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भारत के AMCA स्टेल्थ फाइटर प्रोजेक्ट के लिए रक्षा मंत्रालय ने जारी की RFP, दो इंजन, स्टेल्थ डिजाइन और AI सिस्टम से होगा लैस

एएमसीए को स्टेल्थ तकनीक के साथ तैयार किया जा रहा है ताकि दुश्मन के रडार इसे आसानी से पकड़ न सकें। इसमें इंटरनल वेपन बे, एडवांस्ड एवियोनिक्स, सेंसर फ्यूजन और सुपरक्रूज जैसी आधुनिक क्षमताएं होंगी...

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📍नई दिल्ली | 27 May, 2026, 4:32 PM

AMCA Fighter Jet RFP: भारत के सबसे बड़े और सबसे महत्वाकांक्षी लड़ाकू विमान प्रोजेक्ट एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) को लेकर बड़ा कदम उठाया गया है। रक्षा मंत्रालय ने आज इस स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर विमान प्रोजेक्ट के लिए आधिकारिक रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) जारी कर दी। यह आरएफपी तीन शॉर्टलिस्टेड कंपनियों और कंसोर्टियम को भेजा गया है।

यह विमान स्टेल्थ तकनीक, आधुनिक सेंसर, लंबी दूरी तक हमला करने की क्षमता और नेटवर्क आधारित युद्ध प्रणाली से लैस होगा। यह विमान पूरी तरह मल्टी रोल होगा और दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को भेदने में सक्षम बनाया जाएगा।

यह प्रोजेक्ट भारतीय वायुसेना के भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। एएमसीए को भारत का पहला पूरी तरह स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर विमान माना जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि यह विमान चीन के जे-20 और अमेरिका के एफ-35 जैसे आधुनिक फाइटर जेट्स की श्रेणी में भारत की एंट्री कराएगा।

AMCA Fighter Jet RFP: क्या है एएमसीए प्रोजेक्ट

एएमसीए यानी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट एक ट्विन इंजन, मल्टी रोल और लो ऑब्जर्वेबल स्टेल्थ फाइटर जेट है। इसे एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी यानी एडीए द्वारा डिजाइन किया गया है। यह एजेंसी डीआरडीओ के तहत काम करती है।

इस विमान को भारतीय वायुसेना की भविष्य की जरूरतों के हिसाब से विकसित किया जा रहा है। यह एयर-टू-एयर, एयर-टू-ग्राउंड और इंटेलिजेंस सर्विलांस एंड रिकॉनिसेंस यानी आईएसआर मिशन को अंजाम देने में सक्षम होगा।

एएमसीए को स्टेल्थ तकनीक के साथ तैयार किया जा रहा है ताकि दुश्मन के रडार इसे आसानी से पकड़ न सकें। इसमें इंटरनल वेपन बे, एडवांस्ड एवियोनिक्स, सेंसर फ्यूजन और सुपरक्रूज जैसी आधुनिक क्षमताएं होंगी।

किन कंपनियों को भेजा गया आरएफपी

रक्षा मंत्रालय ने यह आरएफपी तीन शॉर्टलिस्टेड कंपनियों और कंसोर्टियम को जारी किया है। इनमें पहला नाम लार्सन एंड टुब्रो और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के कंसोर्टियम का है। दूसरा नाम टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स का है और तीसरा नाम भारत फोर्ज और बीईएमएल के समूह का है।

इन कंपनियों को एएमसीए प्रोजेक्ट में इंडस्ट्री पार्टनर के तौर पर चुना जा सकता है। आरएफपी के अनुसार चुनी गई कंपनी को विमान के निर्माण, असेंबली, सिस्टम इंटीग्रेशन, टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन में अहम भूमिका निभानी होगी। लेकिन कुल प्रोजेक्ट 7 साल यानी 84 महीने में पूरा करना है। वहीं, पूरा प्रोजेक्ट 2034 तक पूरा करना होगा।

एएमसीए की सबसे बड़ी खासियत क्या होगी

एएमसीए को पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान कहा जा रहा है। इसका मतलब यह है कि इसमें स्टेल्थ तकनीक के साथ आधुनिक डिजिटल युद्ध प्रणाली होगी।

