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सिविल-मिलिट्री फ्यूजन को लेकर वायु सेना का बड़ा कदम, अब IAF अफसर बनेंगे IAS-IPS!

वायुसेना यह जानना चाहती है कि कितने अफसर भविष्य में प्रशासनिक सेवाओं जैसे आईएएस, आईपीएस या आईएफएस में जाना चाहते हैं और क्या उन्हें इसके लिए संस्थागत मदद दी जानी चाहिए...

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📍नई दिल्ली | 5 May, 2026, 10:17 PM

IAF Civil Services Support Survey: भारतीय वायु सेना के अंदर एक ऐसा बदलाव शुरू हुआ है, जो अफसरों के करियर को एक नई दिशा दे सकता है। वायु सेना ने अपने अधिकारियों के करियर को लेकर एक अहम कदम उठाया है। एयर मुख्यालय की ओर से जारी एक आधिकारिक पत्र में यह संकेत दिया गया है कि अब सेना अपने अधिकारियों को यूपीएससी सिविल सर्विस एग्जाम की तैयारी में मदद करने की संभावना तलाश रही है। इसके लिए पूरे संगठन में एक डिमांड सर्वे शुरू किया गया है, ताकि यह समझा जा सके कि कितने अधिकारी इस दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं।

यह पहल खास तौर पर उन अधिकारियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जो सैन्य सेवा के बाद प्रशासनिक क्षेत्र में जाना चाहते हैं।

IAF Civil Services Support Survey: एयर हेडक्वार्टर से जारी हुआ आधिकारिक पत्र

23 अप्रैल को एयर मुख्यालय से एक पत्र जारी किया गया। यह पत्र सभी कमांड एजुकेशन ऑफिसर्स को भेजा गया है, जिनमें वेस्टर्न, साउथ वेस्टर्न, सेंट्रल, ईस्टर्न, साउदर्न, ट्रेनिंग, मेंटेनेंस और अंडमान-निकोबार कमांड शामिल हैं।
सभी कमांड्स के एजुकेशन ऑफिसर्स को निर्देश दिया गया कि वे अपने-अपने क्षेत्र में अफसरों के बीच “सिविल-मिलिट्री फ्यूजन” पर सर्वे कराएं। जिसके तहत वायुसेना यह जानना चाहती है कि कितने अफसर भविष्य में प्रशासनिक सेवाओं जैसे आईएएस, आईपीएस या आईएफएस में जाना चाहते हैं और क्या उन्हें इसके लिए संस्थागत मदद दी जानी चाहिए।

किन अफसरों के लिए है यह सर्वे

इस सर्वे का केंद्र बिंदु शॉर्ट सर्विस कमीशन यानी एसएससी अधिकारी हैं। ये वे अधिकारी होते हैं जो आम तौर पर 10 से 14 साल की सेवा के बाद सेना से बाहर आते हैं और उसके बाद उन्हें नई करियर दिशा तलाशनी होती है।

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ऐसे अफसरों के सामने अक्सर यह सवाल होता है कि आगे क्या किया जाए। इसी को ध्यान में रखते हुए वायु सेना अब उन्हें सिविल सर्विस की तैयारी में मदद देने का विकल्प देख रही है।

किन अधिकारियों को मिलेगा मौका

पत्र में साफ किया गया है कि यह सर्वे उन सभी अधिकारियों के लिए है, जिन्होंने कम से कम 5 साल की सेवा पूरी कर ली है। इसमें एसएससी अधिकारियों के साथ-साथ परमानेंट कमीशन यानी पीसी अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं।

हालांकि परमानेंट कमीशन यानी पीसी अफसर भी इस सर्वे में हिस्सा ले सकते हैं, लेकिन उन्हें सामान्य यूपीएससी प्रक्रिया से ही गुजरना होगा। उनके लिए किसी विशेष सुविधा की बात अभी नहीं कही गई है।

एयर फोर्स ने अपनी सभी यूनिट्स को निर्देश दिया है कि वे अपने क्षेत्र के सभी इच्छुक अधिकारियों तक यह जानकारी पहुंचाएं और उन्हें सर्वे में शामिल होने के लिए प्रेरित करें।

सभी इच्छुक अधिकारियों को एजुकेशन डायरेक्टरेट के पोर्टल पर जाकर एक प्रोफॉर्मा भरना होगा। इस प्रोफॉर्मा के जरिए यह जानकारी ली जा रही है कि कितने अफसर गंभीरता से सिविल सर्विस की तैयारी करना चाहते हैं।

