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रक्षा मंत्रालय का बड़ा फैसला: 62 हजार OFB कर्मचारी चुन सकेंगे कॉमन एब्जॉर्प्शन पैकेज या केंद्रीय कर्मचारी का दर्जा

जब अक्टूबर 2021 में ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड को भंग कर उसकी 41 प्रोडक्शन युनिट्स को सात नए डिफेंस पीएसयू में बदला गया था, तब हजारों कर्मचारियों के सामने सबसे बड़ा सवाल उनकी सेवा शर्तों को लेकर था...

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📍नई दिल्ली | 18 Jun, 2026, 11:12 AM

Defence Ministry OFB employees: रक्षा क्षेत्र में काम कर रहे करीब 62 हजार कर्मचारियों के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। पूर्व ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड (ओएफबी) के कॉर्पोरेटाइजेशन के लगभग पांच साल बाद आखिरकार सरकार ने कर्मचारियों के भविष्य को लेकर लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितता को खत्म करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। रक्षा मंत्रालय के रक्षा उत्पादन विभाग (डीडीपी) ने एक ऑफिस मेमोरेंडम जारी कर बताया है कि ओएफबी से बनी सातों डिफेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (डीपीएसयू) में कर्मचारियों के लिए कॉमन एब्जॉर्प्शन पैकेज लागू किया जाएगा।

सूत्रों के मुताबिक 11 जून को हुई एम्पावर्ड ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स (ईजीओएम) की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी, जिसके बाद 15 जून को डिफेंस प्रोडक्शन डिपार्टमेंट ने इसका औपचारिक आदेश जारी किया। इस फैसले के तहत कर्मचारियों को दो विकल्प दिए जाएंगे। पहला, वे संबंधित डीपीएसयू में स्थायी रूप से एब्जॉर्प्शन स्वीकार कर सकते हैं। दूसरा, यदि वे एब्जॉर्प्शन नहीं चुनना चाहते तो उन्हें रिटायर होने तक डीम्ड डेपुटेशन पर रखा जाएगा और वे केंद्रीय सरकारी कर्मचारी के रूप में अपनी मौजूदा सुविधाएं प्राप्त करते रहेंगे।

इस फैसले को 2021 में हुए ओएफबी कॉर्पोरेटाइजेशन के बाद पैदा हुई सबसे बड़ी कर्मचारी चिंता का समाधान भी माना जा रहा है। पिछले पांच सालों से कर्मचारी संगठनों, यूनियनों और विभिन्न कर्मचारी मंचों की सबसे बड़ी मांग यही थी कि कर्मचारियों को स्पष्ट रूप से यह बताया जाए कि उनका भविष्य क्या होगा और क्या वे केंद्रीय सरकारी कर्मचारी का दर्जा बनाए रख पाएंगे।

Defence Ministry OFB employees: क्या थी कर्मचारियों की चिंता की वजह?

जब अक्टूबर 2021 में ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड को भंग कर उसकी 41 प्रोडक्शन युनिट्स को सात नए डिफेंस पीएसयू में बदला गया था, तब हजारों कर्मचारियों के सामने सबसे बड़ा सवाल उनकी सेवा शर्तों को लेकर था। उस समय कर्मचारियों को सामूहिक रूप से नए डीपीएसयू में डीम्ड डेपुटेशन पर भेजा गया था। शुरुआत में यह व्यवस्था दो साल के लिए थी, लेकिन बाद में इसे कई बार बढ़ाया गया।

सूत्रों के मुताबिक कर्मचारियों को सबसे ज्यादा चिंता पेंशन, मेडिकल सुविधाओं, करियर प्रोग्रेशन, सीएसडी कैंटीन, सेलरी स्ट्रक्चर और नौकरी की सुरक्षा को लेकर थी। कई यूनियनों ने आशंका जताई थी कि स्थायी एब्जॉर्प्शन की स्थिति में कर्मचारियों की कुछ केंद्रीय सरकारी सुविधाएं प्रभावित हो सकती हैं। यही वजह थी कि कॉर्पोरेटाइजेशन के पांच साल बाद भी बड़ी संख्या में कर्मचारी अंतिम फैसले का इंतजार कर रहे थे।

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अब जारी आदेश में सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जो कर्मचारी एब्जॉर्प्शन नहीं चुनेंगे, वे रिटायरमेंट तक केंद्रीय सरकार के कर्मचारी बने रहेंगे और उन पर केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए लागू सभी नियम, वेतनमान, भत्ते, छुट्टी, मेडिकल सुविधाएं और सेवा शर्तें लागू रहेंगी। (Defence Ministry OFB employees)

