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LAC के पास भारत-अमेरिका का सबसे बड़ा “युद्धाभ्यास”, पहली बार अपाचे हेलीकॉप्टर भी होंगे शामिल

युद्ध अभ्यास 2026 का 22वां संस्करण सितंबर के पहले सप्ताह से शुरू होगा और लगभग तीन सप्ताह तक चलेगा। इस बार इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसका आयोजन दो बिल्कुल अलग भौगोलिक इलाकों में किया जाएगा...

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📍नई दिल्ली | 11 Jun, 2026, 10:15 PM

Exercise Yudh Abhyas 2026: भारत और अमेरिका की सेनाएं इस साल सितंबर में एक बार फिर संयुक्त सैन्य अभ्यास “युद्ध अभ्यास” के तहत साथ नजर आएंगी। यह अभ्यास ऐसे समय में आयोजित हो रहा है जब भारत अपनी उत्तरी सीमाओं पर लगातार सतर्कता बनाए हुए है और आधुनिक युद्ध की चुनौतियों के अनुरूप अपनी तैयारियों को मजबूत कर रहा है।

युद्ध अभ्यास 2026 का 22वां संस्करण सितंबर के पहले सप्ताह से शुरू होगा और लगभग तीन सप्ताह तक चलेगा। इस बार इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसका आयोजन दो बिल्कुल अलग भौगोलिक इलाकों में किया जाएगा। एक तरफ उत्तराखंड का औली क्षेत्र होगा, जो चीन सीमा के करीब ऊंचाई वाले इलाके में स्थित है, जबकि दूसरी तरफ राजस्थान का महाजन फील्ड फायरिंग रेंज होगा, जो रेगिस्तानी युद्धाभ्यास के लिए जाना जाता है।

दोनों देशों की सेनाओं से लगभग 350-350 सैनिक इस अभ्यास में हिस्सा लेंगे। इसके अलावा पहली बार एएच-64 अपाचे अटैक हेलीकॉप्टरों को भी इस अभ्यास का हिस्सा बनाया जा रहा है।

Exercise Yudh Abhyas 2026: औली क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

उत्तराखंड का औली केवल एक पर्यटन स्थल नहीं है। सैन्य दृष्टि से इसकी अहमियत काफी ज्यादा है। यह क्षेत्र लगभग 2,500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी से करीब 95 किलोमीटर की दूरी पर है।

साल 2020 में पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच शुरू हुए लंबे सैन्य गतिरोध के बाद भारतीय सेना ने उच्च हिमालयी इलाकों में लड़ाई की तैयारियों पर विशेष ध्यान देना शुरू किया। इसी वजह से औली जैसे इलाके अब मिलिट्री ट्रेनिंग के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

हाई एल्टीट्यूड इलाकों में सैनिकों को कई अतिरिक्त चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। यहां ऑक्सीजन का स्तर कम होता है, तापमान तेजी से गिरता है और मौसम कुछ ही घंटों में बदल सकता है। ऐसे वातावरण में सामान्य सैन्य अभ्यास भी कठिन हो जाता है।

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युद्ध अभ्यास के दौरान भारतीय और अमेरिकी सैनिक इन परिस्थितियों में संयुक्त अभियान चलाने की ट्रेनिंग लेंगे। इसमें पैदल सेना की गतिविधियां, ऊंचाई वाले इलाकों में रसद व्यवस्था और कठिन भूभाग में सैनिकों की आवाजाही जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

कम ऑक्सीजन में युद्ध की तैयारी

हाई एल्टीट्यूड इलाकों में सबसे बड़ी चुनौती सैनिकों की शारीरिक क्षमता होती है। कम ऑक्सीजन के कारण सांस लेने में परेशानी होती है और सामान्य कार्य भी कठिन हो जाते हैं।

इसी वजह से औली में सैनिकों को एक्लाइमेटाइजेशन यानी ऊंचाई के अनुसार शरीर को ढालने की ट्रेनिंग भी दी जाएगी।

सेना के विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी सैन्य अभियान की सफलता केवल हथियारों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि सैनिकों की शारीरिक तैयारी और सहनशक्ति भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।

इस अभ्यास में अमेरिकी सैनिकों को भी भारतीय सेना के उन अनुभवों से सीखने का मौका मिलेगा जो उसने सियाचिन, लद्दाख और अन्य ऊंचाई वाले इलाकों में वर्षों की तैनाती के दौरान हासिल किए हैं।

राजस्थान में दिखेगी बिल्कुल अलग तस्वीर

जहां औली बर्फीले और पहाड़ी युद्धक्षेत्र का प्रतिनिधित्व करेगा, वहीं राजस्थान का महाजन फील्ड फायरिंग रेंज का वातावरण बिलकुल अलग होगा।

महाजन भारतीय सेना के सबसे बड़े फायरिंग और युद्धाभ्यास इलाकों में गिना जाता है। यहां टैंक, तोपखाना, बख्तरबंद वाहन और कई तरह के हथियारों का परीक्षण और प्रशिक्षण नियमित रूप से किया जाता है।

रेगिस्तानी इलाके में युद्ध की चुनौतियां अलग होती हैं। यहां की तेज गर्मी, धूल, लंबी दूरी और खुला इलाका सैनिकों की रणनीति पर असर डालते हैं।

महाजन में दोनों देशों की सेनाएं लाइव फायर ड्रिल, मैकेनाइज्ड ऑपरेशन और आर्टिलरी कोआर्डिनेशन जैसे अभ्यास किए जाएंगे। इससे दोनों देशों की सेनाओं को अलग-अलग युद्धइलाकों में ऑपरेशन करने का अनुभव मिलेगा।

