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29 साल बाद आर्मर्ड कोर से मिला नया सेना प्रमुख: कौन हैं लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ, जिन्होंने टैंक फॉर्मेशन से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक निभाई अहम भूमिका

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ भारतीय सेना के उन चुनिंदा अधिकारियों में शामिल हैं जिन्होंने अपने करियर में ऑपरेशनल कमांड, रणनीतिक योजना, सैन्य आधुनिकीकरण और अंतरराष्ट्रीय सैन्य सहयोग जैसे लगभग हर महत्वपूर्ण क्षेत्र में काम किया है...

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📍नई दिल्ली | 13 Jun, 2026, 3:40 PM

Lt Gen Dhiraj Seth Army Chief: केंद्र सरकार ने भारतीय सेना के वर्तमान उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को देश का अगला सेना प्रमुख नियुक्त करने का फैसला किया है। वह 30 जून की दोपहर से भारतीय सेना की कमान संभालेंगे। मौजूदा सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी उसी दिन रिटायर हो रहे हैं। लगभग चार दशक लंबे सैन्य अनुभव, सेना के आधुनिकीकरण में महत्वपूर्ण योगदान और दो ऑपरेशनल कमांड की कमान संभालने का अनुभव रखने वाले लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ अब भारतीय सेना के सर्वोच्च पद तक पहुंच गए हैं। उनकी नियुक्ति इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि 1997 के बाद पहली बार आर्मर्ड कोर का कोई अधिकारी सेना प्रमुख बनने जा रहा है।

Lt Gen Dhiraj Seth Army Chief: कौन हैं लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ?

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ भारतीय सेना के उन चुनिंदा अधिकारियों में शामिल हैं जिन्होंने अपने करियर में ऑपरेशनल कमांड, रणनीतिक योजना, सैन्य आधुनिकीकरण और अंतरराष्ट्रीय सैन्य सहयोग जैसे लगभग हर महत्वपूर्ण क्षेत्र में काम किया है।

वह राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, खड़कवासला के पूर्व छात्र हैं और दिसंबर 1986 में भारतीय सेना की प्रतिष्ठित आर्मर्ड कोर में कमीशन प्राप्त किया था। उस समय भारतीय सेना तेजी से आधुनिकीकरण के दौर से गुजर रही थी और आर्मर्ड फोर्सेज को पश्चिमी सीमा पर महत्वपूर्ण भूमिका दी जा रही थी। धीरज सेठ ने अपने करियर की शुरुआत टैंक रेजिमेंट से की और धीरे-धीरे सेना के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचे।

करीब 40 सालों की सेवा के दौरान उन्होंने रेगिस्तान से लेकर जम्मू-कश्मीर और पश्चिमी मोर्चे से लेकर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र तक अलग-अलग सैन्य जिम्मेदारियां संभाली हैं। (Lt Gen Dhiraj Seth Army Chief)

29 साल बाद आर्मर्ड कोर से बने सेना प्रमुख

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ की नियुक्ति भारतीय सेना के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम मानी जा रही है। भारतीय सेना के इतिहास में आर्मर्ड कोर के अधिकारियों का सेना प्रमुख बनना अपेक्षाकृत कम देखने को मिला है। लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ से पहले आर्मर्ड कोर से आने वाले आखिरी सेना प्रमुख जनरल शंकर रॉय चौधरी थे, जिन्होंने वर्ष 1994 से 1997 तक भारतीय सेना की कमान संभाली थी। वह प्रतिष्ठित 20 लांसर्स रेजिमेंट से थे और टैंक युद्धक अभियानों के विशेषज्ञ माने जाते थे।

दिलचस्प बात यह है कि जनरल शंकर रॉय चौधरी को सेना प्रमुख का पद उस समय मिला था जब तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल बिपिन चंद्र जोशी का कार्यकाल के दौरान अचानक निधन हो गया था। जनरल जोशी भी आर्मर्ड कोर से ही थे और 64 कैवेलरी रेजिमेंट से कमीशन प्राप्त अधिकारी थे। वह भारतीय सेना के उन चुनिंदा “टैंकमैन” अधिकारियों में गिने जाते थे जिन्होंने सेना के सर्वोच्च पद तक पहुंच बनाई।

