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भारत की MArG तोप पर अमेरिका का भरोसा! कल्याणी और एएम जनरल की साझेदारी से बदल सकता है 155 एमएम आर्टिलरी का बाजार

MArG एक ट्रक बेस्ड आर्टिलरी सिस्टम है जिसमें 155 मिमी की तोप को एक हाई मोबिलिटी व्हीकल पर लगाया गया है। पारंपरिक तोपों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में काफी समय लगता है...

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📍नई दिल्ली/पेरिस | 18 Jun, 2026, 9:42 PM

MArG 155mm Artillery System: भारत के रक्षा उद्योग के लिए पेरिस से एक बड़ी खबर सामने आई है। भारत फोर्ज की डिफेंस युनिट कल्याणी स्ट्रैटेजिक सिस्टम्स लिमिटेड (KSSL) और अमेरिकी सैन्य वाहन निर्माता कंपनी एएम जनरल ने एक महत्वपूर्ण स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप की घोषणा की है। दोनों कंपनियों ने यूरोसैटरी 2026 डिफेंस एक्सपो के दौरान समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य दुनिया भर की सेनाओं के लिए नई पीढ़ी के मोबाइल 155 मिमी माउंटेड आर्टिलरी सिस्टम डेवलप करना और उन्हें वैश्विक बाजार में पेश करना है।

सूत्रों के मुताबिक यह समझौता भारत में डेवलप एक स्वदेशी आर्टिलरी प्लेटफॉर्म को अमेरिकी सैन्य तकनीक और वैश्विक नेटवर्क के साथ जोड़ने की कोशिश है। खास बात यह है कि इसी साझेदारी के आधार पर एएम जनरल ने अमेरिकी सेना के मोबाइल टैक्टिकल कैनन (MTC) प्रोग्राम में भी हिस्सा लेने का प्रस्ताव दिया है।

पेरिस में आयोजित यूरोसैटरी दुनिया की सबसे बड़ी डिफेंस एग्जिबिशन में गिनी जाती है। यहां दुनिया भर की कंपनियां अपने नए हथियार और सैन्य प्लेटफॉर्म पेश करती हैं। इसी मंच पर कल्याणी स्ट्रैटेजिक और एएम जनरल ने संयुक्त रूप से एलान किया कि वे आधुनिक युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए हल्के, तेज, मजबूत और हर मौसम में काम करने वाले माउंटेड आर्टिलरी सिस्टम डेवलप करेंगे।

कंपनियों का कहना है कि आज के युद्धक्षेत्र में सिर्फ भारी मारक क्षमता काफी नहीं है। किसी भी आर्टिलरी सिस्टम को तेजी से तैनात होने, जल्दी स्थान बदलने और कठिन इलाकों में काम करने में सक्षम होना चाहिए। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए मल्टी टेरेन आर्टिलरी गन (MArG) प्लेटफॉर्म को आगे बढ़ाया जा रहा है।

MArG 155mm Artillery System
MArG 155mm Artillery System (Image Source: KSSL)

MArG 155mm Artillery System: क्या है MArG सिस्टम?

MArG एक ट्रक बेस्ड आर्टिलरी सिस्टम है जिसमें 155 मिमी की तोप को एक हाई मोबिलिटी व्हीकल पर लगाया गया है। पारंपरिक तोपों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में काफी समय लगता है। वहीं MArG को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह तेजी से किसी भी इलाके में पहुंच सके, फायरिंग कर सके और तुरंत अपनी जगह बदल सके, जिसे शूट एंड स्कूट भी कहा जाता है।

आधुनिक युद्ध में यह क्षमता बेहद महत्वपूर्ण हो चुकी है क्योंकि दुश्मन का काउंटर बैटरी रडार सिस्टम कुछ ही मिनटों में तोप की लोकेशन का पता लगा सकता है। (MArG 155mm Artillery System)

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अमेरिका की नजर भारतीय आर्टिलरी पर क्यों?

