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ऑपरेशन सिंदूर पर राजनाथ सिंह का बड़ा संदेश, ‘जहां आतंकवाद पनपेगा, वहीं मिलेगा जवाब’

राजनाथ सिंह ने कहा कि पहले रक्षा जरूरतों के लिए विदेशी हथियारों और उपकरणों पर अधिक भरोसा किया जाता था। लेकिन पिछले कुछ साल में इस सोच में बदलाव लाया गया है...

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📍नई दिल्ली | 18 Jul, 2026, 7:03 PM

Operation Sindoor Rajnath Singh: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया के सामने भारत की आधुनिक सैन्य तैयारी और रक्षा क्षमता का मजबूत प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि पिछले 12 साल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में रक्षा क्षेत्र में हुए बदलावों ने भारतीय सेनाओं को नई ताकत दी है। यही वजह है कि ऑपरेशन सिंदूर जैसे मुश्किल सैन्य अभियान को सफलतापूर्वक अंजाम दिया जा सका।

नई दिल्ली में शनिवार को रिपब्लिक टीवी के आयोजित कार्यक्रम फोर्सेज फर्स्ट कॉन्क्लेव में रक्षा मंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सैन्य अभियान नहीं था, बल्कि यह भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के साहस, आधुनिक तकनीक और स्वदेशी रक्षा उपकरणों की क्षमता का प्रमाण भी है।

Operation Sindoor Rajnath Singh: आतंकवाद पर सरकार की नीति साफ

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत की आतंकवाद के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति केवल बयान नहीं है, बल्कि यह सरकार की कार्यशैली का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि भारतीय सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों और उनके मददगारों को प्रभावी जवाब दिया है।

उन्होंने कहा कि भारत केवल अपनी सीमा की रक्षा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर वहां भी कार्रवाई करने की क्षमता रखता है, जहां से आतंकवाद संचालित होता है।

ऑपरेशन सिंदूर में दिखी स्वदेशी हथियारों की ताकत

रक्षा मंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कई आधुनिक स्वदेशी वेपन सिस्टम्स का प्रभावी इस्तेमाल किया गया। उन्होंने विशेष रूप से आकाश तीर, आकाश मिसाइल सिस्टम और ब्रह्मोस मिसाइल का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि इन वेपन सिस्टम्स ने यह साबित किया कि भारत अब आधुनिक तकनीक वाले रक्षा उपकरण स्वयं विकसित और तैयार करने की दिशा में काफी आगे बढ़ चुका है। उन्होंने इसे भारतीय उद्योगों पर सरकार के बढ़ते भरोसे का भी उदाहरण बताया।

आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ा रक्षा क्षेत्र

राजनाथ सिंह ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। उन्होंने बताया कि अब तक रक्षा सेवाओं के लिए 509 रक्षा उपकरणों और प्रणालियों की पांच पॉजिटिव इंडिजेनाइजेशन लिस्ट जारी की जा चुकी हैं।

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इसके अलावा रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों के लिए 5,012 वस्तुओं वाली पांच अलग-अलग सूचियां भी जारी की गई हैं। उन्होंने कहा कि जल्द ही एक और नई पॉजिटिव इंडिजेनाइजेशन लिस्ट जारी की जाएगी, जिससे देश में रक्षा उत्पादन को और गति मिलेगी।

रक्षा उत्पादन पहुंचा रिकॉर्ड स्तर पर

रक्षा मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का सालाना रक्षा उत्पादन लगभग 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 के आसपास यह आंकड़ा करीब 40 हजार करोड़ रुपये था।

उन्होंने यह भी बताया कि रक्षा निर्यात में भी तेज बढ़ोतरी हुई है। वित्त वर्ष 2013-14 में जहां रक्षा निर्यात केवल 686 करोड़ रुपये था, वहीं अब यह बढ़कर 38 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।

आयात पर निर्भरता कम करने पर जोर

राजनाथ सिंह ने कहा कि पहले रक्षा जरूरतों के लिए विदेशी हथियारों और उपकरणों पर अधिक भरोसा किया जाता था। लेकिन पिछले कुछ साल में इस सोच में बदलाव लाया गया है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने देश के भीतर ऐसा रक्षा औद्योगिक तंत्र विकसित किया है, जो भारतीय सेनाओं की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांग भी पूरी कर सकता है।

उनके अनुसार, किसी भी देश की रणनीतिक स्वतंत्रता तभी मजबूत होती है जब वह अपने हथियार, गोला-बारूद, मिसाइल, रडार, ड्रोन और अन्य सैन्य उपकरण स्वयं बना सके।

