📍चंडीगढ़ | 4 May, 2026, 1:07 PM
Disability pension army India: पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने पूर्व सैनिकों और जवानों के हक में एक बेहद अहम फैसला दिया है। दिव्यांग पेंशन से जुड़े मामले पर अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर कोई सैनिक भर्ती के समय पूरी तरह फिट था और सेवा के दौरान उसे कोई बीमारी या दिव्यांगता हो जाती है, तो उसे सैन्य सेवा से जुड़ा माना जाएगा और ऐसे में पेंशन देने से इनकार नहीं किया जा सकता।
यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक अपनी दिव्यांग पेंशन के लिए अलग-अलग अदालतों और ट्राइब्यूनल में लड़ाई लड़ रहे थे। इस आदेश को एक बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है।
Disability pension army India: भर्ती के समय फिट, तो जिम्मेदारी सेना की
अदालत ने अपने फैसले में साफ कहा कि अगर कोई जवान भर्ती के समय मेडिकल तौर पर फिट था, तो सेवा के दौरान होने वाली बीमारी या दिव्यांगता की जिम्मेदारी सैन्य सेवा की मानी जाएगी। इसका सीधा मतलब यह है कि ऐसे मामलों में सरकार यह नहीं कह सकती कि बीमारी का सेवा से कोई संबंध नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि सैनिक देश की सेवा करते हैं और कई बार कठिन परिस्थितियों में काम करते हैं, ऐसे में उनके स्वास्थ्य पर असर पड़ना स्वाभाविक है। इसलिए ऐसी स्थिति में उन्हें पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने खारिज कीं सरकार की दलीलें
इस मामले में केंद्र सरकार ने अदालत के सामने यह तर्क दिया था कि कुछ बीमारियां ऐसी होती हैं, जिन्हें सेवा से जुड़ा नहीं माना जा सकता। सरकार का कहना था कि हर बीमारी को सैन्य सेवा से जोड़ना सही नहीं है।
लेकिन अदालत ने इस दलील को पूरी तरह खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जब तक सरकार यह साबित नहीं कर देती कि बीमारी पूरी तरह से सेवा से अलग है, तब तक उसे सेवा से जुड़ा ही माना जाएगा।
अदालत ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के पहले के फैसलों का भी हवाला दिया और कहा कि इन सिद्धांतों का पालन करना जरूरी है।
मेडिकल बोर्ड की राय पर भी सवाल
इस फैसले की एक बड़ी खास बात यह रही कि अदालत ने मेडिकल बोर्ड की भूमिका पर भी टिप्पणी की। कई मामलों में देखा गया है कि सिर्फ मेडिकल बोर्ड की एक लाइन की राय के आधार पर सैनिकों की पेंशन रोक दी जाती है।
कोर्ट ने कहा कि मेडिकल बोर्ड की राय अंतिम नहीं मानी जा सकती, खासकर तब जब उसमें ठोस कारण नहीं दिए गए हों। अगर बोर्ड यह स्पष्ट नहीं करता कि बीमारी सेवा से जुड़ी क्यों नहीं है, तो उस आधार पर पेंशन नहीं रोकी जा सकती।
सैनिकों के परिवार को भी मिलेगा लाभ
अदालत ने यह भी साफ किया कि इस फैसले का फायदा सिर्फ सैनिक तक सीमित नहीं रहेगा। अगर किसी पूर्व सैनिक को दिव्यांग पेंशन का हक मिलता है, तो उसके परिवार को भी उससे जुड़े सभी लाभ मिलेंगे।
इसमें पत्नी, बच्चे और अन्य आश्रित शामिल हैं, जिन्हें नियमों के अनुसार फैमिली पेंशन या अन्य लाभ मिलते हैं। इससे उन परिवारों को राहत मिलेगी, जो लंबे समय से आर्थिक परेशानी झेल रहे थे।
अदालत ने अपने आदेश में कहा, “अगर कोई सैनिक भर्ती के समय फिट था और सेवा के दौरान उसे बीमारी होती है, तो उसे सैन्य सेवा से जुड़ा माना जाएगा।” कोर्ट ने यह भी कहा कि सैनिकों के मामलों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है, क्योंकि वे देश के लिए अपना जीवन समर्पित करते हैं।
हजारों मामलों पर पड़ेगा असर
यह फैसला सिर्फ एक या दो मामलों तक सीमित नहीं है। देशभर में ऐसे हजारों मामले हैं, जहां सैनिकों की दिव्यांग पेंशन अटकी हुई है या उन्हें मना कर दिया गया है।
अब इस फैसले के बाद ऐसे मामलों में स्पष्टता आएगी और सैनिकों को अपने हक के लिए लंबी कानूनी लड़ाई नहीं लड़नी पड़ेगी। इससे ट्रिब्यूनल और अदालतों में लंबित मामलों पर भी असर पड़ेगा।
पेंशन नियमों को लेकर साफ संदेश
इस फैसले के जरिए अदालत ने सरकार को यह भी संदेश दिया है कि पेंशन से जुड़े मामलों में नियमों का सही तरीके से पालन किया जाए। खासकर उन मामलों में जहां सैनिकों ने सेवा के दौरान स्वास्थ्य समस्याएं झेली हैं।
कोर्ट ने कहा कि सरकार को एक जिम्मेदार नियोक्ता की तरह व्यवहार करना चाहिए और सैनिकों के हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए।

