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29 साल बाद टैंक अफसर जनरल धीरज सेठ के हाथों में भारतीय सेना की कमान, ऑपरेशन सिंदूर और शौर्य स्क्वाड्रन से बनाई अलग पहचान

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए), खड़कवासला के पूर्व छात्र हैं। उन्हें दिसंबर 1986 में भारतीय सेना की प्रतिष्ठित 2 लांसर्स (गार्डनर हॉर्स) रेजिमेंट के माध्यम से आर्मर्ड कोर में कमीशन मिला था...

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📍नई दिल्ली | 30 Jun, 2026, 2:47 PM

Army Chief General Dhiraj Seth: भारतीय सेना को नया प्रमुख मिल गया है। जनरल धीरज सेठ ने मंगलवार को भारतीय सेना के 31वें सेना प्रमुख के रूप में कार्यभार संभाल लिया। उन्होंने जनरल उपेंद्र द्विवेदी का स्थान लिया, जो 30 जून को अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद सेवानिवृत्त हो गए। लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ के सेना प्रमुख बनने के साथ ही लगभग 29 साल बाद आर्मर्ड कोर के किसी अधिकारी ने भारतीय सेना की कमान संभाली है।

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने 1 अप्रैल 2026 को उप सेना प्रमुख का पद संभाला था। इसके बाद उन्हें सेना की ऑपरेशनल तैयारियों, आधुनिकीकरण कार्यक्रमों और रणनीतिक योजनाओं की जिम्मेदारी सौंपी गई।

Army Chief General Dhiraj Seth: टैंक रेजिमेंट से शुरू हुआ सैन्य सफर

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए), खड़कवासला के पूर्व छात्र हैं। उन्हें दिसंबर 1986 में भारतीय सेना की प्रतिष्ठित 2 लांसर्स (गार्डनर हॉर्स) रेजिमेंट के माध्यम से आर्मर्ड कोर में कमीशन मिला था।

उन्होंने अपने सैन्य जीवन की शुरुआत एक टैंक अधिकारी के रूप में की। इसके बाद रेगिस्तानी इलाकों, पश्चिमी सीमा, जम्मू-कश्मीर और देश के कई रणनीतिक क्षेत्रों में अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालीं। सूत्रों का कहना है कि फील्ड कमांड और मुख्यालय दोनों स्तरों पर उनका अनुभव उन्हें सेना के सबसे अनुभवी अधिकारियों में शामिल करता है।

29 साल बाद आर्मर्ड कोर को फिर मिली सेना की कमान

भारतीय सेना की आर्मर्ड कोर टैंक और मैकेनाइज्ड युद्ध अभियानों के लिए जानी जाती है। आधुनिक युद्ध में यह सेना की आक्रमण क्षमता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ से पहले आर्मर्ड कोर से सेना प्रमुख बनने वाले अंतिम अधिकारी जनरल शंकर रॉय चौधरी थे, जिन्होंने वर्ष 1994 से 1997 तक भारतीय सेना का नेतृत्व किया था। उनके बाद लगभग तीन दशक तक इस कोर का कोई अधिकारी सेना प्रमुख नहीं बन पाया।

ऐसे समय में जब युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और टैंक, ड्रोन, सेंसर, नेटवर्क आधारित युद्ध और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का महत्व बढ़ रहा है, तब आर्मर्ड पृष्ठभूमि वाले अधिकारी का सेना प्रमुख बनना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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जमीनी स्तर से लेकर सबसे बड़ी स्ट्राइक फॉर्मेशन तक संभाली कमान

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने अपने करियर में हर स्तर पर नेतृत्व किया है। उन्होंने सबसे पहले एक आर्मर्ड रेजिमेंट की कमान संभाली। इसके बाद पश्चिमी क्षेत्र में 98 आर्मर्ड ब्रिगेड का नेतृत्व किया।

बाद में उन्हें जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों से जुड़ी यूनिफॉर्म फोर्स की जिम्मेदारी सौंपी गई। लेफ्टिनेंट जनरल बनने के बाद उन्होंने भारतीय सेना की प्रमुख स्ट्राइक फॉर्मेशन 21 कोर (सुदर्शन चक्र कोर) की कमान संभाली। इसके अलावा वह दिल्ली एरिया के जनरल ऑफिसर कमांडिंग भी रहे और वर्ष 2023 की गणतंत्र दिवस परेड का नेतृत्व किया।

दो ऑपरेशनल कमांड का नेतृत्व करने वाले चुनिंदा अधिकारी

भारतीय सेना में बहुत कम अधिकारियों को दो अलग-अलग ऑपरेशनल कमांड का नेतृत्व करने का अवसर मिलता है। लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ उन चुनिंदा अधिकारियों में शामिल हैं।

उन्होंने नवंबर 2023 से जून 2024 तक दक्षिण पश्चिमी कमांड की कमान संभाली। इसके बाद जुलाई 2024 से मार्च 2026 तक सदर्न कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ रहे। इस दौरान उन्होंने पश्चिमी मोर्चे की तैयारियों, प्रशिक्षण और ऑपरेशनल योजनाओं की निगरानी की।

ऑपरेशन सिंदूर में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

रक्षा सूत्रों के अनुसार, सदर्न कमांड के प्रमुख रहते हुए लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अभियान में विभिन्न सैन्य कमांडों के बीच समन्वय, ऑपरेशनल प्लानिंग और खतरे के आकलन में उनका योगदान अहम रहा।