इस विमान में रडार अब्जॉर्बिंग मटेरियल का इस्तेमाल किया जाएगा ताकि इसका रडार क्रॉस सेक्शन बेहद कम रहे। विमान के अंदर ही हथियार रखने के लिए इंटरनल वेपन बे होगा, जिससे इसकी स्टेल्थ क्षमता और मजबूत होगी।

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इसमें एडवांस्ड एईएसए रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, हेलमेट माउंटेड डिस्प्ले और बड़े डिजिटल कॉकपिट स्क्रीन लगाए जाएंगे।

एएमसीए में आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट लगाया जाएगा। इसका काम दुश्मन के रडार और मिसाइल सिस्टम को भ्रमित करना होगा।

विमान में रडार वार्निंग रिसीवर, मिसाइल अप्रोच वार्निंग सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक काउंटर मेजर्स जैसी तकनीकें होंगी। इससे दुश्मन की मिसाइलों से बचाव आसान होगा। (AMCA Fighter Jet RFP)

पांच प्रोटोटाइप बनाए जाएंगे

रक्षा समाचार को मिली आरएफपी के मुताबिक इस प्रोजेक्ट के तहत पांच फ्लाइंग प्रोटोटाइप तैयार किए जाएंगे। इनके अलावा एक स्ट्रक्चरल टेस्ट स्पेसिमेन भी बनाया जाएगा।

इन प्रोटोटाइप्स का इस्तेमाल फ्लाइट टेस्टिंग, सिस्टम वैलिडेशन और अलग-अलग तकनीकी परीक्षणों में किया जाएगा। इसके साथ ही टेस्ट फैसिलिटीज, जिग्स, फिक्स्चर्स और ग्राउंड सपोर्ट सिस्टम भी तैयार किए जाएंगे।

विमान की टेस्टिंग लंबी और जटिल प्रक्रिया होगी। इसमें हजारों घंटे की उड़ान और अलग-अलग मौसम व ऑपरेशनल परिस्थितियों में परीक्षण शामिल होंगे।

ट्विन इंजन कॉन्फिगरेशन पर खास जोर

एएमसीए में दो इंजन लगाए जाएंगे। इसे ट्विन इंजन कॉन्फिगरेशन कहा जाता है। इससे विमान की ताकत और सुरक्षा दोनों बढ़ेंगी।

फिलहाल माना जा रहा है कि शुरुआती एएमसीए मार्क-1 में जीई एफ414 इंजन का इस्तेमाल किया जा सकता है। बाद के संस्करण यानी एएमसीए मार्क-2 में ज्यादा ताकतवर और संभवतः स्वदेशी इंजन लगाने की योजना है। इसके लिए भारत अलग इंजन विकास कार्यक्रम पर भी काम कर रहा है।

आरएफपी में प्रोपल्शन सिस्टम के लिए अलग एननेक्सर दिया गया है, जिसमें इंजन इंटीग्रेशन, टेस्ट रिग्स और ग्राउंड टेस्टिंग की विस्तृत जानकारी शामिल है। (AMCA Fighter Jet RFP)

सुपरक्रूज और स्टेल्थ तकनीक

एएमसीए की सबसे महत्वपूर्ण तकनीकों में सुपरक्रूज क्षमता भी शामिल है। इसका मतलब यह है कि विमान आफ्टरबर्नर का इस्तेमाल किए बिना भी सुपरसोनिक गति से उड़ सकेगा।

आमतौर पर लड़ाकू विमान तेज गति पाने के लिए आफ्टरबर्नर का इस्तेमाल करते हैं जिससे ईंधन की खपत बहुत बढ़ जाती है। लेकिन सुपरक्रूज क्षमता वाले विमान लंबे समय तक तेज गति बनाए रख सकते हैं और ईंधन भी कम खर्च होता है।

आरएफपी में इंफ्रारेड सिग्नेचर को कम करने पर भी विशेष जोर दिया गया है। आधुनिक मिसाइलें इंजन की गर्मी को ट्रैक करके हमला करती हैं। इसलिए एएमसीए में इंजन एग्जॉस्ट डिजाइन इस तरह तैयार किया जाएगा कि उसकी गर्मी कम दिखाई दे। विमान में रडार अब्जॉर्बिंग मटेरियल यानी विशेष कोटिंग का इस्तेमाल होगा जो रडार तरंगों को कम रिफ्लेक्ट करेगी। इससे विमान का रडार क्रॉस सेक्शन बहुत कम हो जाएगा।

