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द्विपक्षीय बातचीत में भारत ने इटली से रखी अहम शर्त, संवेदनशील डिफेंस टेक्नोलॉजी को पाकिस्तान से रखें दूर

30 अप्रैल को नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने इटली के समकक्ष गुइडो क्रोसेट्टो के साथ द्विपक्षीय वार्ता के दौरान डिफेंस से जुड़े कई अहम मसलों पर बातचीत की...

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📍नई दिल्ली | 1 May, 2026, 12:54 PM

India-Italy Defence Talks: भारत ने इटली से कहा है कि वह पाकिस्तान के साथ संवेदनशील रक्षा तकनीक साझा न करे। भारत और इटली के बीच रक्षा सहयोग को लेकर एक अहम बैठक के दौरान रक्षा मंत्री ने अपनी सुरक्षा चिंताओं को सामने रखते हुए यह बात कही। 30 अप्रैल को नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने इटली के समकक्ष गुइडो क्रोसेट्टो के साथ द्विपक्षीय वार्ता के दौरान डिफेंस से जुड़े कई अहम मसलों पर बातचीत की।

बैठक के दौरान भारत ने इटली के सामने यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया कि कोई भी ऐसी रक्षा तकनीक, जो भारत के लिए महत्वपूर्ण है, वह पाकिस्तान तक नहीं पहुंचनी चाहिए। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, राजनाथ सिंह ने इटली से कहा कि वह पाकिस्तान के साथ किसी भी तरह का रक्षा तकनीक सहयोग करने से बचे।

इटली की तरफ से इस पर जवाब दिया गया कि भारत को जो भी तकनीक दी जाएगी, उसे अन्य देशों के साथ साझा नहीं किया जाएगा।

India-Italy Defence Talks: पाकिस्तान से कैसे हैं इटली के डिफेंस संबंध

पाकिस्तान और इटली के बीच साल 2013 में एक स्ट्रैटेजिक एंगेजमेंट प्लान साइन किया था, जिसमें डिफेंस और सिक्योरिटी सहयोग को शामिल किया गया। इसके बाद जनवरी 2025 में हुई एक बैठक में दोनों पक्षों ने इन संबंधों को और मजबूत करने की बात दोहराई। मार्च 2025 में भी पाकिस्तान ने इटली के साथ रक्षा, कृषि और आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।

इटली पाकिस्तान को रक्षा उपकरण और तकनीक देने वाला एक सप्लायर रहा है। इटली मुख्य रूप से नेवल सेक्टर, हेलीकॉप्टर और कुछ एयरक्राफ्ट तथा राडार सिस्टम सप्लाई करता है।

अगर सप्लाई की बात करें तो इटली की कंपनी लियोनार्डो द्वारा बनाए गए एडब्ल्यू139 हेलीकॉप्टर पाकिस्तान को दिए गए हैं। इन हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल ट्रांसपोर्ट, सर्च एंड रेस्क्यू और मेडिकल इमरजेंसी जैसी जरूरतों में किया जाता है। ये पाकिस्तान के सरकारी और एयर फोर्स फ्लीट का हिस्सा हैं और समय-समय पर इनके ऑर्डर भी दिए जाते रहे हैं।

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इसके अलावा नेवल क्षेत्र में एक अहम प्रोजेक्ट ‘सी सुल्तान’ है, जिसमें पाकिस्तान अपनी नौसेना के लिए पुराने विमान की जगह नए लॉन्ग रेंज मैरीटाइम पेट्रोल एयरक्राफ्ट तैयार कर रहा है। इसके तहत ब्राजील के एम्ब्रेयर लाइनिज 1000 जेट को मॉडिफाई किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट में इटली की कंपनी लियोनार्डो ने 2021 में एक बड़ा कॉन्ट्रैक्ट हासिल किया था, जिसमें एंटी-सबमरीन और मैरीटाइम स्ट्राइक सिस्टम लगाने का काम शामिल है। इस प्रोजेक्ट के तहत पहला विमान शामिल किया जा चुका है और आगे भी कई विमान शामिल करने की योजना बताई जाती है।

इसके अलावा इटली ने पाकिस्तान को रडार सिस्टम भी उपलब्ध कराए हैं। लियोनार्डो के ग्रिफो रडार मिराज-3 और एफ-7 जैसे फाइटर जेट्स में लगाए गए हैं। नेवल डोमेन में भी कुछ कॉम्पोनेंट्स और टॉरपीडो से जुड़े सिस्टम सप्लाई किए गए हैं।

