📍नई दिल्ली | 4 May, 2026, 4:41 PM
AMCA Fighter Jet India: भारत का सबसे महत्वाकांक्षी पांचवी पीढ़ी का फाइटर जेट प्रोजेक्ट एएमसीए यानी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट अब आंध्र प्रदेश के पुट्टापर्थी में बनाया जाएगा। राज्य सरकार ने इस बड़े प्रोजेक्ट के लिए करीब 600 एकड़ जमीन डीआरडीओ को दे दी है। इस प्रोजेक्ट में करीब एक लाख करोड़ रुपये का निवेश आने की संभावना है और यहां लगभग 140 फाइटर जेट तैयार किए जाएंगे। यह भारत के रक्षा क्षेत्र में अब तक के सबसे बड़े निवेशों में से एक माना जा रहा है।
AMCA Fighter Jet India: क्यों चुना गया पुट्टापर्थी
पुट्टापर्थी को इस प्रोजेक्ट के लिए इसलिए चुना गया क्योंकि यह बेंगलुरु के काफी करीब है, जहां एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी यानी एडीए स्थित है। यही एजेंसी इस पूरे प्रोजेक्ट की डिजाइन और डेवलपमेंट देख रही है।
सूत्रों के मुताबिक, फाइटर जेट के अलग-अलग हिस्सों की डिजाइनिंग, टेस्टिंग और मॉड्यूल असेंबली बेंगलुरु में होगी, जबकि फाइनल असेंबली और ग्राउंड टेस्टिंग पुट्टापर्थी में की जाएगी। यहां का एयरस्पेस अपेक्षाकृत खाली है और फ्लाइट टेस्टिंग के लिए ज्यादा सुविधाजनक माना गया है।
इन सभी मॉड्यूल्स को आंध्र प्रदेश के पुट्टापर्थी भेजा जाएगा, जहां फाइटर जेट की फाइनल असेंबली यानी अंतिम जोड़ने का काम होगा। यहीं पर जमीन पर टेस्टिंग भी की जाएगी।
पुट्टापर्थी को इस प्रोजेक्ट के लिए खास वजह से चुना गया है। यह कर्नाटक की सीमा के करीब श्री सत्य साई जिले में स्थित है और बेंगलुरु से ज्यादा दूर नहीं है। इससे डिजाइन सेंटर और प्रोडक्शन यूनिट के बीच बेहतर तालमेल बना रहेगा।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “एएमसीए जैसे प्रोजेक्ट के लिए एक अलग फ्लाइट टेस्टिंग रेंज की जरूरत होती है। पुट्टापर्थी इस लिहाज से उपयुक्त है क्योंकि यहां एयर ट्रैफिक कम है और तेजी से टेस्टिंग संभव है।”
उन्होंने यह भी बताया कि बेंगलुरु में पहले से ही एयर ट्रैफिक काफी ज्यादा है, इसलिए वहां इस तरह की टेस्टिंग रेंज बनाना संभव नहीं था। इसी वजह से डीआरडीओ ऐसी जगह तलाश रहा था जो बेंगलुरु के करीब हो लेकिन जहां एयरस्पेस खाली हो। पुट्टापर्थी इस जरूरत को पूरा करता है।
क्या है एएमसीए प्रोजेक्ट
एएमसीए यानी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट भारत का पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर जेट प्रोग्राम है। यह पूरी तरह स्वदेशी प्रोजेक्ट है, जिसे एडीए और डीआरडीओ मिलकर विकसित कर रहे हैं।
इस प्रोजेक्ट की शुरुआत साल 2000 के आसपास हुई थी, लेकिन लंबे समय तक यह अलग-अलग चरणों में चलता रहा। आखिरकार 2023 में इसका डिजाइन पूरी तरह तैयार हो गया। इसके बाद मार्च 2024 में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी ने इसके प्रोटोटाइप बनाने को मंजूरी दी। इस काम के लिए करीब 15,000 करोड़ की राशि तय की गई थी।
योजना के तहत कुल 5 प्रोटोटाइप बनाए जाएंगे। इनमें से पहले तीन प्रोटोटाइप डेवलपमेंटल फ्लाइट ट्रायल्स के लिए इस्तेमाल होंगे, यानी यह देखा जाएगा कि सिस्टम हवा में कैसे काम करता है और उसकी परफॉर्मेंस कैसी है। इसके बाद बाकी दो प्रोटोटाइप वेपन ट्रायल्स के लिए होंगे, जिनमें हथियारों के साथ इसकी क्षमता को परखा जाएगा।