एएमसीए में सेंसर फ्यूजन तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसका मतलब यह है कि विमान के अलग-अलग सेंसर से मिलने वाली जानकारी एक साथ पायलट को दिखाई जाएगी। इसमें एईएसए रडार, इंफ्रारेड सर्च एंड ट्रैक सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट और सुरक्षित डेटा लिंक शामिल होंगे।

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विमान में एडवांस्ड एईएसए यानी एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड अरे रडार पारंपरिक रडार की तुलना में ज्यादा शक्तिशाली और तेज होगा। यह रडार एक साथ कई लक्ष्यों को ट्रैक कर सकेगा। इसके अलावा दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से बचने की क्षमता भी इसमें होगी।

आधुनिक एवियोनिक्स सिस्टम

एएमसीए का पूरा कॉकपिट डिजिटल होगा। आरएफपी में बड़े पैनोरमिक डिस्प्ले, हेलमेट माउंटेड डिस्प्ले और एडवांस्ड मिशन कंप्यूटर का जिक्र किया गया है।

पायलट को अलग-अलग स्क्रीन देखने की जरूरत नहीं पड़ेगी। विमान के सेंसर और रडार से मिलने वाली जानकारी एक साथ प्रोसेस होकर पायलट को दिखाई जाएगी। इसे सेंसर फ्यूजन कहा जाता है। (AMCA Fighter Jet RFP)

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड मदद

आरएफपी के अनुसार विमान में एआई आधारित सहायता प्रणाली भी होगी। इससे पायलट को युद्ध के दौरान तेजी से निर्णय लेने में मदद मिलेगी।

सिस्टम खुद खतरे की पहचान कर पायलट को चेतावनी देगा और जरूरत पड़ने पर जवाबी कार्रवाई के विकल्प भी सुझाएगा।

होगा इंटरनल वेपन बे

एएमसीए में हथियार विमान के अंदर रखे जाएंगे। इसे इंटरनल वेपन बे कहा जाता है। इससे विमान की स्टेल्थ क्षमता बनी रहती है क्योंकि बाहरी हिस्से पर हथियार लटकाने से रडार सिग्नेचर बढ़ जाता है।

एएमसीए को कई प्रकार की मिसाइलों और बमों से लैस किया जाएगा। इसमें हवा से हवा में मार करने वाली अस्त्र मिसाइल, हवा से जमीन पर हमला करने वाले प्रिसिजन गाइडेड हथियार और लंबी दूरी की मिसाइलें शामिल की जा सकती हैं।

भविष्य में ब्रह्मोस-एनजी जैसी मिसाइलों को भी इसमें जोड़े जाने की संभावना बताई गई है।

एएमसीए में फ्लाई-बाय-वायर तकनीक का इस्तेमाल होगा। इसमें पायलट के कमांड को कंप्यूटर कंट्रोल्ड सिस्टम विमान तक पहुंचाते हैं।

इसके साथ एआई आधारित स्टेबिलिटी और फ्लाइट एनवेलप प्रोटेक्शन सिस्टम भी होगा। इससे विमान को संभालना आसान होगा और सुरक्षा बढ़ेगी।

लंबी टेस्टिंग प्रक्रिया होगी

आरएफपी में बताया गया है कि एएमसीए के प्रोटोटाइप्स पर करीब 1800 से ज्यादा फ्लाइट सॉर्टीज की जाएंगी।

इसके लिए अलग-अलग टेस्ट फैसिलिटीज बनाई जाएंगी। इनमें ग्राउंड टेस्ट रिग्स, ईएमआई-ईएमसी टेस्ट सेटअप, स्ट्रक्चरल टेस्ट फैसिलिटी और टेलीमेट्री सिस्टम शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक यह प्रक्रिया कई साल तक चल सकती है। (AMCA Fighter Jet RFP)