जनरल बिपिन चंद्र जोशी के निधन के बाद जनरल शंकर रॉय चौधरी ने सेना की कमान संभाली और 1997 तक सेना प्रमुख रहे। उनके सेवानिवृत्त होने के बाद लगभग 29 वर्षों तक आर्मर्ड कोर का कोई अधिकारी भारतीय सेना के शीर्ष पद तक नहीं पहुंच पाया। अब लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ की नियुक्ति के साथ यह लंबा अंतराल समाप्त हो गया है और आर्मर्ड कोर को एक बार फिर भारतीय सेना का नेतृत्व करने का अवसर मिला है।

आर्मर्ड कोर भारतीय सेना की वह शाखा है जो टैंक और मैकेनाइज्ड युद्धक अभियानों के लिए जानी जाती है। आधुनिक युद्ध में टैंक फॉर्मेशन किसी भी सेना की आक्रमण क्षमता की रीढ़ माने जाते हैं।

स्वतंत्र भारत में अब तक केवल कुछ ही आर्मर्ड कोर अधिकारियों को सेना प्रमुख बनने का अवसर मिला है। इनमें जनरल राजेंद्र सिंह जाडेजा, जनरल जे.एन. चौधरी, जनरल ए.एस. वैद्य, जनरल वी.एन. शर्मा, जनरल बिपिन चंद्र जोशी और जनरल शंकर रॉय चौधरी जैसे नाम शामिल हैं। (Lt Gen Dhiraj Seth Army Chief)

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हर स्तर पर संभाली कमान

धीरज सेठ का सैन्य करियर केवल स्टाफ नियुक्तियों तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने जमीनी स्तर से लेकर बड़े मिलिट्री स्ट्रक्चर्स तक हर स्तर पर कमान संभाली है।

उन्होंने सबसे पहले रेगिस्तानी क्षेत्र में एक आर्मर्ड रेजिमेंट का नेतृत्व किया। इसके बाद पश्चिमी क्षेत्र में 98 आर्मर्ड ब्रिगेड की कमान संभाली। यह ब्रिगेड उस समय पाकिस्तान केंद्रित स्ट्राइक फॉर्मेशन का हिस्सा मानी जाती थी।

इसके बाद उन्हें जम्मू-कश्मीर में यूनिफॉर्म फोर्स की जिम्मेदारी सौंपी गई। यह डिवीजन स्तर की काउंटर इंसर्जेंसी फोर्स है, जो आतंकवाद विरोधी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

लेफ्टिनेंट जनरल बनने के बाद उन्होंने भारतीय सेना की प्रमुख स्ट्राइक फॉर्मेशन सुदर्शन चक्र कोर यानी 21 कोर की कमान संभाली। यह सेना की सबसे ताकतवर आक्रमणकारी फॉर्मेशन में से एक मानी जाती है।

बाद में उन्हें दिल्ली एरिया का जनरल ऑफिसर कमांडिंग नियुक्त किया गया, जहां उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सैन्य आयोजनों तथा महत्वपूर्ण समारोहों की जिम्मेदारी संभाली। (Lt Gen Dhiraj Seth Army Chief)

दो ऑपरेशनल कमांड की कमान संभालने का दुर्लभ रिकॉर्ड

भारतीय सेना में बहुत कम अधिकारियों को दो अलग-अलग ऑपरेशनल कमांड का नेतृत्व करने का अवसर मिलता है। लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ उन चुनिंदा अधिकारियों में शामिल हैं जिन्होंने यह उपलब्धि हासिल की।

उन्होंने नवंबर 2023 से जून 2024 तक दक्षिण पश्चिमी कमांड की कमान संभाली। इसके बाद जुलाई 2024 में उन्हें सदर्न कमांड का जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ नियुक्त किया गया।

