएनएस अग्रेय, आईएनएस दुनागिरी और आईएनएस संशोधक तक की यात्रा केवल नए युद्धपोतों की यात्रा नहीं है, बल्कि भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता की यात्रा भी है।
आईएनएस विक्रांत भारत में बना पहला स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर है। एयरक्राफ्ट कैरियर ऐसा बड़ा युद्धपोत होता है, जिस पर लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर और कई तरह के सैन्य उपकरण संचालित किए जा सकते हैं। वहीं आईएनएस दुनागिरी, आईएनएस संशोधक और आईएनएस अग्रेय जैसे जहाज अलग-अलग समुद्री मिशनों के लिए तैयार किए गए हैं। (Indian Navy Tri-Commissioning)
40 से ज्यादा स्वदेशी युद्धपोत और पनडुब्बियां नौसेना में शामिल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में 40 से ज्यादा मेड इन इंडिया युद्धपोत और पनडुब्बियां भारतीय नौसेना में शामिल हुई हैं। उनके अनुसार इसका मतलब है कि भारतीय नौसेना को लगभग हर कुछ सप्ताह में नई ताकत मिल रही है।
उन्होंने कहा कि इस समय 45 बड़े नौसैनिक प्लेटफॉर्म निर्माणाधीन हैं। प्रधानमंत्री के अनुसार यह केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि भारत की औद्योगिक क्षमता और समुद्री शक्ति निर्माण की दिशा को दिखाता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत शिपबिल्डिंग, शिप रिपेयर, शिप रिसाइक्लिंग और एमआरओ को राष्ट्रीय मिशन के रूप में देख रहा है। एमआरओ का मतलब मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल है। यानी जहाजों की नियमित देखभाल, खराब उपकरणों की मरम्मत और लंबे समय बाद बड़े स्तर पर होने वाली तकनीकी जांच।
उन्होंने शिपिंग सेक्टर के लिए घोषित 70 हजार करोड़ रुपये के इंसेंटिव पैकेज का भी जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह केवल आर्थिक फैसला नहीं है, बल्कि भारत के समुद्री भविष्य में निवेश है। (Indian Navy Tri-Commissioning)
रक्षा निर्यात पहुंचा 40 हजार करोड़ रुपये के पार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि एक समय भारत की पहचान दुनिया के सबसे बड़े रक्षा आयातक देशों में होती थी। विदेशों से हथियार, सैन्य उपकरण और रक्षा तकनीक खरीदने पर अधिक निर्भरता के कारण देश के सामने रणनीतिक और सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां भी पैदा होती थीं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में सरकार बनने के बाद इस स्थिति को बदलने का संकल्प लिया गया और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता दी गई।
प्रधानमंत्री के अनुसार, इसके लिए कई बड़े नीतिगत सुधार किए गए। रक्षा क्षेत्र में डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट के लिए नए अवसर तैयार किए गए। इसका असर देश के रक्षा उत्पादन में साफ दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 तक भारत का कुल रक्षा उत्पादन करीब 40 हजार करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर लगभग 1 लाख 80 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
उन्होंने कहा कि केवल रक्षा उत्पादन ही नहीं बढ़ा है, बल्कि रक्षा निर्यात में भी तेज वृद्धि हुई है। वर्ष 2014 तक भारत करीब 700 करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादों का निर्यात करता था। अब यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 40 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। (Indian Navy Tri-Commissioning)

