HomeIndian Armyभारतीय सेना कर रही अंतरिक्ष में युद्ध की तैयारी! स्पेस वॉरफेयर पर...

भारतीय सेना कर रही अंतरिक्ष में युद्ध की तैयारी! स्पेस वॉरफेयर पर करेगी बड़ी स्टडी, चीन-पाकिस्तान पर नजर

स्टडी में यह देखा जाएगा कि स्पेस टेक्नोलॉजी आधुनिक युद्ध को किस तरह बदल रही है। इसमें निगरानी, इंटेलिजेंस, संचार, मिसाइल ट्रैकिंग और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर जैसे विषय शामिल रहेंगे...

रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US

📍नई दिल्ली | 2 Jun, 2026, 5:54 PM

Indian Army Space Warfare Study: आधुनिक युद्ध अब सिर्फ जमीन, समुद्र और आसमान तक सीमित नहीं रह गया है। बल्कि दुनिया की बड़ी सैन्य ताकतें अब अंतरिक्ष यानी स्पेस को भी भविष्य के युद्ध का सबसे अहम हिस्सा मान रही हैं। भारत सरकार ने भी स्पेस वॉरफेयर को अब मल्टी डॉमेन ऑपरेशंस (MDO) में शामिल किया है, जिसमें लैंड, सी, एयर, स्पेस, साइबर और कॉग्निटिव शामिल हैं। जिसे देखते हुए भारतीय सेना ने स्पेस वॉरफेयर को लेकर बड़ी तैयारी शुरू कर दी है।

रक्षा समाचार को मिले आरएफपी डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक भारतीय सेना “स्पेस वॉरफेयर: न्यू हाई ग्राउंड ऑफ कॉन्फ्लिक्ट” को लेकर बड़ी स्टडी की तैयारी कर रही है। डॉक्यूमेंट के मुताबिक यह स्टडी आर्मी मैनेजमेंट स्टडीज बोर्ड (AMSB) के तहत कराई जाएगी।

भारतीय सेना का मानना है कि भविष्य के संघर्षों में स्पेस आधारित तकनीक की भूमिका बेहद अहम होने वाली है। इसी वजह से सेना अब स्पेस टेक्नोलॉजी, सैटेलाइट नेटवर्क, मिसाइल ट्रैकिंग, सर्विलांस सिस्टम और अंतरिक्ष आधारित सैन्य क्षमताओं पर गहराई से स्टडी करना चाहती है।

Indian Army Space Warfare Study: क्यों महत्वपूर्ण हो गया है स्पेस वॉरफेयर

पिछले कुछ वर्षों में दुनिया के कई देशों ने अंतरिक्ष को रणनीतिक सैन्य क्षेत्र के रूप में विकसित करना शुरू कर दिया है। अमेरिका, चीन और रूस जैसे देश पहले से ही एंटी-सैटेलाइट हथियार, स्पेस सर्विलांस सिस्टम और मिलिट्री सैटेलाइट नेटवर्क पर काम कर रहे हैं।

आधुनिक सेना अब संचार, नेविगेशन, ड्रोन ऑपरेशन, मिसाइल गाइडेंस और रियल टाइम इंटेलिजेंस के लिए सैटेलाइट सिस्टम पर निर्भर हो चुकी है। किसी युद्ध की स्थिति में अगर दुश्मन देश के सैटेलाइट सिस्टम को नुकसान पहुंचा दे, तो उसकी संचार और सैन्य क्षमता बुरी तरह प्रभावित हो सकती है।

इसी वजह से भारतीय सेना अब स्पेस डोमेन को केवल वैज्ञानिक क्षेत्र नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा रणनीतिक क्षेत्र मान रही है। (Indian Army Space Warfare Study)

एमसीटीई करेगा स्टडी और सेमिनार

इस प्रोजेक्ट का समन्वय मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग करेगा, जो भारतीय सेना की प्रमुख तकनीकी संस्थाओं में गिना जाता है। यह संस्थान संचार, नेटवर्किंग, साइबर और आधुनिक युद्ध तकनीकों पर काम करता है।

डॉक्यूमेंट में कहा गया है कि स्टडी का विषय “स्पेस वॉरफेयर: न्यू हाई ग्राउंड ऑफ कॉन्फ्लिक्ट” रखा गया है और इसके तहत अंतरिक्ष आधारित युद्ध की बदलती चुनौतियों का स्टडी किया जाएगा।

सेना इस स्टडी के जरिए यह समझना चाहती है कि आने वाले समय में स्पेस आधारित सैन्य क्षमताएं युद्ध की दिशा को किस तरह प्रभावित कर सकती हैं। (Indian Army Space Warfare Study)

यह भी पढ़ें:  जानें क्या है भारतीय नौसेना की कंटीन्यूटी ड्रिल? MILAN 2026 में जीता विदेशी मेहमानों का दिल

