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नए आर्मी चीफ ने बदली सेना की सोच! जनरल धीरज सेठ की टीम में पहली बार महिला ADC अफसर की नियुक्ति

एडीसी यानी एड-डी-कैंप किसी वरिष्ठ सैन्य अधिकारी का सबसे भरोसेमंद स्टाफ अधिकारी माना जाता है। सेना प्रमुख के साथ रहने वाला एडीसी केवल औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहता...

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📍नई दिल्ली | 1 Jul, 2026, 8:20 PM

General Dhiraj Seth Woman ADC: भारतीय सेना के 31वें सेना प्रमुख के रूप में जनरल धीरज सेठ ने 30 जून को कार्यभार संभाल लिया। वहीं वे पहले ऐसे सेना प्रमुख हैं, जिनके स्टाफ अफसरों में एक महिला अधिकारी भी है। हालांकि नौसेना और वायुसेना प्रमुख के स्टाफ अफसरों में बतौर एड-डी-कैंप (एडीसी) महिला अधिकारियों की नियुक्ति होती रही है। सेना के सूत्रों का कहना है कि यह व्यवस्था केवल प्रोटोकॉल तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय सेना में बदलती कार्यसंस्कृति, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और संयुक्त सैन्य सुधारों की दिशा को भी दर्शाती है।

General Dhiraj Seth Woman ADC: सेना प्रमुख की टीम में दो एडीसी

सूत्रों के मुताबिक, जनरल धीरज सेठ के दो एडीसी में एक महिला कैप्टन हैं, जो सेना की सिग्नल कोर की अधिकारी हैं। सिग्नल कोर भारतीय सेना की वह शाखा है, जो सिक्योर कम्युनिकेशन, डिजिटल नेटवर्क, डेटा ट्रांसमिशन और कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम की जिम्मेदारी संभालती है। वे 26 जनवरी पर महिला बाइकर्स की डेयर डेविल टीम का हिस्सा भी रह चुकी हैं।

आधुनिक युद्ध में कम्युनिकेशन सिस्टम किसी भी सैन्य अभियान की रीढ़ मानी जाती है। सेना तेजी से नेटवर्क आधारित युद्ध प्रणाली की ओर बढ़ रही है। ऐसे में सिग्नल कोर का महत्व लगातार बढ़ा है। सूत्रों का कहना है कि सेना प्रमुख की टीम में इस कोर की अधिकारी की मौजूदगी आधुनिक सैन्य जरूरतों को भी दर्शाती है।

वहीं, दूसरे एडीसी सेना की फर्स्ट हॉर्स यानी स्किनर्स हॉर्स में मेजर हैं। वन एच के नाम से प्रसिद्ध यह भारतीय सेना की सबसे पुरानी, प्रतिष्ठित और गौरवशाली आर्मर्ड रेजिमेंट्स में से एक है। यह रेजिमेंट ब्रिटिश काल में स्थापित हुई थी और आज भारतीय सेना की आर्मर्ड कोर का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

समय के साथ इस रेजिमेंट ने घुड़सवार इकाई से आधुनिक टैंक रेजिमेंट का रूप लिया और कई युद्धों तथा सैन्य अभियानों में अहम भूमिका निभाई। अपनी पेशेवर क्षमता, अनुशासन और समृद्ध सैन्य परंपराओं के चलते स्किनर्स हॉर्स को भारतीय सेना की सबसे सम्मानित रेजिमेंट्स में गिना जाता है।

बता दें कि सुरक्षा कारणों से दोनों एडीसी का नाम नहीं लिखा है। (General Dhiraj Seth Woman ADC)

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महिलाओं को मिल रहे हैं लगातार नए अवसर

भारतीय सेना में महिलाओं की भूमिका पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ी है। पहले महिलाएं केवल सीमित शाखाओं तक ही थीं, लेकिन अब वे सिग्नल, इंजीनियर्स, आर्टिलरी, एयर डिफेंस, मिलिट्री पुलिस, आर्मी एविएशन और कई अन्य क्षेत्रों में भी जिम्मेदारियां निभा रही हैं।

साल 2013 में लेफ्टिनेंट गेनेवी लालजी किसी आर्मी कमांडर की पहली महिला एडीसी बनी थीं, जिसने सेना में महिलाओं के लिए एक नया रास्ता खोला। इसके बाद वर्ष 2023 में भारतीय वायुसेना की स्क्वाड्रन लीडर मनीषा पाधी ने इतिहास रचते हुए मिजोरम के राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपति की एडीसी के रूप में जिम्मेदारी संभाली। वह किसी राज्यपाल की एडीसी बनने वाली भारतीय सशस्त्र बलों की पहली महिला अधिकारी थीं। वहीं वर्ष 2025 में भारतीय नौसेना की लॉजिस्टिक्स ब्रांच की लेफ्टिनेंट कमांडर यशस्वी सोलंकी देश की पहली महिला अधिकारी बनीं, जिन्हें राष्ट्रपति और तीनों सेनाओं के सर्वोच्च सेनापति का एडीसी नियुक्त किया गया। (General Dhiraj Seth Woman ADC)

क्या होता है एडीसी का काम?

