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भारतीय नौसेना को मिला नया सबमरीन हंटर MH-60R सीहॉक, ऑपरेशन सिंदूर से हिंद महासागर तक बढ़ी भारत की ताकत!

अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी इस डिलीवरी का स्वागत करते हुए कहा कि इससे समुद्री सुरक्षा और मुक्त एवं खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता और मजबूत होगी...

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📍नई दिल्ली | 17 Jul, 2026, 7:48 PM

MH-60R Seahawk Indian Navy: भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत को और मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। अमेरिका ने भारतीय नौसेना को एक और अत्याधुनिक एमएच-60आर ‘सीहॉक’ मल्टी-रोल नौसैनिक हेलीकॉप्टर सौंप दिया है। यह हेलीकॉप्टर पिछले सप्ताह केरल के कोच्चि में भारतीय नौसेना को डिलीवर किया गया। अमेरिकी दूतावास ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि इसी सप्ताह दो और हेलीकॉप्टर भारत पहुंचने वाले हैं। इनकी डिलीवरी के साथ भारतीय नौसेना के पास मौजूद सीहॉक हेलीकॉप्टरों की संख्या 21 तक पहुंच जाएगी।

अमेरिकी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि लॉकहीड मार्टिन द्वारा विकसित यह अत्याधुनिक हेलीकॉप्टर भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी की मजबूती का प्रतीक है। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी इस डिलीवरी का स्वागत करते हुए कहा कि इससे समुद्री सुरक्षा और मुक्त एवं खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता और मजबूत होगी।

MH-60R Seahawk Indian Navy: 2020 में हुआ था 24 हेलीकॉप्टरों का बड़ा समझौता

भारत ने फरवरी 2020 में अमेरिका के साथ फॉरेन मिलिट्री सेल्स (एफएमएस) कार्यक्रम के तहत 24 एमएच-60आर (MH-60R) ‘रोमियो’ हेलीकॉप्टर खरीदने का समझौता किया था। इस सौदे की कीमत लगभग 2.6 अरब अमेरिकी डॉलर थी। इन हेलीकॉप्टरों का निर्माण अमेरिकी कंपनी सिकोरस्की एयरक्राफ्ट करती है, जो अब लॉकहीड मार्टिन का हिस्सा है।

इन हेलीकॉप्टरों की डिलीवरी साल 2021 से शुरू हुई। जुलाई 2026 तक 21 हेलीकॉप्टर भारत को मिल चुके हैं, जबकि अंतिम तीन हेलीकॉप्टरों की डिलीवरी अभी बाकी है।

अभी कितने हेलीकॉप्टर हैं ऑपरेशन के लिए तैयार

भारतीय नौसेना के सूत्रों के अनुसार, अभी तक मिले हेलीकॉप्टरों में से 15 हेलीकॉप्टर पूरी तरह ऑपरेशनल हैं और विभिन्न युद्धपोतों पर तैनात किए जा चुके हैं।

तीन हेलीकॉप्टर अमेरिका में भारतीय पायलटों और तकनीकी कर्मचारियों की ट्रेनिंग के लिए रखे गए हैं। वहीं, हाल में पहुंचे तीन हेलीकॉप्टरों की जांच, दस्तावेजी प्रक्रिया और वैलिडेशन के बाद उन्हें भी जल्द नौसेना के बेड़े में शामिल किया जाएगा। (MH-60R Seahawk Indian Navy)

दो स्क्वाड्रन में हो चुकी है तैनाती

सीहॉक हेलीकॉप्टरों के लिए भारतीय नौसेना ने दो अलग-अलग स्क्वाड्रन तैयार किए हैं। पहला स्क्वाड्रन आईएनएएस 334 ‘सीहॉक्स’ है, जिसे 6 मार्च 2024 को आईएनएस गरुड़, कोच्चि में कमीशन किया गया था। यह स्क्वाड्रन ट्रेनिंग और ऑपरेशनल मदद दोनों की जिम्मेदारी संभालता है।

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दूसरा स्क्वाड्रन आईएनएएस 335 ‘ऑस्प्रेय्स’ है, जिसे 17 दिसंबर 2025 को आईएनएस हंसा, गोवा में कमीशन किया गया। यह पश्चिमी समुद्री क्षेत्र में पूरी तरह ऑपरेशनल स्क्वाड्रन है।

