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चिकन नेक से LAC तक, पूर्वोत्तर में जनरल धीरज सेठ ने तीन अहम कोर की तैयारियों का लिया जायजा

इससे पहले जनरल धीरज सेठ ने पश्चिम बंगाल के सुकना स्थित त्रिशक्ति कोर (XXXIII Corps) और नागालैंड के दीमापुर स्थित स्पीयर कोर (III Corps) का दौरा किया था...

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📍नई दिल्ली | 16 Jul, 2026, 9:28 PM

General Dhiraj Seth Gajraj Corps: भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने गुरुवार को पूर्वी कमान के तहत आने वाली तेजपुर स्थित 4 कोर (IV Corps) का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने कोर की ऑपरेशनल तैयारियों, युद्धक क्षमता और पूर्वोत्तर क्षेत्र की मौजूदा सुरक्षा स्थिति की विस्तृत समीक्षा की। सेना प्रमुख ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर सीमा सुरक्षा, आधुनिक सैन्य तकनीकों के उपयोग और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल से जुड़े पहलुओं की जानकारी ली।

इससे पहले जनरल धीरज सेठ ने पश्चिम बंगाल के सुकना स्थित त्रिशक्ति कोर (XXXIII Corps) और नागालैंड के दीमापुर स्थित स्पीयर कोर (III Corps) का दौरा किया था।

General Dhiraj Seth Gajraj Corps: गजराज कोर पूर्वोत्तर की सुरक्षा का अहम स्तंभ

4 कोर को गजराज कोर के नाम से जाना जाता है। यह भारतीय सेना की सबसे महत्वपूर्ण फॉर्मेशन में से एक मानी जाती है। इसका मुख्यालय असम के तेजपुर में स्थित है। इस कोर की जिम्मेदारी असम के बड़े हिस्से और अरुणाचल प्रदेश के उन इलाकों की सुरक्षा है, जो वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के नजदीक हैं।

इस कोर के तहत मिसामारी स्थित 71 माउंटेन डिवीजन, रंगिया स्थित 21 माउंटेन डिवीजन (रेड हॉर्न डिवीजन) और अरुणाचल प्रदेश के बोमडिला के पास रूपा स्थित 5 माउंटेन डिवीजन (बॉल ऑफ फायर डिवीजन) आती हैं। इनमें से खास तौर पर 5 माउंटेन डिवीजन एलएसी के नजदीक तैनात है और संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्रों की सुरक्षा संभालती है।

ऑपरेशनल तैयारियों की दी जानकारी

दौरे के दौरान सेना प्रमुख को पूर्वी कमान के अधिकारियों ने मौजूदा सुरक्षा स्थिति, सीमा पर तैनाती, ऑपरेशनल तैयारियों और सैन्य क्षमता बढ़ाने के लिए चल रही विभिन्न परियोजनाओं की जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि गजराज कोर अपने जिम्मेदारी वाले क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षित माहौल बनाए रखने के लिए लगातार काम कर रही है। सेना प्रमुख ने इन प्रयासों की समीक्षा की और क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी ली।

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नागरिक प्रशासन और केंद्रीय बलों के साथ बेहतर तालमेल

सेना अधिकारियों ने जनरल धीरज सेठ को बताया कि गजराज कोर राज्य सरकार, जिला प्रशासन और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के साथ लगातार कॉर्डिनेशन बनाकर काम कर रही है।

इस कॉर्डिनेशन के तहत विकास कार्यों में सहयोग, सामुदायिक संपर्क कार्यक्रम, स्थानीय प्रशासन को सहायता और जरूरत पड़ने पर राहत कार्यों में भागीदारी शामिल है। सेना का कहना है कि सीमावर्ती इलाकों में स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल से सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होती है।

असम और मेघालय में आंतरिक सुरक्षा में निभाई अहम भूमिका

सेना प्रमुख ने गजराज कोर की सराहना करते हुए कहा कि इस फॉर्मेशन ने असम और मेघालय में आंतरिक सुरक्षा बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने प्राकृतिक आपदाओं और मानवीय सहायता अभियानों के दौरान कोर की त्वरित प्रतिक्रिया की भी प्रशंसा की। बाढ़, भूस्खलन और अन्य आपात स्थितियों में सेना द्वारा स्थानीय प्रशासन को दी गई सहायता की जानकारी भी उन्हें दी गई।

