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जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन को मिलेगी नई धार, राष्ट्रीय राइफल्स के लिए सेना खरीदने जा रही है नए बुलेट प्रूफ ट्रूप्स कैरियर

यह व्हीकल खास तौर पर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जैसे संवेदनशील इलाकों में तैनात जवानों के लिए तैयार किया जा रहा है, जहां काउंटर इंसर्जेंसी और काउंटर टेररिज्म ऑपरेशन लगातार चलते रहते हैं...

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📍नई दिल्ली | 30 Apr, 2026, 7:35 PM

Indian Army Bulletproof Troop Carrier: भारतीय सेना जम्मू-कश्मीर में तैनात राष्ट्रीय राइफल्स यूनिट्स के लिए एक नए तरह के सुरक्षित व्हीकल को खरीदने की तैयारी कर रही है। इसके तहत करीब 159 बुलेट प्रूफ ट्रूप्स कैरियर यानी बीपीटीसी खरीदने की योजना बनाई गई है। इसके लिए रक्षा मंत्रालय ने रिक्वेस्ट फॉर इंफॉर्मेशन जारी किया है। यह व्हीकल खास तौर पर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जैसे संवेदनशील इलाकों में तैनात जवानों के लिए तैयार किया जा रहा है, जहां काउंटर इंसर्जेंसी और काउंटर टेररिज्म ऑपरेशन लगातार चलते रहते हैं।

Indian Army Bulletproof Troop Carrier: 5000 मीटर तक की ऊंचाई पर करेगा काम

बीपीटीसी को इस तरह डिजाइन किया जाए कि यह अलग-अलग तरह के इलाकों में आसानी से काम कर सके। यह व्हीकल मैदानी जगहों के साथ-साथ पहाड़ी और बर्फीले इलाकों में भी चल सके। इसे करीब 5000 मीटर तक की ऊंचाई पर ऑपरेट करने के लिए तैयार रहे, जहां आम व्हीकल काम नहीं कर पाते।

इसमें हर मौसम में काम करने की क्षमता होगी। चाहे भारी बारिश हो, बर्फबारी हो या धूल भरे हालात, यह व्हीकल बिना रुकावट के चलता रहेगा। इसके अंदर हीटिंग, वेंटिलेशन और एयर कंडीशनिंग सिस्टम लगाया जाए, जिससे केबिन का तापमान कंट्रोल रहे। इससे ठंडे इलाकों में भी जवानों को परेशानी नहीं होगी। यह वाहन बेहद कठिन मौसम में भी काम करने के लिए तैयार हो। इसमें माइनस 5 से माइनस 10 डिग्री सेल्सियस तक की ठंड और 40 डिग्री सेल्सियस तक की गर्मी में पूरी तरह से ऑपरेशनल रहने की क्षमता हो। (Indian Army Bulletproof Troop Carrier)

30 लोगों के बैठने की व्यवस्था

इस व्हीकल की सबसे बड़ी खूबी इसकी सुरक्षा है। इसमें कुल 30 लोगों के बैठने की व्यवस्था होगी, जिसमें ड्राइवर और को-ड्राइवर के अलावा 28 जवान बैठ सकेंगे। अंदर की सीट्स इस तरह बनाई गई हैं कि जवानों को लंबी दूरी के दौरान भी आराम मिल सके।

इसकी पेलोड क्षमता कम से कम 3 टन हो, ताकि यह भारी मात्रा में सामान और उपकरण एक साथ ले जा सके। वाहन का कुल वजन अधिकतम 20 टन तक हो, जिसमें वाहन का खुद का वजन और उसमें बैठने वाले जवानों का वजन शामिल है। (Indian Army Bulletproof Troop Carrier)

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मजबूत इंजन और बेहतर मोबिलिटी