इस फाइटर जेट को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि यह दुश्मन के रडार से आसानी से बच सके और एक साथ कई तरह के मिशन पूरे कर सके। इसमें एयर टू एयर और एयर टू ग्राउंड दोनों तरह के ऑपरेशन की क्षमता होगी।
यह प्रोजेक्ट भारतीय वायुसेना की भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, ताकि देश को अत्याधुनिक फाइटर जेट मिल सके।
एएमसीए प्रोजेक्ट की शुरुआती लागत करीब 15,803 करोड़ रुपये बताई गई है, जिसमें प्रोटोटाइप डेवलपमेंट शामिल है। इसके बाद बड़े स्तर पर उत्पादन के लिए अतिरिक्त निवेश किया जाएगा।
इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए सात कंपनियों ने रुचि दिखाई थी, जिनमें से तीन को आगे के लिए चुना गया है।
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, “यह प्रोजेक्ट भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे देश की रक्षा उत्पादन क्षमता मजबूत होगी और नई तकनीक के विकास को बढ़ावा मिलेगा। पुट्टापर्थी में बनने वाली यह सुविधा फाइटर जेट निर्माण के लिए एक प्रमुख केंद्र बनेगी।”
प्राइवेट कंपनियों की भी होगी भूमिका
इस प्रोजेक्ट में निजी कंपनियों को भी शामिल किया जा रहा है। टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, एलएंडटी और भारत फोर्ज जैसी कंपनियों को शॉर्टलिस्ट किया गया है।
इन कंपनियों के साथ मिलकर प्रोडक्शन यूनिट तैयार की जाएगी। जल्द ही एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी की तरफ से रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल यानी आरएफपी जारी किया जाएगा, जिसके बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।
इस प्रोजेक्ट के लिए एक तय टाइमलाइन भी बनाई गई है। योजना के मुताबिक पहला प्रोटोटाइप सितंबर 2027 तक तैयार किया जाएगा। इसके बाद सितंबर 2028 में इसकी पहली उड़ान यानी मेडन फ्लाइट की योजना है।
मार्च 2034 तक इस फाइटर जेट को पूरी तरह प्रमाणित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद बड़े स्तर पर इसका उत्पादन शुरू किया जाएगा।
यह फैसला उस प्रस्ताव के बाद आया है, जो आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने पिछले साल रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के सामने रखा था।
बताया जाता है कि राज्य सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए जमीन मुफ्त में उपलब्ध कराई है। यहां न सिर्फ प्रोडक्शन यूनिट बनेगी, बल्कि वैज्ञानिकों के लिए रिहायशी टाउनशिप और फ्लाइट टेस्टिंग कॉम्प्लेक्स भी तैयार किया जाएगा।
एचएएल नहीं होगा इस प्रोजेक्ट का हिस्सा
इस फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि इस प्रोजेक्ट में सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी एचएएल की भूमिका सीमित रहेगी।
पहले इस बात को लेकर कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के बीच विवाद भी हुआ था, क्योंकि एचएएल बेंगलुरु में स्थित है। लेकिन अब यह प्रोजेक्ट प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।
करीब एक लाख करोड़ रुपये के निवेश के साथ यह प्रोजेक्ट आंध्र प्रदेश में एक बड़ा डिफेंस और एयरोस्पेस इकोसिस्टम तैयार करेगा। इसके जरिए कई छोटी और मंझोली कंपनियों को भी काम मिलेगा।
इसके साथ ही इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी से जुड़े क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। इस प्रोजेक्ट के लिए सप्लाई चेन और सपोर्ट इंडस्ट्री भी विकसित की जाएगी।

