📍नई दिल्ली/हैदराबाद | 13 Jun, 2026, 5:22 PM
IAF Graduation Parade 2026: भारतीय वायुसेना को शनिवार को 231 नए अधिकारी मिले। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह की मौजूदगी में डुंडीगल स्थित एयर फोर्स अकादमी में आयोजित 217वें कोर्स की कंबाइंड ग्रेजुएशन परेड की समीक्षा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की और कैडेट्स को प्रेसिडेंट कमीशन प्रदान किया। इनमें राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) की पहली महिला बैच की कैडेट्स भी शामिल थीं। रक्षा मंत्री ने इस मौके पर कहा कि आधुनिक युद्ध तेजी से बदल रहा है और नए अधिकारियों को हर चुनौती के लिए तैयार रहना होगा। इस दौरान वायुसेना प्रमुख की अगुवाई में फ्लाईपास्ट हुआ, जिसमें पिलाटस पीसी-7 एमके-II, हॉक, किरण और चेतक जैसे ट्रेनर एयरक्राफ्ट्स ने हिस्सा लिया।
IAF Graduation Parade 2026: भारतीय वायुसेना को मिले 231 नए अधिकारी
एयर फोर्स अकादमी में आयोजित इस समारोह में 231 फ्लाइट कैडेट्स ने प्रशिक्षण पूरा किया। इनमें 194 पुरुष और 37 महिला फ्लाइट कैडेट शामिल हैं। यह किसी भी सैन्य अधिकारी के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण क्षण माना जाता है क्योंकि इसी दिन वह ट्रेनी से अफसर बनता है।
इस अवसर पर भारतीय नौसेना के 9 अधिकारियों, भारतीय तटरक्षक बल के 3 अधिकारियों और वियतनाम के 2 अधिकारियों को भी उनकी ट्रेनिंग पूरी करने के बाद विंग्स प्रदान किए गए। इसके अलावा नेविगेशन ट्रेनिंग पूरा करने वाले 3 अधिकारियों को ब्रेवेट्स प्रदान किए गए। (IAF Graduation Parade 2026)
पहले महिला एनडीए बैच ने रचा नया इतिहास
इस समारोह की सबसे बड़ी खासियत राष्ट्रीय रक्षा अकादमी से आईं पहली महिला कैडेट्स का वायुसेना अधिकारी बनना रहा। कुछ साल पहले तक एनडीए में केवल पुरुष कैडेट्स को प्रवेश मिलता था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद महिलाओं के लिए भी रास्ता खुला।
अब उन्हीं महिला कैडेट्स का पहला बैच प्रशिक्षण पूरा कर भारतीय वायुसेना का हिस्सा बना है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने महिला अधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि बढ़ती नारी शक्ति भारतीय वायुसेना को और मजबूत, संतुलित तथा सक्षम बना रही है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की बढ़ती भागीदारी भारत की समावेशी सैन्य व्यवस्था को दर्शाती है।
ऑपरेशन सिंदूर का किया जिक्र
अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने भारतीय वायुसेना की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि वायुसेना ने हमेशा देश के लिए ढाल और तलवार दोनों की भूमिका निभाई है।
उन्होंने कहा कि 1947-48 के कश्मीर युद्ध के दौरान श्रीनगर एयरलिफ्ट ने युद्ध की दिशा बदल दी थी। इसी तरह 1971 के युद्ध में भारतीय वायुसेना ने निर्णायक भूमिका निभाकर इतिहास रचा।
राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस अभियान के दौरान भारतीय वायुसेना ने अत्यधिक सटीकता और पेशेवर क्षमता का प्रदर्शन किया। आतंकवादी ठिकानों पर किए गए हमलों ने यह साबित किया कि भारतीय वायुसेना आधुनिक युद्ध की चुनौतियों का सामना करने में पूरी तरह सक्षम है।