पहली बार शामिल होंगे अपाचे हेलीकॉप्टर

युद्ध अभ्यास 2026 में एएच-64 अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर भी शामिल होंगे। अपाचे दुनिया के सबसे आधुनिक लड़ाकू हेलीकॉप्टरों में गिना जाता है। भारतीय सेना और वायुसेना दोनों इसे इस्तेमाल करती हैं।

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इस हेलीकॉप्टर को एंटी टैंक मिशन, सटीक हमले और क्लोज एयर सपोर्ट के लिए डेवलप किया गया है।

पहली बार युद्ध अभ्यास में अपाचे हेलीकॉप्टरों को शामिल करने का उद्देश्य लैंड और एयर फोर्सेज के बीच बेहतर तालमेल विकसित करना है।

इससे सैनिकों को वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में अभ्यास करने का अवसर मिलेगा, जहां जमीन पर मौजूद सैनिकों को एय़र सपोर्ट भी मिलेगा।

क्या होता है कॉम्बाइंड आर्म्स ऑपरेशन?

आधुनिक युद्ध में केवल पैदल सेना या केवल टैंक पर्याप्त नहीं माने जाते। युद्ध में जीत के लिए विभिन्न मिलिट्री शाखाओं का कॉर्डिनेशन जरूरी होता है।

इसे कॉम्बाइंड आर्म्स ऑपरेशन कहा जाता है। इसमें पैदल सेना, टैंक, तोपखाना, हेलीकॉप्टर और सर्विलांस सिस्टम्स एक साथ काम करती हैं।

युद्ध अभ्यास 2026 के दौरान दोनों देशों की सेनाएं इसी तरह के अभ्यासों में शामिल होंगी। अपाचे हेलीकॉप्टरों की भागीदारी इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है क्योंकि इससे सैनिकों को एयर-ग्राउंड इंटीग्रेशन की असली समझ मिलेगी।

पिछले साल अलास्का में हुआ था अभ्यास

युद्ध अभ्यास का पिछला संस्करण सितंबर 2025 में अमेरिका के अलास्का राज्य में आयोजित किया गया था। अलास्का की अत्यधिक ठंडी और सब-आर्कटिक परिस्थितियों में दोनों देशों के सैनिकों ने संयुक्त प्रशिक्षण लिया था।
उस दौरान बर्फीले वातावरण में सैन्य अभियान, जीवित रहने की तकनीक और चरम मौसम में ऑपरेशन पर जोर दिया गया था।

इस बार अभ्यास का फोकस ऊंचाई वाले इलाकों और रेगिस्तानी युद्धक्षेत्र पर रहेगा। इस तरह हर संस्करण में अलग वातावरण चुनकर सैनिकों को विविध परिस्थितियों के लिए तैयार किया जाता है।

2004 में हुई थी शुरुआत

युद्ध अभ्यास की शुरुआत वर्ष 2004 में हुई थी। उस समय इसका दायरा काफी सीमित था और मुख्य रूप से आतंकवाद विरोधी तथा काउंटर-इंसर्जेंसी आपरेशंस पर ध्यान दिया जाता था। समय के साथ इसमें भी बदलाव हुए।

अब यह केवल काउंटर टेररिज्म अभ्यास नहीं रह गया है, बल्कि इसमें हाई एल्टीट्यूड वारफेयर, मैकेनाइज्ड ऑपरेशन, मानवीय सहायता और आपदा राहत जैसे विषय भी शामिल हो गए हैं। दो दशकों में यह भारत और अमेरिका की सेनाओं के बीच सबसे बड़े संयुक्त सैन्य अभ्यासों में शामिल हो चुका है।

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युद्ध अभ्यास दोनों देशों के बढ़ते रक्षा सहयोग का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। पिछले कुछ सालों में भारत और अमेरिका के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ा है। दोनों देशों ने कई रक्षा समझौते किए हैं, जिनके तहत तकनीकी जानकारी, लॉजिस्टिक सहायता और सैन्य सहयोग को बढ़ावा मिला है।

अपाचे हेलीकॉप्टर, पी-8आई मैरीटाइम सर्विलांस एयरक्राफ्ट, एमएच-60आर हेलीकॉप्टर और अन्य आधुनिक सैन्य उपकरण भारत द्वारा अमेरिका से खरीदे गए प्रमुख प्लेटफॉर्म हैं। संयुक्त अभ्यासों के जरिए दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे की कार्यशैली, रणनीति और तकनीक को बेहतर तरीके से समझ पाती हैं।

मालाबार और कोप इंडिया जैसे अभ्यास भी अहम

युद्ध अभ्यास भारत और अमेरिका के बीच होने वाले कई बड़े सैन्य अभ्यासों में से एक है। समुद्री क्षेत्र में मालाबार अभ्यास आयोजित किया जाता है, जिसमें जापान भी भाग लेता है और कई बार ऑस्ट्रेलिया भी शामिल होता है।

इसी तरह वायुसेना स्तर पर कोप इंडिया अभ्यास आयोजित किया जाता है। इसके अलावा क्वाड देशों के बीच भी विभिन्न स्तरों पर सैन्य सहयोग बढ़ रहा है। युद्ध अभ्यास इन सभी कार्यक्रमों में लैंड-बेस्ड मिलिटरी कोआपरेशन का सबसे प्रमुख उदाहरण माना जाता है।

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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