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K9 Vajra Artillery Guns: भारतीय सेना को मिलेंगी 100 नई K9 वज्र तोपें, लार्सन एंड टुब्रो के साथ 7,629 करोड़ रुपये कॉन्ट्रैक्ट पर हुए दस्तखत

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📍नई दिल्ली | 20 Dec, 2024, 6:05 PM

K9 Vajra Artillery Guns: भारत सरकार ने देश की रक्षा क्षमता को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय ने लार्सन एंड टुब्रो (L&T) के साथ 155 मिमी/52 कैलिबर K9 वज्र K9 (VAJRA-T) स्व-चालित ट्रैक्ड तोपों की खरीद के लिए 7,628.70 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट किया है। यह कॉन्ट्रैक्ट 20 दिसंबर, 2024 को रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में साइन किया गया। इससे पहले 14 दिसंबर को ही केंद्रीय कैबिनेट कमेटी ने 100 अतिरिक्त K9 वज्र तोपों और 12 नए Su-30MKI लड़ाकू विमानों के अधिग्रहण को मंजूरी दी थी।

K9 Vajra Artillery Guns: MoD signs Rs 7,629 crore contract with Larsen Toubro for Indian Army

K9 वज्र: भारतीय सेना के लिए गेम-चेंजर

K9 वज्र तोप भारतीय सेना की तोपखाने (आर्टिलरी) शक्ति को आधुनिक बनाने और संचालन क्षमता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह तोप अपनी तेज रफ्तार और सटीकता के लिए जानी जाती है। इसे विशेष रूप से ऊंचाई वाले क्षेत्रों और माइनस तापमान वाले इलाकों में ऑपरेशन करने के लिए डिजाइन किया गया है।

यह तोप लंबी दूरी तक सटीक और घातक फायरपावर देने में सक्षम है। इसके मॉडर्न फीचर्स भारतीय सेना को हर तरह के इलाके में बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करेंगे। इसकी जबरदस्त क्षमताएं सेना को न केवल लद्दाख जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बल्कि अन्य कठिन इलाकों में भी चीन जैसी चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनाएंगी।

K9 Vajra Artillery Guns: MoD signs Rs 7,629 crore contract with Larsen Toubro for Indian Army

चीन के साथ बढ़ती चुनौतियों का जवाब

सैन्य सूत्रों ने बताया कि यह खरीद “बाय इंडियन” श्रेणी के तहत की गई है, जिसमें न्यूनतम 60 फीसदी इंडीजीनियस  (स्वदेशीकरण) इक्विपमेंट्स का होना जरूरी है। लद्दाख और अन्य ऊंचाई वाले क्षेत्रों में चीन के साथ बढ़ती सैन्य चुनौतियों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। इन तोपों की तैनाती से भारतीय सेना की रणनीतिक ताकत में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। हाल ही में केंद्रीय कैबिनेट ने 100 अतिरिक्त K9 वज्र तोपों को मंजूरी दी थी, जो भारत की उत्तरी सीमाओं की रक्षा में अहम भूमिका निभाएंगी।

स्वदेश में ही बनेंगी

K9 वज्र तोपों का निर्माण पूरी तरह से भारत में किया जाएगा। लार्सन एंड टुब्रो की गुजरात के हजीरा में स्थित मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में इन तोपों का निर्माण किया जाएगा। यह 155 मिमी, 52-कैलिबर सेल्फ-प्रोपेल्ड होवित्जर तोपें हैं, जिन्हें दक्षिण कोरिया की कंपनी हनव्हा टेकविन की तकनीकी मदद से विकसित किया गया है। इस प्रोजेक्ट को दक्षिण कोरिया की डिफेंस एजेंसी की मंजूरी है। एलएंडटी ने पहले भी सेना को 100 K-9 वज्र तोपें सप्लाई की थीं। 2017 में, रक्षा मंत्रालय ने 4,366 करोड़ रुपये की लागत से इन तोपों को खरीदने का फैसला किया था। ये तोपें भारतीय सेना की ताकत बढ़ाने में मदद करेंगी।

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K9 Vajra Artillery Guns: भारतीय सेना को मिलेंगी 100 अतिरिक्त K9 वज्र तोपें; लद्दाख में चीन की चुनौती से निपटने की तैयारी

आत्मनिर्भर भारत और मेक-इन-इंडिया अभियान को बल

K9 वज्र परियोजना न केवल भारतीय सेना के लिए, बल्कि भारतीय उद्योग के लिए भी एक बड़ा अवसर लेकर आई है। इस परियोजना से अगले चार वर्षों में नौ लाख मानव-दिनों का रोजगार पैदा होगा। इसके अलावा, इस परियोजना में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs) सहित भारतीय उद्योगों की सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा।

K9 वज्र की खासियत

K9 वज्र एक 155 मिमी की ट्रैक्ड आर्टिलरी गन है, जो टैंक जैसी मारक क्षमता, एडवांस मोबिलिटी और सटीकता के लिए मशहूर है। यह तोप पहले राजस्थान के रेगिस्तान में तैनात की गई थी, लेकिन 2020 में चीन के साथ सीमा पर तनाव के बाद इसे लद्दाख जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात किया गया। बता दें कि सेना में पहले से ही के9 वज्र गनों की पांच रेजिमेंट हैं, और इस फैसले के बाद पांच रेजिमेंट और बनाईं जाएंगी। जिसके बाद इनकी संख्या कुल 10 हो जाएगी।

