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ब्रह्मोस मिसाइल के लिए बनेगा हाई-टेक सबसिस्टम, PTC इंडस्ट्रीज को मिला मिशन-क्रिटिकल ऑर्डर

ब्रह्मोस मिसाइल में इस्तेमाल होने वाले एयरफ्रेम और स्ट्रक्चरल हिस्सों के लिए हल्की लेकिन बेहद मजबूत धातुओं की जरूरत होती है। इन्हें अत्यधिक तापमान और तेज कंपन के बीच भी बिना क्षति के काम करना पड़ता है...

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📍नई दिल्ली | 17 Jul, 2026, 8:50 PM

PTC Industries BrahMos Order: पीटीसी इंडस्ट्रीज लिमिटेड को देश के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक रक्षा कार्यक्रमों में शामिल ब्रह्मोस एयरोस्पेस से दो साल का बड़ा ऑर्डर मिला है। कंपनी ने शुक्रवार को स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में बताया कि इस ऑर्डर के तहत कंपनी ब्रह्मोस मिसाइल के लिए एक मिशन-क्रिटिकल स्ट्रक्चरल असेंबली वाले रणनीतिक मिसाइल सबसिस्टम का डेवलपमेंट, इंटीग्रेशन और सप्लाई करेगी।

अब तक पीटीसी इंडस्ट्रीज रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र के लिए हाई-परफॉर्मेंस मटेरियल, प्रेसिजन कास्टिंग, इंजीनियरिंग कंपोनेंट और क्रिटिकल असेंबली तैयार करती रही है। लेकिन नए ऑर्डर के साथ कंपनी की भूमिका और बड़ी हो गई है।

अब उसे केवल अलग-अलग पार्ट्स नहीं बनाने होंगे, बल्कि पूरे सबसिस्टम को विकसित करके उसे इंटीग्रेटेड रूप में तैयार करना होगा। रक्षा उद्योग में इसे काफी बड़ा बदलाव माना जाता है, क्योंकि सिस्टम इंटीग्रेशन में डिजाइन, निर्माण, गुणवत्ता जांच और अंतिम असेंबली सभी चरण शामिल होते हैं।

कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर सचिन अग्रवाल ने इसे कंपनी के इतिहास का अहम पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि यह ऑर्डर दिखाता है कि ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने भारत के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक कार्यक्रमों में पीटीसी इंडस्ट्रीज की तकनीकी क्षमता पर भरोसा जताया है।

PTC Industries BrahMos Order: सुपरसोनिक मिसाइल के लिए बनेंगे विशेष स्ट्रक्चर

पीटीसी इंडस्ट्रीज जिस असेंबली का निर्माण करेगी, उसे ब्रह्मोस जैसी सुपरसोनिक मिसाइल में इस्तेमाल किया जाएगा। ब्रह्मोस की गति लगभग मैक 2.8 से 3 तक पहुंचती है। इतनी तेज रफ्तार पर मिसाइल के हर हिस्से पर बहुत अधिक दबाव, कंपन और गर्मी का असर पड़ता है।

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इसी वजह से इस तरह की स्ट्रक्चरल असेंबली तैयार करना आसान नहीं होता। इसके लिए माइक्रोन लेवल की सटीक मशीनिंग, विशेष जॉइनिंग तकनीक, कंट्रोल असेंबली का इंटीग्रेशन और कई चरणों की गुणवत्ता जांच करनी पड़ती है। तैयार होने वाले प्रत्येक हिस्से की ट्रेसेबिलिटी भी सुनिश्चित करनी होती है ताकि उसके निर्माण से लेकर अंतिम परीक्षण तक हर चरण का रिकॉर्ड उपलब्ध रहे।

1963 में शुरू हुई थी कंपनी

पीटीसी इंडस्ट्रीज की शुरुआत साल 1963 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रिसिजन टूल्स एंड कास्टिंग्स के रूप में हुई थी। शुरुआती दौर में कंपनी औद्योगिक उपयोग के लिए इन्वेस्टमेंट कास्टिंग तैयार करती थी।

