HomeIndian Navyअंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर GRSE को मिला नवरत्न का दर्जा, रविवार को...

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर GRSE को मिला नवरत्न का दर्जा, रविवार को पीएम मोदी नौसेना को सौंपेंगे 3 स्वदेशी जहाज

जीआरएसई के मामले में पिछले पांच सालों के आंकड़े इस बदलाव की वजह बताते हैं। वित्त वर्ष 2021-22 में कंपनी का रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस करीब 1,754 करोड़ रुपये था। वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर लगभग 7,002 करोड़ रुपये पहुंच गया...

रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US

📍नई दिल्ली/कोलकाता | 20 Jun, 2026, 3:34 PM

GRSE Navratna Status: अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर 21 जून को कोलकाता में भारतीय नौसेना के लिए एक बड़ा कार्यक्रम होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोलकाता में गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड यानी जीआरएसई द्वारा बनाए गए तीन स्वदेशी नौसैनिक जहाजों को भारतीय नौसेना में औपचारिक रूप से कमीशन करेंगे। इन तीन प्लेटफॉर्म में एडवांस्ड स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस दुनागिरी, सर्वे वेसल लार्ज आईएनएस संशोधक और एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट आईएनएस अग्रय शामिल हैं।

तीनों जहाजों की कमीशनिंग ऐसे समय हो रही है, जब इन्हें बनाने वाली कोलकाता की सरकारी शिपबिल्डिंग कंपनी जीआरएसई को नवरत्न का दर्जा मिल गया है। वित्त मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक एंटरप्राइजेज ने 20 जून को जीआरएसई को नवरत्न पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइज का दर्जा दिया। यह दर्जा कंपनी के पिछले कुछ वर्षों के वित्तीय प्रदर्शन, उत्पादन क्षमता और लगातार बढ़ती शिपबिल्डिंग उपलब्धियों को देखते हुए दिया गया है।

GRSE Navratna Status: क्या होता है नवरत्न दर्जा और जीआरएसई को क्यों मिला?

नवरत्न दर्जा केंद्र सरकार उन सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को देती है, जिन्होंने लगातार बेहतर वित्तीय प्रदर्शन किया हो और जिनकी ऑपरेशनल कैबेबिलिटी मजबूत हो। इससे कंपनी को निवेश, विस्तार, नई परियोजनाओं और रणनीतिक साझेदारी से जुड़े फैसले लेने में पहले से अधिक वित्तीय और प्रशासनिक स्वतंत्रता मिलती है।

जीआरएसई के मामले में पिछले पांच सालों के आंकड़े इस बदलाव की वजह बताते हैं। वित्त वर्ष 2021-22 में कंपनी का रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस करीब 1,754 करोड़ रुपये था। वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर लगभग 7,002 करोड़ रुपये पहुंच गया। यानी पांच साल में कंपनी के कारोबार में करीब 300 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

इसी अवधि में कंपनी का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स भी 190 करोड़ रुपये से बढ़कर 748 करोड़ रुपये पहुंच गया। यह करीब 294 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। रक्षा शिपबिल्डिंग जैसे क्षेत्र में यह प्रदर्शन इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि यहां जहाज निर्माण में कई साल लगते हैं, बड़ी सप्लाई चेन की जरूरत होती है और हर प्लेटफॉर्म की तकनीकी जटिलता अलग होती है।

नवरत्न दर्जा मिलने के बाद जीआरएसई अब बड़े निवेश प्रस्तावों पर तेजी से फैसले ले सकेगा। सामान्य नियमों के तहत नवरत्न कंपनियों को एक परियोजना में 1,000 करोड़ रुपये या अपनी नेटवर्थ के 15 प्रतिशत तक निवेश करने की अनुमति होती है, हालांकि यह सीमा संबंधित नियमों और कंपनी की वित्तीय स्थिति के अनुसार लागू होती है। इससे शिपयार्ड को नई निर्माण सुविधाएं, आधुनिक मशीनरी, डिजाइन इंफ्रास्ट्रक्चर और उत्पादन क्षमता बढ़ाने वाले प्रोजेक्ट्स पर काम करने में सुविधा मिलती है।

भारतीय नौसेना से सेवानिवृत्त अधिकारी और जीआरएसई के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर कमोडोर पीआर. हरि ने कहा कि नवरत्न दर्जा कंपनी की यात्रा का एक महत्वपूर्ण क्षण है। उनके अनुसार यह सम्मान जीआरएसई के वर्तमान और पूर्व कर्मचारियों की मेहनत, प्रोफेशनलिज्म और समर्पण को मान्यता है। उन्होंने कहा कि इससे कंपनी को रणनीतिक अवसरों पर काम करने, रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भरता बढ़ाने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा मजबूत करने में मदद मिलेगी।

