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Explained: SU-30 MKI से दागी गई रुद्रम-II मिसाइल, सिर्फ एक वार और दुश्मन का रडार बेकार, जानिए कितनी है खतरनाक

रुद्रम-II एक स्वदेशी एयर-टू-सर्फेस मिसाइल है। इस मिसाइल को खास तौर पर दुश्मन के रडार, एयर डिफेंस सिस्टम, कमांड सेंटर, कम्युनिकेशन स्टेशन, बंकर और अन्य महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को नष्ट करने के लिए डेवलप किया गया है...

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📍नई दिल्ली | 2 Jun, 2026, 9:38 PM

RudraM-II Missile: भारत ने एक ऐसी स्वदेशी मिसाइल का सफल परीक्षण किया है, जिसे आधुनिक युद्ध के सबसे महत्वपूर्ण हथियारों में गिना जा रहा है। डीआरडीओ और भारतीय वायुसेना ने मिलकर रुद्रम-II एयर-टू-सर्फेस मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया। यह मिसाइल सु-30 एमकेआई लड़ाकू विमान से दागी गई और उसने अपने टारगेट को बेहद सटीकता के साथ हिट किया।

क्या है RudraM-II Missile?

रुद्रम-II एक स्वदेशी एयर-टू-सर्फेस मिसाइल है। इसे फाइटर जेट से लॉन्च किया जाता है और यह जमीन पर मौजूद दुश्मन के टारगेट्स पर हमला करती है। इस मिसाइल को खास तौर पर दुश्मन के रडार, एयर डिफेंस सिस्टम, कमांड सेंटर, कम्युनिकेशन स्टेशन, बंकर और अन्य महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को नष्ट करने के लिए डेवलप किया गया है।

रुद्रम-II, डीआरडीओ की रुद्रम मिसाइल सीरीज का दूसरा और अधिक एडवांस वर्जन है। इससे पहले रुद्रम-1 डेवलप की जा चुकी है, जिसने भारतीय वायुसेना को दुश्मन के रडार सिस्टम पर हमला करने की क्षमता दी थी। रुद्रम-II को उससे कहीं अधिक शक्तिशाली और बहुउद्देश्यीय बनाया गया है।

कठिन परिस्थितियों में किया गया परीक्षण

रक्षा मंत्रालय की तरफ से मिली जानकारी के मुताबिक यह परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर तट के पास किया गया। मिसाइल को ऐसी परिस्थितियों में छोड़ा गया जिन्हें सैन्य भाषा में “एक्सट्रीम रिलीज कंडीशंस” कहा जाता है। इसका मतलब है कि मिसाइल को अलग-अलग ऊंचाई, गति और जटिल उड़ान प्रोफाइल के दौरान लॉन्च किया गया।

मिसाइल विमान से अलग होने के बाद खुद अपने टारगेट की ओर बढ़ी और तय जगह पर बिल्कुल सटीक वार किया। परीक्षण के दौरान रेंज पर मौजूद ट्रैकिंग सिस्टम, रडार और अन्य निगरानी उपकरणों ने पूरे मिशन पर नजर रखी।

रुद्रम-II की जरूरत क्यों पड़ी?

आधुनिक युद्ध में किसी भी देश की सुरक्षा का सबसे बड़ा आधार उसका एयर डिफेंस नेटवर्क होता है। इसमें रडार, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और सर्विलांस सिस्टम शामिल होता है।

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अगर किसी देश की वायुसेना को दुश्मन के इलाके में हमला करना है, तो सबसे पहले उसके एयर डिफेंस सिस्टम को निष्क्रिय करना जरूरी होता है। यदि ऐसा नहीं किया जाए तो लड़ाकू विमान दुश्मन की मिसाइलों का आसान निशाना बन सकते हैं।

रुद्रम-II इसी काम के लिए बनाई गई है। यह दुश्मन के रडार की पहचान कर उसे नष्ट कर सकती है, जिससे आगे आने वाले विमानों के लिए रास्ता आसान हो जाता है। (RudraM-II Missile)

कैसे काम करती है यह मिसाइल?

रुद्रम-II में अत्याधुनिक गाइडेंस और टारगेटिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसमें पैसिव होमिंग हेड लगाया गया है, जो दुश्मन के रडार से निकलने वाले रेडियो सिग्नल को पकड़ता है। जैसे ही रडार सक्रिय होता है, मिसाइल उसके सोर्स के डायरेक्शन में बढ़ने लगती है।

इसके अलावा इसमें इमेजिंग इन्फ्रारेड सीकर भी लगाया गया है। यह लक्ष्य की गर्मी और उसकी तस्वीर के आधार पर पहचान करता है।

यही कारण है कि अगर दुश्मन अपना रडार बंद भी कर दे, तब भी मिसाइल टारगेट को खोजकर हमला कर सकती है।

रुद्रम-II की प्रमुख खूबियां

रुद्रम-II को लंबी दूरी और तेज गति वाली मिसाइल माना जाता है। इसकी अनुमानित मारक क्षमता 300 किलोमीटर से अधिक है।

यह मैक 3 से मैक 4.3 की रफ्तार से उड़ सकती है, जो लगभग 3,600 से 4,300 किलोमीटर प्रति घंटा के बराबर है। इतनी तेज गति के कारण दुश्मन के पास प्रतिक्रिया देने या बचाव करने के लिए बहुत कम समय बचता है।