इस सर्वे की अंतिम तारीख 8 मई तय की गई है, इसलिए इसे तेजी से पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं।

यूपीएससी सिविल सर्विस एग्जाम के जरिए आईएएस, आईपीएस, आईएफएस और अन्य ग्रुप ए सेवाओं में भर्ती होती है। इसमें देशभर से लाखों उम्मीदवार हिस्सा लेते हैं।

बढ़ेगा सिविल-मिलिट्री फ्यूजन

वायुसेना की इस पहल को “सिविल-मिलिट्री फ्यूजन” की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। ताकि मिलिट्री और सिविल प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल बनाया जाए। अगर एयर फोर्स के अधिकारी सिविल सर्विस में जाते हैं, तो वे अपने साथ सैन्य अनुभव, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता भी लेकर जाएंगे, जो प्रशासन में काम आ सकती है।

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रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल अमोल अवाते का कहना है कि अगर यह पहल सही है, तो यह एक अच्छा और आगे की सोच वाला कदम है, खासकर शॉर्ट सर्विस कमीशन यानी एसएससी अधिकारियों के लिए। इससे उन्हें सिविल सर्विस में जाने का एक साफ और तय रास्ता मिल सकता है।

उनके मुताबिक, सेना के अधिकारी अपने साथ कई अहम गुण लेकर आते हैं। उनमें अनुशासन होता है, ईमानदारी होती है, नेतृत्व की क्षमता होती है और दबाव में फैसले लेने की आदत होती है। इसके साथ ही वे कठिन परिस्थितियों में काम करने और संसाधनों को सही तरीके से संभालने का अनुभव रखते हैं। आज के जटिल प्रशासनिक माहौल में ये सभी गुण बहुत जरूरी हैं।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस व्यवस्था को बड़े स्तर पर लागू करने से पहले सावधानी से सोचना होगा, खासकर परमानेंट कमीशन यानी पीसी अधिकारियों के मामले में। मेडिकल कैटेगरी, प्रमोशन पर असर और छोटे अनुशासनिक मामलों जैसे मुद्दों को स्पष्ट नियमों के जरिए तय करना जरूरी होगा। इसके साथ ही वेतन सुरक्षा और वरिष्ठता को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि सबके साथ न्याय हो सके और ज्यादा लोग इसमें भाग लेने के लिए आगे आएं।

उन्होंने इस पहल का समर्थन करते हुए कहा कि ऐसे मॉडल पहले भी रहे हैं और आज भी कई देशों में, साथ ही भारत में सीएपीएफ, राज्य पुलिस और पीएसयू में काम कर रहे हैं। इससे यह साबित होता है कि यह व्यवस्था संभव भी है और उपयोगी भी।

स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का मिले विकल्प

वहीं, रिटायर्ड कमोडोर विनय कुमार कुशवाहा का कहना है कि सशस्त्र सेनाओं के स्थायी कमीशन अधिकारियों के साथ मौजूदा व्यवस्था में समानता नहीं है। अभी इन अधिकारियों को पेंशन पाने के लिए कम से कम 20 साल की सेवा करनी पड़ती है, जबकि सिविल सेवाओं में कम समय के बाद भी सेवानिवृत्ति के विकल्प मिल जाते हैं।

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उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय रक्षा अकादमी/भारतीय सैन्य अकादमी/वायु सेना अकादमी में चार साल को भी सेवा में जोड़ते हुए कुल 15 साल की सेवा के बाद अधिकारियों को प्रोराटा पेंशन के साथ स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का विकल्प दिया जाए। इससे अधिकारी कम उम्र में ही सिविल सेवा या अन्य क्षेत्रों में दूसरा करियर शुरू कर सकेंगे।

उनके मुताबिक, इससे सेना के अधिकारियों के अनुभव और नेतृत्व का बेहतर उपयोग होगा, मनोबल बढ़ेगा और युवा अधिकारियों को आगे बढ़ने के मौके मिलेंगे। साथ ही, सरकार पर लंबे समय का पेंशन बोझ भी कम हो सकता है।

साथ ही, यह सुधार सशस्त्र बलों के भीतर स्वस्थ संगठनात्मक वातावरण बनाएगा तथा राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ सिविल-मिलिट्री फ्यूजन को मजबूत करेगा।

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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