इन दोनों स्क्वाड्रनों के हेलीकॉप्टर आईएनएस विक्रांत, आईएनएस विक्रमादित्य, आधुनिक विध्वंसक युद्धपोतों और फ्रिगेट्स पर तैनात किए जा सकते हैं। (MH-60R Seahawk Indian Navy)

क्यों खास है MH-60R सीहॉक

एमएच-60 ‘रोमियो’ दुनिया के सबसे आधुनिक नौसैनिक हेलीकॉप्टरों में शामिल है। यह अमेरिकी सेना के प्रसिद्ध ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर का समुद्री संस्करण है। इसमें जहाज पर कम जगह घेरने के लिए फोल्ड होने वाले मुख्य रोटर ब्लेड और मुड़ने वाली टेल लगाई गई है।

यह दो टर्बोशाफ्ट इंजन से चलता है। हेलीकॉप्टर में तीन से चार सदस्यीय क्रू रहता है और इसमें पांच अतिरिक्त सैनिक या कर्मी बैठ सकते हैं। इसकी अधिकतम गति लगभग 330 किलोमीटर प्रति घंटा है, जबकि इसकी ऑपरेशनल रेंज लगभग 830 किलोमीटर है। यह लगभग 3,000 किलोग्राम तक का भार ले जाने में सक्षम है।

पनडुब्बियों का लग सकता है पता

सीहॉक हेलीकॉप्टर की सबसे बड़ी ताकत इसकी एंटी-सबमरीन वारफेयर (एएसडब्ल्यू) क्षमता है। इसमें डिपिंग सोनार लगा होता है, जिसे समुद्र में नीचे उतारकर पानी के भीतर मौजूद पनडुब्बियों का पता लगाया जाता है। इसके अलावा यह बड़ी संख्या में सोनोबॉय भी समुद्र में गिरा सकता है। ये छोटे सेंसर समुद्र के भीतर होने वाली ध्वनि को रिकॉर्ड करके पनडुब्बियों की गतिविधि का पता लगाते हैं।

हेलीकॉप्टर में लगा मल्टी-मोड रडार समुद्र की सतह और उसके आसपास मौजूद टारगेट्स की पहचान करता है। दुश्मन की पनडुब्बी मिलने पर यह एमके-54 लाइटवेट टॉरपीडो से हमला कर सकता है।

भारत ने साल 2024 में अमेरिका से 500 से अधिक आधुनिक सोनोबॉय खरीदने का फैसला किया था। इसी साल अमेरिका ने 53 एमके-54 टॉरपीडो की बिक्री को भी मंजूरी दी थी, ताकि सीहॉक हेलीकॉप्टरों की मारक क्षमता और बढ़ाई जा सके। (MH-60R Seahawk Indian Navy)

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समुद्र की सतह पर भी कर सकता है हमला

एमएच-60आर केवल पनडुब्बियों के खिलाफ ही नहीं, बल्कि समुद्र की सतह पर मौजूद दुश्मन के जहाजों के खिलाफ भी प्रभावी हथियार है।

यह एजीएम-114 हेलफायर मिसाइल, मशीन गन और अन्य आधुनिक हथियारों से लैस किया जा सकता है। इसमें लगे इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर, लेजर रेंज फाइंडर, इलेक्ट्रॉनिक सपोर्ट मेजर्स, इन्फ्रारेड जैमर, मिसाइल अप्रोच वार्निंग सिस्टम और ग्लास कॉकपिट इसे हर मौसम और दिन-रात में ऑपरेशन करने की क्षमता देते हैं।

इसका रडार समुद्र में मौजूद छोटे टारगेट्स और यहां तक कि पनडुब्बियों के पेरिस्कोप तक की पहचान करने में सक्षम माना जाता है। (MH-60R Seahawk Indian Navy)

