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एमडीएल ने भारतीय नौसेना को सौंपा नया स्टेल्थ फ्रिगेट महेंद्रगिरि, प्रोजेक्ट-17ए का है आखिरी जहाज

प्रोजेक्ट-17ए के तहत भारतीय नौसेना के लिए कुल सात एडवांस्ड स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट बनाए जा रहे हैं। यह पहले के प्रोजेक्ट-17 यानी शिवालिक क्लास का अपग्रेडेड वर्जन माना जाता है...

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📍नई दिल्ली | 30 Apr, 2026, 11:11 PM

INS Mahendragiri: मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड यानी एमडीएल ने प्रोजेक्ट-17ए के तहत तैयार किए गए चौथे स्टेल्थ फ्रिगेट ‘महेंद्रगिरि’ को नौसेना को सौंप दिया है। जल्द ही नौसेना औपचारिक रूप से आईएनएस महेंद्रगिरि कमीशन करेगी।

आईएनएस महेंद्रगिरि प्रोजेक्ट-17ए के तहत एमडीएल में तैयार होने वाला आखिरी जहाज है। इस जहाज को तैयार करने में वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो, वॉरशिप ओवरसीइंग टीम और नौसेना के कई तकनीकी विभागों ने मिलकर काम किया।

इस मौके पर एमडीएल के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर कैप्टन जगमोहन (रिटायर्ड) और ईस्टर्न नेवल कमांड के चीफ स्टाफ ऑफिसर (टेक) रियर एडमिरल गौतम मरवाहा के बीच एक्सेप्टेंस डॉक्यूमेंट पर साइन किए।

एमडीएल के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर कैप्टन जगमोहन ने कहा कि आईएनएस महेंद्रगिरि को नौसेना को सौंपना पूरे संगठन के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि के पीछे एमडीएल, वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो, वॉरशिप ओवरसीइंग टीम और भारतीय नौसेना के अलग-अलग विभागों की मेहनत और आपसी तालमेल है। सभी ने मिलकर इस युद्धपोत को तैयार किया है।

कैप्टन जगमोहन ने यह भी कहा कि महेंद्रगिरि सिर्फ एक आधुनिक युद्धपोत नहीं है, बल्कि यह भारत की स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता का मजबूत उदाहरण है। इसमें अत्याधुनिक कॉम्बैट क्षमताएं हैं और इसके कमांडिंग ऑफिसर और क्रू इस पर गर्व करेंगे।

उन्होंने आगे कहा कि यह जहाज भारतीय नौसेना के विजन, रक्षा मंत्रालय के लगातार सहयोग और देश के शिपबिल्डिंग इकोसिस्टम की क्षमता को दिखाता है। एमडीएल ने साफ किया कि वह आगे भी देश की राष्ट्रीय सुरक्षा में योगदान देने और भारत की समुद्री ताकत को मजबूत करने के लिए इसी तरह काम करता रहेगा।

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INS Mahendragiri: क्या है प्रोजेक्ट-17ए

प्रोजेक्ट-17ए के तहत भारतीय नौसेना के लिए कुल सात एडवांस्ड स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट बनाए जा रहे हैं। यह पहले के प्रोजेक्ट-17 यानी शिवालिक क्लास का अपग्रेडेड वर्जन माना जाता है।

इन जहाजों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि ये एक साथ कई तरह के मिशन संभाल सकें। इसमें एयर डिफेंस, एंटी-शिप ऑपरेशन, एंटी-सबमरीन वारफेयर और निगरानी जैसे काम शामिल हैं। इस प्रोजेक्ट में चार जहाज एमडीएल और तीन गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स द्वारा बनाए जा रहे हैं।

इन सभी जहाजों के नाम भारत की पर्वत श्रृंखलाओं पर नीलगिरि, हिमगिरि, उदयगिरि, दूनागिरि, तारागिरि, विंध्यगिरि और महेंद्रगिरि के नाम पर रखे हैं।

महेंद्रगिरि में है स्टेल्थ क्षमता

महेंद्रगिरि को खास तौर पर स्टेल्थ फीचर्स के साथ तैयार किया गया है। इसका डिजाइन ऐसा है कि दुश्मन के रडार पर इसकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है। इसे कम रडार क्रॉस सेक्शन के साथ डिजाइन किया गया है, जिससे यह समुद्र में ज्यादा सुरक्षित तरीके से ऑपरेशन कर सकता है।

इसके अलावा जहाज में एडवांस्ड प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट सिस्टम लगाया गया है, जिससे इसके सभी सिस्टम एक नेटवर्क के जरिए जुड़े रहते हैं।

6,600 टन है वजनी

यह फ्रिगेट करीब 149 मीटर लंबा और लगभग 6,600 टन के आसपास का डिस्प्लेसमेंट रखता है। इसकी अधिकतम गति करीब 32 नॉट्स तक पहुंच सकती है। यह लंबी दूरी तक ऑपरेशन करने में सक्षम है और समुद्र में लंबे समय तक तैनात रह सकता है।

इसमें सीओडीओजी यानी कंबाइंड डीजल और गैस टर्बाइन प्रोपल्शन सिस्टम दिया गया है। इसमें जरूरत के हिसाब से डीजल इंजन या गैस टर्बाइन का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे ईंधन की बचत और बेहतर परफॉर्मेंस दोनों मिलते हैं।

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जहाज में कंट्रोलेबल पिच प्रोपेलर लगाया गया है, जिससे इसकी मूवमेंट को बेहतर तरीके से कंट्रोल किया जा सकता है।

कई आधुनिक हथियारों और सेंसर सिस्टम से है लैस

‘महेंद्रगिरि’ को कई तरह के आधुनिक हथियारों और सेंसर सिस्टम से लैस किया गया है। इसमें सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, मीडियम रेंज सर्फेस टू एयर मिसाइल, मुख्य गन, क्लोज-इन वेपन सिस्टम और टॉरपीडो जैसे सिस्टम शामिल हैं।

इसके साथ ही इसमें एडवांस्ड रडार और सोनार सिस्टम लगाए गए हैं, जो हवा और पानी दोनों में होने वाली गतिविधियों पर नजर रख सकते हैं। इस जहाज पर हेलीकॉप्टर ऑपरेशन भी किए जा सकते हैं, जिससे इसकी निगरानी और हमला करने की क्षमता बढ़ जाती है।

इस जहाज में 75 प्रतिशत से ज्यादा स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसमें कई सिस्टम भारत में ही डिजाइन और बनाए गए हैं।

प्रोजेक्ट-17A के तहत एमडीएल ने पहले भी तीन जहाज नौसेना को सौंपे हैं। इस जहाज का निर्माण पिछले जहाजों के मुकाबले कम समय में पूरा किया गया है।

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  • News Desk

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