इस समझौते का सबसे महत्वपूर्ण पहलू अमेरिकी सेना का मोबाइल टैक्टिकल कैनन प्रोग्राम माना जा रहा है। अमेरिकी सेना फिलहाल एम777 टोइड हॉवित्जर का इस्तेमाल करती है, लेकिन अब वह इससे भी ज्यादा मोबाइल और तुरंत रेस्पॉन्स देने वाले सिस्टम की तलाश में है।

एएम जनरल ने अमेरिकी सरकार को जो प्रस्ताव दिया है, उसमें कल्याणी स्ट्रैटेजिक के MArG प्लेटफॉर्म को आधार बनाया गया है। यदि यह प्रस्ताव चुना जाता है तो 2027 से इसकी डिलीवरी शुरू की जा सकती है।

भारत फोर्ज के वाइस चेयरमैन और जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर अमित कल्याणी के मुताबिक, एएम जनरल के साथ यह साझेदारी भारत की आर्टिलरी तकनीक और क्षमताओं पर उनके भरोसे को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि कल्याणी स्ट्रैटेजिक आधुनिक युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एडवांस और युद्ध में परखे जा चुके सिस्टम्स डेवलप कर रही है। यह समझौता दुनिया की सेनाओं को नई पीढ़ी के प्रभावी और भरोसेमंद आर्टिलरी समाधान उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

वहीं, एएम जनरल के प्रेसिडेंट और सीईओ जॉन चैडबोर्न ने कहा कि कल्याणी स्ट्रैटेजिक के साथ काम करना दोनों कंपनियों की अपने सहयोगी देशों और सैनिकों को बेहतर सैन्य क्षमता उपलब्ध कराने की साझा प्रतिबद्धता को दिखाता है। उन्होंने कहा कि एएम जनरल की पेटेंटेड सॉफ्ट रिकॉइल टेक्नोलॉजी को कल्याणी स्ट्रैटेजिक के आधुनिक आर्टिलरी प्लेटफॉर्म के साथ जोड़कर ऐसी नई क्षमताएं डेवलप की जाएंगी, जो बदलते युद्धक्षेत्र में सेनाओं को महत्वपूर्ण बढ़त दे सकती हैं।

रक्षा उद्योग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि किसी भारतीय निजी कंपनी के डिजाइन पर आधारित आर्टिलरी सिस्टम का अमेरिकी सेना के कार्यक्रम में शामिल होना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

4×4 ट्रक पर लगी 155 मिमी की भारी तोप

MArG सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत इसका हल्का और कॉम्पैक्ट डिजाइन है। सामान्य तौर पर 155 मिमी की तोपों को 6×6 या 8×8 मिलिट्री व्हीकल्स पर लगाया जाता है। लेकिन कल्याणी स्ट्रैटेजिक ने इसे 4×4 हाई मोबिलिटी प्लेटफॉर्म पर डेवलप किया है।

MArG-39, MArG-45 और MArG-52 इसके प्रमुख वेरिएंट हैं। इनमें कैलिबर और मारक दूरी के अनुसार अंतर है, लेकिन मूल डिजाइन समान है। कंपनी का दावा है कि MArG-52 दुनिया का सबसे हल्का 155 मिमी/52 कैलिबर माउंटेड आर्टिलरी सिस्टम है। इसका वजन लगभग 24 टन है जबकि यह 40 किलोमीटर से अधिक दूरी तक टारगेट पर हमला कर सकता है।

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MArG 155mm Artillery System
MArG 155mm Artillery System (Image Source: KSSL)

कितनी है मारक क्षमता?

कंपनी के अनुसार MArG में लगी 155 मिमी/52 कैलिबर तोप 40 किलोमीटर से अधिक दूरी तक हाई एक्सप्लोसिव प्रोजेक्टाइल दाग सकती है।

सिस्टम अपने साथ 20 से अधिक गोले और प्रोपेलेंट चार्ज लेकर चल सकता है। जिससे फायरिंग के लिए इसे बार-बार सप्लाई वाहन पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।

रक्षा सूत्रों के मुताबिक एक्सटेंडेड रेंज गोला-बारूद के साथ इसकी मारक दूरी और बढ़ सकती है। हालांकि सटीक आंकड़े इस्तेमाल किए जाने वाले एम्युनिशन पर निर्भर करते हैं। (MArG 155mm Artillery System)

क्या है सॉफ्ट रिकॉइल टेक्नोलॉजी?