करीब 600 किलोग्राम वजन वाली यह मिसाइल लगभग 4.7 मीटर लंबी होती है, जबकि कुछ आधुनिक वेरिएंट की लंबाई 5.3 मीटर तक है। इसमें 87 से 90 किलोग्राम का हाई एक्सप्लोसिव वारहेड लगाया जाता है, जो रडार स्टेशन, कमांड सेंटर और एयर डिफेंस सिस्टम को गंभीर नुकसान पहुंचाने में सक्षम है।

इसमें एक खास तरह का रैमजेट इंजन लगाया गया है। लॉन्च के बाद पहले सॉलिड फ्यूल बूस्टर मिसाइल को तेज गति देता है, फिर रैमजेट इंजन सक्रिय होकर इसे अत्यधिक गति से लक्ष्य तक पहुंचाता है।

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मिसाइल को अलग-अलग ऊंचाइयों और गति पर लॉन्च किया जा सकता है। मिसाइल को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह लॉन्च के बाद स्वतः अपने लक्ष्य तक पहुंच सके। इसके लिए इसमें आधुनिक नेविगेशन सिस्टम और सटीक मार्गदर्शन तकनीक का उपयोग किया गया है।

रुद्रम-II का परीक्षण भारतीय वायुसेना के सु-30 एमकेआई लड़ाकू विमान से किया गया। सु-30 एमकेआई भारतीय वायुसेना का सबसे शक्तिशाली बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान माना जाता है। यह लंबी दूरी तक उड़ान भर सकता है और भारी मात्रा में हथियार ले जाने में सक्षम है।

रुद्रम-II के साथ इसका कॉम्बिनेशन भारतीय वायुसेना की स्ट्राइक क्षमता को और मजबूत बनाता है। (RudraM-II Missile)

रुद्रम प्रोजेक्ट की कैसे हुई शुरुआत

भारत लंबे समय तक इस प्रकार की मिसाइलों के लिए विदेशी तकनीक पर निर्भर रहा। भारतीय वायुसेना रूसी मूल की Kh-31P जैसी मिसाइलों का इस्तेमाल करती थी।

डीआरडीओ ने लगभग एक दशक पहले स्वदेशी एंटी-रेडिएशन मिसाइल विकसित करने की परियोजना शुरू की। इस कार्यक्रम का नेतृत्व हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमरात ने किया।

इसके साथ डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी, हाई एनर्जी मैटेरियल्स रिसर्च लेबोरेटरी, आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट और इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज जैसी संस्थाओं ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

रुद्रम-1 के सफल परीक्षणों के बाद वैज्ञानिकों ने अधिक दूरी और बेहतर मारक क्षमता वाली रुद्रम-II पर काम शुरू किया। पिछले कुछ वर्षों में इसके कई चरणों में परीक्षण किए गए और अब यह प्रणाली अपने चरम पर पहुंचती दिखाई दे रही है।

कई संस्थाओं ने मिलकर किया विकास

रुद्रम-II में डीआरडीओ के अलावा कई सरकारी और औद्योगिक संगठनों का योगदान शामिल है।

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, रीजनल सेंटर फॉर मिलिट्री एयरवर्थिनेस, मिसाइल सिस्टम क्वालिटी एश्योरेंस एजेंसी और विभिन्न विकास-सह-उत्पादन साझेदारों ने इसके निर्माण और परीक्षण में सहयोग किया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सफल परीक्षण पर डीआरडीओ, भारतीय वायुसेना, रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों, उद्योग भागीदारों और सभी संबंधित टीमों को बधाई दी।

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उन्होंने कहा कि इस परीक्षण ने यह दिखाया है कि भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक लगातार परिपक्व हो रही है। उनके अनुसार उन्नत हथियार प्रणालियों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

डीआरडीओ के अध्यक्ष और रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव ने भी वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और परीक्षण टीमों की सराहना की। (RudraM-II Missile)

आधुनिक युद्ध में क्यों महत्वपूर्ण है ऐसी मिसाइल

हाल के सालों में दुनिया के कई संघर्षों ने दिखाया है कि वायु रक्षा प्रणाली और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध आधुनिक लड़ाई का अहम हिस्सा बन चुके हैं। किसी भी बड़े सैन्य अभियान से पहले दुश्मन के रडार और मिसाइल नेटवर्क को निष्क्रिय करना आवश्यक माना जाता है।

ऐसी स्थिति में रुद्रम-II जैसी मिसाइलें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यह दुश्मन की निगरानी क्षमता को कमजोर करने और आगे आने वाले लड़ाकू विमानों के लिए रास्ता साफ करने का काम करती हैं। (RudraM-II Missile)

DRDO and the Indian Air Force have successfully tested the indigenous RudraM-II air-to-surface missile from a Su-30MKI fighter jet under extreme operational conditions. The missile accurately struck its designated target, validating all critical systems. Designed to destroy enemy radars and air defence networks, RudraM-II significantly boosts India’s anti-radar strike capability and strengthens the country’s self-reliance in advanced defence technologies. Its successful trial marks another major milestone in India’s indigenous missile development programme.

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  • News Desk

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