जवानों से मुलाकात कर बढ़ाया उत्साह

दौरे के दौरान जनरल धीरज सेठ ने अधिकारियों और जवानों से भी बातचीत की। उन्होंने सैनिकों के उच्च मनोबल, पेशेवर कार्यशैली और कर्तव्य के प्रति समर्पण की सराहना की।

उन्होंने कहा कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और चुनौतीपूर्ण वातावरण में तैनात सैनिकों की भूमिका राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी रैंकों से हर परिस्थिति के लिए तैयार रहने का आह्वान किया।

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ड्रोन के इस्तेमाल पर जोर

सेना प्रमुख ने गजराज कोर द्वारा आधुनिक तकनीकों को अपनाने की भी सराहना की। अधिकारियों ने उन्हें बताया कि ऑपरेशनल क्षमता बढ़ाने के लिए ड्रोन, आधुनिक निगरानी प्रणालियों और अन्य उभरती तकनीकों का उपयोग लगातार बढ़ाया जा रहा है।

उन्हें भारतीय वायुसेना के साथ आयोजित जॉइंट एयरबोर्न एक्सरसाइज की जानकारी भी दी गई, जिनका उद्देश्य विभिन्न सेनाओं के बीच तालमेल और संयुक्त अभियान क्षमता को मजबूत करना है।

जनरल धीरज सेठ ने अधिकारियों और जवानों से कहा कि बदलते सुरक्षा माहौल में केवल पारंपरिक सैन्य क्षमता पर्याप्त नहीं है। नई तकनीकों, तेज सूचना साझा करने की व्यवस्था और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर कॉर्डिनेशन की भी उतनी ही आवश्यकता है।

उन्होंने सभी सैनिकों से मिशन पर पूरा ध्यान केंद्रित रखने, संयुक्त कार्य संस्कृति को मजबूत करने और हर समय उच्च स्तर की ऑपरेशनल तैयारियां बनाए रखने को कहा।

पूर्वी कमान के अन्य महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों का भी किया दौरा

गजराज कोर के दौरे से पहले सेना प्रमुख ने सुकना स्थित त्रिशक्ति कोर का दौरा किया था, जहां उन्हें चिकन नेक यनी सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी दी गई।

सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है। पश्चिम बंगाल में स्थित यह संकरा भूभाग मुख्य भारत को पूर्वोत्तर के आठ राज्यों से जोड़ता है। सबसे संकरे हिस्से में इसकी चौड़ाई लगभग 20 किलोमीटर से भी कम है। इसी मार्ग से सड़क, रेल और सैन्य रसद पूर्वोत्तर राज्यों तक पहुंचती है।

हाल के वर्षों में इस क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार, भूमिगत रेलवे लाइन की योजना, सीमा सुरक्षा बल के लिए अतिरिक्त भूमि उपलब्ध कराना और मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने जैसे कई कदम उठाए गए हैं। बागडोगरा हवाई अड्डा और हासीमारा वायुसेना स्टेशन भी इस पूरे क्षेत्र की सैन्य तैयारियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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स्पीयर कोर में दिया ‘विजय’ का मंत्र

पूर्वी कमान के दौरे के दौरान सेना प्रमुख ने दीमापुर स्थित स्पीयर कोर का भी निरीक्षण किया। वहां उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में सेना के लिए अपना विजन “विजय” साझा किया।

“विजय” का अर्थ है विजिलेंस (सतर्कता), इनोवेशन (नवाचार), जॉइंटनेस (संयुक्तता), आत्मनिर्भरता और योद्धा फर्स्ट। उन्होंने कहा कि इन्हीं सिद्धांतों के आधार पर भारतीय सेना भविष्य की चुनौतियों के लिए खुद को तैयार कर रही है।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि आधुनिक युद्ध अब मल्टी डाइमेंशन हो चुका है। इसलिए तकनीक, संयुक्त अभियान क्षमता, आत्मनिर्भर सैन्य प्रणालियों और बेहतर कॉर्डिनेशन पर लगातार काम करना जरूरी है।

यह दौरा जनरल धीरज सेठ के सेना प्रमुख बनने के बाद पूर्वी क्षेत्र का दूसरा बड़ा फील्ड निरीक्षण था। इससे पहले वह जम्मू-कश्मीर के पुंछ, राजौरी और सुंदरबनी सेक्टर में स्थित व्हाइट नाइट कोर (16 कोर) के फॉरवर्ड इलाकों का दौरा कर वहां की ऑपरेशनल तैयारियों की समीक्षा कर चुके हैं। (General Dhiraj Seth Gajraj Corps)

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