पश्चिम बंगाल की भूमिका बेहद अहम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत जिस नए समुद्री दौर की ओर बढ़ रहा है, उसमें पश्चिम बंगाल की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण रहने वाली है। राज्य के पास बंदरगाहों की क्षमता है, उद्योगों के लिए मजबूत आधार है और कुशल मानव संसाधन भी मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में समुद्री अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई तक ले जाने की पूरी क्षमता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले वर्षों में पश्चिम बंगाल भारत की ब्लू इकोनॉमी, मैरिटाइम मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और तटीय विकास का एक अहम केंद्र बन सकता है। भारत ने हमेशा समुद्र को सहयोग और संपर्क के माध्यम के रूप में देखा है, लेकिन शांति बनाए रखने के लिए ताकत भी उतनी ही जरूरी है। समृद्धि की रक्षा के लिए सुरक्षा जरूरी है और भविष्य के निर्माण के लिए आत्मनिर्भरता जरूरी है।
उन्होंने कहा कि आईएनएस अग्रेय, आईएनएस दुनागिरी और आईएनएस संशोधक का भारतीय नौसेना में शामिल होना इसी सोच का प्रतीक है। ये तीनों जहाज उस भारत की तस्वीर पेश करते हैं जो 21वीं सदी में अपनी क्षमता को पहचानता है, अपनी ताकत पर भरोसा करता है और तेज गति, नई ऊर्जा तथा मजबूत संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। (Indian Navy Tri-Commissioning)
बंदरगाहों को बनाया जा रहा है आधुनिक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत अब अपने पूरे मैरिटाइम इकोसिस्टम को मजबूत करने पर काम कर रहा है। इसके तहत बंदरगाहों को आधुनिक बनाया जा रहा है, नई क्षमता तैयार की जा रही है और समुद्री तथा तटीय क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी से जोड़ा जा रहा है। देश में नदी जलमार्गों का विस्तार किया जा रहा है और सड़क, रेल, बंदरगाह तथा जलमार्गों को जोड़ने वाला मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क विकसित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सागरमाला जैसी पहल इसी व्यापक सोच का हिस्सा हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य व्यापार की लागत कम करना, उद्योगों को गति देना और तटीय इलाकों में रोजगार व विकास के नए अवसर तैयार करना है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में बने रक्षा उपकरण अब दुनिया के 80 से ज्यादा देशों तक पहुंच रहे हैं। हालांकि आत्मनिर्भरता की दिशा में अभी बहुत काम बाकी है, लेकिन पिछले 12 वर्षों में हुई प्रगति यह दिखाती है कि स्पष्ट नीति, सही दिशा और सामूहिक प्रयासों से देश में बड़े बदलाव किए जा सकते हैं।
नौसेना प्रमुख बोले- ट्राई-कमीशनिंग से दिखी नई गति
भारतीय नौसेना के प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन ने इस अवसर पर जीआरएसई की टीम, उद्योग साझेदारों, एमएसएमई, नौसेना मुख्यालय, कमांड मुख्यालय, वॉरशिप ओवरसीइंग टीम और ट्रायल एजेंसियों को बधाई दी।
नौसेना प्रमुख ने कहा कि कोलकाता में यह ट्राई-कमीशनिंग उपलब्धि भारत के युद्धपोत निर्माण क्षेत्र में आधुनिकता, आत्मनिर्भरता और भरोसे की नई गति को दिखाती है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत में प्रधानमंत्री द्वारा पिछले वर्ष मुंबई में हुई पहली ट्राई-कमीशनिंग के 17 महीने बाद कोलकाता में दूसरी ट्राई-कमीशनिंग हुई है।
उन्होंने कहा कि इन तीनों परियोजनाओं ने निर्माण के दौरान कई नए माइलस्टोन हासिल किए हैं। नौसेना प्रमुख के अनुसार जहाजों के निर्माण में शुरुआत से लेकर ट्रायल तक अलग-अलग एजेंसियों और उद्योग भागीदारों की भूमिका रही है। (Indian Navy Tri-Commissioning)

स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस दुनागिरी
आईएनएस दुनागिरी प्रोजेक्ट 17ए के तहत बनाया गया एडवांस्ड स्टील्थ फ्रिगेट है। यह उन आधुनिक युद्धपोतों में शामिल है जिन्हें दुश्मन के रडार पर कम दिखाई देने के उद्देश्य से डिजाइन किया जाता है। स्टील्थ फ्रिगेट की बाहरी बनावट, रडार सिग्नेचर, इंफ्रारेड सिग्नेचर और ध्वनि स्तर को कम रखने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
