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भविष्य के युद्ध में सड़कें होंगी सबसे बड़ा हथियार! रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया क्यों जरूरी है बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर

रक्षा मंत्री ने कहा कि कई बार युद्ध का पहला मोर्चा सीमा पर नहीं, बल्कि उस सड़क पर होता है जो सैनिकों को सीमा तक पहुंचाती है। यदि सड़क मजबूत और हर मौसम में चालू रहने वाली हो तो सेना कम समय में अपनी तैनाती कर सकती है...

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📍नई दिल्ली | 16 Jul, 2026, 3:27 PM

BRO Strategic Infrastructure Conclave: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को कहा कि आधुनिक युद्ध तेजी से बदल रहा है। सेनाओं में अत्याधुनिक मिसाइलें, ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम और लंबी दूरी तक मार करने वाले हथियार शामिल हो रहे हैं। इसके बावजूद सीमा तक पहुंचाने वाली सड़कें, सुरंगें, हवाई पट्टियां और बंदरगाह आने वाले समय में भी उतने ही महत्वपूर्ण रहेंगे।

उन्होंने कहा कि किसी भी युद्ध का नतीजा केवल आधुनिक हथियार तय नहीं करते। सैनिकों, हथियारों और रसद को समय पर सीमा तक पहुंचाने वाला मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर भी उतना ही जरूरी होता है। इसलिए सीमा क्षेत्रों में सड़क, सुरंग, पुल, हवाई पट्टी और अन्य रणनीतिक ढांचे का विकास राष्ट्रीय सुरक्षा का अहम हिस्सा है।

BRO Strategic Infrastructure Conclave: सीमा तक पहुंचने वाली सड़क भी युद्ध का पहला मोर्चा

नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन (बीआरओ) स्ट्रैटेजिक इंफ्रास्ट्रक्चर कॉन्क्लेव में बोलते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि कई बार युद्ध का पहला मोर्चा सीमा पर नहीं, बल्कि उस सड़क पर होता है जो सैनिकों को सीमा तक पहुंचाती है। यदि सड़क मजबूत और हर मौसम में चालू रहने वाली हो तो सेना कम समय में अपनी तैनाती कर सकती है।

उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति ऐसी सड़क बनाता है, वह भी राष्ट्रीय सुरक्षा में उतनी ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है जितनी सीमा पर तैनात सैनिक निभाते हैं। (BRO Strategic Infrastructure Conclave)

BRO Strategic Infrastructure Conclave
Border Infrastructure Will Remain Critical in Future Warfare, Says Defence Minister Rajnath Singh at BRO Strategic Infrastructure Conclave (Photo: PIB)

बीआरओ ने बदली अपनी पहचान

राजनाथ सिंह ने कहा कि पिछले साढ़े छह दशकों में बीआरओ ने केवल सड़क निर्माण एजेंसी की भूमिका तक खुद को सीमित नहीं रखा। आज यह दुनिया की प्रमुख रणनीतिक इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने वाली संस्थाओं में शामिल है।

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उन्होंने कहा कि अटल टनल, सेला टनल और उमलिंग ला सड़क जैसी परियोजनाएं बीआरओ की इंजीनियरिंग क्षमता और कठिन परिस्थितियों में काम करने की योग्यता का प्रमाण हैं। ऊंचे पहाड़ों, बर्फबारी और बेहद कठिन मौसम के बीच भी बीआरओ के कर्मचारियों ने लगातार काम कर यह साबित किया है कि मजबूत इच्छाशक्ति के साथ बड़ी से बड़ी चुनौती का सामना किया जा सकता है। (BRO Strategic Infrastructure Conclave)

नई तकनीकों का तेजी से हो रहा इस्तेमाल

रक्षा मंत्री ने कहा कि बीआरओ अब आधुनिक तकनीकों को तेजी से अपना रहा है। विशेष रूप से टनल निर्माण तकनीक ने देश में बड़ा बदलाव लाया है। पहले जहां सुरंगें मुख्य रूप से शहरों में मेट्रो परियोजनाओं तक सीमित थीं, वहीं अब इन्हीं तकनीकों का इस्तेमाल पहाड़ी क्षेत्रों में राष्ट्रीय राजमार्ग और सामरिक सड़कों के निर्माण में भी किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे कठिन इलाकों में जिस रफ्तार से बीआरओ सड़कें और राजमार्ग बना रहा है, वह आधुनिक तकनीक और मानव क्षमता के बेहतर तालमेल का उदाहरण है।