करीब ढाई वर्षों तक उन्होंने भारतीय सेना की दो महत्वपूर्ण कमांड का नेतृत्व किया। इस दौरान पश्चिमी मोर्चे, प्रशिक्षण गतिविधियों और सामरिक तैयारियों की निगरानी उनकी जिम्मेदारी रही। (Lt Gen Dhiraj Seth Army Chief)

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान निभाई अहम भूमिका

सदर्न कमांड के प्रमुख के रूप में लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

हालांकि ऑपरेशन की कई जानकारियां सार्वजनिक नहीं की गई हैं, लेकिन सैन्य सूत्रों के अनुसार उस दौरान विभिन्न कमांड्स के बीच समन्वय और ऑपरेशनल तैयारियों में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही। यही कारण है कि उन्हें 2026 में उत्तम युद्ध सेवा पदक (यूवाईएसएम) से सम्मानित किया गया। (Lt Gen Dhiraj Seth Army Chief)

सेना के आधुनिकीकरण के प्रमुख चेहरों में रहे शामिल

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को भारतीय सेना में मॉर्डनाइजेशन और कैपेसिटी डेवलपमेंट का विशेषज्ञ माना जाता है। सैन्य हलकों में उनकी सबसे बड़ी पहचान एक ऐसे अधिकारी की रही है, जिन्होंने अपने करियर के दौरान केवल ऑपरेशनल कमांड ही नहीं संभाली, बल्कि सेना को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने वाली योजनाओं पर भी लंबे समय तक काम किया। उनकी अधिकांश महत्वपूर्ण स्टाफ नियुक्तियां सेना के कैपेबिलिटी डेवलपमेंट, हथियार अधिग्रहण और मॉडर्नाइजेशन से जुड़ी रही हैं।

आर्मी मुख्यालय में उन्होंने मैकेनाइज्ड फोर्सेस के लिए कैपेबिलिटी डेवलपमेंट की जिम्मेदारी संभाली, जहां उनका काम टैंक और आर्मर्ड फॉर्मेशनों की युद्धक क्षमता को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करना था। इसके बाद ब्रिगेडियर के रूप में उन्होंने पर्सपेक्टिव प्लान्स एंड एक्विजिशन से जुड़े महत्वपूर्ण पद पर काम किया। यह वही शाखा है जहां सेना के लंबे समय के आधुनिकीकरण कार्यक्रम, नई सैन्य क्षमताओं की योजना और हथियारों की खरीद से संबंधित रोडमैप तैयार किए जाते हैं।

बाद में एडिशनल डायरेक्टर जनरल वेपन्स एंड इक्विपमेंट के रूप में उन्होंने आधुनिक हथियार प्रणालियों, सैन्य उपकरणों की खरीद, परीक्षण और सेना में शामिल किए जाने की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाई। भारतीय सेना के लॉन्ग टर्म इंटीग्रेटेड पर्सपेक्टिव प्लान (एलटीआईपीपी) में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है। यह योजना सेना के आने वाले वर्षों के आधुनिकीकरण, नई तकनीकों को शामिल करने और युद्धक क्षमता बढ़ाने का आधार मानी जाती है।

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सदर्न कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ रहते हुए उन्होंने “डिकेड ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन” और “फ्यूचर रेडी फोर्स” के कॉन्सैप्ट पर विशेष जोर दिया। उनके नेतृत्व में आयोजित एक्सरसाइज रुद्र शक्ति जैसे बड़े सैन्य अभ्यासों में मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस, प्रिसीजन फायरपावर और नई तकनीकों के इंटीग्रेशन प्रमुखता दी गई। (Lt Gen Dhiraj Seth Army Chief)

शौर्य स्क्वॉड्रन: टैंक और ड्रोन को लाए साथ

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को भारतीय सेना में आधुनिकीकरण और नई युद्ध तकनीकों को अपनाने वाले अधिकारियों में गिना जाता है। सदर्न कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान “शौर्य स्क्वॉड्रन” की नींव रखी। जिसे भारतीय सेना के भविष्य के युद्धक्षेत्र की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। हालांकि इसे अभी तक फाइनल ऑपरेशन क्लीयरेंस नहीं मिला है, लेकिन माना जा रहा है कि जल्द ही इसे मंजूरी मिलेगी।