पांच साल पुरानी अनिश्चितता खत्म करने की कोशिश

रक्षा मंत्रालय के भीतर पिछले कई वर्षों से कर्मचारियों की सबसे बड़ी चिंता उनकी सेवा शर्तों को लेकर थी। ओएफबी के कॉर्पोरेटाइजेशन के बाद कर्मचारियों को नई कंपनियों में भेज तो दिया गया था, लेकिन स्थायी एब्जॉर्प्शन और केंद्रीय सरकारी कर्मचारी का दर्जा बनाए रखने को लेकर स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आई थी।

कई कर्मचारी संगठनों और यूनियनों का कहना था कि जब तक सरकार स्पष्ट रूप से यह नहीं बताएगी कि कर्मचारियों को क्या विकल्प मिलेंगे, तब तक असमंजस बना रहेगा। अब जारी आदेश में पहली बार सरकार ने साफ कर दिया है कि कर्मचारियों को अपनी पसंद का विकल्प चुनने का अवसर दिया जाएगा।

रक्षा सूत्रों के अनुसार यह निर्णय इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें किसी कर्मचारी पर अनिवार्य एब्जॉर्प्शन नहीं थोपा गया है। कर्मचारियों को यह अधिकार दिया गया है कि वे नई डीपीएसयू कंपनी में स्थायी रूप से शामिल होना चाहते हैं या केंद्रीय सरकार के कर्मचारी के रूप में अपनी वर्तमान स्थिति बनाए रखना चाहते हैं। (Defence Ministry OFB employees)

246 साल पुरानी संस्था थी ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड

ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड भारतीय डिफेंस प्रोडक्शन सिस्टम की सबसे पुरानी संस्थाओं में से एक था। इसकी शुरुआत वर्ष 1775 में कोलकाता के काशीपुर क्षेत्र में हुई थी। समय के साथ यह देश का सबसे बड़ा सरकारी रक्षा उत्पादन नेटवर्क बन गया।

ओएफबी के तहत 41 उत्पादन इकाइयां काम करती थीं, जहां छोटे हथियार, गोला-बारूद, टैंक, बख्तरबंद वाहन, तोपें, पैराशूट, ऑप्टिकल उपकरण, सैनिकों की वर्दियां और अन्य सैन्य सामग्री तैयार की जाती थी।

रक्षा उत्पादन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि दशकों तक ओएफबी भारतीय सेनाओं की जरूरतों को पूरा करने वाली मुख्य संस्था रही। हालांकि समय के साथ दक्षता, लागत, प्रतिस्पर्धा और आधुनिकीकरण को लेकर सवाल उठने लगे थे। इसी के बाद सरकार ने इसे कॉर्पोरेट मॉडल में बदलने का फैसला लिया। (Defence Ministry OFB employees)

सात नई कंपनियों में बांटी गई थीं 41 फैक्ट्रियां

1 अक्टूबर 2021 से ओएफबी की 41 प्रोडक्शन यूनिट्स को सात नई डिफेंस पीएसयू में ट्रांसफर कर दिया गया। म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड को गोला-बारूद और विस्फोटक उत्पादन की जिम्मेदारी मिली। आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड को टैंक और बख्तरबंद वाहन निर्माण का काम दिया गया।

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इसी तरह एडवांस्ड वेपंस एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड को आधुनिक हथियार प्रणालियों की जिम्मेदारी मिली, जबकि यंत्रा इंडिया लिमिटेड मशीन टूल्स और इंजीनियरिंग उत्पादों पर केंद्रित हुई। वहीं, इंडिया ऑप्टेल लिमिटेड को ऑप्टिकल और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम मिले। ट्रूप कम्फर्ट्स लिमिटेड सैनिकों के कपड़े और उपकरण तैयार करने लगी, जबकि ग्लाइडर्स इंडिया लिमिटेड को पैराशूट और एयरड्रॉप सिस्टम का काम सौंपा गया।

रक्षा मंत्रालय का उद्देश्य इन कंपनियों को अधिक स्वायत्तता देकर उन्हें प्रतिस्पर्धी और व्यावसायिक रूप से सक्षम बनाना था।

क्या कहा गया है नए आदेश में?

15 जून को जारी ऑफिस मेमोरेंडम में कहा गया है कि सातों नई डीपीएसयू द्वारा तैयार किया गया कॉमन एब्जॉर्प्शन पैकेज सभी पात्र कर्मचारियों को पेश किया जाएगा। इसमें ओएफ स्कूल और ओएफ अस्पतालों के कर्मचारी शामिल नहीं होंगे।

आदेश के अनुसार पूर्ववर्ती ओएफबी के सभी कर्मचारियों से पूछा जाएगा कि वे नई डीपीएसयू में स्थायी एब्जॉर्प्शन चाहते हैं या नहीं। इसमें वे कर्मचारी भी शामिल होंगे जो फिलहाल अन्य मंत्रालयों या विभागों में प्रतिनियुक्ति पर काम कर रहे हैं।

सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि जो कर्मचारी एब्जॉर्प्शन का विकल्प नहीं चुनेंगे, उन्हें रिटायरमेंट तक डीम्ड डेपुटेशन पर रखा जाएगा। ऐसे कर्मचारी केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों पर लागू सभी नियमों, वेतनमान, भत्तों, छुट्टियों, मेडिकल सुविधाओं और करियर प्रोग्रेशन के अधिकारों के तहत काम करते रहेंगे। (Defence Ministry OFB employees)

डीम्ड डेपुटेशन का क्या मतलब है?

