📍नई दिल्ली | 20 May, 2026, 8:30 PM
India-South Korea Defence Cooperation: भारत और दक्षिण कोरिया ने रक्षा साइबर सुरक्षा, सैन्य प्रशिक्षण और संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में सहयोग बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। सियोल में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री आह्न ग्यू-बैक के बीच हुई बैठक में रक्षा उत्पादन, नई तकनीक और इंडो-पैसिफिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
भारत और दक्षिण कोरिया के बीच यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियां तेजी से बढ़ रही हैं। दोनों देशों ने साफ कहा कि वे “फ्री, ओपन और रूल-बेस्ड इंडो-पैसिफिक” के समर्थन में साथ काम करेंगे। रणनीतिक मामलों के जानकार इसे चीन की बढ़ती आक्रामक गतिविधियों के बीच महत्वपूर्ण संकेत मान रहे हैं।
India-South Korea Defence Cooperation: डिफेंस साइबर और मिलिट्री ट्रेनिंग पर समझौते
बैठक के दौरान भारत और दक्षिण कोरिया के बीच तीन बड़े रक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। पहला समझौता डिफेंस साइबर कोऑपरेशन से जुड़ा है। इसके तहत दोनों देश साइबर सुरक्षा, सैन्य नेटवर्क की सुरक्षा और डिजिटल खतरों से निपटने में सहयोग करेंगे।
दूसरा समझौता भारत के नेशनल डिफेंस कॉलेज और कोरिया नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी के बीच सैन्य प्रशिक्षण और अकादमिक आदान-प्रदान को लेकर हुआ। इसके जरिए दोनों देशों के सैन्य अधिकारी एक-दूसरे के संस्थानों में प्रशिक्षण ले सकेंगे।
तीसरा समझौता संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में सहयोग बढ़ाने को लेकर हुआ। भारत लंबे समय से यूएन पीसकीपिंग मिशनों में सक्रिय भूमिका निभाता रहा है, जबकि दक्षिण कोरिया भी अंतरराष्ट्रीय शांति अभियानों में अपनी भागीदारी बढ़ा रहा है।
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि ये समझौते दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक और रक्षा संबंधों को दिखाते हैं।
एलएंडटी और हनव्हा के बीच भी हुए समझौते
भारत की एलएंडटी और दक्षिण कोरिया की हनव्हा कंपनी लिमिटेड के बीच भी दो अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। सूत्रों के मुताबिक ये समझौते नई रक्षा तकनीकों से जुड़े हैं।
दोनों कंपनियां पहले से भारत में के-9 वज्र ट्रैक्ड सेल्फ-प्रोपेल्ड आर्टिलरी गन का संयुक्त उत्पादन कर रही हैं। के-9 वज्र भारतीय सेना की सबसे आधुनिक आर्टिलरी गनों में गिनी जाती है।
सूत्रों का कहना है कि नए समझौते एडवांस डिफेंस टेक्नोलॉजी, सिस्टम इंटीग्रेशन और उत्पादन सहयोग को आगे बढ़ाने पर केंद्रित हैं।
इंडो-पैसिफिक पर साझा रणनीतिक सोच
बैठक में दोनों देशों ने “एक्ट ईस्ट पॉलिसी” और दक्षिण कोरिया की क्षेत्रीय रणनीति के बीच बढ़ती समानता पर जोर दिया। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक दोनों देशों ने कहा कि वे एक स्वतंत्र, खुला और नियम आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र बनाए रखने के लिए मिलकर काम करेंगे।
रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि “रूल-बेस्ड इंडो-पैसिफिक” शब्द का इस्तेमाल अक्सर दक्षिण चीन सागर और समुद्री मार्गों पर चीन की बढ़ती दावेदारी के संदर्भ में किया जाता है।
चीन पहले भी दक्षिण चीन सागर में विदेशी युद्धपोतों की मौजूदगी पर आपत्ति जताता रहा है। ऐसे में भारत और दक्षिण कोरिया का यह साझा बयान क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
रक्षा उत्पादन और नई तकनीक पर फोकस
राजनाथ सिंह ने सियोल में भारत-दक्षिण कोरिया डिफेंस इंडस्ट्री बिजनेस राउंडटेबल की भी अध्यक्षता की। इसमें दोनों देशों के सरकारी अधिकारी और रक्षा उद्योग से जुड़े बड़े प्रतिनिधि शामिल हुए।
बैठक में संयुक्त विकास, संयुक्त उत्पादन और संयुक्त निर्यात के नए अवसरों पर चर्चा हुई। दोनों देशों ने भारत-कोरिया डिफेंस इनोवेशन एक्सेलेरेटर इकोसिस्टम (KIND-X) को आगे बढ़ाने पर भी सहमति जताई।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आधुनिक रक्षा उत्पादन अब केवल टैंक, तोप और पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं रह गया है।
उन्होंने कहा कि आज का डिफेंस इकोसिस्टम एडवांस इलेक्ट्रॉनिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोनॉमस सिस्टम्स, साइबर टेक्नोलॉजी, सेंसर, सेमीकंडक्टर्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी, एडवांस मैटेरियल्स और स्पेस-बेस्ड सिस्टम्स पर आधारित होता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया मिलकर भविष्य की रक्षा तकनीकों पर काम कर सकते हैं।
भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता पर जोर
राजनाथ सिंह ने कहा कि दक्षिण कोरिया की तकनीकी क्षमता और भारत के बड़े मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम का संयोजन मजबूत साझेदारी बना सकता है। उन्होंने कहा कि भारत के पास तेजी से बढ़ता स्टार्टअप नेटवर्क, एमएसएमई, रिसर्च संस्थान और निजी रक्षा कंपनियों का मजबूत आधार मौजूद है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय युवा उद्यमी अब अनमैन्ड सिस्टम्स, एआई आधारित प्लेटफॉर्म्स, साइबर सिक्योरिटी, एडवांस कम्युनिकेशन और डिफेंस सॉफ्टवेयर जैसे क्षेत्रों में तेजी से काम कर रहे हैं।
उन्होंने कोरियाई कंपनियों से भारतीय उद्योग के साथ लंबे समय की साझेदारी बढ़ाने की अपील की।
‘आत्मनिर्भर भारत’ पर भी चर्चा
बैठक के दौरान राजनाथ सिंह ने भारत के बढ़ते रक्षा उत्पादन और निर्यात के आंकड़ों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा उत्पादन करीब 1.54 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। वहीं रक्षा निर्यात लगभग 40 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।
उन्होंने कहा कि सरकार स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने पर लगातार काम कर रही है और निजी क्षेत्र की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है।
ऑपरेशन सिंदूर का भी किया जिक्र
दक्षिण कोरिया में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन भारत के मजबूत और निर्णायक रुख का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि भारत आतंकवाद को किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं करेगा।
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत “नो फर्स्ट यूज” नीति का पालन करता है, लेकिन इसका मतलब कमजोरी नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत किसी भी तरह की परमाणु ब्लैकमेलिंग को स्वीकार नहीं करेगा।
कोरियन वॉर मेमोरियल पर श्रद्धांजलि
दक्षिण कोरिया दौरे की शुरुआत में राजनाथ सिंह ने सियोल स्थित कोरियन वॉर सेमेट्री पहुंचकर युद्ध में जान गंवाने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि दी।
उन्होंने कहा कि दक्षिण कोरिया के लोगों का साहस, देशभक्ति और समर्पण प्रेरणादायक है। भारत ने इस मौके पर दक्षिण कोरिया के साथ अपनी एकजुटता भी जताई।





