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1 जुलाई से भारतीय सेना में नया वॉर मॉडल! 6 मेजर जनरल संभालेंगे नई कॉम्बैट IBG और फायर सपोर्ट ग्रुप की कमान

पूर्वी मोर्चे पर चीन की चुनौती को देखते हुए 17 माउंटेन स्ट्राइक कोर (ब्रह्मास्त्र कोर) के तहत पहली बार कई कॉम्बैट आईबीजी को ऑपरेशनल रूप दिया जा रहा है। इसके साथ ही इन नई फॉर्मेशनों की कमान संभालने के लिए 6 नए मेजर जनरल स्तर के अधिकारियों की भी नियुक्ति की जा रही है...

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📍नई दिल्ली | 1 Jul, 2026, 7:00 AM

Indian Army IBG: भारतीय सेना के लिए 1 जुलाई कई बड़े बदलाव लेकर आया है। इसी दिन जहां जनरल धीरज सेठ ने नए सेना प्रमुख के रूप में जिम्मेदारी संभाली और नए उप सेना प्रमुख ने भी कार्यभार ग्रहण किया, वहीं सेना के सबसे महत्वाकांक्षी सैन्य सुधार कार्यक्रम इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप (आईबीजी) के लिए भी यह तारीख बेहद अहम मानी जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक, पूर्वी मोर्चे पर चीन की चुनौती को देखते हुए 17 माउंटेन स्ट्राइक कोर (ब्रह्मास्त्र कोर) के तहत पहली बार कई कॉम्बैट आईबीजी को ऑपरेशनल रूप दिया जा रहा है। इसके साथ ही इन नई फॉर्मेशनों की कमान संभालने के लिए 6 नए मेजर जनरल स्तर के अधिकारियों की भी नियुक्ति की जा रही है।

आईबीजी भारतीय सेना के पिछले सात सालों से चल रहे सबसे बड़े आर्गेनाइजेशनल चेंज का अहम चरण है। आईबीजी मॉडल के जरिए सेना भारी-भरकम डिवीजन बेस्ड स्ट्रक्चर से निकलकर तेज, लचीली और आत्मनिर्भर लड़ाकू फॉर्मेशन की ओर बढ़ रही है।

Indian Army IBG: पानागढ़ स्थित 17 माउंटेन स्ट्राइक कोर में बन रही हैं नई आईबीजी

पश्चिम बंगाल के पानागढ़ में स्थित 17 माउंटेन स्ट्राइक कोर के तहत पांच कॉम्बैट आईबीजी और एक फायर सपोर्ट ग्रुप (एफएसजी) को तैयार किया जा रहा है। यह कोर विशेष रूप से चीन के खिलाफ पर्वतीय इलाकों में ऑपरेशन के लिए बनाई गई थी।

सूत्रों के अनुसार, फिलहाल इस पूरी व्यवस्था को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया गया है।

सूत्रों का कहना है कि इन पांच आईबीजी का गठन 23 डिवीजन और 59 डिवीजन से किया जा रहा है। इसके अलावा एक अलग फायर सपोर्ट ग्रुप भी बनाया गया है, जो इन सभी कॉम्बैट आईबीजी को लंबी दूरी की मारक क्षमता के साथ आर्टिलरी सपोर्ट उपलब्ध कराएगा।

एक जुलाई से मिले नए मेजर जनरल

रक्षा सूत्रों के मुताबिक, प्रत्येक आईबीजी और फायर सपोर्ट ग्रुप की कमान मेजर जनरल स्तर का अधिकारी संभालेगा। एक जुलाई से इनमें से दो आईबीजी और फायर सपोर्ट ग्रुप को नए मेजर जनरल मिल रहे हैं। बाकी फॉर्मेशंस में पहले से ही वरिष्ठ अधिकारियों की तैनाती हो चुकी है।

इस तरह नए इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप (आईबीजी) और एक फायर सपोर्ट ग्रुप (एफएसजी) की कमान छह मेजर जनरल स्तर के अधिकारियों ने संभाल ली है।

सूत्रों का कहना है कि नए कमांडरों की नियुक्ति के साथ इन फॉर्मेशनों को ऑपरेशनल फॉर्म देने की प्रक्रिया तेज हो गई है। (Indian Army IBG)

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चीफ ऑपरेशंस ऑफिसर की तैनाती

आईबीजी के साथ सेना ने एक नई जिम्मेदारी भी बनाई है, जिसे चीफ ऑपरेशंस ऑफिसर (सीओओ) कहा जाएगा। यह जिम्मेदारी ब्रिगेडियर रैंक के अधिकारी संभालेंगे। जो पहले डिप्टी जीओसी जैसी भूमिका के बजाय ऑपरेशनल कॉर्डिनेशन संभालेंगे।