उन्होंने कहा कि इस सफलता के पीछे केवल स्वदेशी प्लेटफॉर्म नहीं थे, बल्कि प्रशिक्षित, अनुशासित और साहसी अधिकारी भी थे, जिन्होंने मिशन को सफल बनाया। (IAF Graduation Parade 2026)
बदलते युद्ध के स्वरूप को समझने की जरूरत
रक्षा मंत्री ने नए अधिकारियों को चेतावनी दी कि आधुनिक युद्ध पहले की तुलना में पूरी तरह बदल चुका है। उन्होंने कहा कि एक समय था जब युद्ध में सैनिक और हथियार साफ दिखाई देते थे, लेकिन आज स्थिति अलग है।
अब रडार, उपग्रह, ड्रोन, सेंसर, रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकें युद्ध का स्वरूप बदल रही हैं। कई बार दुश्मन दिखाई नहीं देता, लेकिन वह साइबर नेटवर्क, कम्युनिकेशन सिस्टम या अन्य तकनीकी माध्यमों से हमला कर सकता है।
उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में अधिकारियों को लगातार सतर्क रहने की जरूरत है। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें जो शिक्षा दी गई है, वही उन्हें अनिश्चित परिस्थितियों में सही निर्णय लेने में मदद करेगी।

नई तकनीकों को अपनाने पर दिया जोर
राजनाथ सिंह ने कहा कि भविष्य के युद्धों में केवल पारंपरिक हथियारों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा। अधिकारियों को नई तकनीकों को समझना, अपनाना और जरूरत पड़ने पर उन्हें अपने अनुसार ढालना भी सीखना होगा।
उन्होंने कहा कि हर संघर्ष नई सीख देता है। आधुनिक दौर में वही देश आगे बढ़ रहे हैं जो तकनीक का सबसे बेहतर उपयोग कर रहे हैं।
रक्षा मंत्री ने कहा कि आज छोटे देश भी नई रणनीतियों और आधुनिक हथियारों के जरिए बड़ी सैन्य शक्तियों को नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखते हैं। इसलिए अधिकारियों को लगातार सीखते रहना होगा और अपनी पेशेवर क्षमता को मजबूत बनाए रखना होगा। (IAF Graduation Parade 2026)
सेकंडों में लेने होंगे फैसले
नए अधिकारियों को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि उनके कंधों पर अब बड़ी जिम्मेदारी है। कई बार ऐसी परिस्थितियां आएंगी जब उन्हें मिनटों नहीं बल्कि कुछ सेकंड में फैसला लेना होगा।
उन्होंने कहा कि अधिकारी के कंधों पर लगी विंग्स केवल एक प्रतीक नहीं हैं, बल्कि यह पूरे देश के भरोसे का चिन्ह हैं। इसलिए उन्हें हमेशा उच्चतम स्तर की पेशेवर क्षमता और अनुशासन बनाए रखना होगा। (IAF Graduation Parade 2026)
वायुसेना प्रमुख ने लिया फ्लाईपास्ट में हिस्सा
कंबाइंड ग्रेजुएशन परेड के दौरान आकर्षक फ्लाईपास्ट भी आयोजित किया गया। फ्लाईपास्ट में पिलाटस पीसी-7 मार्क-2, हॉक, किरण और चेतक जैसे प्रशिक्षण विमानों ने हिस्सा लिया। आसमान में इन विमानों को देख कर दर्शक रोमांचित हो गए।
फ्लाईपास्ट में तीन किरण ट्रेनर जेट की फॉर्मेशन ने भी हिस्सा लिया। इस फॉर्मेशन की सबसे बड़ी खूबी यह थी कि भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह स्वयं एक किरण विमान उड़ा रहे थे। आमतौर पर ऐसे अवसरों पर वरिष्ठ अधिकारी फ्लाईपास्ट का निरीक्षण करते हैं, लेकिन इस बार एयर चीफ ने खुद कॉकपिट संभालकर उड़ान भरी।
आकाश गंगा और शक्ति टीम का प्रदर्शन बना आकर्षण
