📍नई दिल्ली | 26 May, 2026, 4:22 PM
Johnnette JM-1 Loitering Munition: भारत के डिफेंस सेक्टर में तेजी से उभर रहे स्टार्टअप जॉनेट टेक्नोलॉजीज ने म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड (एमआईएल) के साथ एक अहम समझौता किया है। इस समझौते के तहत दोनों कंपनियां मिलकर भारतीय सेना के लिए लॉइटरिंग म्यूनिशन्स और अनमैन्ड कॉम्बैट एरियल व्हीकल (यूसीएवी) प्लेटफॉर्म्स पर काम करेंगी।
जॉनेट टेक्नोलॉजीज के सीईओ जॉन लिविंगस्टोन ने बताया कि एमआईएल के साथ हुआ यह एमओयू भविष्य में जॉनेट की जेएम सीरीज लॉइटरिंग म्यूनिशन्स और आने वाले यूसीएवी प्रोग्राम्स में वारहेड इंटीग्रेशन के लिए अहम भूमिका निभाएगा।
बता दें कि जॉनेट टेक्नोलॉजीज नोएडा स्थित एक भारतीय डिफेंस स्टार्टअप है, जो ड्रोन, लॉइटरिंग म्यूनिशन और अनमैन्ड सिस्टम्स पर काम करता है।
कंपनी का सबसे चर्चित प्रोडक्ट जेएम-1 लॉइटरिंग म्यूनिशन है। यह एक ऐसा ड्रोन बेस्ड वेपन है जो हवा में कुछ समय तक मंडरा कर सही टारगेट मिलने पर सीधे उस पर हमला कर सकता है।
रक्षा सूत्रों के मुताबिक भारतीय सेना पहले ही जॉनेट से 150 से ज्यादा जेएम-1 लॉइटरिंग म्यूनिशन खरीद चुकी है। जॉनेट के सिस्टम्स को खास तौर पर हाई एल्टीट्यूड इलाकों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है।
लद्दाख और उत्तरी सीमाओं पर ऊंचाई वाले इलाकों में सामान्य ड्रोन को ऑपरेट करना मुश्किल होता है। कम ऑक्सीजन, तेज हवा और बेहद ठंडे मौसम में सिस्टम की क्षमता प्रभावित होती है। कंपनी का दावा है कि जेएम-1 ऐसे हालात में भी ऑपरेशन कर सकता है। (Johnnette JM-1 Loitering Munition)
लॉइटरिंग म्यूनिशन को आम भाषा में “सुसाइड ड्रोन” भी कहा जाता है। यह ड्रोन और मिसाइल का मिला-जुला रूप होता है। इसे किसी इलाके में भेजा जाता है, जहां यह कुछ समय तक हवा में रहकर टारगेट तलाशता है।
जैसे ही टारगेट मिलता है, यह सीधे उससे टकराकर विस्फोट कर देता है। आधुनिक युद्ध में ऐसे सिस्टम का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है।
रूस-यूक्रेन युद्ध, इजराइल और मध्य पूर्व के संघर्षों में लॉइटरिंग म्यूनिशन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल देखा गया है।
जेएम-1 की क्या हैं खासियतें
जॉनेट का जेएम-1 सिस्टम खास तौर पर पहाड़ी और कठिन इलाकों के लिए डिजाइन किया गया है। कंपनी के मुताबिक इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित एल्गोरिदम इस्तेमाल किया गया है।
यह सिस्टम 18 हजार फीट से ज्यादा ऊंचाई वाले इलाकों में भी सटीक हमला कर सकता है। यही वजह है कि इसे लद्दाख और ऊंचाई वाले सीमावर्ती इलाकों के लिए उपयोगी माना जा रहा है।
जेएम-1 लगभग 25 मिनट तक हवा में रह सकता है और कई किलोमीटर दूर तक लक्ष्य पर हमला कर सकता है। इसे कम लागत वाला और तेजी से तैनात होने वाला हथियार बताया जाता है।
कंपनी का दावा है कि इस सिस्टम में 85 प्रतिशत से ज्यादा स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। (Johnnette JM-1 Loitering Munition)
एमआईएल क्या करती है