सूत्रों का कहना है कि इसी दौरान आधुनिक तकनीक, नेटवर्क आधारित ऑपरेशन और विभिन्न सैन्य संसाधनों के बेहतर उपयोग पर विशेष जोर दिया गया। उनके योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2026 में उत्तम युद्ध सेवा पदक (यूवाईएसएम) से सम्मानित किया गया।

सेना के आधुनिकीकरण से जुड़े रहे महत्वपूर्ण पदों पर

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को भारतीय सेना में आधुनिकीकरण और क्षमता विकास का विशेषज्ञ माना जाता है।

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उन्होंने सेना मुख्यालय में मैकेनाइज्ड फोर्सेज की क्षमता विकास शाखा में काम किया, जहां टैंक और आर्मर्ड फॉर्मेशन की युद्ध क्षमता बढ़ाने की योजनाओं पर काम हुआ। इसके अलावा उन्होंने पर्सपेक्टिव प्लान्स, हथियार एवं उपकरण और लॉन्ग टर्म इंटीग्रेटेड पर्सपेक्टिव प्लान जैसी महत्वपूर्ण शाखाओं में भी जिम्मेदारियां निभाईं।

रक्षा सूत्रों के मुताबिक, इन नियुक्तियों के दौरान उन्होंने आधुनिक हथियार प्रणालियों, डिजिटल नेटवर्क, नई तकनीकों और भविष्य की सैन्य आवश्यकताओं से जुड़ी योजनाओं पर काम किया।

शौर्य स्क्वाड्रन के जरिए टैंक और ड्रोन का तालमेल

सदर्न कमांड के प्रमुख रहते हुए लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने शौर्य स्क्वाड्रन की शुरुआत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह विशेष ड्रोन स्क्वाड्रन आर्मर्ड फॉर्मेशन के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार किया गया है।

सूत्रों के मुताबिक, इसका उद्देश्य टैंक यूनिटों को रियल टाइम निगरानी, लक्ष्य की पहचान, प्रिसीजन स्ट्राइक और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर जैसी क्षमताएं उपलब्ध कराना है।

मार्च 2026 में झांसी के पास बबीना फील्ड फायरिंग रेंज में आयोजित बड़े मैकेनाइज्ड अभ्यास के दौरान टैंक, ड्रोन और डिजिटल कमांड सिस्टम के बीच तालमेल का प्रदर्शन भी किया गया था।

तीनों सेनाओं के बीच समन्वय को दिया बढ़ावा

सदर्न कमांड का कार्यकाल पूरा होने पर लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को सेना, नौसेना और वायुसेना की ओर से संयुक्त गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया था।

रक्षा सूत्रों के अनुसार, उनके नेतृत्व में कई संयुक्त सैन्य अभ्यास आयोजित किए गए, जिनमें तीनों सेनाओं ने एक साथ हिस्सा लिया। इन अभ्यासों का उद्देश्य युद्ध के समय बेहतर समन्वय और संयुक्त अभियान क्षमता को मजबूत करना था।

सेना से जुड़ी है पारिवारिक विरासत

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ऐसे परिवार से आते हैं, जिसका भारतीय सशस्त्र बलों से गहरा संबंध रहा है। उनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल के. एम. सेठ भारतीय सेना के एडजुटेंट जनरल रह चुके हैं और उन्होंने भी प्रतिष्ठित 21 स्ट्राइक कोर की कमान संभाली थी। भारतीय सेना के इतिहास में पिता और पुत्र दोनों का एक ही स्ट्राइक कोर का नेतृत्व करना दुर्लभ उपलब्धियों में गिना जाता है।

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उनके छोटे भाई रियर एडमिरल रवनीश सेठ भारतीय नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी हैं।

अंतरराष्ट्रीय मिशन और सैन्य शिक्षा में भी रहे अव्वल

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने वर्ष 1995-96 में अंगोला में संयुक्त राष्ट्र मिशन के साथ ऑपरेशन ऑफिसर के रूप में भी काम किया। इससे उन्हें बहुराष्ट्रीय सैन्य अभियानों का अनुभव मिला।

सैन्य शिक्षा के क्षेत्र में भी उनका रिकॉर्ड शानदार रहा है। उन्होंने जूनियर कमांड कोर्स में पहला स्थान हासिल किया। डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज में उन्हें बेस्ट ऑल राउंड स्टूडेंट ऑफिसर चुना गया, जबकि यंग ऑफिसर्स कोर्स में सिल्वर सेंटूरियन सम्मान मिला। उन्होंने नेशनल डिफेंस कॉलेज, फ्रांस के कमांड एंड स्टाफ कोर्स और अमेरिका के नेवल पोस्टग्रेजुएट स्कूल में भी प्रशिक्षण प्राप्त किया।

कई सैन्य सम्मान से हो चुके हैं सम्मानित

अपने लंबे सैन्य करियर के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को परम विशिष्ट सेवा पदक (पीवीएसएम), उत्तम युद्ध सेवा पदक (यूवाईएसएम) और अति विशिष्ट सेवा पदक (एवीएसएम) सहित कई प्रतिष्ठित सैन्य सम्मान मिल चुके हैं। इसके अलावा उन्हें सेना प्रमुख और आर्मी कमांडर स्तर की कई प्रशस्तियां भी प्राप्त हुई हैं।

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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