समारोह में भारतीय वायुसेना की प्रसिद्ध स्काईडाइविंग टीम “आकाश गंगा” ने भी प्रदर्शन किया। इसके अलावा महिला एयर वॉरियर्स की “शक्ति” ड्रिल टीम ने अपनी शानदार प्रस्तुति से दर्शकों की खूब सराहना हासिल की।
इसके अलावा सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान, सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम और सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम ने मनमोहक हवाई करतब दिखाए। (IAF Graduation Parade 2026)
इन अधिकारियों को मिले प्रतिष्ठित पुरस्कार
प्रशिक्षण के दौरान सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को रक्षा मंत्री ने सम्मानित भी किया।
फ्लाइंग ऑफिसर आशीष कुमार यादव को पायलट कोर्स में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए प्रतिष्ठित “प्रेसिडेंट्स प्लाक” और “नवानगर स्वॉर्ड ऑफ ऑनर” प्रदान किया गया। उन्होंने समग्र मेरिट सूची में पहला स्थान प्राप्त किया।
नेविगेशन शाखा में फ्लाइंग ऑफिसर एकता गुप्ता को समग्र मेरिट में प्रथम स्थान हासिल करने पर “प्रेसिडेंट्स प्लाक” दिया गया।
ग्राउंड ड्यूटी शाखा में फ्लाइंग ऑफिसर दिव्यांशी सिंह को सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने पर “प्रेसिडेंट्स प्लाक” से सम्मानित किया गया। (IAF Graduation Parade 2026)
क्या होता है प्रेसिडेंट कमीशन
भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना में किसी भी कैडेट के लिए अधिकारी बनने का सबसे महत्वपूर्ण क्षण वह होता है, जब उसे प्रेसिडेंट कमीशन प्रदान किया जाता है। यह वह आधिकारिक नियुक्ति है, जिसके बाद एक कैडेट सैन्य अधिकारी बन जाता है।
जब कोई कैडेट एनडीए, आईएमए, ओटीए, आईएनए या एयर फोर्स अकादमी से अपना प्रशिक्षण पूरा करता है, तो पासिंग आउट परेड के दौरान उसे राष्ट्रपति की ओर से कमीशन दिया जाता है। इसके साथ ही वह भारतीय सशस्त्र बलों में अधिकारी के रूप में शामिल हो जाता है। चूंकि भारत के राष्ट्रपति तीनों सेनाओं के सर्वोच्च सेनापति होते हैं, इसलिए यह नियुक्ति उनके नाम से जारी की जाती है।
प्रेसिडेंट कमीशन केवल एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह एक कानूनी अधिकार भी देता है। इसके बाद अधिकारी अपनी यूनिट में जाकर सैनिकों का नेतृत्व कर सकता है, सैन्य जिम्मेदारियां संभाल सकता है और अपने पद से जुड़े अधिकारों का उपयोग कर सकता है। बिना कमीशन के कोई भी व्यक्ति आधिकारिक तौर पर सैन्य अधिकारी नहीं माना जाता।
पासिंग आउट परेड के दौरान कैडेटों को शपथ दिलाई जाती है कि वे देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करेंगे। इसके बाद उन्हें उनकी शाखा और रैंक के अनुसार सेना, नौसेना या वायुसेना में नियुक्त किया जाता है। इसी प्रक्रिया को प्रेसिडेंट कमीशन कहा जाता है।
यह उस लंबे और कठिन प्रशिक्षण का अंतिम पड़ाव होता है, जिसे पूरा करने के बाद एक कैडेट अधिकारी बनने का अधिकार प्राप्त करता है। यही कारण है कि सैन्य अकादमियों में होने वाले कमीशनिंग समारोह को बेहद गौरवपूर्ण और भावनात्मक अवसर माना जाता है। परिवारों के लिए भी यह गर्व का क्षण होता है, क्योंकि उसी दिन उनका बेटा या बेटी आधिकारिक रूप से भारतीय सशस्त्र बलों का अधिकारी बन जाता है। (IAF Graduation Parade 2026)