बीपीटीसी में टर्बोचार्ज्ड डीजल इंजन लगा हो, जो इसे अलग-अलग तरह के रास्तों पर चलने की ताकत देगा। यह 4×4 ड्राइव सिस्टम से लैस होना चाहिए, जिससे जरूरत के अनुसार इसे अलग-अलग मोड में चलाया जा सकेगा। इसकी लंबाई 9 मीटर, चौड़ाई 2.5 मीटर और 3.25 मीटर हो।

इस व्हीकल की स्पीड सड़क पर करीब 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे हो, जबकि खराब इलाकों में इसकी स्पीड 50 से 75 किमी प्रति घंटा होनी चाहिए। साथ ही, इसकी रेंज भी मैदानी इलाकों के लिए 350 किमी और पहाड़ी इलाकों के लिए 300 किमी रखी गई है, जिससे यह एक बार में सैकड़ों किलोमीटर तक चल सकता है।

इसके साथ इसमें सेल्फ रिकवरी सिस्टम भी हो, यानी अगर व्हीकल कहीं फंस जाए तो यह खुद को बाहर निकाल सके। (Indian Army Bulletproof Troop Carrier)

बैलिस्टिक प्रोटेक्शन से लैस

इस व्हीकल की सबसे अहम बात इसका STANAG लेवल-3 बैलिस्टिक प्रोटेक्शन है। इसे इस तरह तैयार किया जाए कि यह अलग-अलग तरह की गोलियों और हमलों से जवानों को बचा सके।

व्हीकल के सभी हिस्सों, जैसे दरवाजे, दीवारें और छत, को मजबूत बुलेट प्रूफ स्टील से बनाया जाए। इसमें खास तरह का बुलेट रेसिस्टेंट ग्लास लगा हो, जो गोलियों को रोक सके।

इसके अलावा व्हीकल के नीचे वाले हिस्से भी मजबूत हो, ताकि यह ग्रेनेड या विस्फोट जैसे हमलों को झेल सके। इंजन और फ्यूल टैंक को भी अतिरिक्त सुरक्षा का फीचर हो, ताकि हमला होने पर भी व्हीकल तुरंत बंद न हो। (Indian Army Bulletproof Troop Carrier)

लगे हों रन-फ्लैट सिस्टम वाले टायर

बीपीटीसी में ऐसे टायर लगाए जाएं, जो खराब होने के बाद भी कुछ दूरी तक व्हीकल को चलने देंगे। इसे रन-फ्लैट सिस्टम कहा जाता है। इसका मतलब है कि अगर टायर पंचर भी हो जाए तो व्हीकल तुरंत नहीं रुकेगा।

इसमें अतिरिक्त टायर भी दिया जाए, जिससे जरूरत पड़ने पर उसे बदला जा सके। यह सुविधा ऑपरेशन के दौरान बहुत काम आती है, जहां रुकना जोखिम भरा हो सकता है।

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इस बुलेटप्रूफ ट्रूप्स कैरियर में आधुनिक लाइटिंग सिस्टम होना चाहिए, जिसमें एलईडी हेडलाइट्स, फॉग लाइट्स, टेल लाइट्स, ब्रेक लाइट्स और कन्वॉय लाइट्स शामिल हैं। इसके साथ ब्लैकआउट स्विच की सुविधा भी हो, जिससे ऑपरेशन के दौरान जरूरत पड़ने पर पूरी लाइटिंग बंद की जा सके। वाहन पर एंटी-रायट वायर मेश भी लगा हो, जो सुरक्षा को और मजबूत बनाएगा।

गनर हैच और फायरिंग की सुविधा

इस व्हीकल को सिर्फ ट्रांसपोर्ट के लिए ही नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर फायरिंग के लिए भी तैयार हो। इसके ऊपर एक गनर हैच लगा हो, जहां से सैनिक मशीन गन का इस्तेमाल कर सकते हैं।

इसके अलावा व्हीकल के दोनों तरफ छोटे-छोटे फायरिंग पोर्ट दिए जाएं, जिनसे अंदर बैठे जवान भी जरूरत पड़ने पर जवाबी कार्रवाई कर सकें। इससे यह व्हीकल एक तरह से चलते-फिरते सुरक्षा प्लेटफॉर्म की तरह काम करता है।