भारतीय जरूरतों के अनुसार किए जा रहे अपग्रेड

भारतीय नौसेना के लिए आने वाले एमएच-60आर हेलीकॉप्टरों में इंडिया यूनिक इक्विपमेंट (आईयूई) भी जोड़े जा रहे हैं। इनमें स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट, सुरक्षित संचार प्रणाली और भारतीय जरूरतों के अनुरूप अन्य उपकरण शामिल हैं। पहले से सेवा में मौजूद हेलीकॉप्टरों को भी चरणबद्ध तरीके से अमेरिका भेजकर इन्हीं मानकों के अनुसार अपग्रेड किया जाएगा।

इन हेलीकॉप्टरों का भारतीय विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत पर भी सफल परीक्षण किया जा चुका है। भारतीय नौसेना के अनुसार, इन्हें भारतीय मौसम और समुद्री परिस्थितियों के अनुरूप पूरी तरह परखा गया है।

पुराने सी किंग हेलीकॉप्टरों की ले रहे हैं जगह

एमएच-60आर हेलीकॉप्टर ब्रिटेन मूल के सी किंग एमके-42बी हेलीकॉप्टरों की जगह ले रहे हैं। सी किंग हेलीकॉप्टर करीब 40 सालों तक भारतीय नौसेना की सेवा में रहे और जून 2026 में उन्हें चरणबद्ध तरीके से सेवा से हटाया गया।

नई पीढ़ी के सीहॉक हेलीकॉप्टर आने के बाद नौसेना की पनडुब्बी रोधी क्षमता, समुद्री निगरानी और जहाज आधारित हवाई अभियानों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। (MH-60R Seahawk Indian Navy)

ऑपरेशन सिंदूर और नौसैनिक अभ्यासों में हुआ इस्तेमाल

भारतीय नौसेना प्रमुख रहे एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने दिसंबर 2025 में दूसरे स्क्वाड्रन के कमीशनिंग के दौरान बताया था कि एमएच-60आर हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किया गया था और उन्होंने अपनी निर्धारित भूमिका प्रभावी तरीके से निभाई।

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इन हेलीकॉप्टरों को ट्रोपेक्स-25 सहित कई बड़े नौसैनिक अभ्यासों में भी तैनात किया जा चुका है। इनके आधुनिक सेंसर और नेटवर्क आधारित सिस्टम युद्धपोतों को समुद्री क्षेत्र की बेहतर जानकारी उपलब्ध कराते हैं।

7,995 करोड़ का सस्टेनमेंट पैकेज भी हुआ लागू

हेलीकॉप्टरों की लंबे समय तक बेहतर उपलब्धता बनाए रखने के लिए भारत ने दिसंबर 2025 में लगभग 7,995 करोड़ का सस्टेनमेंट पैकेज भी साइन किया था। इस पांच सालीय पैकेज में स्पेयर पार्ट्स, तकनीकी सहायता, ट्रेनिंग, मरम्मत, उपकरण, नियमित निरीक्षण और भारत में इंटरमीडिएट स्तर की रिपेयर सुविधाएं तैयार करना शामिल है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इससे धीरे-धीरे रखरखाव के लिए अमेरिका पर निर्भरता कम होगी और भारत के भीतर ही मरम्मत एवं तकनीकी क्षमता विकसित होगी। (MH-60R Seahawk Indian Navy)

हिंद महासागर में बढ़ी समुद्री निगरानी क्षमता

भारतीय नौसेना लंबे समय से 100 से अधिक मल्टी-रोल नौसैनिक हेलीकॉप्टरों की आवश्यकता बता रही है। फिलहाल एमएच-60आर हेलीकॉप्टर हिंद महासागर क्षेत्र में पनडुब्बियों की निगरानी, समुद्री मार्गों की सुरक्षा, विमानवाहक पोतों की सुरक्षा, खोज एवं बचाव अभियान, मेडिकल इवैक्यूएशन और लंबी दूरी की समुद्री निगरानी जैसे कई महत्वपूर्ण कार्यों में इस्तेमाल किए जा रहे हैं।

इन हेलीकॉप्टरों के आने से भारतीय नौसेना की जहाज आधारित हवाई क्षमता पहले की तुलना में काफी मजबूत हुई है और आधुनिक युद्धपोतों को एक ऐसी हवाई ताकत मिली है, जो समुद्र के ऊपर और समुद्र के नीचे दोनों तरह के खतरों पर लगातार नजर रखने में सक्षम है। (MH-60R Seahawk Indian Navy)

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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