क्या-क्या शामिल होगा स्टडी में

डॉक्यूमेंट के अनुसार यह स्टडी केवल टेक्निकल रिसर्च तक सीमित नहीं होगी। इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा रणनीति, जियोपॉलिटिक्स और आर्थिक प्रभाव जैसे कई पहलुओं को शामिल किया जाएगा।

स्टडी में यह देखा जाएगा कि स्पेस टेक्नोलॉजी आधुनिक युद्ध को किस तरह बदल रही है। इसमें निगरानी, इंटेलिजेंस, संचार, मिसाइल ट्रैकिंग और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर जैसे विषय शामिल रहेंगे।

इसके अलावा अंतरिक्ष आधारित सैन्य क्षमताओं का भारत की रक्षा तैयारी और रणनीतिक ताकत पर क्या असर पड़ सकता है, इसका भी विश्लेषण किया जाएगा। (Indian Army Space Warfare Study)

अंतरिक्ष से जुड़े खतरों पर रहेगा फोकस

सूत्रों के मुताबिक आज का युद्ध तेजी से नेटवर्क सेंट्रिक होता जा रहा है। किसी भी सेना की ताकत अब केवल सैनिकों और हथियारों से नहीं, बल्कि उसके डेटा नेटवर्क और सैटेलाइट सिस्टम से भी तय होती है।

अगर युद्ध के दौरान किसी देश का सैटेलाइट नेटवर्क जाम या नष्ट हो जाए, तो उसकी मिसाइल गाइडेंस, जीपीएस, संचार और निगरानी क्षमता प्रभावित हो सकती है।

इसी वजह से दुनिया की कई सेनाएं अब एंटी-सैटेलाइट सिस्टम, स्पेस सर्विलांस और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग तकनीक पर काम कर रही हैं।

भारतीय सेना की इस स्टडी में भी ऐसे खतरों और उनसे निपटने की रणनीति पर फोकस रहने की संभावना है।

एआई और आधुनिक तकनीक पर भी चर्चा

डॉक्यूमेंट में कहा गया है कि स्टडी के दौरान आधुनिक तकनीक, आर्थिक विकास और जियोपॉलिटिकल प्रभावों को भी शामिल किया जाएगा।

अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बिग डेटा, सैटेलाइट इमेजिंग और ऑटोमेटेड सिस्टम मॉडर्न वॉरफेयर का अहम हिस्सा बन चुके हैं।

स्पेस बेस्ड डेटा की मदद से अब रियल टाइम में दुश्मन की गतिविधियों की निगरानी की जा सकती है। मिसाइल लॉन्च, सैनिकों की तैनाती और सैन्य गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा सकती है।

इसी वजह से भारतीय सेना भविष्य के युद्ध में एआई और स्पेस टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल को गंभीरता से समझना चाहती है।

भारत की सैन्य रणनीति में बढ़ रहा स्पेस का महत्व

भारत पहले ही डिफेंस सेक्टर में स्पेस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बढ़ा चुका है। भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना अब संचार और निगरानी के लिए कई सैन्य सैटेलाइट का इस्तेमाल कर रही हैं।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) भी कई रक्षा आधारित स्पेस परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं।

यह भी पढ़ें:  पिलाटस की जगह लेने वाला ट्रेनर एयरक्राफ्ट HTT-40 अब उड़ान को तैयार, हनीवेल ने HAL को भेजे तीन नए इंजन

2019 में भारत ने मिशन शक्ति के तहत एंटी-सैटेलाइट मिसाइल टेस्ट भी किया था। इसके बाद भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया था जिनके पास एंटी-सैटेलाइट क्षमता मौजूद है।

सूत्रों का कहना है कि इसी बदलती स्थिति को देखते हुए भारतीय सेना अब स्पेस वॉरफेयर पर गहराई से स्टडी करना चाहती है। (Indian Army Space Warfare Study)

विशेषज्ञ संस्थानों से मांगे गए प्रस्ताव

वहीं, सेना ऐसे संस्थानों, थिंक टैंक और रिसर्च एजेंसियों से प्रस्ताव मांग रही है, जिन्हें स्पेस रिसर्च और रक्षा स्टडी का अनुभव हो।

स्टडी करने वाले संस्थानों के पास अनुभवी विशेषज्ञों की टीम होना जरूरी है। डॉक्यूमेंट के अनुसार स्टडी टीम में कम से कम पांच सदस्य होने चाहिए। इसमें मेजर जनरल स्तर के विशेषज्ञ, ब्रिगेडियर स्तर के अधिकारी और रक्षा स्टडी से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हो सकते हैं।

