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झांसी पहुंचकर आर्मी कमांडर ने देखी ‘शौर्य स्क्वाड्रन’, व्हाइट टाइगर डिवीजन में शोकेस किए गए न्यू जनरेशन वेपंस

शौर्य स्क्वाड्रन का कॉन्सैप्ट पहली बार मार्च 2026 में आयोजित एक्सरसाइज अमोघ ज्वाला के दौरान सामने आया था। यह अभ्यास झांसी स्थित बबीना फील्ड फायरिंग रेंज में आयोजित किया गया था...

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📍नई दिल्ली/झांसी | 18 Jul, 2026, 8:05 PM

Shaurya Squadron Indian Army: भारतीय सेना तेजी से खुद को भविष्य के युद्धों के लिए तैयार कर रही है। सेना अब नए हथियार खरीदने के साथ अपने पूरे मिलिट्री स्ट्रक्चर में भी बदलाव कर रही है। इसी बदलाव के तहत इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप (आईबीजी), इन्फैंट्री के लिए अश्नि प्लाटून, आर्टिलरी के लिए शक्तिबाण रेजिमेंट और दिव्यास्त्र बैटरी जैसी नई फॉर्मेशंस बनाई जा रही हैं। इसके साथ ही आर्मर्ड कोर यानी टैंक रेजिमेंट के लिए ‘शौर्य स्क्वाड्रन’ भी तैयार की जा रही है। जिसके खबर सबसे पहले रक्षा समाचार ने प्रकाशित की थी।

हालांकि भारतीय सेना ने अभी तक शौर्य स्क्वाड्रन की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन हाल के सैन्य कार्यक्रमों और वरिष्ठ अधिकारियों के दौरों से साफ संकेत मिले हैं कि सेना इस नई फॉर्मेशन पर तेजी से काम कर रही है। इसका उद्देश्य टैंक यूनिट्स को ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और काउंटर-ड्रोन तकनीक से लैस करना है।

Shaurya Squadron Indian Army: सेना बदल रही है युद्ध की पूरी सोच

पिछले कुछ साल में दुनिया के कई युद्धों ने यह साबित किया है कि आधुनिक युद्ध अब केवल टैंक, तोप और सैनिकों के दम पर नहीं लड़े जाते। रूस-यूक्रेन युद्ध में छोटे ड्रोन ने कई बार भारी-भरकम टैंकों को भी नष्ट कर दिया। इसी तरह पश्चिम एशिया के युद्धों में भी ड्रोन और यूएवी ने युद्ध की दिशा बदलने में बड़ी भूमिका निभाई।

भारतीय सेना ने इन अनुभवों का अध्ययन किया है। अब सेना का फोकस ऐसी लड़ाकू क्षमता तैयार करना है, जिसमें टैंक, ड्रोन, आर्टिलरी, हेलीकॉप्टर, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक साथ काम करें।

इसी वजह से सेना पारंपरिक ह्यूमन बेस्ड मिलिट्री स्ट्रक्चर से निकलकर नेटवर्क बेस्ड वेपन सिस्टम की ओर बढ़ रही है, जहां हर यूनिट एक-दूसरे से डिजिटल तरीके से जुड़ी होगी।

भारतीय सेना ने साल 2023 से 2032 की अवधि को ‘डेकेड ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन’ नाम दिया है। इस दौरान सेना का लक्ष्य अपने संगठन, प्रशिक्षण, तकनीक और युद्ध क्षमता में व्यापक बदलाव करना है। (Shaurya Squadron Indian Army)

अमोघ ज्वाला अभ्यास में पहली बार दिखी शौर्य स्क्वाड्रन

शौर्य स्क्वाड्रन का कॉन्सैप्ट पहली बार मार्च 2026 में आयोजित एक्सरसाइज अमोघ ज्वाला के दौरान सामने आया था। यह अभ्यास झांसी स्थित बबीना फील्ड फायरिंग रेंज में आयोजित किया गया था।

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उस समय वर्तमान सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ सदर्न कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ थे। उन्होंने इस अभ्यास के दौरान आधुनिक मैकेनाइज्ड युद्ध का प्रदर्शन देखा था। इसी अभ्यास में पहली बार शौर्य स्क्वाड्रन की मौजूदगी सामने आई थी।