रक्षा सूत्रों के मुताबिक, सीओओ का काम पूरे ऑपरेशन का कॉर्डिनेशन करना होगा। इसमें ऑपरेशन की योजना बनाना, खुफिया जानकारी का विश्लेषण, लॉजिस्टिक व्यवस्था, फायर सपोर्ट और युद्ध के दौरान अलग-अलग युनिट्स के बीच तालमेल बनाए रखना शामिल रहेगा।

इस व्यवस्था से आईबीजी की कमान संभाल रहे मेजर जनरल को बड़े रणनीतिक फैसलों पर ज्यादा ध्यान देने का अवसर मिलेगा। (Indian Army IBG)

क्या है इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप

इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप यानी आईबीजी भारतीय सेना की नई कॉम्बैट फॉर्मेशन है। इसे इस तरह से तैयार किया गया है कि किसी ऑपरेशन के दौरान अलग-अलग यूनिटों को जोड़ने की जरूरत न पड़े। पूरी फॉर्मेशन पहले से ही सभी जरूरी हथियारों, इंजीनियरिंग सपोर्ट, लॉजिस्टिक सिस्टम और चिकित्सा सुविधाओं के साथ तैयार रहती है।

सूत्रों के अनुसार, एक आईबीजी में लगभग 5,500 सैनिक होंगे। इसमें पैदल सेना, आर्टिलरी, इंजीनियर, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स (ईएमई), आर्मी सर्विस कोर, कम्युनिकेशन सिस्टम और फील्ड अस्पताल जैसी सभी जरूरी युनिट्स शामिल रहेंगी।

यही वजह है कि इसे एक सेल्फ-कंटेंड फाइटिंग फॉर्मेशन कहा जा रहा है। (Indian Army IBG)

भारी डिवीजन की जगह छोटी लेकिन ज्यादा ताकतवर फॉर्मेशन

सूत्रों का कहना है कि पहले किसी बड़े ऑपरेशन के लिए पूरी कोर या पूरी डिवीजन को एक्टिव करना पड़ता था। इसमें काफी समय लगता था क्योंकि एक कोर में हजारों सैनिक और भारी सैन्य संसाधन शामिल होते हैं।

नई आईबीजी सिस्टम में जरूरत के मुताबिक केवल एक फॉर्मेशन को बहुत कम समय में आगे भेजा जा सकता है। इससे प्रतिक्रिया देने का समय कम होगा और ऑपरेशन तेजी से शुरू किया जा सकेगा।

इसी वजह से सेना अब बड़ी लेकिन धीमी फॉर्मेशन की जगह छोटी, तेज और अधिक घातक फॉर्मेशंस पर जोर दे रही है। (Indian Army IBG)

क्यों जरूरी हुआ यह बदलाव

सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में युद्ध का स्वरूप तेजी से बदला है। अब केवल सैनिकों की संख्या ही महत्वपूर्ण नहीं रही, बल्कि तेज निर्णय, डिजिटल नेटवर्क, ड्रोन, सटीक फायरपावर और जॉइंट ऑपरेशन ज्यादा अहम हो गए हैं।

इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए आईबीजी मॉडल तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य ऐसी फॉर्मेशन बनाना है जो कम समय में किसी भी क्षेत्र में पहुंचकर स्वतंत्र रूप से कार्रवाई कर सके। (Indian Army IBG)

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चीन की सैन्य रणनीति से मिला सबक

सूत्रों के मुताबिक, पूर्वी लद्दाख और वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन की सैन्य गतिविधियों ने भी भारतीय सेना को अपने स्ट्रक्चर पर नए सिरे से विचार करने के लिए प्रेरित किया।

पिछले एक दशक में चीन ने अपने पुराने डिवीजन सिस्टम की जगह कंबाइंड आर्म्स ब्रिगेड मॉडल अपनाया है। इन ब्रिगेड में टैंक, आर्टिलरी, एयर डिफेंस, ड्रोन और अन्य सपोर्ट युनिट्स को एक साथ रखा गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।

भारतीय सेना की नई आईबीजी भी इसी तरह तेज और बहु-क्षमता वाली फॉर्मेशन के रूप में तैयार की जा रही हैं। हालांकि सेना के सूत्रों का कहना है कि भारतीय मॉडल पूरी तरह अपनी ऑपरेशनल जरूरतों और पर्वतीय इलाकों की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। (Indian Army IBG)