म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड (एमआईएल) भारत सरकार की रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी है। यह कंपनी देश के लिए गोला-बारूद, बम, रॉकेट और दूसरे विस्फोटक हथियार तैयार करती है।
ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड के पुनर्गठन के बाद एमआईएल का गठन किया गया था। कंपनी भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना को अलग-अलग तरह की युद्ध सामग्री उपलब्ध कराती है।
अब जॉनेट और एमआईएल मिलकर ड्रोन प्लेटफॉर्म्स में आधुनिक वारहेड इंटीग्रेशन पर काम करेंगे।
इस समझौते का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा “वारहेड इंटीग्रेशन” है। यानी जॉनेट के ड्रोन और यूसीएवी प्लेटफॉर्म्स में एमआईएल के बनाए विस्फोटक और वारहेड लगाए जाएंगे।
इससे ड्रोन की स्ट्राइक क्षमता और ज्यादा प्रभावी होगी। अलग-अलग मिशन के हिसाब से अलग तरह के वारहेड इस्तेमाल किए जा सकेंगे।
रक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि आधुनिक युद्ध में केवल ड्रोन बनाना काफी नहीं होता। उसके साथ सही सेंसर, गाइडेंस और वारहेड का तालमेल भी जरूरी होता है।
एमआईएल के पास गोला-बारूद और विस्फोटक सिस्टम का बड़ा अनुभव है। वहीं जॉनेट नई ड्रोन टेक्नोलॉजी पर काम कर रही है। इसलिए दोनों कंपनियों का यह सहयोग महत्वपूर्ण माना जा रहा है। (Johnnette JM-1 Loitering Munition)
यूसीएवी प्रोग्राम पर भी काम
जॉनेट ने कहा है कि यह साझेदारी उसके आने वाले यूसीएवी प्रोग्राम्स के लिए भी अहम होगी। यूसीएवी यानी अनमैन्ड कॉम्बैट एरियल व्हीकल ऐसे लड़ाकू ड्रोन होते हैं जो बिना पायलट के ऑपरेशन कर सकते हैं। इन्हें निगरानी, हमला और हाई रिस्क मिशन के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
दुनिया के कई बड़े देश अब यूसीएवी बेस्ड वॉरफेयर सिस्टम पर तेजी से काम कर रहे हैं। भारत भी अब इस क्षेत्र में अपनी क्षमता बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
वहीं, कंपनी UCAV प्रोग्राम के साथ कंपनी मीडियम अल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस (MALE) कैटेगरी में भी एंट्री करने की तैयारी कर रही है। (Johnnette JM-1 Loitering Munition)
भारतीय सेना में बढ़ रहा ड्रोन का इस्तेमाल
पिछले कुछ सालों में भारतीय सेना ने तेजी से ड्रोन और लॉइटरिंग म्यूनिशन की खरीदे हैं। सीमा पर निगरानी, दुश्मन की पोस्ट पर हमला और रियल टाइम इंटेलिजेंस के लिए इन सिस्टम्स का इस्तेमाल बढ़ा है।
विशेषकर चीन और पाकिस्तान सीमा पर छोटे ड्रोन और लॉइटरिंग म्यूनिशन को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आत्मनिर्भर भारत पर जोर
भारत सरकार लंबे समय से रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर जोर दे रही है। सरकार चाहती है कि भारतीय सेना ज्यादा से ज्यादा स्वदेशी हथियार इस्तेमाल करे।
इसी वजह से निजी स्टार्टअप्स को भी रक्षा क्षेत्र में तेजी से अवसर दिए जा रहे हैं। iDEX जैसे कार्यक्रमों के जरिए नई कंपनियों को सेना और रक्षा मंत्रालय के साथ काम करने का मौका मिल रहा है। (Johnnette JM-1 Loitering Munition)