शौर्य स्क्वॉड्रन मूल रूप से एक विशेष ड्रोन स्क्वॉड्रन है, जिसे आर्मर्ड फॉर्मेशनों यानी टैंक और मैकेनाइज्ड यूनिट्स के साथ जोड़ा गया है। इसका उद्देश्य युद्ध के दौरान टैंक फॉर्मेशनों को रियल-टाइम सर्विलांस, टारगेट की पहचान, प्रिसीजन स्ट्राइक, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और दुश्मन की बेहतर जानकारी उपलब्ध कराना है। आधुनिक युद्ध में केवल टैंक और आर्मर्ड व्हीकल्स के साथ ड्रोन, सेंसर और डिजिटल नेटवर्क का इंटीग्रेशन भी जरूरी हो गया है। शौर्य स्क्वॉड्रन इसी सोच का हिस्सा है।

मार्च 2026 में झांसी के पास बबीना फील्ड फायरिंग रेंज में आयोजित एक बड़े इंटीग्रेटेड मैकेनाइज्ड अभ्यास के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने शौर्य स्क्वॉड्रन की क्षमताओं का प्रदर्शन देखा था। इस अभ्यास में ड्रोन और आर्मर्ड फोर्सेस के बीच तालमेल, रियल-टाइम टारगेटिंग और कॉर्डिनेटेड फायरपावर का प्रदर्शन किया गया। (Lt Gen Dhiraj Seth Army Chief)

मिला था ट्राई-सर्विस गार्ड ऑफ ऑनर

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ के कार्यकाल की एक और उल्लेखनीय उपलब्धि तीनों सेनाओं के बीच जॉइंटनेस और कॉर्डिनेशन को मजबूत करना रही। 31 मार्च को जब उन्होंने सदर्न कमांड की कमान छोड़ी, तब उन्हें एक विशेष ट्राई-सर्विस गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया।

सामान्य तौर पर किसी आर्मी कमांडर को कमान छोड़ते समय केवल सेना की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाता है, लेकिन धीरज सेठ को भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के संयुक्त दल द्वारा सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके नेतृत्व में बढ़े ट्राई-सर्विस सहयोग और जॉइंट मिलिट्री एप्रोच को लेकर दिया गया।

उनके कार्यकाल के दौरान सदर्न कमांड क्षेत्र में कई जॉइंट मिलिट्री एक्सरसाइज आयोजित की गईं, जिनमें तीनों सेनाओं ने मिलकर हिस्सा लिया। इन अभ्यासों का उद्देश्य युद्ध के समय बेहतर समन्वय, संसाधनों का साझा उपयोग और जॉइंट आपरेशनल कैपेबिलिटी डेवलप करना था। ऑपरेशन सिंदूर के बाद हुई तीनों सेनाओं की जॉइंट एक्सरसाइज त्रिशूल में भी इस जॉइंट एप्रोच की झलक देखने को मिली। (Lt Gen Dhiraj Seth Army Chief)

पारिवारिक विरासत भी है बेहद खास

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ का सैन्य करियर कई मायनों में एक दिलचस्प पारिवारिक विरासत से भी जुड़ा हुआ है। उनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल के.एम. सेठ भी भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों में गिने जाते थे और उन्होंने सेना के एडजुटेंट जनरल के रूप में दिसंबर 1997 में रिटायर हुए थे।

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खास बात यह है कि पिता और पुत्र दोनों ने भारतीय सेना की प्रतिष्ठित 21 स्ट्राइक कोर, जिसे “सुदर्शन चक्र कोर” के नाम से भी जाना जाता है, की कमान संभाली। यह भारतीय सेना की सबसे महत्वपूर्ण आक्रमणकारी फॉर्मेशनों में से एक मानी जाती है और पश्चिमी मोर्चे पर इसकी अहम भूमिका रहती है।