सीमा के गांवों तक पहुंच रही बेहतर कनेक्टिविटी

राजनाथ सिंह ने कहा कि किसी भी सभ्यता के विकास में कनेक्टिविटी की अहम भूमिका होती है। सड़क, रेल, हवाई और डिजिटल संपर्क किसी भी क्षेत्र के विकास की नींव हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि देश के किसी भी दूरदराज इलाके में रहने वाला नागरिक खुद को मुख्यधारा से अलग महसूस न करे। इसी सोच के तहत सीमावर्ती गांवों को मजबूत किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि जिन गांवों को पहले देश का आखिरी गांव कहा जाता था, उन्हें अब वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत देश का पहला गांव बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। इन गांवों में सड़क, बिजली, संचार, स्वास्थ्य और अन्य सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। (BRO Strategic Infrastructure Conclave)

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इंफ्रास्ट्रक्चर केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं

रक्षा मंत्री ने कहा कि मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना केवल सरकार का काम नहीं है। इसमें उद्योग, शिक्षण संस्थान, इंजीनियर और प्रशासन सभी की समान भूमिका है।

उन्होंने उद्योग जगत से नई तकनीक विकसित करने, शैक्षणिक संस्थानों से शोध बढ़ाने, इंजीनियरों से नए समाधान तैयार करने और प्रशासन से उन्हें समय पर लागू करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सभी पक्ष मिलकर ही ऐसा माहौल बना सकते हैं जिसमें बेहतर गुणवत्ता वाले रणनीतिक इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण हो। (BRO Strategic Infrastructure Conclave)

BRO Strategic Infrastructure Conclave
Rajnath Singh released three flagship BRO publications ‘Path Pradarshak’, ‘Oonchi Sadken’ and ‘Path Vikas’. (Photo: PIB)

बीआरओ में बढ़ रहा डिजिटल बदलाव

कार्यक्रम में बीआरओ के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह ने कहा कि आज केवल सड़क बनाना ही पर्याप्त नहीं है। अब यह भी जरूरी है कि योजना कितनी बेहतर बनाई गई, काम कितनी तेजी से पूरा हुआ, उसकी निगरानी कैसे हुई और रखरखाव कितना प्रभावी है।

उन्होंने बताया कि बीआरओ संगठन में तकनीक आधारित बदलाव किए जा रहे हैं। डिजिटल प्लानिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित समाधान, आधुनिक निर्माण तकनीक, मशीनों का अधिक इस्तेमाल और उद्योग तथा शिक्षण संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ाया जा रहा है।

परियोजना प्रबंधन और भर्ती के लिए शुरू हुए नए डिजिटल प्लेटफॉर्म

कॉन्क्लेव के दौरान रक्षा मंत्री ने बीआरओ के दो नए डिजिटल प्लेटफॉर्म भी शुरू किए। इनमें एक परियोजना प्रबंधन से जुड़ा है, जबकि दूसरा भर्ती प्रक्रिया को डिजिटल बनाने के लिए तैयार किया गया है।

बीआरओ का कहना है कि इन प्लेटफॉर्म के जरिए परियोजनाओं की निगरानी, समयबद्ध कार्यान्वयन और संगठन के आधुनिकीकरण में मदद मिलेगी। (BRO Strategic Infrastructure Conclave)

BRO Strategic Infrastructure Conclave
Photo: PIB

परियोजनाओं को मिला सम्मान

कार्यक्रम में विभिन्न बीआरओ परियोजनाओं को बेहतर प्रदर्शन और उत्कृष्ट निर्माण कार्य के लिए सम्मानित भी किया गया। इसके अलावा बीआरओ की तीन नई प्रकाशन पुस्तिकाएं ‘पथ प्रदर्शक’, ‘ऊंची सड़कें’ और ‘पथ विकास’ जारी की गईं।

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इन प्रकाशनों में बीआरओ की प्रमुख उपलब्धियां, नई इंजीनियरिंग तकनीक, कार्य प्रणाली और संगठन की विकास यात्रा को शामिल किया गया है। कार्यक्रम के दौरान बीआरओ का आधिकारिक एंथम भी जारी किया गया, जिसे संगठन के कर्मचारियों के योगदान को समर्पित किया गया। (BRO Strategic Infrastructure Conclave)

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