इस साझेदारी का सबसे तकनीकी पहलू एएम जनरल की पेटेंटेड सॉफ्ट रिकॉइल टेक्नोलॉजी (SRT) है। सामान्य भाषा में समझें तो जब कोई बड़ी तोप फायर करती है तो पीछे की ओर बहुत तेज झटका लगता है। इसे रिकॉइल कहा जाता है। इसी वजह से भारी तोपों को मजबूत और भारी प्लेटफॉर्म की जरूरत पड़ती है।

सॉफ्ट रिकॉइल टेक्नोलॉजी इस झटके को काफी हद तक कम कर देती है। इसका फायदा यह होता है कि हल्के वाहन पर भी बड़ी तोप लगाई जा सकती है। (MArG 155mm Artillery System)

पहाड़, रेगिस्तान और सीमावर्ती इलाकों के लिए उपयोगी

MArG सिस्टम को हर तरह के मौसम और इलाके में काम करने के लिए डिजाइन किया गया है। कंपनी का कहना है कि यह पहाड़ी क्षेत्रों, रेगिस्तानी इलाकों और सीमावर्ती क्षेत्रों में भी प्रभावी ढंग से काम कर सकता है।

भारत जैसे देश के लिए यह महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश और पश्चिमी सीमा के कई इलाकों में भारी सैन्य वाहनों की तैनाती चुनौतीपूर्ण होती है।

MArG का हल्का डिजाइन और हाई मोबिलिटी इसे ऐसे इलाकों में उपयोगी बनाता है जहां बड़ी और भारी आर्टिलरी प्रणालियां आसानी से नहीं पहुंच पातीं। (MArG 155mm Artillery System)

शूट एंड स्कूट क्षमता क्यों है अहम?

यूक्रेन युद्ध और हाल के कई संघर्षों ने दिखाया है कि आर्टिलरी की लोकेशन बहुत जल्दी ट्रैक की जा सकती है।

इसी वजह से दुनिया की सेनाएं ऐसी तोपें चाहती हैं जो फायरिंग के बाद तुरंत अपनी स्थिति बदल सकें। इसे शूट एंड स्कूट क्षमता कहा जाता है।

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MArG को इसी सिद्धांत पर डेवलप किया गया है। यह कम समय में फायरिंग कर सकती है और फिर तेजी से नई लोकेशन पर पहुंच सकती है। (MArG 155mm Artillery System)

भारतीय सेना के पास नहीं, लेकिन आर्मेनिया के पास है MArG

सूत्रों के मुताबिक MArG सिस्टम को भारतीय सेना के लिए आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत विकसित किया गया था। 2021 में लॉन्चिंग के बाद MArG 155-BR ने लद्दाख और अन्य हाई-एल्टीट्यूड इलाकों में कई ट्रायल्स पूरे किए। सूत्रों का कहना है कि इन परीक्षणों के दौरान सिस्टम ने अपनी मोबिलिटी और फायरपावर का प्रदर्शन किया था।

दिलचस्प बात यह है कि भारत फोर्ज और कल्याणी समूह को भारतीय सेना से एडवांस्ड टोव्ड आर्टिलरी गन सिस्टम (ATAGS) के लिए बड़ा ऑर्डर मिल चुका है। करीब 184 ATAGS गन भारतीय सेना के लिए खरीदी जा रही हैं। लेकिन MArG, जो उसी तकनीकी परिवार का ट्रक-माउंटेड और ज्यादा मोबाइल वर्जन माना जाता है, अभी सेना में औपचारिक रूप से शामिल नहीं हुआ है।

फिलहाल MArG को ट्रायल, इवैल्यूएशन और एक्सपोर्ट मार्केट पर केंद्रित प्लेटफॉर्म के रूप में देखा जा रहा है। कंपनी को आर्मेनिया से 72 MArG 155-BR सप्लाई का बड़ा ऑर्डर मिल चुका है। रक्षा उद्योग के आंकड़ों के अनुसार पिछले कुछ सालों में कल्याणी स्ट्रैटेजिक भारत के सबसे सफल निजी रक्षा निर्यातकों में शामिल हो गई है।

रक्षा बाजार के जानकारों का कहना है कि दुनिया भर में मोबाइल आर्टिलरी की मांग तेजी से बढ़ रही है। फ्रांस की सीजर, स्वीडन की आर्चर और दक्षिण कोरिया के कई सिस्टम्सपहले से इस बाजार में मौजूद हैं। अब कल्याणी स्ट्रैटेजिक और एएम जनरल की साझेदारी इसी बाजार में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही है। (MArG 155mm Artillery System)

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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