अभ्यास में टैंक, आर्टिलरी, अटैक हेलीकॉप्टर, लड़ाकू विमान, ड्रोन और एयर डिफेंस सिस्टम को एक साथ इस्तेमाल किया गया। इसका उद्देश्य यह दिखाना था कि भविष्य के युद्धों में सभी हथियार प्रणालियां एक नेटवर्क के रूप में काम करेंगी।

फिर क्यों चर्चा में आई शौर्य स्क्वाड्रन

हाल ही में सदर्न कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर ने झांसी स्थित 31 आर्मर्ड डिवीजन का दौरा किया। जिसे व्हाइट टाइगर डिवीजन के नाम से भी जाना जाता है।

इस दौरान उन्हें नई सैन्य तकनीकों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड सिस्टम, मानवरहित प्लेटफॉर्म और इनसे निपटने वाली काउंटर-ड्रोन तकनीकों का प्रदर्शन दिखाया गया। साथ ही उन्होंने सेना की युद्ध की तैयारियों और लड़ाकू क्षमता बढ़ाने के लिए चल रहे प्रयासों की समीक्षा की।

लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर ने शौर्य स्क्वाड्रन के सैनिकों से भी बातचीत की। उन्होंने आधुनिक सैन्य उपकरणों की प्रदर्शनी देखी, जिसमें डिवीजन की नई युद्ध क्षमता और तकनीकी तैयारियों का प्रदर्शन किया गया।

उन्होंने जवानों से कहा कि वे बदलती चुनौतियों के अनुसार खुद को लगातार तैयार रखें, नई तकनीक सीखते रहें और हर समय मिशन के लिए तैयार रहें। उन्होंने कहा कि यह भारतीय सेना के ‘डेकेड ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन’ अभियान के अनुरूप सेना को और अधिक आधुनिक तथा सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

सेना इस नई यूनिट को प्रैक्टिकली डेवलप कर रही है, हालांकि इसका पूरा स्ट्रक्चर और आर्गेनाइजेशनल डिटेल्स अभी पब्लिक नहीं किए गए हैं।

क्या होगी शौर्य स्क्वाड्रन की भूमिका

शौर्य स्क्वाड्रन को आर्मर्ड रेजिमेंट की ड्रोन और काउंटर-ड्रोन यूनिट माना जा रहा है। आसान शब्दों में समझें तो यह यूनिट टैंकों के लिए “आंख” और “सुरक्षा कवच” दोनों का काम करेगी।

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युद्ध के दौरान सबसे पहले ड्रोन आगे जाकर दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखेंगे। वे दुश्मन के टैंक, सैनिक, हथियार और छिपे हुए ठिकानों की जानकारी रियल टाइम में टैंक कमांडरों तक पहुंचाएंगे।

यदि दुश्मन की ओर से ड्रोन हमला होता है तो यही यूनिट उन्हें पहचानने और रोकने का भी काम करेगी। (Shaurya Squadron Indian Army)

टैंकों के साथ मिलकर काम करेंगे ड्रोन

अब तक टैंक यूनिट्स मुख्य रूप से अपने सेंसर और जमीन पर मौजूद सैनिकों की जानकारी के आधार पर आगे बढ़ती थीं।

नई व्यवस्था में ड्रोन पहले आसमान से पूरे इलाके की निगरानी करेंगे। वे कई किलोमीटर आगे तक दुश्मन की गतिविधियों का पता लगाएंगे।

इससे टैंक कमांडर को पहले से पता होगा कि आगे कौन सा खतरा मौजूद है। यदि कहीं घात लगाकर हमला करने की तैयारी हो रही होगी तो ड्रोन उसकी जानकारी पहले ही दे देंगे।

इस तरह टैंक और ड्रोन मिलकर एक जॉइंट कॉम्बैट सिस्टम के तौर पर काम करेंगे। (Shaurya Squadron Indian Army)

ड्रोन के साथ काउंटर-ड्रोन क्षमता भी

सेना केवल अपने ड्रोन बढ़ाने पर ही काम नहीं कर रही, बल्कि दुश्मन के ड्रोन से बचाव की तैयारी भी कर रही है।