K-9 वज्र-टी तोपों से लैस सेल्फ-प्रोपेल्ड आर्टिलरी रेजिमेंट्स स्ट्राइक कोर के टैंक और इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल्स (ICVs) के ठीक पीछे चलती हैं। ये तोपें दुश्मन के ठिकानों पर हाई-एक्सप्लोसिव गोले बरसाती हैं। रेगिस्तानी इलाकों में K-9 वज्र जैसी ट्रैक वाली तोपें फायर सपोर्ट के लिए बेहद जरूरी होती हैं।

एलएंडटी द्वारा बनाई गई पहली 100 K-9 वज्र तोपों ने पांच रेजिमेंट्स को लैस किया है, जिनमें से प्रत्येक रेजिमेंट में 20 तोपें हैं। इनमें से एक रेजिमेंट को मई 2020 में चीन सीमा पर घुसपैठ के बाद तैनात किया गया था, जबकि बाकी चार रेजिमेंट्स को स्ट्राइक कोर की चार टैंक ब्रिगेड्स के साथ तैनात किया गया है। वहीं, अब, आज हुए नए समझौते के तहत अगली 100 तोपों से सेना की दूसरी स्ट्राइक कोर की पांच और रेजिमेंट्स को लैस किया जाएगा।

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सेना की दीर्घकालिक योजना के तहत इन 200 तोपों के बाद 100 और तोपों का तीसरा ऑर्डर दिया जाएगा। इन पांच नई रेजिमेंट्स में से प्रत्येक को सेना की “इंडिपेंडेट आर्मर्ड ब्रिगेड्स” के साथ तैनात किया जाएगा।

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इस तोप की सबसे बड़ी खासियत इसकी सेल्फ-प्रोपेल्ड (स्व-चालित) प्रणाली है, जो इसे अन्य तोपों से अलग बनाती है। इसे खींचने के लिए किसी बाहरी वाहन की आवश्यकता नहीं होती, और इसके एडवांस सिस्टम इसे कठिन परिस्थितियों में भी तेजी से फायरिंग और पुनः तैनाती में सक्षम बनाते हैं।

  1. लंबी दूरी की सटीक फायरिंग: K9 वज्र तोपें लंबी दूरी तक सटीक और प्रभावी फायरिंग करने में सक्षम हैं।
  2. तेज फायरिंग रेट: यह तोपें तेज गति से गोले दाग सकती हैं, जो किसी भी युद्ध क्षेत्र में निर्णायक साबित हो सकती हैं।
  3. सभी प्रकार के भूभागों में संचालन: इन तोपों की क्रॉस-कंट्री मोबिलिटी उन्हें किसी भी भूभाग में संचालन के लिए उपयुक्त बनाती है।
  4. उच्च ऊंचाई और माइनस तापमान में कार्यक्षमता: K9 वज्र तोपें उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों और कठिन मौसम स्थितियों में भी पूरी क्षमता के साथ काम कर सकती हैं।

K9 Vajra Artillery Guns में हाई एल्टीट्यूड पर तैनाती के लिए खास अपग्रेड

नई K9 वज्र तोपों को ऊंचाई वाले क्षेत्रों के लिए खास तौर पर तैयार किया जा रहा है। इन्हें -20°C तक के ठंडे मौसम में भी प्रभावी रूप से काम करने लायक बनाया गया है। इसके लिए इनमें कई खास फीचर जोड़े गए हैं, जैसे:

  • एडवांस्ड फायर-कंट्रोल सिस्टम
  • विशेष लुब्रिकेंट्स
  • ठंडे मौसम के लिए तैयार की गई बैटरियां
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तोप की रेंज 40 किलोमीटर से अधिक है और यह 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से मूव कर सकती है। इसे पांच जवानों की टीम मैनेज करती है और यह 49 राउंड तक गोला-बारूद अपने साथ ले जाने में सक्षम है।

बता दें कि 18 दिसंब को कोरियाई दूतावास ने हनह्वा एयरोस्पेस लैंड सिस्टम्स के साथ एक बैठक की थी और के-9 होवित्जर (वज्र) परियोजना के दूसरे चरण की स्थिति सहित कोरिया-भारत रक्षा सहयोग पर विचारों का आदान-प्रदान किया। दक्षिण कोरिया की कंपनी हनवा एयरोस्पेस यूरोप में अपनी पहली उत्पादन इकाई स्थापित करने जा रही है।  रोमानिया में K-9 थंडर होवित्जर के लिए 2025 तक शुरू होने की उम्मीद है। यह अत्याधुनिक सुविधा रोमानियाई सशस्त्र बलों और रक्षा निर्यात के लिए उत्पादन, उपकरण परीक्षण, अनुसंधान, प्रशिक्षण और रखरखाव सेवाएं प्रदान करेगी। K-9 थंडर को रोमानिया सहित नौ देशों ने चुना है। यह अत्याधुनिक तोप 40 किलोमीटर से अधिक की रेंज और स्वचालित गोला-बारूद प्रणाली से लैस है। हनवा K2 ब्लैक पैंथर टैंक और AS-21 रेडबैक इन्फैंट्री वाहनों की आपूर्ति के लिए भी निविदा प्रक्रिया में भाग ले रही है।

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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