फायर सपोर्ट ग्रुप की क्या होगी भूमिका

सूत्रों के मुताबिक, पांच कॉम्बैट आईबीजी के अलावा एक अलग फायर सपोर्ट ग्रुप भी बनाया गया है। इसमें दो आर्टिलरी बटालियन शामिल की गई हैं।

इस फॉर्मेशन में लंबी दूरी की तोपें, रॉकेट सिस्टम और अन्य आर्टिलरी हथियार रहेंगे। जरूरत पड़ने पर यही फायर सपोर्ट ग्रुप सभी आईबीजी को दूर से मार करने वाली फायरपावर उपलब्ध कराएगा। पहले ऐसी क्षमता अलग-अलग आर्टिलरी यूनिटों में बंटी रहती थी।

सूत्रों का कहना है कि सेना की नई दिव्यास्त्र बैटरियां भी इसी फायर सपोर्ट ग्रुप के साथ जोड़ी जा सकती हैं। इन बैटरियों में पारंपरिक आर्टिलरी के साथ ड्रोन और लॉइटरिंग म्यूनिशन जैसी आधुनिक क्षमताओं को भी शामिल किया जा रहा है।

लॉजिस्टिक सिस्टम पर चल रहा काम

सूत्रों ने बताया कि आईबीजी का गठन लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन अभी इसकी लॉजिस्टिक व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सैनिकों, वाहनों, हथियारों, उपकरणों और मुख्यालयों का रिऑर्गेनाइजेशन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ट्रूप्स, वाहन, हथियार और अन्य संसाधनों की री-एलोकेशन के कारण पूरी प्रक्रिया में समय लगेगा।

फिलहाल नई फॉर्मेशन ऑपरेशनल स्थिति में हैं, लेकिन सभी सपोर्ट सिस्टम को पूरी तरह से इंटीग्रेशन होने में लगभग दो महीने का समय और लग सकता है। इस दौरान ट्रांसपोर्टेशन, गाड़ियों की व्यवस्था, गोला-बारूद, संचार, मरम्मत और चिकित्सा सहायता जैसी व्यवस्थाओं को नए स्ट्रक्चर के अनुसार व्यवस्थित किया जा रहा है। (Indian Army IBG)

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सात साल पुराने सैन्य सुधार को मिला नया रूप

आईबीजी का कॉन्सैप्ट पहली बार साल 2018 में सेना के पुनर्गठन के दौरान सामने आया था। इससे पहले तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने सेना के स्ट्रक्चर में बदलाव को लेकर कई अध्ययन शुरू कराए थे। उसी प्रक्रिया में आईबीजी मॉडल तैयार किया गया।

इसके बाद पश्चिमी मोर्चे पर 9 कोर में इसका परीक्षण किया गया। वर्ष 2019 में एक्सरसाइज हिमविजय सहित पूर्वी क्षेत्र के कई सैन्य अभ्यासों में भी इसे परखा गया। अब पहली बार इसे स्थायी रूप से ऑपरेशनल स्वरूप दिया जा रहा है। (Indian Army IBG)

माउंटेन स्ट्राइक कोर की जगह नया मॉडल

सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2013 में चीन को ध्यान में रखकर लगभग 90 हजार सैनिकों वाली 17 माउंटेन स्ट्राइक कोर बनाने की योजना स्वीकृत हुई थी। बाद में सेना ने महसूस किया कि इतनी बड़ी फॉर्मेशन को तेजी से तैनात करना और संचालित करना कठिन होगा।

इसी वजह से अब उसी स्ट्रक्चर को छोटे लेकिन अधिक सक्षम आईबीजी मॉडल में बदला जा रहा है। प्रत्येक आईबीजी इलाके, दुश्मन की तैनाती और ऑपरेशन की जरूरत के अनुसार तैयार की गई है। (Indian Army IBG)

सेना के बड़े ट्रांसफॉर्मेशन का हिस्सा

सूत्रों का कहना है कि आईबीजी केवल एक नई फॉर्मेशन नहीं है, बल्कि सेना के व्यापक संगठनात्मक बदलाव का हिस्सा है। इसी कार्यक्रम के तहत रुद्र ब्रिगेड, भैरव बटालियन, दिव्यास्त्र बैटरी और शक्तिबाण यूनिट जैसी नई स्ट्रक्चर भी बनाए जा रहे हैं।

सेना का उद्देश्य अलग-अलग वेपन सिस्टम्स, ड्रोन, आर्टिलरी, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और लॉजिस्टिक संसाधनों को इंटीग्रेट करके ऐसी फॉर्मेशन तैयार करना है, जो कम समय में किसी भी मोर्चे पर स्वतंत्र रूप से ऑपरेशन चला सके। (Indian Army IBG)

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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