यह भारतीय सेना के इतिहास में उन दुर्लभ अवसरों में से एक रहा जब पिता और पुत्र दोनों एक ही प्रतिष्ठित स्ट्राइक कोर के कमांडर बने। इससे उनके परिवार का भारतीय सेना के साथ लंबे और गहरे जुड़ाव का भी पता चलता है।

सैन्य सेवा की यह परंपरा परिवार की अगली पीढ़ी तक भी जारी है। लेफ्टिनेंट जनरल के.एम. सेठ के दूसरे पुत्र रियर एडमिरल रवनीश सेठ भारतीय नौसेना में वरिष्ठ अधिकारी हैं और वर्तमान में कर्नाटक के कारवार स्थित महत्वपूर्ण नौसैनिक अड्डे पर तैनात हैं। (Lt Gen Dhiraj Seth Army Chief)

संयुक्त राष्ट्र मिशन में भी किया प्रतिनिधित्व

धीरज सेठ को अंतरराष्ट्रीय सैन्य अनुभव भी प्राप्त है। वर्ष 1995-96 के दौरान उन्होंने अंगोला में संयुक्त राष्ट्र मिशन के साथ ऑपरेशंस ऑफिसर के रूप में काम किया।

यह अनुभव उन्हें बहुराष्ट्रीय सैन्य अभियानों, शांति स्थापना अभियानों और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों को समझने में मददगार रहा।

शिक्षा और सैन्य प्रशिक्षण में हमेशा रहे अव्वल

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ का रिकॉर्ड केवल फील्ड कमांड तक सीमित नहीं रहा है है। सैन्य शिक्षा और प्रोफेल ट्रेनिंग में भी उन्होंने लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। वे आर्मर्ड कोर्स के कर्नल ऑफ द रेजिमेंट भी हैं। 

उन्होंने जूनियर कमांड कोर्स में पहला स्थान प्राप्त किया था। डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज में उन्हें बेस्ट ऑल राउंड स्टूडेंट ऑफिसर का सम्मान मिला। यंग ऑफिसर्स कोर्स में उन्हें सिल्वर सेंटूरियन पुरस्कार प्रदान किया गया।

उन्होंने हायर कमांड कोर्स, नेशनल डिफेंस कॉलेज और पेरिस के प्रतिष्ठित कमांड एंड स्टाफ कोर्स में भी प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके अलावा अमेरिका के नेवल पोस्टग्रेजुएट स्कूल में इंटरनेशनल डिफेंस एक्विजिशन मैनेजमेंट कोर्स भी किया। (Lt Gen Dhiraj Seth Army Chief)

मिले कई प्रतिष्ठित सैन्य सम्मान

अपने लंबे सैन्य करियर के दौरान उन्हें कई महत्वपूर्ण सैन्य पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है।

उन्हें अति विशिष्ट सेवा पदक (एवीएसएम), परम विशिष्ट सेवा पदक (पीवीएसएम) और उत्तम युद्ध सेवा पदक (यूवाईएसएम) प्रदान किए जा चुके हैं। इसके अलावा सेना प्रमुख और आर्मी कमांडर स्तर की प्रशस्तियां भी उन्हें मिल चुकी हैं।

अप्रैल 2026 में बने थे उप सेना प्रमुख

1 अप्रैल 2026 को लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने उप सेना प्रमुख का पद संभाला था। उस समय उन्हें सेना की ऑपरेशनल तैयारियों, आधुनिकीकरण कार्यक्रमों और रणनीतिक योजनाओं की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई थी।

अब सरकार ने उन्हें भारतीय सेना का अगला प्रमुख नियुक्त किया है। 30 जून 2026 को जनरल उपेंद्र द्विवेदी के सेवानिवृत्त होने के बाद वह भारतीय सेना की कमान संभालेंगे और देश के 31वें सेना प्रमुख बनेंगे। (Lt Gen Dhiraj Seth Army Chief)

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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