एडीसी यानी एड-डी-कैंप किसी वरिष्ठ सैन्य अधिकारी का सबसे भरोसेमंद स्टाफ अधिकारी माना जाता है। सेना प्रमुख के साथ रहने वाला एडीसी केवल औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहता।

सूत्रों के अनुसार, एडीसी सेना प्रमुख के पूरे दैनिक कार्यक्रम का कॉर्डिनेशन करता है। बैठकों का समय तय करना, विभिन्न कमांड और मुख्यालयों के साथ संपर्क बनाए रखना, आधिकारिक दस्तावेजों का कॉर्डिनेशन, यात्रा कार्यक्रम, सैन्य समारोहों की तैयारी और प्रोटोकॉल से जुड़े कार्य भी उसकी जिम्मेदारी में शामिल होते हैं।

इसके अलावा विदेशी सैन्य प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात, गार्ड ऑफ ऑनर, सैन्य परेड और अन्य औपचारिक आयोजनों में भी एडीसी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। (General Dhiraj Seth Woman ADC)

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2025 से लागू हुई क्रॉस-सर्विस एडीसी नीति

1 जनवरी 2025 से भारतीय सेनाओं में एडीसी सिस्टम में बड़ा बदलाव किया गया। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान के नेतृत्व में शुरू किए गए संयुक्त सैन्य सुधारों के तहत पहली बार तीनों सेनाओं के प्रमुखों को दूसरी सेवा से एडीसी देने का फैसला लिया गया।

नई व्यवस्था के तहत सेना प्रमुख को भारतीय वायुसेना, वायुसेना प्रमुख को भारतीय नौसेना और नौसेना प्रमुख को भारतीय सेना से एडीसी दिया जाने लगा। इसका उद्देश्य तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल विकसित करना और संयुक्त सैन्य संस्कृति को मजबूत करना है।

रक्षा सूत्रों का कहना है कि यह बदलाव प्रस्तावित थिएटर कमांड व्यवस्था और संयुक्त सैन्य अभियानों की तैयारी का भी हिस्सा है।

रक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि एडीसी व्यवस्था में बदलाव केवल प्रशासनिक फैसला नहीं है। इसका उद्देश्य सेना, नौसेना और वायुसेना के अधिकारियों को एक-दूसरे की कार्यप्रणाली समझने का अवसर देना भी है।

नई नीति के तहत अधिकारी अपने मूल सेवा क्षेत्र से बाहर भी काम कर रहे हैं। इससे संयुक्त योजना, बेहतर समन्वय और एकीकृत सैन्य सोच को बढ़ावा मिल रहा है। यही सोच भविष्य की थिएटर कमांड व्यवस्था की भी आधारशिला मानी जा रही है। (General Dhiraj Seth Woman ADC)

भारतीय सेना में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी

वर्ष 1992 में महिलाओं को पहली बार गैर-चिकित्सा शाखाओं में अधिकारी के रूप में शामिल किया गया था। इसके बाद धीरे-धीरे उनकी भूमिका बढ़ती गई। आज महिलाएं केवल मेडिकल या प्रशासनिक सेवाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आर्मी एविएशन, सिग्नल्स, इंजीनियर्स, आर्टिलरी, एयर डिफेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स (ईएमई), आर्मी सर्विस कोर, ऑर्डिनेंस, जज एडवोकेट जनरल (जेएजी), एजुकेशन और मिलिट्री पुलिस जैसी कई महत्वपूर्ण शाखाओं में अपनी सेवाएं दे रही हैं।

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वर्ष 2020 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद महिलाओं को कई शाखाओं में परमानेंट कमीशन मिला। इसके बाद 2021 में पहली बार महिलाओं की भर्ती मिलिट्री पुलिस में सैनिक के रूप में हुई। वर्ष 2023 में महिलाओं के लिए आर्टिलरी रेजिमेंट के दरवाजे भी खुले। वहीं 2025 में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) से पहली महिला कैडेट्स पासआउट हुईं और भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) में भी पहली बार महिला कैडेट्स का प्रशिक्षण शुरू हुआ। टेरिटोरियल आर्मी ने भी 2025-26 में महिला सैनिकों की भर्ती का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया।

जुलाई 2026 तक भारतीय सशस्त्र बलों में महिला अधिकारियों की संख्या 11 हजार से अधिक हो चुकी है, जबकि भारतीय सेना में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग चार प्रतिशत है। हालांकि अभी महिलाओं को इन्फैंट्री, आर्मर्ड कोर और मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री जैसी मुख्य लड़ाकू शाखाओं में शामिल नहीं किया गया है, लेकिन कॉम्बैट सपोर्ट भूमिकाओं में उनकी जिम्मेदारियां लगातार बढ़ रही हैं। (General Dhiraj Seth Woman ADC)

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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