डीम्ड डेपुटेशन का अर्थ है कि कर्मचारी तकनीकी रूप से केंद्रीय सरकार का कर्मचारी बना रहता है लेकिन उसका कार्यस्थल किसी अन्य संगठन में होता है।

रक्षा मंत्रालय के आदेश के मुताबिक ऐसे कर्मचारियों को केंद्रीय सरकारी सेवा नियमों के तहत मिलने वाली सुविधाएं जारी रहेंगी। इसका मतलब है कि उनकी सेवा शर्तें पहले की तरह लागू रहेंगी और वे सरकारी कर्मचारी के रूप में माने जाएंगे।

रक्षा सूत्रों का कहना है कि यही वह बिंदु है जिसकी मांग कर्मचारी संगठन लंबे समय से कर रहे थे। (Defence Ministry OFB employees)

अभी तक सामने नहीं आईं पैकेज की पूरी शर्तें

हालांकि सरकार ने कॉमन एब्जॉर्प्शन पैकेज की घोषणा कर दी है, लेकिन इसकी विस्तृत शर्तें अभी सार्वजनिक नहीं की गई हैं।

आधिकारिक आदेश में केवल इतना कहा गया है कि सातों डीपीएसयू ने मिलकर एक समान पैकेज तैयार किया है। लेकिन इसमें वेतन सुरक्षा, पेंशन व्यवस्था, मेडिकल सुविधाएं, प्रमोशन पॉलिसी और अन्य लाभों का विस्तृत विवरण शामिल नहीं है।

रक्षा सूत्रों के अनुसार कर्मचारियों से विकल्प मांगने से पहले पैकेज का पूरा विवरण साझा किया जाएगा ताकि वे दोनों विकल्पों की तुलना कर सकें। (Defence Ministry OFB employees)

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यूनियनों ने किया इस फैसले का स्वागत

कर्मचारी संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है। ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (एआईडीईएफ) सहित कई संगठनों का कहना है कि यह लंबे समय से चल रही मांगों का परिणाम है।

यूनियन नेताओं का तर्क रहा है कि कर्मचारियों को अपनी पसंद का विकल्प मिलना चाहिए और किसी पर भी एब्जॉर्प्शन थोपा नहीं जाना चाहिए। कई संगठनों ने केंद्रीय सरकारी कर्मचारी का दर्जा बनाए रखने के विकल्प को महत्वपूर्ण बताया है।

हालांकि कुछ यूनियनें अब भी ओएफबी के कॉर्पोरेटाइजेशन को लेकर अपनी पुरानी आपत्तियां दोहरा रही हैं और इस विषय पर अलग रुख रखती हैं। (Defence Ministry OFB employees)

31 मार्च 2027 तक बढ़ाया गया ट्रांजिशन पीरियड

सरकार ने केवल विकल्प देने का फैसला ही नहीं किया है बल्कि ट्रांजिशन पीरियड भी बढ़ाया है। आदेश के अनुसार 1 अक्टूबर 2026 से 31 मार्च 2027 तक सभी कर्मचारियों का ट्रांसफर और डीम्ड डेपुटेशन पहले की शर्तों पर जारी रहेगा।

रक्षा मंत्रालय का मानना है कि इस अवधि के दौरान कर्मचारियों को पैकेज समझने, विकल्प चुनने और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करने का पर्याप्त समय मिल जाएगा। (Defence Ministry OFB employees)

रक्षा उत्पादन व्यवस्था से भी जुड़ा है फैसला

रक्षा क्षेत्र के अधिकारियों का कहना है कि यह केवल कर्मचारियों से जुड़ा फैसला नहीं है। ओएफबी से बनी कंपनियां आज भारतीय रक्षा उत्पादन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। गोला-बारूद, हथियार, बख्तरबंद वाहन, ऑप्टिकल सिस्टम और अन्य सैन्य उपकरणों के उत्पादन में इन कंपनियों की बड़ी भूमिका है।

इसी वजह से कर्मचारियों की स्थिति को लेकर स्पष्टता लाना जरूरी माना जा रहा था। पिछले कुछ सालों में इन कंपनियों ने कई बड़े डिफेंस ऑर्डर पूरे किए हैं और सेना, वायुसेना तथा नौसेना के लिए महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म और उपकरण तैयार किए हैं। (Defence Ministry OFB employees)

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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