रक्षा निर्यात आसान बनाने के लिए किए गए सुधार

रक्षा मंत्री ने बताया कि सरकार ने रक्षा निर्यात को आसान बनाने के लिए कई बड़े सुधार किए हैं। उन्होंने कहा कि डिफेंस एक्सिम पोर्टल, ऑनलाइन मंजूरी, ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस, क्वॉलिटी सर्टिफिकेशन प्रोसेस को सरल बनाना, ग्रीन चैनल नीति और सेल्फ सर्टिफिकेशन जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। इन कदमों से भारतीय कंपनियों के लिए रक्षा उपकरणों का निर्यात पहले की तुलना में आसान हुआ है।

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उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु डिफेंस कॉरिडोर का जिक्र

राजनाथ सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर रक्षा क्षेत्र के सबसे बड़े सुधारों में शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि इन दोनों कॉरिडोर में करीब 70 हजार करोड़ रुपये के निवेश के प्रस्ताव मिले हैं। इनमें से लगभग 10 हजार करोड़ रुपये का निवेश हो चुका है। इससे नई मैन्युफैक्चरिंग इकाइयां स्थापित हुई हैं और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं।

उन्होंने विशेष रूप से उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को आत्मनिर्भर भारत का मजबूत उदाहरण बताया।

रक्षा खरीद में भारतीय उद्योगों को प्राथमिकता

रक्षा मंत्री ने कहा कि रक्षा आधुनिकीकरण के लिए निर्धारित बजट का 75 प्रतिशत हिस्सा भारतीय उद्योगों से खरीद के लिए रखा गया है। उन्होंने बताया कि नई डिफेंस एक्विजिशन प्रोसीजर (डीएपी) में ‘बाय इंडियन-इंडिजिनसली डिजाइन, डेवलप्ड एंड मैन्युफैक्चर्ड’ श्रेणी को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे भारतीय कंपनियों को रक्षा उत्पादन में अधिक अवसर मिलेंगे।

स्टार्टअप और एमएसएमई की बढ़ी भागीदारी

राजनाथ सिंह ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में इनोवेशन बढ़ाने के लिए आईडेक्स, आईडेक्स प्राइम और अदिति योजना जैसी पहल शुरू की गई हैं। उन्होंने बताया कि स्टार्टअप और एमएसएमई से 2,400 करोड़ रुपये से अधिक की खरीद को मंजूरी दी जा चुकी है। वहीं नई रक्षा तकनीकों के विकास के लिए 1,500 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं।

मार्च 2026 तक 676 स्टार्टअप और इनोवेटर्स आईडेक्स से जुड़े थे और 551 अनुबंध किए जा चुके थे। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 में रक्षा क्षेत्र में जहां कुछ दर्जन स्टार्टअप ही काम कर रहे थे, वहीं अब उनकी संख्या 2,000 से अधिक हो चुकी है। ये स्टार्टअप ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम टेक्नोलॉजी, साइबर सुरक्षा, रोबोटिक्स और अन्य आधुनिक रक्षा तकनीकों पर काम कर रहे हैं।

ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड के बदलाव का भी किया उल्लेख

रक्षा मंत्री ने कहा कि ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड के कॉरपोरेटाइजेशन का उद्देश्य उत्पादन क्षमता बढ़ाना, नई तकनीक अपनाना और जवाबदेही सुनिश्चित करना था।

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उन्होंने कहा कि इस फैसले के बाद पहले घाटे में चल रही कई इकाइयां अब लाभ कमाने वाली कंपनियों में बदल चुकी हैं।

राजनाथ सिंह ने कहा कि आज डीआरडीओ केवल अनुसंधान संस्था नहीं रह गई है, बल्कि यह उद्योग, शैक्षणिक संस्थानों, स्टार्टअप, वैज्ञानिकों और निजी कंपनियों को जोड़ने वाला नेशनल इनोवेशन प्लेटफॉर्म बन चुका है।

उन्होंने बताया कि आज देश में रक्षा क्षेत्र के लिए रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों, निजी उद्योगों, 17 हजार से अधिक एमएसएमई और हजारों सप्लाई यूनिट्स का मजबूत नेटवर्क तैयार हो चुका है।

रक्षा क्षेत्र में भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत अब केवल अपनी जरूरतों के लिए रक्षा उपकरण नहीं बना रहा है, बल्कि वह वैश्विक सुरक्षा साझेदार के रूप में भी अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय उद्योग, वैज्ञानिक, सैनिक, इंजीनियर, स्टार्टअप और युवा मिलकर देश के रक्षा औद्योगिक तंत्र को नई दिशा दे रहे हैं।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड यात्रा का भी उल्लेख किया और कहा कि इन दौरों से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत के रणनीतिक, आर्थिक और रक्षा संबंधों को मजबूती मिली है। इंडोनेशिया के साथ ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली पर सहयोग, ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम आपूर्ति और न्यूजीलैंड के साथ व्यापार बढ़ाने जैसे कदमों का भी उन्होंने जिक्र किया।

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