21 जून को एक साथ कमीशन होंगे तीन स्वदेशी जहाज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 जून को कोलकाता के श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट में आयोजित कार्यक्रम में तीनों प्लेटफॉर्म को नौसेना में शामिल करेंगे। यह कार्यक्रम इसलिए भी खास है क्योंकि तीनों जहाजों का काम अलग-अलग है। एक जहाज समुद्री युद्ध के लिए बनाया गया है, दूसरा समुद्र की गहराई और समुद्री क्षेत्र का सर्वे करेगा, जबकि तीसरा उथले समुद्री क्षेत्रों में पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें निशाना बनाने के लिए तैयार किया गया है।

यह भी पढ़ें:  INS Mahe Delivery: कोचीन शिपयार्ड ने भारतीय नौसेना को सौंपी पहली एंटी-सबमरीन शैलो वॉटर क्राफ्ट ‘माहे’, करेगी पनडुब्बियों का शिकार

इन तीनों प्लेटफॉर्म को एक साथ शामिल करने से नौसेना की ब्लू वॉटर ऑपरेशंस, समुद्री डोमेन अवेयरनेस और तटीय क्षेत्रों में एंटी-सबमरीन वॉरफेयर क्षमता को मजबूती मिलेगी। तीनों जहाज भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन किए गए और जीआरएसई ने उनका निर्माण किया है। (GRSE Navratna Status)

आईएनएस दुनागिरी फ्रिगेट: समुद्र में दुश्मन के जहाजों और मिसाइलों से करेगी मुकाबला

आईएनएस दुनागिरी प्रोजेक्ट 17ए का स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट है। फ्रिगेट को नौसेना का ऐसा बहुउद्देश्यीय युद्धपोत माना जाता है, जो समुद्र में दुश्मन के जहाजों, मिसाइलों, विमानों और पनडुब्बियों से जुड़े खतरों के खिलाफ काम कर सकता है।

दुनागिरी इस श्रेणी के आधुनिक युद्धपोतों में शामिल है, जिसे कम रडार सिग्नेचर के साथ तैयार किया गया है। स्टेल्थ डिजाइन का मतलब यह नहीं कि जहाज पूरी तरह दिखाई नहीं देता, बल्कि इसका आकार, सतह और कई सिस्टम इस तरह डिजाइन किए जाते हैं कि दुश्मन के रडार के लिए इसे पकड़ना कठिन हो सके।

दुनागिरी में ब्रह्मोस सरफेस टू सरफेस मिसाइल और मीडियम रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल सिस्टम समेत आधुनिक हथियार और सेंसर लगाए गए हैं। ब्रह्मोस मिसाइल समुद्र में दुश्मन के युद्धपोतों या जमीन पर मौजूद महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की क्षमता रखती है। वहीं एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम जहाज को दुश्मन के विमान, हेलीकॉप्टर और आने वाली मिसाइलों से बचाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

प्रोजेक्ट 17ए के तहत कुल सात स्टेल्थ फ्रिगेट बनाए जा रहे हैं। इनमें कुछ जहाज मुंबई के मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स और कुछ कोलकाता के जीआरएसई में तैयार किए गए हैं। दुनागिरी इस परियोजना की पांचवीं फ्रिगेट है। जहाज के ढांचे, कई उपकरणों, सिस्टम और निर्माण में करीब 75 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है।

आईएनएस संशोधक: समुद्र की गहराई और रास्तों का नक्शा तैयार करने वाला जहाज

तीनों प्लेटफॉर्म में आईएनएस संशोधक का काम अलग है। यह सर्वे वेसल लार्ज श्रेणी का जहाज है। आम भाषा में समझें तो यह नौसेना का समुद्री सर्वे करने वाला जहाज है। इसका उपयोग समुद्र की गहराई मापने, समुद्र तल का नक्शा तैयार करने, तटीय इलाकों की जानकारी जुटाने और नौसैनिक अभियानों के लिए जरूरी हाइड्रोग्राफिक डेटा तैयार करने में किया जाएगा।

किसी भी नौसेना के लिए समुद्री नक्शे बेहद जरूरी होते हैं। जहाजों और पनडुब्बियों को किस रास्ते से गुजरना है, किस क्षेत्र में पानी कितना गहरा है, समुद्र तल पर कहां चट्टानें या अन्य रुकावटें हैं, यह जानकारी सैन्य और नागरिक दोनों तरह के नौवहन के लिए महत्वपूर्ण होती है।