फ्रिगेट ऐसा युद्धपोत होता है जो लंबी दूरी तक समुद्र में रहकर कई प्रकार के मिशन कर सकता है। इसमें एंटी-एयर वॉरफेयर, एंटी-सर्फेस वॉरफेयर और एंटी-सबमरीन वॉरफेयर की क्षमता होती है। यानी यह हवा से आने वाले मिसाइल और विमान के खतरे, समुद्र की सतह पर मौजूद दुश्मन के जहाज और पानी के नीचे मौजूद पनडुब्बी तीनों से निपटने में भूमिका निभा सकता है।
आईएनएस दुनागिरी में आधुनिक रडार, सेंसर, कम्युनिकेशन सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर उपकरण और हथियार प्रणाली लगाई गई है। यह जहाज भारतीय नौसेना के लिए समुद्री क्षेत्र में निगरानी, युद्धक गश्त और टास्क ग्रुप ऑपरेशन में उपयोगी होगा।
प्रोजेक्ट 17ए फ्रिगेट्स को भारतीय नौसेना के मौजूदा फ्रिगेट बेड़े की तुलना में ज्यादा एडवांस माना जाता है। इन जहाजों में ऑटोमेशन पर भी जोर दिया गया है, जिससे कई सिस्टम डिजिटल तरीके से नियंत्रित किए जा सकते हैं। इससे जहाज को चलाने और युद्धक सिस्टम संचालित करने में कम क्रू के साथ भी काम किया जा सकता है।
आईएनएस दुनागिरी का नाम हिमालय की दुनागिरी पर्वत श्रृंखला के नाम पर रखा गया है। यह नाम भारतीय नौसेना की उस परंपरा को भी आगे बढ़ाता है जिसमें युद्धपोतों को भारत की भौगोलिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान से जुड़े नाम दिए जाते हैं। (Indian Navy Tri-Commissioning)
आईएनएस संशोधक: समुद्र की गहराई और रास्तों की जानकारी जुटाने वाला जहाज
आईएनएस संशोधक सर्वे वेसल लार्ज श्रेणी का जहाज है। इसका मुख्य काम समुद्र की गहराई, समुद्री तल, तटीय क्षेत्र, बंदरगाहों के आसपास के रास्तों और पानी के नीचे मौजूद प्राकृतिक या मानव निर्मित संरचनाओं की जानकारी जुटाना है।
किसी भी नौसेना के लिए हाइड्रोग्राफी बहुत महत्वपूर्ण होती है। हाइड्रोग्राफी का मतलब समुद्र, नदी, बंदरगाह और तटीय जल क्षेत्र का वैज्ञानिक सर्वे है। इसके जरिए यह पता लगाया जाता है कि किसी इलाके में पानी कितना गहरा है, समुद्र तल की बनावट कैसी है, जहाज किस रास्ते से सुरक्षित गुजर सकते हैं और किन जगहों पर खतरा हो सकता है।
आईएनएस संशोधक आधुनिक हाइड्रोग्राफिक उपकरणों से लैस है। इसमें मल्टी-बीम इको साउंडर, साइड स्कैन सोनार, सर्वे बोट, डेटा प्रोसेसिंग सिस्टम और समुद्री मैपिंग के लिए जरूरी डिजिटल उपकरण लगाए गए हैं। मल्टी-बीम इको साउंडर समुद्र तल का विस्तृत नक्शा तैयार करने में मदद करता है। यह पानी के भीतर ध्वनि तरंगें भेजता है और वापस आने वाली तरंगों के आधार पर समुद्र की गहराई और तल की जानकारी जुटाता है।
इस तरह के जहाज नौसेना के ऑपरेशन के साथ-साथ सुरक्षित समुद्री व्यापार, बंदरगाह विकास, तटीय इंफ्रास्ट्रक्चर और आपदा प्रबंधन में भी अहम भूमिका निभाते हैं। समुद्री नक्शे तैयार करने से नौसैनिक जहाजों, पनडुब्बियों और व्यापारी जहाजों को सुरक्षित रूट तय करने में मदद मिलती है। (Indian Navy Tri-Commissioning)
आईएनएस अग्रेय: उथले समुद्र में पनडुब्बियों का दुश्मन
आईएनएस अग्रेय एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट है। इसका मुख्य काम उथले समुद्री इलाकों में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाना, उनका पीछा करना और जरूरत पड़ने पर उन्हें निशाना बनाना है।
भारत के समुद्री क्षेत्र में कई ऐसे इलाके हैं जहां पानी अपेक्षाकृत कम गहरा है। तटीय क्षेत्र, बंदरगाहों के आसपास के इलाके और कुछ समुद्री रास्तों में पनडुब्बियों की गतिविधि पर नजर रखना चुनौतीपूर्ण होता है। उथले पानी में सोनार की ध्वनि तरंगें अलग तरीके से काम करती हैं और समुद्र तल की बनावट भी पनडुब्बी को छिपने में मदद कर सकती है।
इसी कारण शैलो वॉटर क्राफ्ट को खास तौर पर ऐसे क्षेत्रों के लिए डिजाइन किया जाता है। आईएनएस अग्रेय में आधुनिक सोनार सिस्टम, अंडरवाटर सेंसर और पनडुब्बी रोधी हथियार लगाए गए हैं। सोनार सिस्टम पानी के भीतर ध्वनि तरंगों के जरिए पनडुब्बी या अन्य वस्तु की मौजूदगी का पता लगाता है। (Indian Navy Tri-Commissioning)



