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Army Help Line 155306: वेटरन और सैनिकों के लिए भारतीय सेना ने शुरू की नई इमरजेंसी हेल्पलाइन सुविधा; इस्तेमाल करने से पहले पढ़ लें ये शर्तें

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📍नई दिल्ली | 11 Nov, 2024, 4:48 PM

Army Help Line 155306: भारतीय सेना ने अपने जवानों और वेटरन (पूर्व सैनिकों) के लिए एक नई और महत्वपूर्ण हेल्पलाइन सेवा शुरू की है। यह कदम उन सैनिकों और वेटरन के लिए राहत का कारण बनेगा जो किसी आपात स्थिति में सहायता के लिए दर-दर की ठोकरें खाते हैं। यह हेल्पलाइन नंबर, 155306, एक “न्यूमेनिक सर्विस” की तरह काम करेगा, जो पूरी तरह से इमरजेंसी के लिए डिज़ाइन किया गया है।

Army Help Line 1536: Indian Army Launches New Emergency Helpline for Veterans and Soldiers – Important Terms to Know Before Use
(File Photo)

क्या है यह हेल्पलाइन?

यह हेल्पलाइन सेवा किसी भी समय और किसी भी जगह से उपयोग की जा सकती है। सेना की यह हेल्पलाइन सेवा 155306- अब 24/7 सक्रिय होगी और इसमें कॉलर की पहचान के लिए कॉल रिकॉर्डिंग सुविधा भी होगी। कॉल करने पर, कॉलर से उसका नाम, स्थान और जरूरत की जानकारी ली जाएगी, ताकि सही सहायता भेजी जा सके। यह सेवा सिर्फ सैन्य कर्मियों और वेटरन के लिए है, जो किसी भी प्रकार की आपात स्थिति में फंसे हुए हैं, चाहे वह शारीरिक हमला हो, प्राकृतिक आपदा हो या अन्य कोई आपातकालीन स्थिति हो।

साथ ही, इस हेल्पलाइन को ऐसे महत्वपूर्ण संस्थानों से जोड़ा जाएगा जैसे कि स्थानीय पुलिस स्टेशन, सीएमपी यूनिट, और अन्य सरकारी विभागों। इस सुविधा के माध्यम से कॉलर को उनके पास के सैनिकों और पुलिस से जोड़ा जाएगा, जो तुरंत स्थिति की गंभीरता का आकलन करेंगे और मौके पर पहुंचने के लिए तैयार होंगे।

Army Help Line 1536: Indian Army Launches New Emergency Helpline for Veterans and Soldiers – Important Terms to Know Before Use

कैसे काम करेगा हेल्पलाइन नंबर?

जब कोई सैनिक या वेटरन इस नंबर पर कॉल करेगा, तो उस कॉल का जवाब मिलिट्री पुलिस द्वारा दिया जाएगा। इसके बाद, संबंधित यूनिट को सूचना भेजी जाएगी ताकि तुरंत मदद पहुंचाई जा सके। खास बात यह है कि यह हेल्पलाइन हर इलाके में फैली हुई आर्मी यूनिट्स और सिविल नेटवर्क से जुड़ी होगी, जिससे कि सहायता देने में कोई देरी न हो।

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क्या नहीं करना होगा?

यह हेल्पलाइन केवल इमरजेंसी मामलों के लिए है, इसलिए इसके माध्यम से व्यक्तिगत मामलों या छोटे विवादों की शिकायत नहीं की जा सकती। जैसे कि भूमि विवाद, पारिवारिक समस्याएं, या किसी सामान्य सूचना का आदान-प्रदान इस हेल्पलाइन का हिस्सा नहीं होगा। इसका उद्देश्य केवल सेना के जवानों और उनके परिवारों को मुसीबत के समय त्वरित सहायता प्रदान करना है।

कैसे पहुंचेगी मदद?

यदि किसी सैनिक या वेटरन को आपात स्थिति में मदद की आवश्यकता होती है, तो वह सीधे इस हेल्पलाइन पर कॉल करेगा। इसके बाद, संबंधित अधिकारी और यूनिट्स को सूचित किया जाएगा और वे तुरंत सक्रिय होकर संबंधित स्थान पर मदद भेजेंगे। इस प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता और ट्रैकिंग होगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सहायता सही समय पर पहुंच रही है।

सैन्य और समाज का जुड़ाव बढ़ेगा

इस हेल्पलाइन सेवा से यह भी सुनिश्चित होगा कि हमारे सैनिकों और वेटरन के बीच एक मजबूत नेटवर्क बने, जो उन्हें हर संकट में एक दूसरे का सहारा देने के लिए तैयार रहे। यह पहल सेना के भीतर एक मजबूत समुदाय और विश्वास का निर्माण करेगी, जो देश के प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा के लिए तत्पर रहता है।

भारतीय सेना द्वारा शुरू की गई यह हेल्पलाइन सेवा वेटरन और सैनिकों के लिए एक अमूल्य सुविधा साबित होगी। इससे न सिर्फ सैन्य परिवारों को सुरक्षा का अहसास होगा, बल्कि उनके लिए एक मजबूत समर्थन प्रणाली भी बनेगी, जो कभी भी और कहीं भी उनकी मदद के लिए तैयार रहेगी। इस पहल से सेना और समाज के बीच का संबंध और मजबूत होगा, और सैनिकों के प्रति समाज का सम्मान और स्नेह और भी बढ़ेगा।

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आपात स्थिति में मदद पाने के लिए यह हेल्पलाइन नंबर – 155306 – अब आपके मोबाइल में सेव करना जरूरी है।

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  • Herry Photo

    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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