आईएनएस संशोधक को तटीय और गहरे समुद्र दोनों क्षेत्रों में हाइड्रोग्राफिक सर्वे के लिए तैयार किया गया है। इसमें समुद्री और भू-भौतिकीय डेटा जुटाने के लिए आधुनिक सर्वे सिस्टम लगाए गए हैं। जहाज में ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल और रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल जैसे उपकरण भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं। ये उपकरण समुद्र के भीतर जाकर ऐसी जगहों की जानकारी जुटाने में मदद करते हैं, जहां सामान्य जहाज के सेंसर की पहुंच सीमित होती है।

यह भी पढ़ें:  BrahMos Aerospace: क्यों विवादों में घिरा देश के लिए अचूक मिसाइल बनाने वाला संस्थान? जानें क्या है पूरा मामला

इसके अलावा सर्वे जहाज बंदरगाहों की योजना, समुद्री मार्गों की सुरक्षा, आपदा के बाद समुद्री क्षेत्र का आकलन और वैज्ञानिक शोध से जुड़े काम भी करते हैं। जरूरत पड़ने पर ऐसे जहाज सीमित स्तर पर सर्च एंड रेस्क्यू, समुद्री शोध और मेडिकल सपोर्ट जैसे कार्यों में भी उपयोगी हो सकते हैं। (GRSE Navratna Status)

आईएनएस अग्रय: उथले समुद्र में पनडुब्बियों को खोजने वाला युद्धपोत

आईएनएस अग्रय एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट है। इसका मुख्य काम समुद्र के उथले क्षेत्रों में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाना और उनके खिलाफ कार्रवाई करना है।

उथले समुद्र में पनडुब्बी रोधी युद्ध आसान नहीं होता। गहरे समुद्र की तुलना में यहां पानी की गहराई कम होती है, समुद्र तल की बनावट अलग होती है और ध्वनि तरंगों का व्यवहार भी बदल जाता है। पनडुब्बियों को खोजने के लिए इस्तेमाल होने वाले सोनार सिस्टम को ऐसे वातावरण में अधिक सटीक और संवेदनशील होना पड़ता है।

आईएनएस अग्रय अर्नाला क्लास की एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट है। इसमें उथले पानी में काम करने वाले सोनार सिस्टम, हल्के टॉरपीडो और स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर लगाए गए हैं। सोनार पानी के भीतर ध्वनि तरंगें भेजकर किसी पनडुब्बी या अन्य वस्तु की स्थिति का पता लगाने में मदद करता है। टॉरपीडो और रॉकेट लॉन्चर पनडुब्बी रोधी कार्रवाई के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।

अग्रय को जीआरएसई ने बनाया है। यह अर्नाला क्लास का चौथा जहाज है, जिसे मार्च 2026 में नौसेना को सौंपा गया था। इस श्रेणी के कुल आठ जहाज जीआरएसई और लार्सन एंड टुब्रो द्वारा बनाए जा रहे हैं। (GRSE Navratna Status)

मार्च में एक ही दिन तीनों जहाज सौंपकर बनाया था रिकॉर्ड

जीआरएसई ने इस साल 30 मार्च को आईएनएस दुनागिरी, आईएनएस संशोधक और आईएनएस अग्रय तीनों जहाज नौसेना को एक ही दिन सौंपे थे। डिफेंस शिपबिल्डिंग में एक ही दिन तीन अलग-अलग श्रेणी के प्लेटफॉर्म की डिलीवरी को महत्वपूर्ण उपलब्धि माना गया था।

कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कुल आठ वॉरशिप और नेवल प्लेटफॉर्म डिलीवर किए। इनमें तीन प्लेटफॉर्म की एक ही दिन डिलीवरी भी शामिल थी। वहीं, जीआरएसई अब केवल छोटे जहाजों तक सीमित नहीं है, बल्कि फ्रिगेट, सर्वे वेसल, एंटी-सबमरीन क्राफ्ट और अन्य जटिल प्लेटफॉर्म पर एक साथ काम कर रहा है। (GRSE Navratna Status)

भारत के पहले स्वदेशी युद्धपोत से शुरू हुआ था सफर

जीआरएसई का इतिहास भारतीय नौसैनिक शिपबिल्डिंग से जुड़ा हुआ है। वर्ष 1961 में, डिफेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग घोषित होने के लगभग एक साल बाद, इस शिपयार्ड ने भारत का पहला स्वदेशी युद्धपोत आईएनएस अजय नौसेना को सौंपा था।