बीपीटीसी में एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम भी दिया जाएगा। इसमें ऐसे फीचर्स होंगे जो ड्राइवर को मुश्किल रास्तों पर व्हीकल को चलाने में मदद करेंगे।

इसमें 360 डिग्री कैमरा, टक्कर से बचाने वाला सिस्टम, ब्रेकिंग कंट्रोल और ड्राइवर की थकान को पहचानने वाले फीचर्स शामिल होंगे। इससे दुर्घटना की संभावना कम हो जाती है। (Indian Army Bulletproof Troop Carrier)

बेहतर कंट्रोल और ब्रेकिंग सिस्टम

इस व्हीकल में सभी पहियों पर डिस्क ब्रेक लगे हो और एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम भी दिया गया हो। इससे अचानक ब्रेक लगाने पर भी व्हीकल संतुलित रहेगा।

इसमें एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम यानी एडीएएस लेवल-2 फीचर्स भी अनिवार्य रूप से हो। यह सिस्टम खास तौर पर पहाड़ी इलाकों, कच्चे रास्तों और कम विजिबिलिटी जैसे कोहरा, बर्फ या धूल भरे माहौल में बेहतर ड्राइविंग में मदद करेगा। इसमें एडाप्टिव क्रूज कंट्रोल दिया गया हो, जो ट्रैफिक के हिसाब से खुद स्पीड को कंट्रोल करे। इसके साथ फॉरवर्ड कोलिजन वार्निंग और ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम भी हो, जो सामने खतरा आने पर वाहन को अपने आप रोक सकता है।

यह व्हीकल ढलान वाले रास्तों पर भी पूरी तरह लोड होने के बावजूद रुक सकता है। यह खासियत पहाड़ी इलाकों में काफी जरूरी मानी जाती है। (Indian Army Bulletproof Troop Carrier)

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आसान रखरखाव और लंबी उम्र

सेना ने आरएफआई में कहा कि बीपीटीसी को इस तरह डिजाइन किया जाए कि इसका रखरखाव आसान हो। इसके अलग-अलग हिस्सों को जरूरत पड़ने पर आसानी से बदला जा सकता है। इससे फील्ड में ही इसकी मरम्मत की जा सकेगी।

इसकी उम्र भी 10 साल या एक लाख किमी रखी गई है, ताकि इसे कई सालों तक इस्तेमाल किया जा सके। इसके साथ कंपनियों को स्पेयर पार्ट्स और मेंटेनेंस सपोर्ट देना भी जरूरी होगा।

यह पूरी प्रक्रिया डिफेंस एक्विजिशन प्रोसीजर 2020 के तहत आगे बढ़ाई जा रही है और इसे ‘बाय इंडियन-आईडीडीएम’ कैटेगरी में रखा गया है। इसका मतलब है कि इस प्रोजेक्ट में भारतीय कंपनियों की भागीदारी होगी और स्वदेशी तकनीक पर जोर रहेगा।

इस प्रोजेक्ट के तहत चुनी गई कंपनी को तय समय में सभी व्हीकल तैयार करने होंगे। कॉन्ट्रैक्ट मिलने के बाद हर तीन साल तक 60 व्हीकलों की डिलीवरी करनी होगी, ताकि सेना को समय पर यह नई क्षमता मिल सके।

सेना की जरूरतों के मुतबिक यह व्हीकल सड़क और रेल दोनों के जरिए आसानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सके। इसके साथ कंपनी को ट्रेनिंग के लिए एआर और वीआर वीडियो, सेक्शनाइज्ड मॉडल्स और डिटेल्ड मैनुअल्स भी देने होंगे, ताकि सैनिक इसे सही तरीके से ऑपरेट और मेंटेन कर सकें।

इसमें भाग लेने के लिए कंपनियों को यह भी दिखाना होगा कि उनके पास बड़े स्तर पर उत्पादन करने की क्षमता है। (Indian Army Bulletproof Troop Carrier)

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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