इसके अलावा भारतीय सशस्त्र बलों के साथ पहले किए गए स्टडी और अकादमिक संस्थानों से सहयोग को भी मूल्यांकन का हिस्सा बनाया गया है। (Indian Army Space Warfare Study)

सेमिनार में होगी बड़ी चर्चा

इस प्रोजेक्ट के तहत केवल रिसर्च रिपोर्ट ही तैयार नहीं की जाएगी, बल्कि एक बड़ा सेमिनार भी आयोजित किया जाएगा।

डॉक्यूमेंट के अनुसार स्टडी पूरा होने के बाद विशेषज्ञों, सैन्य अधिकारियों और रणनीतिक मामलों के जानकारों के बीच विस्तृत चर्चा होगी। इसमें स्पेस आधारित युद्ध की चुनौतियों और भारत की तैयारी पर विचार किया जाएगा।

सेमिनार में मिलिट्री कम्यूनिकेशन, स्पेस सिक्योरिटी, सैटेलाइट सुरक्षा, साइबर खतरों और आधुनिक युद्ध में अंतरिक्ष की भूमिका जैसे विषय शामिल रह सकते हैं। (Indian Army Space Warfare Study)

दस महीने में पूरी करनी होगी स्टडी

डॉक्यूमेंट के मुताबिक संस्था को स्टडी और सेमिनार का काम समझौते पर हस्ताक्षर होने के दस महीने के भीतर पूरा करना होगा।

स्टडी पूरा होने के बाद संस्था को विस्तृत रिपोर्ट, प्रेजेंटेशन और हाई क्वालिटी प्रिंटेड कॉपी सेना को सौंपनी होगी। डॉक्यूमेंट में डिजिटल और हार्ड कॉपी दोनों जमा करने की बात कही गई है। (Indian Army Space Warfare Study)

राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर का होगा विश्लेषण

स्टडी के दौरान यह भी देखा जाएगा कि स्पेस वॉरफेयर भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को किस तरह प्रभावित कर सकता है।

रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक अब युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रह गया है। दुश्मन देश साइबर अटैक, सैटेलाइट जैमिंग और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के जरिए भी हमला कर सकते हैं।

अगर किसी देश का कम्यूनिकेशन नेटवर्क जाम हो जाए, तो उसकी सेना के ऑपरेशन प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए सेना अब स्पेस और साइबर दोनों क्षेत्रों को साथ लेकर चल रही है। (Indian Army Space Warfare Study)

यह भी पढ़ें:  Bharat Tank India: जोरावर के बाद आ रहा है एक और हल्का टैंक 'भारत', 2026 तक हो जाएगा तैयार, जानें खूबियां

भारत के लिए क्यों अहम है यह स्टडी

भारत के सामने चीन और पाकिस्तान जैसी दोहरी सुरक्षा चुनौती मौजूद है। चीन पहले से ही स्पेस टेक्नोलॉजी और मिलिट्री सैटेलाइट नेटवर्क पर तेजी से काम कर रहा है।

चीनी सेना स्पेस आधारित निगरानी, एंटी-सैटेलाइट वेपन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम विकसित कर चुकी है। वहीं पाकिस्तान भी चीन की मदद से अपनी सैन्य तकनीक मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

ऐसे में भारतीय सेना भविष्य के युद्ध की तैयारी के लिए स्पेस डोमेन को लेकर अपनी रणनीति मजबूत करना चाहती है।

स्पेस को माना जा रहा नया युद्धक्षेत्र

रक्षा मामलों से जुड़े सूत्रों का कहना है कि आने वाले समय में स्पेस को “न्यू हाई ग्राउंड ऑफ कॉन्फ्लिक्ट” यानी संघर्ष का नया बड़ा मोर्चा माना जा रहा है। जिस देश के पास मजबूत स्पेस नेटवर्क और सैटेलाइट सिक्योरिटी होगी, उसे युद्ध के दौरान रणनीतिक बढ़त मिल सकती है। इसी वजह से दुनिया की बड़ी सेनाएं अब जमीन और समुद्र के साथ-साथ अंतरिक्ष को भी युद्ध का नया क्षेत्र मान रही हैं। भारतीय सेना का यह स्टडी भी उसी बदलते वैश्विक सैन्य माहौल का हिस्सा माना जा रहा है। (Indian Army Space Warfare Study)

The Indian Army is undertaking a major study on space warfare, reflecting the growing importance of satellites, space-based surveillance, missile tracking, and secure communications in modern military operations. As future conflicts expand beyond traditional battlefields, the study will examine emerging threats, space security challenges, and the role of advanced technologies in national defence. The initiative highlights India’s increasing focus on multi-domain warfare and strategic preparedness in the space domain.

Author

  • Herry Photo

    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US
हरेंद्र चौधरी
हरेंद्र चौधरी
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

Most Popular