समय के साथ कंपनी ने अपनी तकनीक को लगातार विकसित किया। साल 1998 में उसने ब्रिटेन की कास्टिंग्स टेक्नोलॉजी इंटरनेशनल से रिप्लीकास्ट प्रक्रिया का लाइसेंस लिया और बाद में अपनी रैपिडकास्ट तकनीक विकसित की। इससे बड़े और जटिल धातु के पुर्जे अधिक सटीकता के साथ तैयार किए जाने लगे।

बाद में कंपनी ने फोर्जकास्ट और एडवांस सिरेमिक मोल्डिंग जैसी तकनीकों को भी अपनाया। आज पीटीसी एयरोस्पेस, रक्षा, अंतरिक्ष, ऊर्जा, तेल एवं गैस और समुद्री क्षेत्र के लिए विशेष धातु और जटिल कंपोनेंट तैयार करती है।

लखनऊ में तैयार हो रहा है हाईटेक मैन्युफैक्चरिंग सेंटर

पीटीसी इंडस्ट्रीज इस समय उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लखनऊ नोड में अपनी अत्याधुनिक उत्पादन सुविधाओं का विस्तार कर रही है।

करीब 50 एकड़ में बने स्ट्रैटेजिक मैटेरियल टेक्नोलॉजी कॉम्प्लेक्स में वैक्यूम आर्क रीमेल्टिंग, प्लाज्मा आर्क मेल्टिंग, इलेक्ट्रॉन बीम मेल्टिंग और वैक्यूम इंडक्शन मेल्टिंग जैसी आधुनिक तकनीकें लगाई गई हैं।

इन सुविधाओं के जरिए एयरोस्पेस ग्रेड टाइटेनियम, सुपरअलॉय, बिलेट, बार, प्लेट और अन्य विशेष धातु उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। यही सामग्री आधुनिक मिसाइलों, लड़ाकू विमानों, गैस टर्बाइन और अंतरिक्ष कार्यक्रमों में इस्तेमाल होती है।

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ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज ऑपरेशनल सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में गिनी जाती है। इसका विकास भारत और रूस के संयुक्त उपक्रम ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने किया है।

यह मिसाइल जमीन, समुद्र, हवा और पनडुब्बी से लॉन्च की जा सकती है। इसकी तेज गति, सटीक निशाना लगाने की क्षमता और कम प्रतिक्रिया समय इसे भारतीय सशस्त्र बलों के सबसे महत्वपूर्ण हथियारों में शामिल करते हैं।

ब्रह्मोस मिसाइल में इस्तेमाल होने वाले एयरफ्रेम और स्ट्रक्चरल हिस्सों के लिए हल्की लेकिन बेहद मजबूत धातुओं की जरूरत होती है। इन्हें अत्यधिक तापमान और तेज कंपन के बीच भी बिना क्षति के काम करना पड़ता है।

टाइटेनियम और सुपरअलॉय की बढ़ रही है अहमियत

आधुनिक रक्षा प्रणालियों में टाइटेनियम और सुपरअलॉय का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। इन धातुओं का वजन कम होता है, लेकिन मजबूती बहुत अधिक होती है। ये जंग से भी सुरक्षित रहती हैं और ऊंचे तापमान पर भी अपनी क्षमता बनाए रखती हैं।

भारत के पास टाइटेनियम अयस्क के बड़े भंडार हैं, लेकिन लंबे समय तक इसकी प्रोसेसिंग के लिए विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता था। पीटीसी इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियां अब देश के भीतर ही इस तकनीक को विकसित कर रही हैं।

कई बड़े रक्षा संगठनों के साथ कर चुकी है काम

पीटीसी इंडस्ट्रीज पहले से हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), डीआरडीओ, इसरो, सफ्रान, दसॉ एविएशन, बीएई सिस्टम्स और इजराइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज जैसी संस्थाओं और कंपनियों के लिए विशेष कंपोनेंट तैयार कर चुकी है।

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