एडीए रखेगा डिजाइन कंट्रोल

आरएफपी के अनुसार एडीए इस पूरे प्रोजेक्ट का डिजाइन अथॉरिटी रहेगा। यानी विमान के डिजाइन और कॉन्फिगरेशन का पूरा नियंत्रण एडीए के पास रहेगा। इंडस्ट्री पार्टनर को डिजाइन डेटा और ड्रॉइंग्स के आधार पर मैन्युफैक्चरिंग और सिस्टम इंटीग्रेशन करना होगा।

आरएफपी में यह भी कहा गया है कि जो कंपनी या कंसोर्टियम यह प्रोजेक्ट जीतेगा, उसे तीन महीने के भीतर नई कंपनी बनानी होगी। इसी नई कंपनी के जरिए एएमसीए प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया जाएगा। (AMCA Fighter Jet RFP)

माइलस्टोन आधारित पेमेंट सिस्टम

प्रोजेक्ट में भुगतान माइलस्टोन आधारित होगा। यानी अलग-अलग चरण पूरे होने पर भुगतान जारी किया जाएगा।
इन चरणों में टूलिंग, जिग्स, स्ट्रक्चरल मॉड्यूल, पहला प्रोटोटाइप, फर्स्ट फ्लाइट और आगे की टेस्टिंग शामिल हैं।

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भारत के लिए क्यों अहम है एएमसीए

भारतीय वायुसेना लंबे समय से पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर विमान की जरूरत महसूस कर रही है। चीन पहले ही जे-20 को अपनी वायुसेना में शामिल कर चुका है। वहीं अमेरिका के पास एफ-22 और एफ-35 जैसे आधुनिक विमान मौजूद हैं।

ऐसे में एएमसीए को भारत की सामरिक जरूरतों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रोजेक्ट केवल एक लड़ाकू विमान नहीं बल्कि भारत की एयरोस्पेस और रक्षा निर्माण क्षमता की बड़ी परीक्षा भी है।

इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर फोकस

इस प्रोजेक्ट के तहत बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। इसमें हाई प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग, कंपोजिट स्ट्रक्चर निर्माण, टेस्ट फैसिलिटीज और डिजिटल इंजीनियरिंग शामिल हैं।

इसके साथ भारतीय कंपनियों को आधुनिक एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी पर काम करने का मौका मिलेगा।

कंपोजिट मटेरियल का इस्तेमाल

एएमसीए में बड़े पैमाने पर कंपोजिट मटेरियल का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे विमान का वजन कम होगा और मजबूती बढ़ेगी।

कम वजन होने से विमान की गति, रेंज और हथियार ले जाने की क्षमता बेहतर होगी। (AMCA Fighter Jet RFP)

साइबर सिक्योरिटी पर खास फोकस

आरएफपी में साइबर सिक्योरिटी को अनिवार्य बनाया गया है। कंपनियों को रक्षा मंत्रालय की साइबर सुरक्षा गाइडलाइन का पालन करना होगा।

क्योंकि आधुनिक लड़ाकू विमान पूरी तरह नेटवर्क आधारित होते हैं, इसलिए साइबर हमलों से सुरक्षा बेहद जरूरी मानी जा रही है।

एएमसीए परियोजना में अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को लागू किया जाएगा। आरएफपी में एएस9100 जैसे एयरोस्पेस क्वालिटी स्टैंडर्ड का जिक्र किया गया है।

सभी निर्माण इकाइयों और सप्लाई चेन को इन मानकों का पालन करना होगा। (AMCA Fighter Jet RFP)

लंबे समय तक रखरखाव की जिम्मेदारी

इंडस्ट्री पार्टनर को केवल विमान बनाना ही नहीं बल्कि उनके रखरखाव और सपोर्ट की जिम्मेदारी भी निभानी होगी। आरएफपी में एलआरयू और दूसरे सिस्टम्स के लिए वारंटी और लॉन्ग टर्म सपोर्ट की व्यवस्था का भी जिक्र किया गया है।

रक्षा अधिकारियों का कहना है कि एएमसीए प्रोजेक्ट भारत के रक्षा क्षेत्र में निजी कंपनियों की भूमिका को भी नए स्तर पर ले जाएगा। (AMCA Fighter Jet RFP)

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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