रूस-यूक्रेन युद्ध में देखा गया कि छोटे एफपीवी ड्रोन ने बड़ी संख्या में टैंकों को नुकसान पहुंचाया। इसके बाद दुनिया की कई सेनाओं ने अपने टैंकों पर अतिरिक्त सुरक्षा लगानी शुरू की।

भारतीय सेना भी टैंकों पर कोप केज जैसी सुरक्षा व्यवस्था और काउंटर-ड्रोन सिस्टम का परीक्षण कर रही है, ताकि दुश्मन के ड्रोन हमलों का प्रभाव कम किया जा सके।

सेना का पूरा स्ट्रक्चर बदल रहा है

शौर्य स्क्वाड्रन अकेला बदलाव नहीं है। भारतीय सेना पिछले कुछ साल से अपनी पूरी कॉम्बैट फॉर्मेशंस को बदल रही है। इसी बदलाव के तहत इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप (आईबीजी) बनाए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य ऐसी छोटी लेकिन बेहद तेज कॉम्बैट फॉर्मेशन तैयार करना है, जो कम समय में किसी भी मोर्चे पर कार्रवाई कर सके।

पूर्वी क्षेत्र में चीन सीमा के पास सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में सेना ने हाल ही में पांच आईबीजी तैयार किए हैं। ये माउंटेन स्ट्राइक कॉर्प्स के अंतर्गत बनाए गए हैं और 3 कॉर्प्स, 4 कॉर्प्स तथा 33 कॉर्प्स से जुड़े हुए हैं। (Shaurya Squadron Indian Army)

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पूर्वोत्तर में सेना प्रमुख ने की समीक्षा

वहीं इससे पहले आईबीजी बनने के लगभग दो सप्ताह बाद सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने पूर्वोत्तर क्षेत्र का दौरा किया था। उन्होंने विभिन्न सैन्य ठिकानों पर जाकर सुरक्षा स्थिति, युद्ध तैयारी, नई तकनीकों के उपयोग और ऑपरेशनल क्षमता की समीक्षा की।

सेना प्रमुख ने कमांडरों और जवानों के साथ बातचीत की और अपने ‘विजय’ विजन के अनुरूप भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने पर जोर दिया। उन्होंने तकनीक को तेजी से अपनाने और ऑपरेशनल फुर्ती बनाए रखने के निर्देश दिए।

इन्फैंट्री और आर्टिलरी में पहले ही हो चुके हैं बदलाव

भारतीय सेना पहले ही कई नई फॉर्मेशंस तैयार कर चुकी है। इन्फैंट्री बटालियनों में अश्नि प्लाटून बनाई जा रही हैं। इनमें विशेष रूप से प्रशिक्षित सैनिक ड्रोन, सर्विलंस सिस्टम, एफपीवी स्ट्राइक ड्रोन और लॉइटरिंग म्यूनिशन को ऑपरेट करेंगे।

आर्टिलरी में शक्तिबाण रेजिमेंट तैयार की जा रही हैं, जिनमें लंबी दूरी के ड्रोन, ड्रोन स्वार्म और काउंटर-ड्रोन सिस्टम शामिल होंगे। इसके अलावा दिव्यास्त्र बैटरी आर्टिलरी को रियल टाइम लक्ष्य पहचान और सटीक हमला करने की क्षमता देगी।

इन सभी संरचनाओं का उद्देश्य अलग-अलग हथियार प्रणालियों को एक ही नेटवर्क में जोड़ना है। (Shaurya Squadron Indian Army)

ड्रोन और एआई बन रहे हैं नई ताकत

भारतीय सेना अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सैन्य प्रणालियों पर भी तेजी से काम कर रही है। इन तकनीकों की मदद से ड्रोन से मिलने वाली जानकारी का तुरंत विश्लेषण किया जा सकेगा। इससे कमांडरों को निर्णय लेने में कम समय लगेगा और कार्रवाई तेजी से हो सकेगी।

मानवरहित प्लेटफॉर्म, सेंसर, डिजिटल कमांड नेटवर्क और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को एक साथ जोड़कर सेना ऐसी युद्ध प्रणाली तैयार कर रही है, जिसमें अलग-अलग यूनिट्स एक साथ काम कर सकें। (Shaurya Squadron Indian Army)

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