हथियार और गोला-बारूद के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच लेन-देन हुआ है। साल 2019 में पाकिस्तान ने इटली से बड़ी मात्रा में हॉवित्जर गन के लिए गोले खरीदे थे। इससे पहले 2018 में इटली ने पाकिस्तान को सैकड़ों मिलियन डॉलर के रक्षा निर्यात की मंजूरी दी थी, जिससे पाकिस्तान उस साल इटली के प्रमुख खरीदारों में शामिल हो गया। हाल के वर्षों में भी छोटे स्तर पर हथियार, पार्ट्स और एम्यूनिशन की सप्लाई जारी रही है।

कुछ रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि हेलीकॉप्टर, ड्रोन और एयर डिफेंस से जुड़े कुछ कॉम्पोनेंट्स के क्षेत्र में भी सहयोग हुआ है। 2016 में पाकिस्तान ऑर्डनेंस फैक्ट्री ने इटली की एक कंपनी के साथ समझौता किया था, जिससे तकनीकी सहयोग को बढ़ावा मिला।

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बता दें कि इटली की लियोनॉर्डो कंपनी भारत में अदाणी डिफेंस के साथ मिल कर हेलीकॉप्टर मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम तैयार कर रही है। जिसमें लिओनॉर्डो के AW169M (लाइट यूटिलिटी) और AW109 TrekkerM मिलिट्री हेलीकॉप्टर शामिल हैं।

रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर जोर

इस बैठक में दोनों देशों ने अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की बात दोहराई। भारत और इटली के बीच संबंध शांति, स्थिरता, स्वतंत्रता और आपसी सम्मान जैसे मूल्यों पर आधारित हैं। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि इन मूल्यों के आधार पर आगे भी सहयोग को बढ़ाया जाएगा।

रक्षा मंत्री ने बताया कि इस दौरान क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा हुई, जिसमें पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति भी शामिल रही। इसके अलावा रक्षा उद्योग में सहयोग बढ़ाने के रास्तों पर भी बातचीत की गई।

रक्षा उद्योग में सहयोग बढ़ाने पर जोर

बैठक में आत्मनिर्भर भारत कार्यक्रम के तहत रक्षा उत्पादन और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया। भारत चाहता है कि विदेशी कंपनियां भारतीय उद्योग के साथ मिलकर काम करें, ताकि देश में ही आधुनिक रक्षा उपकरण तैयार किए जा सकें।

इटली की तरफ से भी इस दिशा में सहयोग की इच्छा जताई गई। दोनों देशों ने मिलकर ऐसे प्रोजेक्ट्स पर काम करने की संभावना पर चर्चा की, जिससे दोनों को फायदा हो सके।

2026-27 के लिए सैन्य सहयोग

इस बैठक के दौरान भारत और इटली के बीच 2026-27 के लिए द्विपक्षीय सैन्य सहयोग योजना का भी आदान-प्रदान किया गया। इस योजना में दोनों देशों की सेनाओं के बीच होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा तय की गई है।

इसमें संयुक्त सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण, स्टाफ एक्सचेंज और ऑपरेशनल सहयोग जैसे पहलू शामिल हैं। इसका उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच तालमेल और समझ को बढ़ाना है।

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समुद्री सुरक्षा पर भी खास चर्चा

भारत और इटली दोनों ही समुद्री दृष्टि से महत्वपूर्ण देश हैं, इसलिए बैठक में समुद्री सुरक्षा पर भी खास ध्यान दिया गया। दोनों पक्षों ने हिंद महासागर क्षेत्र में जानकारी साझा करने और निगरानी को मजबूत करने पर सहमति जताई।

इसके लिए गुरुग्राम स्थित इंफॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर-इंडियन ओशन रीजन के जरिए सहयोग बढ़ाने की बात कही गई। यह सेंटर समुद्री गतिविधियों पर नजर रखने और जानकारी साझा करने का एक महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म है।

इससे पहले भारत दौरे के दौरान इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेट्टो ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर जाकर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि भी दी। इसके बाद मानेकशॉ सेंटर में उन्हें तीनों सेनाओं की तरफ से गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।

अपने भारत दौरे के दौरान भारतीय तटरक्षक बल ने भी इटली के एक प्रतिनिधिमंडल की मेजबानी की। इसमें फिनकैंटियरी शिपयार्ड के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। बैठक में समुद्री तकनीकों के विकास और सह-विकास पर चर्चा हुई। इस दौरान दोनों पक्षों ने डायनेमिक पोजिशनिंग सिस्टम, एडवांस्ड थ्रस्टर्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम, एंटी-ड्रोन तकनीक और ग्रीन प्रोपल्शन जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर विचार किया। इन तकनीकों का इस्तेमाल भविष्य में समुद्री सुरक्षा और ऑपरेशन को और बेहतर बनाने के लिए किया जा सकता है।

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  • News Desk

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