इसके बाद कंपनी ने भारतीय नौसेना, भारतीय तटरक्षक बल और मित्र देशों के लिए कई तरह के जहाज तैयार किए। जीआरएसई ने मॉरीशस सरकार के लिए सीजीएस बराकुडा नाम का भारत का पहला एक्सपोर्ट वॉरशिप भी बनाया था। यह उपलब्धि इसलिए अहम थी क्योंकि इससे भारत ने केवल अपने लिए युद्धपोत बनाने के बजाय मित्र देशों के लिए भी रक्षा प्लेटफॉर्म तैयार करने की क्षमता दिखाई।

यह भी पढ़ें:  बिना गोली चलाए होगी T-90 टैंक गनर्स की ट्रेनिंग! भारतीय सेना खरीदेगी AI बेस्ड वर्चुअल वॉरफील्ड सिमुलेटर

जीआरएसई अब तक 800 से अधिक मरीन प्लेटफॉर्म डिलीवर कर चुका है। इनमें वॉरशिप, गश्ती पोत, सर्वे जहाज, तटरक्षक पोत और अन्य समुद्री प्लेटफॉर्म शामिल हैं। कंपनी के अनुसार उसने भारतीय नौसेना, तटरक्षक बल और मित्र देशों को कुल 118 युद्धपोत दिए हैं, जिनमें 80 भारतीय नौसेना में शामिल किए गए हैं।

जर्मनी के लिए बन रहे हैं 12 जहाज

जीआरएसई डिफेंस शिप्स के साथ कमर्शियल शिपबिल्डिंग में भी सक्रिय है। कंपनी इस समय एक जर्मन ग्राहक के लिए 12 मल्टी पर्पज वेसल तैयार कर रही है। ये जहाज भारत में बन रहे हैं और इन्हें विदेशी ग्राहक को दिया जाना है। इस परियोजना को मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड मॉडल के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।

कंपनी ग्रीन वेसल और ऑटोनॉमस वेसल के क्षेत्र में भी काम कर रही है। ग्रीन वेसल से मतलब ऐसे जहाजों से है, जिनमें ईंधन की खपत और पर्यावरणीय प्रभाव कम करने वाली तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। ऑटोनॉमस वेसल ऐसे प्लेटफॉर्म होते हैं, जो कुछ कार्य सीमित मानव नियंत्रण या डिजिटल सिस्टम के जरिए कर सकते हैं।

जीआरएसई रिसर्च शिप निर्माण में भी विशेष क्षमता रखता है। समुद्री शोध, हाइड्रोग्राफी और समुद्र से जुड़े वैज्ञानिक डेटा जुटाने के लिए रिसर्च वेसल महत्वपूर्ण होते हैं। संशोधक जैसे सर्वे वेसल इसी क्षमता का उदाहरण हैं। (GRSE Navratna Status)

नवरत्न दर्जे के बाद योजनाओं को मिलेगा विस्तार

जीआरएसई इस समय ब्राउनफील्ड और ग्रीनफील्ड दोनों तरह की विस्तार योजनाओं पर काम कर रहा है। ब्राउनफील्ड विस्तार का मतलब मौजूदा शिपयार्ड, वर्कशॉप, डॉक और निर्माण सुविधाओं को बड़ा या आधुनिक बनाना होता है। वहीं ग्रीनफील्ड परियोजना में नई जगह पर नई निर्माण क्षमता विकसित की जाती है।

शिपबिल्डिंग में उत्पादन क्षमता बढ़ाने का मतलब केवल ज्यादा जहाज बनाना नहीं होता। इसके लिए स्टील कटिंग सुविधा, ब्लॉक निर्माण, भारी क्रेन, डॉक, आउटफिटिंग जेटी, परीक्षण सुविधा, डिजाइन टीम, सप्लाई चेन और हजारों छोटे-बड़े उद्योगों का नेटवर्क भी जरूरी होता है।

नवरत्न दर्जा मिलने के बाद जीआरएसई के बोर्ड को निवेश और विस्तार से जुड़े फैसलों में अधिक अधिकार मिलेंगे। कंपनी के लिए यह बदलाव ऐसे समय आया है, जब नौसेना के लिए नए युद्धपोतों, सर्वे प्लेटफॉर्म, पनडुब्बी रोधी जहाजों और गश्ती पोतों की जरूरत लगातार बनी हुई है।

21 जून को दुनागिरी, संशोधक और अग्रय की कमीशनिंग के साथ जीआरएसई के बनाए तीन अलग-अलग समुद्री प्लेटफॉर्म औपचारिक रूप से भारतीय नौसेना की ऑपरेशनल फ्लीट का हिस्सा बन जाएंगे। (GRSE Navratna Status)

Author

  • Herry Photo

    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US
हरेंद्र चौधरी
हरेंद्र चौधरी
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

Most Popular